The Author Swati फॉलो Current Read जिम्मेवारी By Swati हिंदी लघुकथा Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books एक और बेटी Malik Mention , gujaratएक 77 साल का आदमी इधर उधर घूम रहा था... लाइफ ऑफ़ अ वूमेन वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी बचपन से ही मैं कई बार मरी हू... दो पतियों की लाडली पत्नी - 17 तीनों हंसते-हंसते थक चुके हैं। Shreya के गाल लाल हो चुके हैं... तेरे मेरे दरमियान - 88 विक्की :- तुम इस मुसीबत मे खुद फसी हो ना की मेरे वजह से , मै... Trikon - एक्शन सीरीज़ - अध्याय 7 — लंका दहन मकान का पिछला बरामदा छोटा था। ढके हुए कूलर। पुराने एसी के आउ... श्रेणी लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी शेयर करे जिम्मेवारी (2.9k) 2.8k 8.4k जिंदगी ने ऐसी मोड़ पे लाकर खड़ा कर दिया है जहां से आगे जाने का रास्ता पता नही है और पीछे जा नही सकती । जैसे तैसे करके यहां तक तो आ गई लेकिन इससे आगे का सफर कैसे करू कुछ समझ नहीं आ रही । मैं पीछे रह गई हूं या ये दुनिया ही आगे चली गईं , सारे अपने कहां खो गए कुछ पता नही है पैसे के चक्कर में सब कुछ छूट गया है , घर परिवार दोस्त रिश्तेदार सबकुछ ।पैसे तो मैने बहुत कमा लिया लेकिन जो रिश्ते पीछे रह गए उन्हे कैसे कमाऊ , आज मुझे अकेलेपन का एहसास हो रहा है ऐसा लग रहा है मैं जिंदा रह कर भी क्या करू कोई नही है मेरे पास जिसके साथ मिलकल मैं अपना खुशी बांटू ऐसा कोई भी नही है जिसके साथ मैं अपना गम बांटू । जो अपनापन अपने देश में अपने गांव में है वो विदेश की मिट्टी में मिलना असंभव है ।लोग अपने को छोर कर कहीं दूर देश में तो चले जाते है लेकिन जब उन्हें अकेलापन सताता तो उनको याद अपनी मां ही आती है अपनी बहन ही आती है , चंद पैसों के लिए कोई भी ना जाए दूर अपनी फैमिली को छोर कर , पिता की तबियत खराब है लेकिन मैं बस पैसे ही भेज सकती हूं और क्या कर सकती मै इतने दूर से ।मां का खयाल रखने के लिए मेरी एक छोटी बहन हैं पिताजी की देखभाल मां करती है , साल में एक दो बार ही आना जाना हो पाता है , पढ़ाई भी करनी है पैसे भी कमाने है ये सब मैनेज करना है , कभी कभी जिंदगी से बहुत थक जाती हूं जीने की इच्छा नहीं होती तभी सामने मां बाबूजी और बहन का चेहरा आ जाता है , सच में बहुत मुस्किल है घर की जिम्मेवारी उठाना कितना कुछ सहना पड़ता है अपनी फैमिली के लिए । बाबूजी अगर बूढ़े हो जाए तो घर कौन संभाले मुझे ये जिम्मेवारी लेनी ही थी । मैं अपने परिवार को ऐसे भूखे नही देख सकती थी ,अपने पिता को मरते हुए नही देख सकती थी । बचपन में जब पिताजी काम पे जाते थे तो हम दोनो बहनों के लिए हमेशा कुछ खाने को तो कुछ खेलने को जरूर लेट थे ,चाहे हालात जैसे भी हो , कभी भी खाली हाथ घर नहीं आते थे ।तो जब अभी मेरे पापा को मेरी जरूरत है तो मैं कैसे उनका साथ दु कैसे उनकी मदद करू ।बस पैसे तो भेज रही हू लेकिन क्या उनको मेरी जरूरत नहीं पड़ती होगी मैं घर कैसे जाऊं , अगर घर चली गई तो पैसे कहां से आयेंगे। मैं क्या करू कहां जाऊं । किससे बोलूं ये सब कोई नही है जो मेरा दुख समझे । अपने मां बाप से अच्छा इस पूरी दुनिया के कोई नही है ,कोई हो भी नाही सकता ।पूरी दुनिया में भगवान ने सिर्फ मां बाप को ही ऐसा क्यों बनाया है जिसकी जगह कोई नही ले सकता कोई भी नहीं ।स्वाती Download Our App