The Subscriber Ravi Bhanushali द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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The Subscriber

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रात के ठीक बारह बजे थे।
मोबाइल की स्क्रीन पर सिर्फ़ एक नोटिफिकेशन चमक रहा था।
“Matru Bharti YouTube Channel – New Video Uploaded”
आरव ने अनमने मन से स्क्रीन पर उंगली रखी।
वह पिछले तीन साल से कहानियाँ लिख रहा था, पढ़ रहा था, सुन रहा था… लेकिन अब उसे लगने लगा था कि कहानियाँ सिर्फ़ शब्द होती हैं, ज़िंदगी नहीं बदलतीं।
वीडियो का टाइटल था—
“एक कहानी जो आपको हमेशा के लिए बदल देगी”
आरव हल्की हंसी हंसा।
“हर कोई यही कहता है,” उसने बुदबुदाकर कहा।
फिर भी उसने प्ले दबा दिया।
वीडियो शुरू होते ही एक साधारण-सी आवाज़ गूंजने लगी—ना कोई म्यूज़िक, ना कोई बनावट।
“अगर आप ये कहानी पूरी सुन लेते हैं, तो आप वही इंसान नहीं रहेंगे जो अभी हैं…”
आरव का दिल ज़रा तेज़ धड़कने लगा।
कहानी थी एक छोटे से गाँव की—
जहाँ एक बूढ़ा आदमी हर रोज़ मंदिर के बाहर बैठकर कहानियाँ सुनाया करता था।
लोग हँसते, बच्चे खेलते, पर कोई रुककर पूरी कहानी नहीं सुनता था।
एक दिन एक लड़का रुका।
लड़के ने पूछा—
“बाबा, आपकी कहानियों से क्या मिलता है?”
बूढ़े ने मुस्कराकर कहा—
“जो कहानी पूरी सुन ले, उसे खुद का सच मिल जाता है।”
लड़का हँसा… लेकिन बैठ गया।
वीडियो के साथ-साथ आरव जैसे उस कहानी के अंदर उतरता जा रहा था।
कहानी में लड़का हर दिन आता रहा।
हर दिन एक नई कहानी।
कभी डरावनी, कभी भावुक, कभी ऐसी कि आँखें नम हो जाएँ।
और धीरे-धीरे वह लड़का बदलने लगा।
उसका गुस्सा कम हुआ।
उसका अहंकार टूटने लगा।
उसे दूसरों का दर्द दिखने लगा।
एक दिन लड़के ने पूछा—
“बाबा, आप कौन हो?”
बूढ़े ने जवाब दिया—
“मैं वो आवाज़ हूँ… जिसे तुम हमेशा अनसुना कर देते थे।”
आरव का गला सूख गया।
वीडियो के कमेंट सेक्शन में हजारों लोग लिख रहे थे—
“ये कहानी मेरी ज़िंदगी से जुड़ी है।”
“मैं रो पड़ा।”
“आज पहली बार खुद को समझ पाया।”
आरव की आँखें स्क्रीन से हट नहीं पा रही थीं।
कहानी आगे बढ़ी।
एक दिन वह बूढ़ा मंदिर के बाहर नहीं मिला।
लड़का परेशान हो गया।
पूरे गाँव में ढूँढा…
लेकिन अंत में मंदिर की दीवार पर लिखा मिला—
“कहानियाँ कभी मरती नहीं… बस नए कंठ ढूँढती हैं।”
लड़का समझ गया।
अब वही मंदिर के बाहर बैठता था…
और कहानियाँ सुनाता था।
वीडियो खत्म हुआ।
कुछ सेकंड तक स्क्रीन काली रही।
फिर एक लाइन आई—
“अगर ये कहानी आपको छू गई… तो समझिए आप भी उस परंपरा का हिस्सा हैं।”
आरव को लगा जैसे किसी ने उसके सीने में उंगली रख दी हो।
उसे याद आया—
जब वह पहली बार कहानी पढ़कर रोया था
जब शब्दों ने उसे टूटने से बचाया था
जब अंधेरे में कहानियाँ ही उसकी रोशनी बनी थीं
उसने मोबाइल नीचे रखा।
कमरे में अजीब-सी शांति थी।
आरव ने फिर स्क्रीन देखी।
Subscribe बटन लाल रंग में चमक रहा था।
ये सिर्फ़ एक बटन नहीं था।
ये उस एहसास को स्वीकार करना था कि—
कहानियाँ सिर्फ़ मनोरंजन नहीं होतीं,
कहानियाँ इंसान बनाती हैं।
उसने सब्सक्राइब कर दिया।
उसी पल उसके फोन पर एक और नोटिफिकेशन आया—
“Welcome to Matru Bharti Family”
नीचे लिखा था—
“यहाँ कहानियाँ नहीं मिलतीं…
यहाँ आप खुद से मिलते हैं।”
आरव मुस्कराया।
अब उसे पता था—
कुछ चैनल व्यूज़ के लिए बनते हैं,
और कुछ… दिलों के लिए।
Matru Bharti दूसरा वाला था।
और जो भी ये कहानी पढ़ रहा है—
अगर आपके दिल में भी कुछ हिला है,
तो शायद आप भी वही सब्सक्राइबर हैं
जिसका इंतज़ार इस कहानी को था।
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