राजकुमारी शिवन्या - भाग 5 Mansi द्वारा पौराणिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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राजकुमारी शिवन्या - भाग 5

भाग ५

अब तक आपने देखा राजा विलम ने बेटी की आने की खुशी में सारी प्रजा मे मिठाई बटवाई सब लोग बहुत खुश थे अब आगे की कहानी देखते है।

राजा और रानी शिवन्या का खूब ध्यान रखने लगे , जान से भी प्यारी थी उन्हे अपनी बेटी। आखिर इतने सालो बाद बच्चे का सुख भोग रहे थे राजा रानी।अब समय बीतता जाता है शिवन्या धीरे धीरे बड़ी होती जा रही है , वह अब १० साल की हो जाती है । समय कब चला जाता है पता ही नही चलता , राजा शिवन्या को सारी विद्याएं सिखाना चाहते थे । शिवन्या को बाण चलाने का बहुत शौक था , वह कोई भी चीज में सीधा निशाना लगा सकती थी।

राजा ने उसे बाण चलाना सिखाया था वह इसमें उत्तम थे , धीरे धीरे बाण चलाने में राजकुमारी शिवन्या भी माहिर बन चुकी थी । शिवन्या का स्वभाव बहुत मस्तीखोर था , वह सारा समय अपनी माता ओर पिता के साथ मस्ती किया करती थी वह महल की दासियों के साथ पूरा दिन शरारते करती थी ओर उनके साथ खेला करती थी।

शिवन्या को १० साल की उमर में ही बाण चलाने के अलावा भी बहुत प्रवृतिया आती थी । उनकी उमर भले ही छोटी थी पर उनकी सोच बड़ो से भी बेहतर थी , वह मस्तीखोर थी पर उनके अंदर बड़ो के लिए आदर भी था और अच्छे संस्कार थे। राजा विलम ओर रानी निलंबा ने हमेशा उन्हे प्यार के साथ साथ अच्छे संस्कार दिए थे।

सब लोग हसी खुशी और कुशल मंगल के साथ जी रहे होते है लेकिन अचानक एक दिन सुबह के ४ बजे भारी बारिश शुरू होने लगती है जबकि वह गर्मियों का मौसम चल रहा था , सब लोग इस बिनमोसम बारिश देख कर चौक गए थे । पर राजा विलम ने सब प्रजा को आदेश दिया कोई अपने घरों से बाहर न निकले बारिश जब तक रुक नहीं जाति ।

निलंबा कहती है यह तो बड़े आश्चर्य की बात है कल तो गर्मी हो रही थी आज अचानक इतनी तेज बारिश का क्या कारण हो सकता है। तब राजा ने कहा आप चिंता मत करिए रानी बारिश अभी रुक ही जायेगी। तब बहुत तेज बिजली के कड़कने की आवाज आई कुमारी शिवन्या दौड़ कर अपने पिता के पास चली गई तब राजा ने कहा अरे मेरी प्यारी बेटी डरो नहीं तुम वह तो बिजली कड़कने की आवाज थी ।

उसमे शिवन्या कहती है अरे मेरे प्यारे पिताजी में नहीं डरी बिजली की आवाज से में तो इसलिए आई थी की आप कही डरे तो नही , यह सुन कर राजा विलम ओर नीलंबा हस पड़े खेर यह तो शिवन्या की वजसे थोड़ा मनोरंजन होता था लेकिन मुसीबत तो अब आने वाली थी। पूरा एक दिन बीत चुका था लेकिन बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी उल्टा दूसरे दिन तो पूरे राज्य में तबाही मचना शुरू हो गया था ।
बारिश की वजह से प्रजा पर मुसीबत आ गई जिन लोगो के घर कच्चे थे वह बारिश की वजह से गिर गए , खेतो में फसल बरबाद हो चुकी थी। अब विलम नगर के बुरे दिन आने वाले थे । आधी से ज़्यादा प्रजा बेघर हो चुकी थी घर गिर चुके थे वह सब मूसलाधार बारिश का सामना कर रहे थे। खूब तेज हवाएं चल रही थी मानो कोई पुरानी चीज याद दिलाने आई हो।

शिवन्या कहती है माता यह बारिश रुक तो जायेगी ना इससे किसी को परेशानी तो नहीं होगी ना , तब निलंबा कहती है पुत्री अब तो सब भगवान पर छोड़ दो उनसे प्रार्थना करो की बारिश जल्द रुक जाए। तब शिवन्या राजा से कहती है , पिताजी हम तो यह बारिश से बच कर महल में सुरक्षित है पर हमारी प्रजा का क्या?? जिनके घर मिट्टी के है उनके घर इस भयंकर बारिश में गिर नहीं गए होंगे ?? क्या उनको परेशानी नहीं हो रही होगी?? उत्तर दीजिए न पिताजी

तब राजा कहते है हा यह तो हमने सोचा ही नहीं हम अभी उनके रहने का बंदोबस्त कर देते है , निलंबा ने कहा जो हमारे मस्तिक्स में नहीं आया वह आपने सोच लिया पुत्री , धन्य है आपके विचार को ।

कहानी को यही तक रखते है दोस्तो , कहानी का भाग ६ जल्द ही आयेगा। 😊