तेरी चाहत मैं - 17 Devika Singh द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • पहली बारिश, पहला प्यार - 1

    Chapter 1 — पहली बारिश, पहला प्यारशाम धीरे-धीरे शहर पर उतर र...

  • अकथ - भाग 3

    भाग 3अवनि ने कांपते हाथों से घर का दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से...

  • तेरी चाहत में - 1

    सुबह 9:10 बजे,ममता देवी : “सोनाई… अरे सोनाई! देख तो लड़की के...

  • Ishq ka Ittefaq - 2

    दिल्ली के सबसे महंगे इलाके में खडा आलीशान मेहरा मेंशन. कबीर...

  • नया युग - 1

    वर्ष 4999 की बाद है, जब मानवता ने अपनी मानवता खो चुका था और...

श्रेणी
शेयर करे

तेरी चाहत मैं - 17

रास्ते में, राज चुप चाप बैठा ड्राइव कर रहा था। सिमरन बोली "राज थैंक्स, वैसा क्या काम है तुमको वहां?"
राज हड़बड़ा कर बोला "वो... वो कुछ खास नहीं, बस मंदिर जाना है।" उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
सिमरन बोली "तुम सिर्फ मंदिर जाने के लिए इधर आ रहे हो, कोई खास बात है क्या? मंदिर तो तुम कहीं भी जा सकते हो।"


राज "वो मैंने वहां पर पहले मन्नत मांगी थी, की अगर मुझे जॉब मिलेगी तो मैं यहां आऊंगा।"
सिमरन बोली "ओह! अच्छा, अगर तुमको कोई समस्या ना हो तो मैं भी मंदिर चल सकती हूं, कई दिन हुए मुझे भी मंदिर गए हुए। वैसा कौन से मंदिर मैं जाना है? "
राज बोला "हां, चलिये मुझे क्या इश्यू होगा। मंदिर तो सभी जाते हैं। यहां पास के मानिक मंदिर जाना है।" राज अब मन ही मन रोहित को कोस रहा था की कहां फसा दिया।
फिर थोड़ी देर मैं दोनो मंदिर मैं खड़े थे। दोनो ने पूजा सामाग्री ली और मंदिर मैं चले गए। दोनो हाथ जोड़े खड़े थे। की तभी राज की नजर सिमरन पर पड़ी, सर पर दुपट्टा ओढे वो उसे उस वक्त और अच्छी लग रही थी। तभी सिमरन ने आंखें खोली और उसे अपना तरफ देखते हुए पकड़ लिया। उसने इशारे से पुछा क्या हुआ, तो राज ने नहीं मैं सर हिला दिया।
फिर थोड़ी देर मैं वो मंदिर से बहार आ गए। बहार निकल कर वो कार मैं बैठा था, थोड़ा आगे चले तो जाम लगा था। अब कार धीरे धीरे चल रही थी।
सिमरन बोली "मेरी वजह से तुमको यहां जाम फेस करना पड़ा।"
राज बोला "नहीं ऐसा कुछ नहीं है, जाम तो सभी जगह लग जाता है।"
सिमरन बोली "राज एक बात बोलो, तुम मुझसे इतनी घबराहट कर कर बात क्यूं करते हो? क्या तुम्हारा नेचर ऐसा है। मैं जब तुमसे बात करता हूं तुम घबरा जाते हो और छोटा सा जवाब दे कर चुप हो जाते हो।”
राज बोला फिर हकलाने लगा "नहीं ऐसा कुछ नहीं है। मैं कब घबराता हूं।"
सिमरन मुस्कुराते हुई बोली "तुम अभी फिर हकला रहे हो। मैं इतनी बुरी और खतरनाक नहीं हूं, ना मैं तुमसे कोई 59 खूसट बॉस की तरह बात करती हूं। बाकी सब तो नॉर्मल बिहेव कर रहे हैं, तुम ही बस………”
राज बोला "नहीं असल मैं मुझे अभी आप के बारे में ज्यादा पता नहीं है। टू थोडा इश्यू है।”
सिमरन बोली "अगर मुझसे बात नहीं करोगे तो जानोगे कैसे?" सिमरन फ़िर मुस्कुरा दी.
फिर वो बोली "चलो मैं तुमको बताती हूं, मैं सिमरन सिंह हूं। मैं दिल्ली की हूं। आई एम ए फ्रेश ग्रेजुएट, एमबीए कॉरेस्पोंडेंस से शुरू हो गया है। मैं CWS मेन मैनेजमेंट ट्रेनी हूं, लेकिन न्यूकमर्स को ट्रेन भी कार्ती हूं। मुझे नींद अच्छी लगती है। चोकोबार आइसक्रीम मुझे पसंद है, आमिर खान मेरा पसंदीदा अभिनेता है, क्रिकेट खेलना और देखना पसंद है। और एक जरूरी बात, मुझे मार्शल आर्ट्स भी आता है, तो सावधान रहें।"
राज को हसीं आ गई खिलखिला के हसने लगा।
सिमरन भी जल्दबाजी हुई बोली "देखा और तुम्हारा पता नहीं क्यों घबरा रहे थे। ऐसे इसमे हसने की कौन सी बात है यार?"
राज बोला "मार्शल आर्ट वाली" फिर वो और हसने लगा। सिमरन बोला "झूठ नहीं बोल रही, क्यों का सर तोड़ा है मैंने, अगर कहो तो तुम्हारा भी तोड़ का डेमो दिखाती हूं।" सिमरन ने पंच बना कर मुस्कुराते हुए राज को पोज दिया, तो वो बोला "नहीं यार, मुझे पक्का यकिन है।"


To be continued
In 18th part