हादसा - भाग 5 Ratna Pandey द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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हादसा - भाग 5

उस समय नदी के किनारे कई तैराक उपस्थित थे, जिन्हें इस नाव को देखकर यह आभास हो गया था कि यह नाव सही सलामत किनारे लग जाए तो यह चमत्कार ही होगा। जैसे ही नाव गुलाटी खाकर डूबने लगी, कई तैराक अपनी जान पर खेल कर सरिता में कूद पड़े। जितनों को बचा सकते थे, भरसक प्रयत्न करके बचा लिया। जो भाग्यशाली थे बच गए, जिनकी क़िस्मत में वहीं अंत लिखा था नदी के तल में समा गए। जो बाहर निकाले गए वह भी ख़ुद भले ही बच गए लेकिन अपने साथ वापस घर जाने के लिए अब उनके साथ वह नहीं थे जो उनके साथ में आए थे।

उस नाव में ऐसे कितने परिवार थे जो वीरान हो गए थे। किसी का मासूम बच्चा नहीं मिला, किसी की पत्नी नहीं मिली, किसी के बूढ़े माता-पिता ना मिल सके। नाविक का भी कोई अता-पता नहीं था, जबकि वह तो अच्छा तैरना जानता था।

पूनम और प्रकाश में से एक तैराक को पूनम मिल गई। वह उसे बचा कर बाहर निकाल लाया लेकिन प्रकाश सरिता में ऐसा खो गया कि किसी तैराक के हाथ ना लग पाया। पूनम लाल जोड़े में दुल्हन की तरह सजी-धजी इस नौका विहार के लिए गई थी लेकिन जब वह बाहर निकली तब उसके शरीर पर लाल वस्त्र तो थे किंतु उसकी मांग का सिंदूर और माथे की बिंदिया मिट चुकी थी। उसके सिंदूर और बिंदिया को पानी प्रकाश के साथ बहा ले गया था। अब तक मेडिकल टीम भी वहां पहुँच गई थी। सब लोगों को उपचार दिया जा रहा था। जो ज़्यादा गंभीर थे, उन्हें एंबुलेंस में डालकर अस्पताल भेजा जा रहा था।

पूनम के शरीर से भी पानी बाहर निकाला गया। वह जैसे ही होश में आई उसने पूछा, “प्रकाश कहाँ है? प्रकाश कहाँ है?” 

प्रकाश तो जल समाधि लेकर चिर निंद्रा में खो चुका था। थोड़ी सी जल्दबाजी के लिए प्रकाश ने अपना जीवन और पूनम ने अपना जीवन साथी खो दिया। माँ बाप ने अपना वारिस खो दिया। इस हादसे ने ऐसे ही ना जाने कितने परिवारों को उजाड़ कर रख दिया।

इस समय उधर प्रकाश और पूनम दोनों के परिवार में शादी की बातें चल रही थीं, बिना किसी विघ्न बाधा के इतनी अच्छी शादी हो गई। सब बहुत ख़ुश थे, उन्हें क्या मालूम था, वे यहाँ जो ख़ुशियाँ मना रहे हैं, जो सोच रहे हैं, वह ख़ुशियाँ चंद पलों की मेहमान हैं। उसके बाद आने वाला समय दुःखों का सैलाब लेकर आएगा जो कि बहुत ही भयानक होगा। 

होश में आते ही पूनम समझ गई कि उसका जीवन वीरान हो चुका है। प्रकाश पानी की गहराई में कहीं खो चुका है। लेकिन फिर भी उसके मन में एक उम्मीद बाकी थी। वह कहते हैं ना जब तक साँस है तब तक आस है।

कुछ गोताखोर अब भी मृतकों के पार्थिव शरीर को ढूँढने की कोशिश कर रहे थे। किसी का शरीर मिला, किसी का नहीं, प्रकाश भी उन्हीं में से एक था जिस का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया था। पूनम वहीं नदी के तट पर यह उम्मीद लिये बैठी थी कि शायद प्रकाश गोताखोरों को कहीं से मिल जाये लेकिन ऐसा हो ना सका।

उसके बाद मदद करने वाले कुछ लोगों ने उसे समझा बुझा कर उस होटल तक पहुँचा दिया जहां वह रुकी हुई थी।

                                                                       

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)

स्वरचित और मौलिक

क्रमशः