कामवासना से प्रेम तक - भाग - 3 सीमा कपूर द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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कामवासना से प्रेम तक - भाग - 3

थोड़ी देर बाद अजय,शेफाली से अपने मन की बात करता,
अजय- शेफाली में तुम्हें कुछ कहना चाहता हूं।
शेफाली - हां कहो।
अजय- सोच रहा हूं कि कैसे कहूं।
शेफाली - अपनी पत्नी से कहने में भी कैसा संकोच, अजय जो कहना है कह दो क्या हुआ।
अजय- अच्छा सुनो, आई लव यू।
शेफाली - ओ बस (हंसते हुए)आई लव यू टू, अजय तुम भी कमाल हो।
अजय- मैं तुमसे प्रेम करने को अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूं,पर न जाने डरता क्यों हूं,ऐसा लगता है,कि मेरा प्रेम कही तुम्हें मुझसे खो ना दे।
शेफाली - मुझे हम पति-पत्नी हैं और प्रेम संभव है,पर मुझे तुम्हारी बातें समझ नहीं आ रही, तुम प्रेम में हो ,तो प्रेम करना नहीं चाहते, क्यों?
अजय- तो ठीक है क्या तू मेरा साथ दोगी।
शेफाली - (मुस्कुराते हुए) हा।

"अजय शेफाली को अपनी बाहों में भरकर उसे बेडरूम तक ले जाता है, और उसे प्रेम वात्सल्य से चुमता है, उसे स्पर्श करता है,और अपने प्रेम का अनुभव करवाते हुए काम क्रीड़ा का आनंद दोनों मिलकर करते हैं।

परन्तु
कुछ ही देर बाद ना जान अजय को क्या हो जाता है वह शेफाली को इंसान ना समझ के खिलौने समझने लगता है और उसके जिस्म के साथ खिलवाड़ करने लगता है, यह सब शेफाली को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता वह बार-बार अजय को मना करती है परंतु अजय शेफाली के साथ जबरदस्ती करता है।

शेफाली ज्यादा कुछ नहीं बोल पाती क्योंकि वह पति-पत्नी के रिश्ते को महत्व देना चाहती है। खराब नहीं करना चाहती क्योंकि वह जानती थी ,कि अगर वह ज्यादा कुछ बोलेगी तो बात बिगड़ेगी,इस वक्त अजय नहीं सुनेगा ना ही समझेगा।
अजय अपनी मस्ती में होता है ,उसे शेफाली की पीड़ा का ऐहसास नहीं होता,

शेफाली मन ही मन कह रही थी अजय से सुबह ही बात करूंगी, अपने मन की भावना को शांत करने के बाद अजय सो जाता है, परंतु शेफाली सो नहीं पाती उसे पूरी रात नींद नहीं आती वह सोचती रहती।

कि यह वह अजय नहीं है जिसे मैं जानती थी अचानक वह अजय बादल कैसे गया।

__
शेफाली अब अजीब सी पीड़ा को झेल रही थी।

सुबह हो जाती है शेफाली ,अजय से बात करती है,अजय अपने आफिस जाने के लिए तैयार हो रहा होता है।

शेफाली - अजय मुझे ना आपसे कुछ कहना है।
अजय- तुम मेरी जान क्या बात है।
शेफाली - अजय आपको रात को क्या हो गया था।
अजय - रात को मतलब क्या कुछ भी तो नहीं।
शेफाली - अजय जिस तरह तुमने किया वह तरीका ग़लत था, प्रेम का अनुभव ऐसे नहीं होता शुरू में तो ठीक था,
और उसके बाद तुम्हें हो क्या गया था ,
क्यों जानवरों जैसे तुमने बिहेव किया ,
जानवर भी कभी ऐसे नहीं करते अपने साथी के साथ जो तुमने मेरे साथ किया।
अजय - ओ समझा।अब तुम मेरी तुलना जानवर से कर रही हो, मेरी जान मैं तो तुमसे प्यार करता हूं ,मेरा प्यार करने का यही तरीका है, तुम्हें यह सब समझना होगा,
मैं अब जा रहा हूं, शाम को जल्दी आऊंगा ,तुम तैयार रहना कल रात के बाद से तो मुझसे रहा नहीं जाता, तुम और भी हसीन लगने लगी हो, और तुम पर और भी अधिक प्यार आने लगा है।

क्रमशः