Shyambabu And SeX - 36 Swati द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Shyambabu And SeX - 36

36

इंतज़ार

 

दरवाजा  एक कामवाली ने खोला, उसने उसे अंदर बिठाया और खुद उसके लिए पानी लेने चली गई। उसने चारों  और देखा घर तो काफी अच्छा है, तान्या ने बताया था कि  उसके पेरेंट्स किसी काम से देहरादून गए हुए हैं और वह उनकी इकलौती बेटी ह। उसकी नज़र घर के अंदर बनी बेसमेंट पर गई,  ‘अच्छा  तान्या मुझसे यहाँ से बात करती थीं।‘ अब उसने टेबल पर रखी पत्रिका उठा ली।  कामवाली पानी के साथ-साथ कॉफी भी रखकर जाने लगी तो उसने उससे पूछा,  “मैडम  कहाँ है?” “वह अभी रही है। तब तक आप कॉफी पिए।“  

“चलो,  कोई नहीं सब्र का फल मीठा होता हैं,” उसने धीरे से कहा। अब वह कॉफी पीने  लगा तो इसी दौरान कामवाली भी घर से निकल गई। ‘इसका मतलब तनु ने पहले इसे भगाना ही ठीक समझा। स्मार्ट गर्ल !!!’ अब वह ज़ोर से बोला,  ‘तनु!! तान्या यार आ जाओ, मैं तुम्हें मिलने के लिए बेक़रार हो रहा हूँ।‘ इतना सुनना था कि उसके फ़ोन पर एक मैसेज आया,  ‘जान !!तुम कपड़े उतारकर सोफे पर आँख बंद कर  लेट जाओ,  तुम्हारे लिए मेरे पास एक सरप्राइज है। मैं अपनी एंट्री को स्पेशल  बनाना चाहती हूँ।" उसने मैसेज पढ़ा तो उसे थोड़ा अजीब लगा,  मगर फिर यह सोचकर कि  इसमें बुराई भी क्या है,  मैं  भी तो कुछ  स्पेशल  ही चाहता हूँ।“ अब  वह अपनी जीन्स और शर्ट उतारकर सोफे पर आँख बंदकर लेट गया,  और यह बात उसने तान्या को  मैसेज करके बता भी दीं ।

 

गायत्री अपने पापा और विकास कहीं बात के बारे में सोच रही है। विकास सही कह रहा है, ‘अरेंज मैरिज में लोग अपना फ़ायदा ही देखते हैं और आजकल तो प्यार भी मतलबी हो गया है’ ‘पर श्याम कितना लकी है, उसकी ज़िन्दगी में ज्योति वापिस आ गई है।‘ उसने उदास होते हुए कहा। अब संदीप ने आकर  कहा,  “चलो,  दीदी कहीं घुमा लाओ, आपको। उसने उसे प्यार से देखा,  ‘मेरा भाई मुझसे, कितना प्यार करता है और मैं सिर्फ अपने बारे में सोच रही हूँ, मेरी वजह से इसकी भी शादी नहीं हो रही है।‘ चलो न, दीदी क्या सोच रही हो। तभी विकास का कॉल आया तो उसने बताया कि वह संदीप के साथ जा रही है। विकास ने उन दोनों को अब एक मॉल में आने को कहा ताकि वे तीनों एकसाथ घूम सके ।

इमरती मॉल में मनोहर के साथ घूम रही है। वह उसे उसकी मनपसंद शॉपिंग करा रहा है। स्टोर का मैनेजर होने की वजह से उसने उसे डिस्काउंट भी दिलवा दिया है। ढेर सारे कपड़े खरीदने के बाद, उसने उसे कही खाने के लिए कहा तो वह उसे मॉल में  बने पिज़्ज़ा हट में  ले गया। दोनों साथ में  बैठकर  पिज़्ज़ा खाने लगे। शौक से पिज़्ज़ा खाती इमरती ने कहा,

 

हमने कई बार बबलू जी को कहा कि बाहर घुमा लाओ,  मगर वह अपनी बेकरी ही नहीं छोड़ता। यह तो भला हो यूनिवर्सिटी का जो ओपन की क्लॉस रविवार को भी लगा देते है। उसके चेहरे पर मुस्कान है।

 

मनोहर ने उसके मुँह पर लगी चटनी साफ़ की तो वह फिर बोल पड़ी,  “पहली बार पिज़्ज़ा खा  रही हूँ न इसलिए” अब वह हंसने लग गया।

 

तुम्हारी बहुत याद आती थी,  थोड़ा और इंतज़ार कर लेती।

 

तुमने कौन सा कोई लौटने का वादा किया था और तुम्हारी कोशिश भी मुझे कहीं नज़र नहीं आई। उसने अब हाथ में एक और पिज़्ज़ा की स्लाइस पकड़ ली।

 

मेरे हालात भी ठीक नहीं थें। 

 

अब जो हो गया, सो हो गया,  किस्मत में  यह मोटू लिखा था, वह मिल गया।

 

श्याम  सोफे पर आँखे बंद किए,  सिर्फ अपने बॉक्सर पहने लेटा हुआ है। तभी ज़ोर से म्यूजिक चलना शुरू हो गया तो वह भी मचल गया । हॉल की लाइट भी हल्की  हो गई। उसने आँख खोलकर देखा, “मेरी तनु भी कितनी रंगीन मिज़ाज़ है । तभी उसे दोबारा मैसेज आया कि ‘मैं आ रही हूँ,  तुम वैसे ही रहना जैसे मैंने तुम्हें बताया है।‘ अब वह फिर से आँख बंद किए, तान्या का इंतज़ार कर रहा है।