सपने - (भाग-42) सीमा बी. द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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सपने - (भाग-42)

सपने.......(भाग-42)

आदित्य और आस्था एक दूसरे से काफी देर तक यूँ ही एक दूसरे से लिपटे रहे.... वो भी बिल्कुल चुपचाप।शायद एक दूसरे से अलग होते ही नहीं अगर आदित्य का फोन न बजता
"आदित्य तुम्हारा फोन बज रहा है, उठा लो", आदित्य से अलग होने की कोशिश करते हुए आस्था ने कहा।" बजने दो, तुम बस यूँ ही मेरे सीने से लगी रहो".....! फोन बज बज कर बंद हो गया, पर शायद कोई जरूरी कॉल था तभी फोन की घंटी दोबारा बजने लगी। "मैं यहीं हूँ, चलो जल्दी से फोन अटैंड करो, कोई Important कॉल होगा".... कह कर आस्था उससे अलग हो गयी। आदित्य ने बेमन से जेब से फोन निकाला और देखा तो राधा अम्मां का नाम स्क्रीन पर फ्लेश हो रहा था। फोन रिसीव किया तो उधर से किसी आदमी की आवाज आ रही थी...." हैलो... आप आदित्य बोल रहे हैं"? "हाँ जी आदित्य बोल रहा हूँ.....राधा अम्मां ठीक हैं न"? आदित्य जी राधा जी हमारे बीच नहीं रहीं, वो दोपहर को आराम करती हैं पर शाम को जब बाहर नहीं आयीं तो सोचा कि थकी होंगी पर रात को खाने के लिए बुलाने गए तो वो उठी ही नहीं......डॉक्टर को बुलाया पर तब तक देर हो चुकी थी.....।" ये कैसे हो सकता है? मैं 2-3 दिन पहले ही तो मिल कर आया हूँ, अम्मां बिल्कुल ठीक थीं", आदित्य बौखला गया था। "आप ठीक कह रहे हैं, वो बिल्कुल ठीक थीं, हम सब भी बहुत हैरान हैं कि अचानक क्या हो गया है....डॉ. साहब का कहना है कि शायद साइलेंट हार्ट अटैक था", उधर से आवाज आयी। आदित्य की आँखो में आँसू देख कर आस्था भी परेशान हो गयी.....पर वो आदित्य के फोन रखने का इंतजार कर रही थी। " आदित्य जी आप बताइए कि उनके क्रियाक्रम और बाकी सब रीति रिवाज कैसे पूरे किए जाने हैं......राधा अम्मां हमेशा कहती रही हैं कि अगर उनको कभी कुछ हो तो हम लोग आप को ही फोन करें.......... इसीलिए आप को फोन किया"। "मेरे आने का इंतजार कर सकते हैं आप? मुझे मुंबई से आने में टाइम लगेगा......कल दोपहर तक ही पहुँच जाऊँगा......"! आदित्य ने उनकी बात सुन कर कहा तो वो बोले," हाँ जी सब इंतजाम हो जाएगा.... आप आ जाइए"। "क्या हुआ आदित्य"? कहाँ पहुँचना है"? आदित्य के लिए राधा अम्मां का जाना बहुत बढा दुख था.....उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे....."आस्था मेरी राधा अम्मां जिन्होंने मेरी मॉम से ज्यादा प्यार दिया, टाइम दिया और मेरी हर बात सुनी बिल्कुल दोस्त की तरह और वो आज नहीं रही.....हरिद्वार से फोन था......उनको मैं ही वहाँ छोड़ कर आया था.....2-3 दिन पहले वो बिल्कुल ठीक थीं, मिल कर ही तो आया हूँ.....आज अचानक वो चली गयीं.....मुझे वहाँ जाना है.....जल्दी से जल्दी जो भी दिल्ली की फ्लाइट मिले"।
आदित्य कुछ घंटे पहले ही तो आया था, बैग भी अनपैक नहीं किया था.....!
"तुम अकेले जा रहे हो आदित्य, मेरा मन नहीं मान रहा कि तुम इस सिचुएशन रो अकेले हैंडिल करो, मैं भी चलूँ तुम्हारे साथ"? आदित्य को जल्दी जल्दी अपना सामान रखते देख आस्था बोली। "आस्था देर हो जाएगी मैं ठीक हूँ अकेला चला जाऊँगा"! "तुम बस 10 मिनट रूको मैं आ रही हूँ", कह आस्था जल्दी से अपने कपड़े पैक करने लगी। वैसे भी तो उसने पैकिंग कर ही रखी थी घर जाने के लिए.....बस कुछ और सामान और कपड़े डालने में वाकई उसने 10 मिनट लगाए......और नाइट सूट में ही चलने को तैयार खड़ी थी.....। "मैं तैयार हूँ आदित्य", हॉल में सोफे पर बैठे आदित्य के पास जा कर आस्था ने कहा तो आदित्य बोला," तुम नाइट ड्रैस में जाओगी एयरपोर्ट", आदित्य ने हैरानी से कहा....." हाँ क्या खराबी है....वहाँ पहुँच कर चैंज कर लूँगी अभी चलो"। आदित्य बोला," खराबी कुछ नहीं है बस तुम लड़कियों को कहाँ आदत होती है बिना मेकअप के बाहर जाने की...."? "आदित्य टाँग बाद में खींचना और ये बताओ हम किसी को बता कर जाएँ या सुबह फोन करोगे"? "सब सो गए हैं, मैंने मैसेज तो कर दिया है"। आदित्य ने अपना और आस्था का बैग उठा लिया, "अब चलो"! दोनो डोर को लॉक करके बाहर आ गए..... आदित्य को अपनी ही गाड़ी में एयरपोर्ट जाना सही लगा।
गाड़ी को पार्किंग में लगा जो दिल्ली जाने की फ्लाइट थी....वो ले ली। एक घंटे के बाद फ्लाइट थी.... 7 बजे तक वो दिल्ली पहुँच ही जाँएगे....यही सोच अपने ड्राइवर को फोन करके उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचने के लिए कह दिया.....आदित्य ने प्लेन में बैठने से पहले मॉम को भी मैसेज कर दिया......। आदित्य अपने और राधा अम्मां सी जुड़ी बातें याद कर रहा था। आस्था हैरान थी आदित्य की ये अनदेखी साइड देख कर। उसने कभी आदित्य को इतना इमोशनल होते हुए नहीं देखा था। दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही उसने ड्राइवर को फोन किया तो उसने बताया कि वो पार्किंग में है। कार में बैठ वो लोग सीधा ही हरिद्वार निकल गए। सुबह का टाइम खाली सड़के तो खाली थी, पर जिकना टाइम पहुँचने को लगना था वो तो लगा ही...फिर भी वो लोग 2 बजे के आसपास पहुँच ही गए। आश्रम पहुँच कर वहाँ जैसे जैसे पंडित जी कहते गए.....आदित्य करता गया। विधिवत दाह संस्कार करने के बाद वापिस आ कर नहाने धोने के बाद ही उन लोगो ने कुछ खाया....। आदित्य की मॉम ने फोन पर उससे बात की और बताया कि "उनकी अस्थियों का विसर्जन करके वहाँ के पंडित जी से पूछ कर आश्रम के मैनेजर को कहना वो सब करवा देगा"। पंडित जी से आदित्य ने बात की तो उन्होंने बताया," बेटा अगर सब विधिवत करना चाहो तो तेरहवीं तक रूकना पड़ेगा। नहीं तो अस्थि विसर्जन करने के बाद आप सब कुछ एक ही दिन में कर सकते हैं... आप विचार करके बता दीजिए, मैं उसी हिसाब से आप को सब कुछ बता दूँगा"। आदित्य ने ये सब कभी मैनेज नहीं किया था तो उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.... वो आश्रम के मैनेजर साहब से पूछने चला गया कि," कैसे करना चाहिए"? मैनेजर साहब ने आदित्य को बताया" आदित्य जी आपकी राधा अम्मां बहुत दूर की सोचती थीं....वो अपने जाने से बहुत पहले ही मुझे मेरी डायरी में लिखवा कर गयीं है कि उनके जाने के बाद आप उनका अंतिम संस्कार करके और अस्थियां गंगा जी में बहा कर चले जाएँ और जो उनके पास पैसा है वो सही जगह पर आप खर्च करें"....उन्होंने डायरी खोल कर दिखा दी। आदित्य के पास फिर एक सवाल था कि वो क्या करे क्या नहीं? उसने आस्था की तरफ देखा तो वो भी सोच में पड़ गयी। आदित्य ने मॉम को फोन किया और राधा अम्मां की आखिरी इच्छा के बारे में बताया तो उसकी मॉम ने कहा," आदि तुम अस्थि विसर्जन करने के बाद आश्रम में खाना बनवा लेना पंडित जी और सब लोगों के खाने का इंतजाम करवा लेना और पंडित जी को कहना कि वो 15 दिन तक आश्रम में आ कर शांति पाठ करें। राधा के पास जितना अमाउंट था वो तुम सोचो कैसे यूज करना चाहते हो..वैसे ही करो"। आदित्य को उस दिन अपनी मॉम बेस्ट मॉम लग रही थी..."ओके मॉम मैं सोचता हूँ", कह आदित्य ने फोन रख दिया। राधा अम्मां के साथ वाले कमरे में एक औरत रहती थी, उसने आदित्य और आस्था को राधा के कमरे में देखा तो आ गयी," बेटा राधा तुम्हारी बहुत बातें करती थी, वे यहाँ बहुत खुश थी, पता नहीं अचानक वो चली गयी...पर बेटा एक बात कहनी थी, मैं और राधा अक्सर बातें करती थी और हम एक दूसरे के न रहने पर जो हम में से रह जाएगा वो हमारी बात किसको बताएगा, वो बताया था उसने मुझे"! आदित्य उस औरत की तरफ देखता रह गया, उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या बोले!" क्या कहा था राधा अम्मां ने आपको"? आदित्य ने पूछा तो वो बुजुर्ग आंटी बोली," राधा के पास कुछ पैसे रखे थे वो कह रही थी कि वो पैसे किसी अनाथ आश्रम में दे देना"। आदित्य ने राधा अम्मां की अलमारी खोली.....तो उसमें वाकई पैसे रखे थे...शायद जो वो कैश दे गया था दो बार वो ऐसे ही रखे थे। आदित्य ने वो पैसे अपने पास रख लिए। पंडित जी को भी बता दिया की कैसे करने का सोचा है। मैनेजर साहब को कह कर पूरे आश्रम के लिए एक दिन का खाना बनने वाला था....पंडित जी को शांति पाठ के लिए कहा और मैनेजर साहब से सब व्यवस्था और पाठ खत्म होने के बाद दक्षिणा वगैरह सब कुछ मैनेजर साहब के हाथ में दे दिया। एक दिन आदित्य और आस्था वहीं रूके। अस्थि विसर्जन करके सब को खाना खिला आदित्य ने एक अनाथ आश्रम में राधा अम्मां के पैसे वहाँ पर रहने वाले बच्चों के लिए दे कर वापिस दिल्ली आ गए। आदित्य की मॉम चाहती थी कि आदित्य घर आए....पर आदित्य ने मना कर दिया। राधा अम्मां की पास बुक वगैरह सब ड्राइवर के हाथ उसने मॉम को देने के लिए भेज दी और अपनी मॉम को फोन करके कह दिया कि," वो पैसे किसी अच्छे काम में लगा दें किसी भी तरह की चैरिटी करके"। ड्राइवर उन्हें वापिस एयरपोर्ट छोड कर घर चला गया। कामों से फ्री हुआ तो उसने आस्था को पूछा, "अब आगे का क्या प्लान है? मैं सेच रही हूँ कि घर चली जाऊँ......काफी दिन हो गए फिर स्नेहा की शादी भी है"। आस्था की बात सुन कर आदित्य बोला, "क्या यार एक तो इतना टाइम लगा दिया" हाँ "कहने में और जब कहा तो छोड कर जा रही हो"। "थोड़े दिनो की बात है, मन न लगे तो तुम आ जाना इलाहाबाद मिलने", आस्था ने मुस्कुराते हुए कहा।" मैं तो आ जाऊँगा मैडम तुम्हारे पास चाइम होगा मेरे लिए"। हम्म सोचते हैं इस बारे में भी ....आस्था ने कहा तो आदित्य बोला," आस्था अभी तो वापिल चलो मुबंई...तुम्हारी स्नेहा की शादी अगले महीने है न तो तब चली जाना"! चलो ठीक है आदित्य अभी चलते हैं मुबंई।
क्रमश: