The Author Miss Chhoti फॉलो Current Read सच्ची दोस्ती By Miss Chhoti हिंदी क्लासिक कहानियां Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books Ishq ka Ittefaq - 3 कॉरिडोर का वो अंधेरा कोना अब भी कबीर मेहरा की भारी साँसों से... मुक्त - भाग 13 एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे क... महाभारत की कहानी - भाग 233 महाभारत की कहानी - भाग-२३७ धृतराष्ट्र के पास नारद, पर्वत, वे... Money Vs Me - Part 3 मैं दिन भर कैफ़े में काम करता और शाम को सज संवर कर निकल जाता... भय से मुक्ति ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्स... श्रेणी लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी शेयर करे सच्ची दोस्ती (7k) 3.9k 15.3k दोस्ती हमारे जीवन का एक बहुत ही खास रिश्ता होता है। जन्म होते ही हमारे साथ कई रिश्ते जुड़ जाते है। पर दोस्ती का रिश्ता हम खुद ही बनाते है और दिल से निभाता है।जीत और राज एक दुसरे के बहोत अच्छे दोस्त थे। दोनों को एक दुसरे का साथ बहोत पसंद था। इन दोनों की दोस्ती मसहूर थी। दोस्ती की छोटी सी दास्तान आप के लिए.... जीत MP से और राज UP से था। दोनों की मुलाकात पटना की स्कुल मे हुई थी। जीत दिखने मे मासुम और मस्ती खोर था। उसी तरह राज भोला और सबके साथ खुलमिल जाने वाला। जीत और राज बहोत कम वक्त मे अच्छे दोस्त बन गए थे। दोनों की पक्की वाली दोस्ती हो गई थी। फिर तो स्कुल और बहार दोनों साथ मे रहते, खाना पीना, घुमना, और पढ़ाई सब साथ मे करते।दोनों अपने परिवार से दुर थे। दोनों एक दुसरे को अच्छी तरह समझते। राज और जीत सारे सुख दुःख मे साथ रहते। स्कुल मे इनकी दोस्ती की बातें हर कोई करता, क्लासमेंट से लेकर टीचर भी इन दोनों की दोस्ती की बातें करते। दोनों की पढाई पुरी हो गई थी। अब दोनों को जॉब करनी थी, पर साथ मे, इसलिए जीत और राज पटना मे एक जगह साथ जॉब के गए। दोनों का सिलेक्शन हो गया। राज और जीत बहोत खुश थे। साथ मे पढाई की और अब साथ मे जॉब करने वाले थे। शुरुवात हुई नये सफर की...रोज शुभः साथ मे जॉब पर जाते, पुरा दिन काम करते और रात को दोनों साथ घर आते, रात को कभी खाना बनाते तो कभी खाना खाने बहार चले जाते, और छुट्टी के दिन बाइक लेके दोनों घुमने निकल जाते। वहाँ पर भी पुरे ऑफिस मे राज और जीत की दोस्ती मशहुर हो गई थी। कुछ महीने के बाद... अचानक ऑफिस के मैनेजर ने जीत का ट्रांसफर दुसरे राज्य मे कर दिया। राज और ऑफिस के सभी लॉग इसबात से दुःखी हो गए। कोई नहीं चाहता था की जीत वहाँ से जाए, जीत भी दुःखी था। एक हप्ते मे वहा पहोचना था। सिर्फ तीन दिन बचे थे। पर जीत से पहले तो राज ने जॉब छोड़ दि। उसके बाद तो राज कहा था ये कोई नहीं जानता था। और जीत भी वहाँ से निकल गया। राज और जीत कहा है, किसीको कुछ पता नहीं था। ना कॉल और ना मैसेज किसी से कोई संपर्क नहीं हो रहा था। कुछ दिनों के बाद what up मे दोनों की साथ मे फोटो देखी तब सबको पता चला, नये शहर, नई जगह दोनों फिर से साथ मे जॉब कर रहे थे। दोनों की दोस्ती पक्की वाली थी। ये दोनों एक दुसरे के लिए कुछ भी कर जाते थे। अच्छा और सच्चा दोस्त बहोत मुश्किल से मिलता है।कुछ दोस्ती अपनो के रिस्तो से भी बढकर होती है, ऐसी दोस्ती बहोत कम होती है। । क्या आपका भी कोई ऐसा अच्छा दोस्त है...? तो ये स्टोरी अपने उस दोस्त को शेयर जरूर कीजिये। । स्टोरी पसंद आये तो रेटिंग जरूर दीजिये।। 🙏🙏_Miss Chhotti Download Our App