वेलेंटाइंस डे - 2 Vaidehi Vaishnav द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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वेलेंटाइंस डे - 2

अब तक आपने पढ़ा कि रघुबीर जब तिरंगे में लिपटे हुए आने की बात कहता है तो सिया रूठ जाती है और कहती है मुझसे इस तरह की बाते न किया करो।

अब आगें....

हँसते हुए रघुबीर ने कहा - बेवकूफ लड़की ! तुमसे समझदारी वाली बातों की उम्मीद में करता भी नहीं। तुम हमेशा ऐसे ही रहना सिया..तितलियों सी चंचल। मैं तुम्हें हँसते मुस्कुराते देखता हुँ तो सुकून मिलता हैं। वादा करो कभी इन आँखों से आँसू न बहने दोगी।

मैंने चुटकी लेते हुए कहा - जो तुमको हो पसन्द वहीं बात करेंगे...

यूं ही हँसते-मुस्कुराते हम घर तक आ गए। मैंने रघुबीर से घर आने को कहा। फिर कभी आऊँगा कहकर रघुबीर वहाँ से चला गया। मैं दूर तक रघुबीर की गाड़ी को देखती रही। मम्मी ने भीतर से आवाज़ लगाई - अरे सिया तुम लोग आ गए..?जल्दी से अंदर आ जाओ दोनों..अदरक वाली चाय बनाई हैं।

मैंने रघुबीर की दूर जाती गाड़ी को देखते हुए कहा - रघुबीर चले गए मम्मी !

मम्मी ने मुझे टोंकते हुए कहा - "चले गए ऐसा नहीं कहते सिया..फिर आएंगे कहो ।"

मेरा शरीर सुन्न पड़ गया। शायद बारिश में भीगने से...या फ़िर मम्मी की बात से... ये रघुबीर औऱ मम्मी आज कैसी बाते कर रहें हैं ? खीझकर मैं अपने कमरे में चलीं गई। ड्रेस चेंज करने के बाद मैं बिस्तर पर लेट गई। फोन पर मैसेज बीप बजी। रघुबीर का मैसेज था। मैसेज में लिखा था...

सुनो ! कल वेलेंटाइन्स डे है , तुम तैयार रहना। कल हम कहीं घूमने चलेंगे।

मैं नख़रे दिखाना चाहती थीं । मना कर देतीं ,पर अंतर्मन ने कहा - पता नहीं रघुबीर फिर कब आए..जो भी पल मिले हैं उन्हें जी-भरकर जी लो।

मैसेज बीप ने मुझें ख्याली दुनिया से बाहर कर दिया। रघुबीर ने लिखा - एक हाँ के लिए भी पंडित जी से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत होंगी ..?

मैंने फनी ईमोजी भेजते हुए - हाँ लिख दिया।

शुभरात्रि बेवकूफ लड़की कहकर रघुबीर ऑफलाइन हो गए। मैं मोबाईल स्क्रीन को अपलक देखती रही।

ग्वालियर की अलसाई सी भोर में चहकते पक्षियों के शोर से मेरी नींद खुल गई। मैंने समय देखने के लिए मोबाईल देखा तो नोटिफिकेशन में रेड रोज़ के साथ रघुबीर का मैसेज था - आई लव यू बेवकूफ लड़की !

मैं हल्के से मुस्कुरा दी ,औऱ 'लव यू टू' लिखकर एक स्माइली भेज दिया। उधर से तुरंत जवाब आया - बिना लाल गुलाब के इज़हारे - मोहब्बत स्वीकार नहीं कि जाएगी।

मैंने शरारती लहज़े में लिख दिया - ठीक हैं , जो लाल गुलाब दे उसी को ढूंढ लीजिए जनाब ।

रघुबीर का रिप्लाई आया - हम एक औऱ साल इंतज़ार कर लेंगे मोहतरमा आपके गुलाब का , पर गुलाब आपसे ही लेंगे।

मैंने कहा - देखते हैं।

रघुबीर ने लिखा - जी बिल्कुल , देख लीजिएगा पर मेहरबानी करके अभी आप तैयार होकर जल्दी से आईए । मैं दस मिनट में आ रहा हूँ।

मैंने हैरान होकर कहा - बस दस मिनट..?

रघुबीर - जी , तुम्हें करना ही क्या है , कितना भी मेकअप कर लो दिखोगी बेकार ही ..उसने एक साथ कई सारे हँसते हुए इमोजी के साथ लिखा।

मैं बिना जवाब दिए तैयार होने चली गई। दस मिनट में रघुबीर सच में घर आ गए। मैंने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहनी औऱ बालों को बांध लिया। मुझें देखकर रघुबीर ने भौहें उचकाते हुए कहा - हम्म ...नॉट बेड लुकिंग गॉर्जियस !

मैं बस मुस्कुरा दी। रघुबीर ने कार का दरवाजा कुछ इस अंदाज में खोला जैसे मैं कोई राजकुमारी हुँ औऱ वो मेरे दरबान।

मैंने इतराते हुए कहा - तो बताईए कहाँ की सैर करवा रहें हैं आप ?

शेष अगलें भाग में...