बेशक इश्क - Part-8 Vandana thakur द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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बेशक इश्क - Part-8

रात का समय....

रूपिका का घर......

चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा है, हर तरफ इतना अंधेरा कि कुछ भी दिखाई देना नामुमकिन सा है वही रूपिका सीढियो से उतरकर नीचे की तरफ आती है उसनें हाथ में मोबाइल पकड़ा है जिसकी टॉर्च ऑन है रूपिका इतना अंधेरा देख कर थोड़ी घबराई हुई है ।

" अचानक लाइट कैसे चली गयी,,,,माधवी आंटी भी चली गयी है,,,, और यहां हॉल से भी पता नहीं कैसी आवाज आ रही है,,,,,," रूपिका ने सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए खुद से कहा ।

वो हॉल में आती है और जनरेटर वाले रूम की तरफ बढती है पर तभी उसे लगता है जैसे किसी नें उसके घर की दरवाजा नॉक किया ।

रूपिका थोडा सा चौंक उठती है । क्योकि अभी रात के 2:00 बज रहे थे और यह वही टाइम था जब उसे डरावने सपने आया करते थे, आज उसे पता नहीं क्यों पर नींद नहीं आ रही थी इसलिये वो आज जाग ही रही थी ।

रूपिका दरवाजे की तरफ टॉर्च करते हुए देखती है तो सामने दरवाजा कुछ खुला हुआ ही था ।

" दरवाजा खुला है,,,,??? माधवी आंटी दरवाजा बन्द करके नहीं गई थी क्या,,,,, ???? रूपिका ने अपने आप से ही सवाल किया ।

" शायद वह भूल गई होंगी,,,,!!! कहते हुए अपना सिर झटककर वो दरवाजे की तरफ बढती है पर उसें लगता है जैसे वो दरवाजा धीरे-धीरे अपने आप खुल रहा था । रूपिका टॉर्च दरवाजे की तरफ किये दरवाजे की तरफ बढने लगती है ।

" कौन,,,, ????? रूपिका नें आवाज लगाते हुए कहा । तभी रूपिका को ऐसे लगता है जैसे उसके बगल में ही कोई चल रहा है और उसकी सांसों की आवाज रूपिका को अपने कान के पास महसूस हो रही थी ।

रूपिका के कदम कुछ पल के लिये ठीठक गये, उसनें अपनी नजरें दरवाजे से हटाकर बगल में देखा, पर वहां कोई नही था ।

रूपिका नें एक बार हॉल में चारों तरफ टॉर्च की रोशनी लगाकर देखा पर उसे कोई भी दिखाई नही देता है ।

रूपिका के सांस में सांस आती है पर उसी वक्त घर का दरवाजा जोर से खुलता है ।

रूपिका सामने देखती है तो चौंक पडती है, एक औरत जिसके लम्बे बाल थे, और आंखे बिल्कुल लाल थी, उसके बालो पर लम्बें- लम्बे अजीब से कीडे लहरो रहे थे,,, और वो रूपिका की तरफ बढ रही थी, वो औरत गिरते-पडते उसकी तरफ बढ रही थी, धीरे-धीरे उस औरत की आंखो से खून निकलनें लगता है उस औरत का शरीर गलनें लगता है रूपिका यह नजारा देखकर कांप उठती है ।

वो अपना जगह पर जम जाती है, उसनें आज से पहले ऐसी कोई भी चीज नही देखी थी, अभी जो उसके सामने था उसें देखसर वो बिल्कुल डर गयी थी । धीरे-धीरे उस औरत की आंखे भी बाहर निकलनें लगती है और चेहरे से कीडे निकलनें लगते है । औरत रूपिका के पास बिल्कुल पास आनें लगती है तो रूपिका जोर से चीख देती है ।

" मेैम साहब,,,,, मैम साहब,, क्या हुआ आपको क्यों चिल्ला रही हैं आप,,,,,,,,????? माधवी नें रूपिका के गाल थपथपाते हुए कहा ।

रूपिका, माधवी की आवाज सुनकर तुरन्त उठकर बैठ जाती है, उसका चेहरा पसीने से तर-बतर हो चुका था और सांसों की रफ्तार लगभग दुगनी हो चुकी थी ।

" वो,,, औरत,,,,,,,,!!!! रूपिका नें अटकती हुई सांसो के साथ कहा ।

" कौनसी औरत,,, मैम साहब,,,,,"

" वो उसके चेहरे से किडै निकल रहे थे, उसकी आंखे नही थी,,,,,,!!!! वो औरत,,, अभी हॉल में,,,,,"

" क्या बोल रही है आप,,,,,??? हॉल में तो कोई नही है,,,, ??? मैं अभी बोलते ही आई हूं आपकी आवाज सुनकर और कौनसी औरत, कीड़े क्या कह रही हैं आप, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा,,,??

रूपिका अपने आस पास देखती है तो वो अपनें रूम मे थी और सोफे पर बैठी हुई थी । उसे समझ नही आता वो सपनें में थी या फिर सच में ही उसने वह सब देखा था ।

" लीजीये,,, पानी,,, और शांत हो जाइये,,,,,, शायद आपने कोई बुरा सपना देखा है तभी आप इतना डर गई है खैर आप उठ जाइए मैंने नीचे नाश्ता लगा दिया है,,,,,,!!! आप नाश्ता करने आ जाइये,,,,, फिर मुझे दूसरे घरो में भी काम के लिये जाना है,,,,,,,!!!!

" हम्म,,,,, !!! रूपिका, माधवी की बात सुनकर धीरे से कहती है माधवी वहां से चली जाती है ।

" व्हॉट्स गॉइंग ऑन,,,,??? क्या हो रहा है यह सब, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, कितने अजीब सपने हैं यह,,,, और इतने ही डरावने,,,,,,!!!! कहते हुए रूपिका एक साथ में ही पानी का पूरा गिलास खत्म कर देती है वो कुछ देर में सोफे से खडी होती है और कबर्ड की तरफ बढ जाती है ।

दूसरी तरफ

रहैजा हाऊस

वदान्य, अपनी कार के पास आता है वो अपने कार का दरवाजा खोलने की कोशिश करता है पर दरवाजा नहीं खुलता ।

" यह खुल क्यो नही रहा है,,,,??? क्या इसे किसी नें अंदर से लॉक किया है,,,,, ???? राव्या क्या तुम हो अंदर,,,,, , ??? राव्या दरवाजा खोलो,,,,,, मुझे कॉलेज के लिये लेट हो रहा है,,,,,!!!!

" तो आपनें पता लगा ही लिया मैं ही हूं,,,,,,, !!!!! कार के अंदर से एक आवाज आती है उसके साथ ही कार का दरवाजा खुलता है तो अन्दर एक लगभग अठरह साल की लडकी बैठी हुई थी ।

" हां, मुझे पता है यह तुम ही हो सकती हो,,,,!!!! तुम्हारे अलावा मेरी कार को कोई हाथ नहीं लगाता है,,,,,,"

" हां सी कहा, पर मुझे एक बार आपके साथ कॉलेज जाना है इसलिये मुझे भी अपने साथ लेकर चलिये,,,,!!!!

" क्या,,,,?? मैं तुम्हें कहीं नहीं ले जाने वाला हूं, तुम अभी कॉलेज में नहीं आई हो, जब तक तुम कॉलेज में नहीं आती, तब तक मैं तुम्हें कॉलेज नहीं लेकर जाऊंगा और वैसे भी हमारी कॉलेज में बच्चों की एंट्री अलाउड नहीं है,,,,, !!!

" क्या आप मुझे बच्चा कह रहे हैं,,,,,???

" औह हा मैं तुम्हें बच्चा कैसे कह सकता हूं तुम तो बंदरिया हो ना,,!!! सॉरी,,, सॉरी हमारी कॉलेज में बंदरियो की एंट्री नहीं है,,,,, !!!! वदान्य आंखे उठाते हुए कहता है । यह बात सुनकर राव्या की भौंहें तन जाती है ।

" औके,,, तो आज आप किसी ओर कीर से चली जाइये, यह कार इस बंदरियां के पास ही रहने दिजिये, और बंदरिया के भाई खुद बंदर ही होते हैं,,, तो आप अपना चेहरा देखिये, बन्दर है आप एक नम्बर के बंदर,,,,, मुछमूंडा बन्दर,,,,,,!!!!! कहते हुए राव्या नें वदान्य को जीभ दिखा दी ।

" राव्या तुम,,,,,!!!! वदान्य राव्या की तरफ गुस्से से हाथ बढाता है तभी राव्या तुरन्त कार की खिड़की बंद कर देती है वदान्य हाथ खिड़की में आने वाला होता है पर वह तुरंत पीछे खींच लेता है ।

" दरवाजा खोला,,, बंदरिया,,,,,!!!!

" नही खोलूंगी बंदर भाई,,, आप किसी ओर कार से चले जाइये,,, और नही जाना चाहते हैं तो मत जाइए लेट हो जाइएगा,,,, पर जब तक आप मुझे साथ नहीं लेकर जाएंगे मैं दरवाजा नहीं खोलूंगी,,,,,;!!!!

" क्या मुसीबत है,,, बहन नही तुम, तुम छोडो,,, ! बैठी रहो अंदर , मैं नहीं लेकर जा रहा तुम्हें,,,, और तुम्हारी इन हरकतों के बाद तो कभी नहीं लेकर जाऊंगा,,,,,,!!!! कहते हुए वदान्य गुस्से से पैर पटकते हुए दूसरी कार की तरफ चला जाता है, जहां पहले से ही ड्राइवर खडा हुआ था ।

वदान्य ड्राइवर से कार की चाबी लेता है फिर घर से निकल जाता है । राव्या, वदान्य के जाने के बात कार का दरवाजा खोलती है ।

" पता नही क्या खडूस भाई है मेरा, बन्दर की प्रजाति का खूद है पर मुझे बंदरिया कहता है,,,,, दिन भर खुद यहां से वहां कूदता रहता है, और मैं इसे बंदरियां दिखती हूं,,,,!!! हूंह,,,,, !!!!! बन्दर भाई,,,, आने दो मेरे हैंडसम भाई को उनसे डांट खिलाऊंगी आपको,,,,,,,!!!! फिर आप तो क्या आपकी बंदरों की टोली भी मुझे इज्जत के साथ कॉलेज लेकर जाएगी,,,,,,, मूछमूंडे बन्दर,,,,,, !!!! कहते हुए राव्या कार का दरवाजा जोर से बन्द करके पैर पटकते हुए घर की तरफ बढ जाती है ।

धारावाहिक जारी है..........