काल पिशाचिनी भूपेंद्र सिंह द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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काल पिशाचिनी




कहानी
काल पिशाचिनी

शाम का वक्त है। कुछ कुछ सूरज अभी भी नज़र आ रहा है। एक जीप तेजी से जंगल के एक सुनसान कच्चे रास्ते से धूल उड़ाते हुए भागी चली जा रही है। जीप में दो लड़के बैठे हैं जो लड़का जीप चला रहा है उसका नाम अजीत है और जो उसके साथ उसकी बगल वाली सीट पर बैठा है उसका नाम मुकेश कुमार है जो की अजीत सिंह का जिगरी और दिल्लगी यार है।
अजीत सिंह - " यार मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा है की जन्मदिन पर भी कोई इतनी जबरदस्त पार्टी करता है।"
मुकेश - " हां यार सुधीर के परिवार वालों ने जन्मदिन सच में ही बड़ी धूमधाम से मनाया है। घर कितना अच्छा सजा रखा था जैसे किसी की शादी हो।"
अजीत - " उसका पिता इतना बड़ा मशहूर बिजेनेसे मैन है अब अपने इकलौते लाडले बेटे के लिए इतना कुछ करना तो बनता ही है।"
मुकेश अपनी कलाई घड़ी में नजर दौड़ाते हुए " हम सुबह दस बजे गए थे और अब देख सात बजने वाले हैं। टाइम तो चुटकियों में ही स्पेंड हो गया कुछ पता ही नहीं चला।"
अजीत - " हूं। वाकई हमें बहुत देर हो गई है। मैने सोचा भी नहीं था की हमें इतना टाइम भी किसी के जन्मदिन में लग जायेगा।"
मुकेश - " मैं तो तुझसे कह रहा था की आज की रात उसके घर में ही रुक जाते हैं लेकिन तूने मेरी एक न सुनी। तुझे मालूम है ना की हमें जंगल के उस भूतिया हॉन्टेड टर्न से गुजरना पड़ेगा।"
अजीत - " अरे यार मुकेश तूं अब बकवास मत कर। मैं उस रास्ते से लाखों बार गुजर चुका हूं। मुझे तो कभी भी कुछ नहीं हुआ। तूं बेवजह ही डर रहा है।"
मुकेश - " अजीत यार तुझे अच्छी तरह से मालूम है ना की उस रास्ते के बारे में कैसी कैसी अफवाहें फैल रही हैं रात को तो बड़े बड़े सिकंदर भी वहां पर जाने से डरते हैं। मैं तो कहता हूं की अभी भी वक्त है वापिस चलते हैं सुधीर के घर में ही रात गुजार लेंगे और कल सुबह होते ही निकल पड़ेंगे।"
अजीत - " ओह हेलो ये सब बकवास मेरे सामने मत कर। मैं किसी काल पिशाचिनी से नहीं डरता। ये सब फालतू के टोटकें हैं। वो काल पिशाचीनी बस एक बार मेरे सामने आ जाए मैं उसकी गर्दन पकड़कर उसे जमीन में घुसा दूंगा।"
मुकेश - " कहना आसान है करना बहुत मुश्किल काम है। जब वो काल पिशाचिनी तेरे सामने आएगी ना तब तुझे पता चलेगा की डर क्या होता है? और क्या होती है काल पिशाचीनी। उसे देखकर तेरी पेंट पेशाब से गीली हो जायेगी।"
अजीत - " हां जैसे तेरी पेंट तो सुखी ही रह जायेगी । अरे वो काल पिशाचिनी सामने तो तब आयेगी ना जब वो सच में होगी। तूं ये फालतू के टोटके मेरे सामने मत आजमा मैं नहीं डरने वाला। काल पिशाचिनी सिर्फ कहानियों में होती है असल जिंदगी से उसका कोई ताल्लुक नहीं हैं।"
मुकेश - " यार तूं नहीं समझेगा। तुझे मालूम है नहीं है की रंजन बाबू के साथ उस काल पिशाचिनी ने क्या किया था?"
अजीत हैरानी से - " क्या किया था?"
मुकेश - " वो अमावस की काली रात थी। रंजन बाबू भी हमारी तरह लेट घर लौट रहे थे और जल्दी वापस अपने घर जाने की जिद कर रहे थे। वे अपना बाइक लेकर हमारी तरह इसी भूतिया रास्ते से गुजर रहे थे तभी उन्हें अचानक से सामने एक बच्ची नजर आई जो की सड़क पर खेल रही थी। रंजन बाबू हैरान रह गए की इतनी रात में एक लड़की भला इस सुनसान सड़क पर क्या कर रही है?"
अजीत - " तो क्या रंजन बाबू ने बाइक रोकी।"
मुकेश कुछ जोर से - " रंजन बाबू ने यही तो गलती कर दी ना उन्होंने उस लड़की के पास जाकर बाइक रोक दी। इस रास्ते पर कोई रुक नहीं सकता और जो भी इस रास्ते पर एक बार रुक गया समझो वो मर गया। रंजन बाबू ने उस लड़की को अपने साथ बैठने के लिए कहा। लेकिन उस लड़की ने साफ मना कर दिया और रंजन बाबू से कुछ खाने के लिए मांगा। रंजन बाबू ने अपनी जेब में हाथ डाला और चॉकलेट निकालकर उस लड़की की और बढ़ा दी।"
अजीत - " तो क्या लड़की ने चॉकलेट पकड़ी।"
मुकेश - " नहीं वो चॉकलेट नीचे गिर गई। जब रंजन बाबू उस चॉकलेट को उठाने के लिए नीचे झुके तो उसकी चीख निकल गई क्योंकि उस लड़की के दोनों पैर गायब थे यां फिर कटे हुए थे। और देखते ही देखते वो लड़की काल पिशाचिनि में बदल गई। रंजन बाबू तो बस एक पत्थर का पुतला बनकर रह गया। उसने जैसे तैसे डरते हुए बाइक चलाई और तेजी से वहां से निकल गया।"
अजीत - " फिर क्या हुआ?"
मुकेश - " अरे होना क्या था अचानक से रंजन बाबू के सामने एक आदमी आ गया जो की दोनों हाथ चौड़े करके उसे रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन रंजन बाबू ने सोच लिया था की वो हर हाल में बाइक नहीं रोकेगा क्योंकि अगर बाइक रूकी तो उसके दिल की धड़कने भी रुक जाएंगी। इसलिए रंजन बाबू ने बाइक की स्पीड और तेज कर दी लेकिन वो आदमी सामने से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था। रंजन बाबू ने बाइक उसके ऊपर चढ़ा दी। बाइक एक और दूर जा गिरी और रंजन बाबू सड़क पर खून से लथपथ होकर गिर गया और वो आदमी बिल्कुल रंजन बाबू के सामने खून से भीगा हुआ गिरा पड़ा था। उस आदमी के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी शायद वो मर गया था। रंजन बाबू ने जैसे तैसे खुद को संभालते हुए उस आदमी का चेहरा देखा और उसकी चीख निकल गई उसका दिल इतनी तेजी से धड़कने लगा की मानों वो अभी फट जायेगा क्योंकि वो लाश खुद उसी की थी।"
ये सुनकर अजीत के चेहरे पर बारह बजने के बजाय मुस्कुराहट आ गई और वो जोर जोर से हंसने लगा।
अजीत हंसते हुए - " यार मुकेश तूं भी ना कहानियां तो अच्छी जोड़ लेता है। कोई आदमी एक ही वक्त में दो जगह कैसे हो सकता है। यार तूने क्या कॉमेडी सुनाई है मैं तो हंस हंसकर पागल हो गया।"
मुकेश - " मैं कोई मजाक नहीं कर रहा हूं ये बात पूरी तरह से सच है।"
अजीत - " अरे वो सिर्फ एक एक्सीडेंट था। रंजन बाबू ने बाइक पर से संतुलन खो दिया था और वो नीचे गिर गए जिसके कारण उनके सर में चोट लगी और उनकी डेथ हो गई। पुलिस ने भी तो यही बात कही है।"
मुकेश - " लेकिन ये सरासर झूठ है। रंजन बाबू को काल पिशाचीनी ने ही मारा है।"
अजीत - " अरे भाई तूं अब ज्यादा बकबास मत कर। वैसे भी तुझे कैसे मालूम की उसे काल पिशाचीनी ने ही मारा है।"
मुकेश - " अरे मेरे डैड भी तो उस दिन कार लेकर रंजन बाबू के पीछे पीछे चले आ रहे थे उन्होंने ये सारा नज़ारा अपनी आंखों से देखा था। मेरे डैड ने पुलिस को भी ये बात बताने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस ने मेरे डैड की बात को तेरी तरह हल्के में ले लिया।"
इतने में अजीत ने जीप का गियर चेंज किया और अब जीप जंगल के उस रास्ते पर चल रही थी जिस रास्ते को मौत का रास्ता कहते हैं। जिस जगह रात को फरिसते भी आने से डरते हैं।
मुकेश - " यार मुझे तो बहुत डर लग रहा है कहीं वो काल पिशाचिनी अचानक से सामने आ गई तो और अगर हम मारे गए तो।"
अजीत - " यार मुकेश तूं बेवजह परेशान हो रहा है। देख तूने ही कहा था ना की जो रुक गया वो मर गया । मैं जीप को रोकूंगा ही नहीं तो फिर हमें कुछ होगा भी नहीं। वैसे भी वो काल पिशाचिनी का मैं काल हूं। अगर वो सामने आ भी गई ना तो उसे ऐसी मौत दूंगा की वो तमाम उम्र याद रखेगी। अच्छा वैसे ये काल पिशाचिनी दिखती कैसी होगी।"
मुकेश - " मैने तो लोगों से सुना है की उसके बड़े बड़े दांत होते हैं कटा फटा काला चेहरा होता है। बिलकुल सफेद आंखें होती हैं। बड़े बड़े नाखून होते हैं जिनमें मांस फसा हुआ होता है। उसके पैर कटे हुए होते हैं।"
अजीत हंसते हुए - " यार मेरा तो बढ़ा मन कर रहा है इस काल पिशाचिनी से मिलने का।"
मुकेश - " यार मुझे इतना डर लग रहा है। मेरा बदन थर थर कांप रहा है और तुझे इस वक्त मजाक सूझ रहा है।"
अजीत जोर से चिलाते हुए - " अबे ओ साली काल पिशाचीनी मैं तुझसे नहीं डरने वाला। तूं मेरे सामने तो आ। मैं तेरे टुकड़े टुकड़े कर डालूंगा।"
इतने में सामने टर्न पर अजीत को अचानक से एक काली परछाई खड़ी नजर आती है जिसके जबाड़े से खून टपक रहा था। अजीत ये देखकर बुरी तरह डर जाता है और जीप के ब्रेक लगाने लगता है लेकिन जीप के ब्रेक लगते ही नहीं है शायद वो फेल हो गए थे। जीप सीधे ही जाकर उस साए से टकरा गई और एक जोर के झटके के साथ जीप वहीं पर जाम होकर रह गई। अजीत सिंह का सर स्टीरिंग व्हील से जा टकराया और कचूमर निकल गया। लगभग दो घंटो के बाद में अजीत को होश आया उसे अपने सर में गर्माहट महसूस हो रही थी।।

अजीत सिंह को होश आया और उसका सारा शरीर खून से लथपथ था। उसे अपने सर में अतयदिक गर्माहट महसूस हो रही थी। उसने अपने बगल में नजर दौड़ाई तो उसका दोस्त मुकेश कुमार खून से लथपथ बेजान सा लेटा पड़ा था। शायद वो मर गया था। ये देखकर अजीत सिंह के दिल धड़कने पूरी तरह से रुक सी गई।
उसने मुकेश के सांसें चेक की लेकिन अफसोस की उसकी सांसे रुक गई थी वो मर चुका था। ये देखकर अजीत सिंह की आंखों से आंसू निकल पड़े।
तभी एक और से अजीत के कानों में कोई आवाज सुनाई दी उसने डरते हुए अपने बगल में नजर दौड़ाई तो कुछ झाड़ियों के पीछे उसकी बहन शालिनी खड़ी थी और उसे आवाज दे रही थी। इतनी सुनसान, भयानक और खूंखार जानलेवा रात में अजीत सिंह अपनी बहन को वहां पर देखकर हक्का बक्का रह गया और पूरी तरह से पसीने से भीग गया। अजीत डरते हुए कंपकंपाते हुए शरीर के साथ जीप से बाहर निकला लेकिन उसके हाथ पैर सब बुरी तरह टूट चुके थे इसलिए जीप से बाहर निकलते ही वो धड़ाम से वहीं पर गिर गया।
तभी शालिनी की आवाज उसके कानों में आई " भईया मैं जहां हूं आप ठीक तो है ना? मेरे पास आइए।"
अपनी बहन की आवाज सुनकर अजीत सिंह के कलेजे में जान आ गई। अजीत ने खुद को संभाला और धीरे धीरे अपने कदम अपनी बहन की और जंगल में बढ़ा दिए लेकिन अजीत के कानों में मुकेश की वो एक ही बात गूंज रही थी की " इस रास्ते पर कोई रुक नहीं सकता और अगर कोई गलती से भी रुक गया तो समझो वो मर गया।"
अजीत सिंह ने अपनी बहन की और कुछ तेजी से कदम बढ़ाए लेकिन शालिनी अंदर जंगल में जाने लग गई।
अजीत ने अपना हाथ उसकी और बढ़ाते हुए आवाज दी " शालिनी कहां जा रही हो?"
शालिनी रूकी और बिना पलटे बहुत ही डरावनी सी आवाज में बोली " जहां सवाल पूछना मना है। चुपचाप मेरे पीछे आयो।"
ये सुनकर अजीत भी घबरा सा गया लेकिन उसने जैसे तैसे करके खुद पर काबू किया और अपनी बहन के पीछे जंगल में कदम बढ़ा दिए।
उसकी बहन एक पेड़ के पास जाकर खड़ी हो गई। उसके बिलकुल सामने पेड़ से एक लंबी सी रस्सी नीचे की और लटक रही थी और जमीन पर पड़ी थी। ऐसे लग रहा था जैसे की किसी ने जाल बिछाया हो।
अजीत ने शालिनी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा " शालिनी इतनी रात को तुम जहां क्या कर रही हो।"
शालिनी ने अपना मुंह पीछे घुमाया और अजीत की एक जोरदार चीख निकल गई और वो धड़ाम से जमीन पर जा गिरा क्योंकि उसके सामने उसकी बहन नहीं बल्कि काल पिशाचीनी खड़ी थी। पूरी तरह से सफेद आंखे, गहरा काला डरावना चेहरा, बड़े बड़े खून से लथपथ लाल लाल नाखून, बड़े बड़े डरावने दांत। अजीत का दिल उछलकर उसके मुंह में आ गया था।
काल पिशाचिनी बहुत ही भयानक और ऊंची डरावनी आवाज में - " क्या कह रहे थे तुम की तुम्हें काल पिशाचिनी से डर नहीं लगता। अब क्या हुआ? मरने के लिए तैयार हो जाओ।"
अजीत के तो मुंह से आवाज भी नहीं निकल पा रही थी। उसका दिल जोर जोर से धक धक कर रहा था मानो की वो अभी फट जायेगा। अजीत ने डरते हुए अपने कदम गसीटने लगा लेकिन वो रस्सी में अपना पैर फंसा बैठा और उलटा लटक गया। उसकी आंखों के सामने काल पिशाचिनी का चेहरा था जिससे मांस की गंदी दुर्गन्ध आ रही थी। काल पिशाचिनी के चेहरे से खून टपक रहा था और उसका मुंह खून से लथपथ था जिससे लारें टपक रही थी।
अजीत की एक जोरदार चीख निकल गई। लेकिन कुछ भी घटित नहीं हुआ। काल पिशाचिनी अभी भी लालायित नजरों से अजीत को देख रही थी।
और फिर एक ही झटके में काल पिशाचिनी ने अपने दोनों हाथों से अजीत का मुंह पकड़ लिया और जोर जोर से पागलों की तरह हंसने लगी। काल पिशाचनी के नाखून अजीत के चेहरे के अंदर घुस गए थे और उसका चेहरा पूरी तरह से फट गया था और जमीन पर खून ऐसे गिर रहा था जैसे की कोई खून की बरसात हो रही हो।
अजीत सिंह दर्द से कराह रहा था वो चीखना चाहता था लेकिन काली डायन काल पिशाचिनी ने उसे इतना कसकर पकड़ रखा था की उसके मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी।
इतने में काल पिशाचिनी ने अजीत का सर उसके शरीर से अलग कर दिया और एक जोरदार चीख उस सुनसान रात में आसमान में गूंजने लगी। काल पिशाचनी उसके सर को कच्चा ही खा गई।

" अरे हुआ क्या है? अचानक से ब्रेक क्यों लगा दिए। अजीत तुम ठीक तो हो क्या? मैं गाड़ी ड्राइव करूं क्या? तुम इस तरह इतनी जोर से क्यों चिलाए , मैने तुम्हे समझाया था ना की चाहे कुछ भी हो जाए गाड़ी मत रोकना। अजीत होश में आओ। आर यू ओके।" मुकेश की आवाजें बार बार अजीत के कानों में गूंज रही थी।
अजीत अचानक से होश में आया और उसने चारों और नज़र दौड़ा दी। मुकेश उसके पास जिंदा बैठा था। उनकी जीप भूतिया टर्न पर खड़ी थी जहां पर अजीत ने जीप के ब्रेक लगाए थे। अजीत के सर में मामूली सी चोट आई थी क्योंकि उसका सर स्टीरिंग व्हील से टकरा गया था।
अजीत हैरानी से - " मुकेश मुकेश.... तुम जिंदा हो? तुम तो मर गए थे ना?"
मुकेश - " अजीत तूं पागल हो गया है क्या? मुझे क्या हुआ है। तुझे क्या हो गया है?
अजीत - " हम कहां है?"
मुकेश - " हम इस वक्त जंगल की कच्ची सड़क पर है। हम दोनों काल पिशाचिनी की बातें कर रहे थे और फिर तूने अचानक से गाड़ी के ब्रेक लगा दिए। तेरा सर स्टरिंग वाहिल से जा टकराया। तूं पिछले आधे घंटे से बेहोश पड़ा है। मैं तुझे कब से उठाने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन तूं उठा ही नहीं। हुआ क्या ? तूं इतना जोर से क्यों चिलाया था?"
अजीत अपना पसीना पोंछलकर लंबी सांस भरते हुए बोला " भगवान का लाख लाख शुक्र है की ये सिर्फ एक सपना था हकीकत नहीं। बाप रे क्या डरावना सपना था?"
मुकेश हैरानी से - " तूं इतनी देर से सपना देख रहा था।"
अजीत - " मैने सपने में काल पिशाचिनी को देखा।"
इतना कहकर अजीत ने अपना सारा सपना मुकेश को सुना दिया।
मुकेश - " यार सपना तो वाकई डरावना था। इतनी बड़ी चीख तो बनती ही है। मुझे गाड़ी चलाने दे। अगर काल पिशाचिनी के इलाके में कुछ देर और रुके ना तो तेरा सपना सच में सच हो जायेगा। "
अजीत चुपचाप ड्राइविंग सीट से खड़ा हो गया। मुकेश गाड़ी चलाने लगा। जंगल में से उल्लुओं के रोने की आवाज आ रही थी जो की अजीत के दिल को अंदर से खाए जा रही थी।।।

मुकेश गाड़ी को फुल स्पीड में भगाए जा रहा था। पास बैठा अजीत सिंह अब भी मारे डर के थर थर कांप रहा था। काल पिशाचनी के द्वारा उसकी गर्दन पकड़ना और एक ही झटके में उसके मुंह को कच्चा चबा जाना। ये सब घटनाएं अजीत की आंखों के सामने बार बार आ रही थी। अजीत को तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा था की वो सिर्फ एक सपना था। अजीत अब भी उस बात को एक हकीकत मानते हुए देख रहा था।
मुकेश - " बस एक बार हम इस भूतिया रास्ते से निकल जाएं। फिर हम सेफ हैं।"
अजीत ने कोई जवाब नहीं दिया और अपने डर पर काबू करने की कोशिश करने लगा।
मुकेश ने गाड़ी की स्पीड और भी तेज कर दी। अचानक से गाड़ी के सामने अजीत आ गया। ये देखकर मुकेश का कलेजा ही बाहर निकल गया। जो अजीत उसकी बगल में बैठा है वो गाड़ी के सामने कैसे आ सकता है। मुकेश ने डरते हुए अपनी नजरें बगल में दौड़ाई तो उसकी बगल में काल पिशाचिनी बैठी थी जो लगातार मुकेश की और घूरे जा रही थी। मुकेश जोर से चीखना चाहता था लेकिन उसकी चीख उसके मुंह में ही दबकर रह गई थी। मुकेश ने डर के मारे अपनी पेंट में ही पेशाब कर दिया।
मुकेश के हाथ कांप रहे थे और फिर धीरे धीरे उसका पूरा शरीर ही थर थर कांपने लगा।
काल पिशाचिनी बहुत ही मोटी और डरावनी आवाज में- " क्या हुआ डर गए। जो डर गया वो मर गया।"
इतने में मुकेश की एक जोरदार चीख निकल गई। काल पिशाचिनी मुकेश के ऊपर झपट पड़ी और उसकी गर्दन में अपने दांत चूबो दिए। जीप यू टर्न से होती हुई सीधे ही नीचे खाई में गिर गई और फिर जंगल में धड़ाम से जा गिरी और एक बहुत बड़ा विस्फोट हुआ। जीप के आग लग गई थी।
कुछ ही देर में सब कुछ शांत हो गया। एक पेड़ की डाल पर बैठा एक उल्लू लगातार जमीन पर बेजान गिरे पड़े मुकेश कुमार की और घूरे जा रहा था जैसे वो उसका शिकार हो।
लगभग आधे घण्टे के बाद मुकेश को होश आया तो उसने धीरे धीरे अपनी आंखें खोली तो उसे सिर्फ काला आसमान नज़र आ रहा था। शायद अमावस्या की रात थी। काली और भयानक रात।
मुकेश के शरीर में एक अजीब सा दर्द हो रहा था। वो पूरी तरह से खून से भीग चुका था। वो खुद को संभालते हुए वहीं जमीन पर बैठ गया और चारों और नजरें दौड़ाने लगा लेकिन उसकी गर्दन पूरी तरह से टूट चुकी थी। जैसे ही वो ईशर उधर देखने लगता तो उसकी एक जोरदार चीख निकल जाती और रात का जानलेवा और खौफनाक सन्नाटा अचानक से टूट जाता। मुकेश अब और हिल भी नहीं सकता था। उसके शरीर में जगह जगह पर कांच चुभा हुआ था। सब कुछ धुंधला सा नजर आ रहा था। काल पिशाचिनि कहीं पर भी नजर नहीं आ रही थी और ना ही अजीत।
उसकी जीप एक और आग में जलाकर राख हो चुकी थी। लोहे का कुछ अंश बचा था। चारों और धुआं फैला हुआ था लेकिन उस काली रात में धुआं नज़र नहीं आ रहा था।
मुकेश अब वापिस से धड़ाम से जमीन पर गिर गया और लंबी लंबी सांसे भरने लगा शायद ये लंबी सांसे ही उसकी जिंदगी की आखिरी सांसे थी।
अचानक से मुकेश को लगा की जैसे कोई उसके करीब आ रहा है। पैरों की आवाजें उसे साफ सुनाई दे रही थी। मुकेश ने इधर उधर देखना चाहा लेकिन गर्दन टूट जाने के कारण वो अपनी गर्दन को बिल्कुल भी नहीं हिला पा रहा था। अगर वो कोशिश भी करता था तो उसे इतना दर्द होता की उसकी आंखों से आंसू निकल पड़ते। वो बस बेजान सा वहां पर पड़ा अपनी मौत का इंतजार कर रहा था। इतना दर्द झेलने से तो अच्छा है की मौत ही नसीब हो जाए।
मुकेश अब सिर्फ एक चीज चाहता था उसकी अब सिर्फ एक ही खबाइहस थी और वो थी की जल्दी से मौत आ जाए।
इतने में एक काली परछाई बिल्कुल उसके ऊपर आकर खड़ी हो गई जिसके मुंह से गंदा खून गिर रहा था और वो खून सीधा मुकेश के चेहरे पर से होते हुए उसके होठों तक जा रहा था लेकिन मुकेश चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता था वो सिर्फ एक काम कर सकता था और वो था इंतजार सिर्फ इंतजार वो भी अपनी मौत का इंतजार।
मुकेश को सबकुछ धुंधला सा नजर आ रहा था लेकिन वो परछाई उसके पास जमीन पर बैठ गई और मुकेश की गर्दन के बिलकुल पास चली गई।
अब मुकेश को साफ नजर आ रहा था वो परछाई काल पिशाचिनी ही थी। बिल्कुल सफेद भूतिया आंखें, खून से लथपथ फटा हुआ काला डरावना चेहरा, बड़े बड़े दांत जिनमें मांस फंसा हुआ था और उसकी दुर्गंध इतनी गन्दी थी की अगर कोई वहां एक मिनिट से ज्यादा खड़ा रहे तो तो तुरंत ही मर जाए। बड़े बड़े खुले हुए काले डरावने घने बाल जो कि काल पिशाचिनी के चेहरे से होते हुए मुकेश की आंखों के ऊपर आ रहे थे। बड़े बड़े नाखून।
मुकेश दर्द से चीखना चाहता था, वो बस अब जल्दी से मरना चाहता था सिर्फ मरना चाहता था। इस असहनीय दर्द को वो अब और नहीं झेल सकता था।
इतने में काल पिशाचिनी ने उसकी गर्दन को कसकर पकड़ लिया और उसके नाखून मुकेश की गर्दन के आर पार हो गए थे। मुकेश चाहकर भी चिला नहीं पा रहा था। उसकी आंखे अब धीरे धीरे बंद हो रही थी और वो भी हमेशा के लिए।
इतने में काल पिशाचिनी ने एक ही झटके में मुकेश की गर्दन उसके शरीर से अलग कर दी और उसे नोच नोचकर खाने लगी।।
मुकेश की अंतिम इच्छा पूरी हो गई थी। पाठकों कहीं आप भी तो ऐसी इच्छा नहीं कर रहे।।।।

कुछ ही देर में मुकेश को अपने चेहरे पर कुछ ठंडा ठंडा सा महसूस हुआ और वो अचानक से चिला उठा " कौन कौन है? कहां है बारिश? बारिश हो रही है? मैं तो मर गया था। वो काल पिशाचिनी मुझे नोच नोचकर खा रही थी। अब मै वापिस जिंदा नहीं होना चाहता। मैं इस दर्द को और नहीं झेल सकता। मैं मरना चाहता हूं सिर्फ और सिर्फ मरना।।।
इतना कहकर मुकेश की आंखें आंसुओं से भर गई और पास में पानी की बोतल लेकर खड़ा अजीत सिंह मुकेश के चेहरे को एक टक देख रहा था मानो वो किसी किताब की तरह उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहा हो।।

मुकेश पसीने से पूरी तरह भीग चुका था। उसका बदन थर थर कांप रहा था। आंसुओं की तो जैसे गंगा ही बह रही थी। ऐसे लग रहा था की जैसे मुकेश का शरीर उसके वश मे है ही नहीं और किसी के वश में हैं शायद काल पिशाचिनी के।
पास में खड़ा अजीत पानी का घूंट भरते हुए बोला " मुकेश तुझे हो क्या गया है? पहले तो तूं कह रहा था की मैं ड्राइव करूंगा और ना तो तूं खुद ड्राइव कर रहा है और ना ही मुझे करने दे रहा है।

बाकी अगर जिंदा रहे तो।।