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खाना अच्छी तरह से चबाकर खाएं


Hunger craving तीव्र भूख के कारण या Food craving अर्थात भोजन की तीव्र लालसा के वश इन्सान भोजन पर अक्सर टूट पड़ते है। हमारे मुंह में ३२ दांत होते हैं।एक निवाले(bite) को कमसे कम ३२ बार सारे मुंह के दोनों ओर से अच्छी तरह से बार बार चबाना चाहिए जब तक वह प्रवाही न बन जाए। अक्सर लोग एक निवाला ३२ बार चबाने से पहले ही उसे निगल जाते है और दुसरा निवाला मुंह में ठूंस देते हैं। एक निवाला अभी निगला ही नहीं और साथ में दूसरा निवाला जल्दी से मुंह में ठूंस दिया जाता है। यह भोजन करने का ग़लत तरीका है। आजकल लोग भोजन समारोह में हाथ में डीश लिए खड़े खड़े ही भोजन करते हैं। Buffet बुफे means a meal (usually at a party or a special occasion) at which food is placed on a long table and people serve themselves.ऐसा भोजन (प्रायः पार्टी अथवा विशेष अवसर पर) जिसमें मेहमान स्‍वयं खाना परोसते हैं । बुफे में टेबल पर तरह तरह के व्यंजन होते हैं। हमें अपनी हुआ और पसंद के अनुसार व्यंजन थाली में परोस कर लेने चाहिए। लेकिन कुछ हर व्यंजन का स्वाद लेने की लालसा में भीड़भाड़ में जल्दी जल्दी जरुरत से ज्यादा भोजन खा लेते हैं और दूसरे दिन अपच और डायरिया(Indigestion and Food poisoning) से पीड़ित होते हैं।

वास्तव में हमारी प्राचीन परंपरा मुताबिक हम बैठ कर आहिस्ता आहिस्ता भोजन करते थे। यही सही तरीका है।
खाना खाने के फायदे तो आपको पता होंगे, लेकिन खाना अच्छी तरह से चबाने के यह फायदे आप शायद नहीं जानते होंगे। लेकिन ठीक तरीके से खाना चबाने के यह फायदे, आपको जरूर पता होने चाहिए ।आइये जानते है भोजन को अच्छी तरह चबाकर या ३२ बार चबाने से होने वाले फायदे:
(१) खुराक़ का अच्छी तरह से अवशोषण( better food absorption) होता है। आप जितनी ज्यादा बार खुराक़ चबाते हैं उतना ही अच्छा अवशोषण होता है। पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।भोजन को चबाते वक्‍त मुंह से अधिक लार निकलती है. भोजन चबाते वक्‍त उसमें मिला विटामिन और पौष्टिक तत्‍व सभी आ कर लार के साथ मिल जाते हैं जिससे हमें ऊर्जा मिलती है।

(२) पाचनतंत्र पर दबाव कम होता है।
होजरी, छोटी आंत,बड़ी आंत पर कम दबाव पड़ता है।

(३)भोजन के पश्चात पेट हल्का सा लगता है।पेट में भारीपन महसूस नहीं होती। सुस्ती वह बैचेनी नहीं होती।

(४)शरीर का वजन कम होता है।खाना खाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे ठीक तरीके से चबाना। अच्छी तरह चबा-चबाकर खाने से आप कम खाते हैं और आपका पेट भी जल्दी भर जाता है। परिणाम स्वरूप आगे चलकर आपका वज़न कम होता है।

(५) रोग से बचाव होता है और आरोग्य अच्छा रहता है।पचे हुए भोजन का अवशोषण आहार नाल की क्षुद्रांत्र (Small intestine) में होता है।

(६) यदि आहार ठीक प्रकार से ना चबाया गया हो तो पाचन में कठिनाई पैदा होगी और पेट में दर्द तथा गैस की समस्‍याए उत्‍पन्‍न हो जाएगी।भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने से कभी भी पाचन संबंधी समस्या जैसे अपच, डकार, गैस और जलन नही होती है।

(७) लार में अमाइलेज उत्सेचक होता है जो स्टार्च को ग्लूकोज और माल्टोज व डेक्स्ट्रिन में तोड़ देता है। मानव तथा कुछ अन्य स्तनपोषियों के लार में एमिलेज(salivary amylase) पाया जाता है जो पाचन में सहायक होता है।
आहार की ३०% स्टार्च का पाचन मुंह में होता है।

(८) चबा चबा कर खाने के अपने फायदे भी हैं, जो भोजन के बेहतर पचने के अलावा और भी ज्यादा जरूरी हैं।जब आप धीरे धीरे खाना खाते हैं तो आपका दिमाग आपको एक सिग्नल भेजता है कि अब आपका पेट भर चुका है अतः आप ओवर इटिंग( over eating) नहीं करते हैं।

(९) जब आप चबा-चबाकर खाते हैं तो आपका पाचन तंत्र, पाचन क्रिया के लिए खुद को तैयार करता है। इस तरह से आप जितना चबा-चबाकर खाते हैं, उतना ही बेहतर आपका पाचनतंत्र काम करता है।धीरे धीरे भोजन चबाने से मुंह में बनने वाले लार से भोजन मुलायम हो जाता है और पाचन क्रिया और भी आसान हो जाती है। मानव तथा कुछ अन्य स्तनपोषियों के लार में एमिलेज पाया जाता है जो पाचन में सहायक होता है।

(९) ठीक तरीके से चबाते हुए भोजन करने से, भोजन कई टुकड़ों में बंटकर
लार के साथ घुल मिलकर, बेहतर पाचन के लिए तैयार हो जाता है। वहीं अच्छी तरह से न चबाने पर ठीक से पाचन नहीं होता।भोजन के चबाने के भी कई कायदे हैं। बेहतर होता है कि हम भोजन को एक साथ ना खा कर बल्कि उसके छोटे-छोटे टुकडे( pieces/bites) कर के खाएं।खाने को तब तक चबाना चाहिए जब तक वो आपके मुंह में घुल ना जाए ।एक और बात जो आपको ध्यान देनी चाहिए कि भले ही खाना सूखा या गीला लेकिन उसे कभी भी तुरंत ना निगलें।

( १०) अच्छी तरह चबाकर खाने का एक फायदा यह भी है, कि आप भोजन का ठीक तरह से स्वाद ले पाते हैं और देर तक उसका आनंद भी उठा सकते हैं।(You can enjoy the taste of food).

(११) धीरे-धरे चबाकर खाने पर आपके शरीर को जरूरी हार्मोन स्त्रवण(secretion) के लिए काफी समय मिल जाता है, जैसे लेप्टिन(Leptin)ग्रेलिन (Ghrelin) अन्तःस्त्राव आदि। इनका पाचन क्रिया में अहम योगदान है।लेप्टिन हमारे शरीर के अंदर संतुष्टि प्रदान करनेवाले हॉर्मोन के रूप में काम करता है। यह हमारी भूख को नियंत्रित करने और ऊर्जा के उत्पादन में संतुलन स्थापित करने का कार्य करता है। ताकि जब तक शरीर में ऊर्जा की कमी ना हो तब तक हमारा शरीर भोजन की मांग ना करे और हमें भूख ना लगे।लेप्टिन शब्द ग्रीक से लिया गया है, जिसका अर्थ "पतला" होता है। यह एक प्रकार का "तृप्ति हार्मोन" है। यह वसा कोशिकाओं द्वारा बनाए जाते हैं, जो भूख को बाधित कर ऊर्जा संतुलन को विनियमित करने में मदद करता है।यह घ्रेलिन नामक भूख दिलाने वाले हार्मोन के कार्य का विरोध करता है।
दोनों हार्मोन ऊर्जा समस्थिति प्राप्त करने के लिए भूख को विनियमित करने हेतु कार्य करते हैं।स्वस्थ वजन बनाए रखने से आपके लेप्टिन के स्तर को स्वाभाविक रूप से संतुलित करने में मदद मिल सकती है। नियमित एक्सरसाइज आपको वजन कम करने और स्वस्थ लेप्टिन के स्तर को बहाल करने में मदद कर सकती है। भले ही स्वस्थ भोजन करना बहुत महत्वपूर्ण है, आप इसके आगे सोचकर और आगे बढ़ कर इसे अगले स्तर तक ले जा सकते हैं!

पाचन प्रक्रिया:
खाने को चबाने के बारे में बात करने से पहले हमे पूरी पाचन प्रक्रिया समझना चाहिए। पचाने की प्रक्रिया में पहली गतिविधि चबाना( chewing of food) है। चबाने से और लार मिल कर ,खाने के कौर को तोड़ देते है। खाने के कौर /ग्रास/ निवाला (mouthful)तोड़ने के बाद उसे निगला जाता है। जब आप खाना निगलते है तो खाना अन्ननलिका (Oesophagus ) में चला जाता है। जिसके बाद अन्ननलिका खाने को पेट(stomach) में धकेल देती है। जब खाना पेट में जाता है तो यह विविध अन्तःस्त्रावो व हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ मिक्स हो जाता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric Acid)
यह हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का पानी आधारित घोल होता है। इसे एक स्ट्रांग एसिड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यह मनुष्यों सहित अधिकांश पशुओं के पाचन तंत्र में उपस्थित गैस्ट्रिक एसिड का मुख्य घटक होता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है।हाईड्रोक्लोरिक अम्ल को HCL, म्यूरिएटिक एसिड, गैस्ट्रिक एसिड या जठर रस और नमक का तेज़ाब आदि नामों से भी जाना जाता है।यह खाने के कौर को लगातार तोड़ता रहता है, ताकि ऊर्जा (Energy) के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकें। पेट में खाना जब पच जाता है तो बाद में छोटी आंत में चला जाता है। जहां ये दूसरे अन्तःस्त्रावो से मिल कर तोड़ने की प्रक्रिया को जारी रखते है। यहां खाने से पोषक तत्व छोटी आंत में अवशोषित हो जाते है और वेस्ट प्रॉडक्ट बड़ी आंत में चले जाते है। यह बचा हुआ वेस्ट प्रॉडक्ट मलाशय और गुदा के माध्यम से मल के रूप में उत्सर्जित हो जाते है।
अक्सर लोग ठीक से खाना नही चबाते और सीधे ही निगल जाते है। कइयों को इस कारण सीधे खाना निगलने की आदत होती है। कई ऐसे भी है जो खाना चबाते तो है लेकिन बहुत बड़े-बड़े कौर को ही निगल लेते है। पाचन क्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा चबाना होता है। जो लोग भोजन को अच्छी तरह से नहीं चबाते वे पाचन संबंधी समस्याओं से जूझते रहते है।

लार की संरचना और कार्य;(Composition and functions of saliva):
लार (राल)मानव के मुंह में उत्पादित पानी-जैसा और आमतौर पर एक झागदार पदार्थ है। लार मौखिक द्रव का एक घटक है। लार उत्पादन और स्त्राव तीन में से एक लार ग्रंथियों से होता है। मानव लार 98% पानी से बना है, जबकि इसका शेष 2% अन्य यौगिक जैसे इलेक्ट्रोलाईट, बलगम, जीवाणुरोधी यौगिकों तथा एंजाइम्स होता है।
लार ग्रंथियां एक्सोक्राइन ग्रंथियां (Exocrine glands) होती हैं ,जो नलिकाओं की एक प्रणाली के माध्यम से लार उत्पन्न करती हैं ।There are three pairs of large salivary glands.
(१)Parotid glands are found in front of and just below each ear.
(२)Submandibular glands are below the jaw.
(३)Sublingual glands are under the tongue.

मनुष्यों में तीन युग्मित प्रमुख लार ग्रंथियां ( पैरोटिड , सबमांडिबुलर और सबलिंगुअल ) होती हैं, साथ ही साथ सैकड़ों छोटी लार ग्रंथियां भी होती हैं। लार ग्रंथियों को सीरस , श्लेष्मा या सेरोमुकस (मिश्रित) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
लार में अमाइलेज,, लाइसोझाइम और लाइपेज (Salivary amylase, Salivary Lysozyme and Salivary Lipase)नामक तीन उत्सेचक: उत्पन्न होते है।

लार के मुख्य कार्य:
(१)लार में लाइसोझाइम (Lysozyme) नामक उत्सेचक( enzyme)होता है जो भोजन में शामिल जीवाणु- बेक्टिरिया का नाश करता है। इस तरह
जीवाणुजन्य चेप से हमारा बचाव करता है।
(२) लार में लाईपेज(salivary lipase or lingual lipase) नामक उत्सेचक होता है; जो भोजन में शामिल लिपीड- ट्राइग्लिसराइड्स का फेटीऐसीडस और ग्लीसराइडस में विघटन करता है। ट्राइग्लिसराइड एक प्रकार का वसा (फैट) है जो हमारे भोजन में मौजूद होता है। हमारा शरीर इस वसा का इस्तेमाल करके ऊर्जा का निर्माण करता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए ट्राइग्लिसराइड्स का सामान्य स्तर शरीर में आवश्यक है। इस प्रकार मुंह से ही लिपीड याने वसा का पाचन प्रारंभ हो जाता है।लाइपेज नवजात शिशुओं के वसा पाचन में बड़ी भूमिका निभाता है क्योंकि उनके अग्नाशयी लाइपेस (pancreatic Lipase)को विकसित होने में अभी कुछ समय है।

लारका एक सुरक्षात्मक कार्य भी है, दांतों पर ऊपर बैक्टीरिया जमाव रोकने में मदद करना और चिपके हुए खाद्य कणों को धोना।

(३)लार में एंजाइम ऐमीलेस होता है (जिसे प्त्यालिन Ptyline भी कहा जाता है) जो स्टार्च को शर्करा में तोड़ता है। इस प्रकार, भोजन का पाचन मुंह में शुरू होता है।

(५) लार आपके मुंह में गीलापन (moisture) बनाए रखता है।

(५) खुराक़ को चबाने में और उसे निगल जाने में व स्वाद की परख (identifying taste) में लार सहायक है।

(६) हमारे मुंह में पनपने वाले जीवाणु से लडकर सुरक्षा प्रदान करती है(antibacterial) और मूंह से आनेवाली बदबू से बचाती है।(Protecting against bad breath).

(७)लार में प्रोटीन और खनीज तत्व दांत के इनेमल को सुरक्षा प्रदान करते है ।(Protecting teeth enamels).

(८) लार हमें दांतों की सड़न और मसूड़ों के रोग से बचाव करती है।(Protecting against dental caries and gum diseases like gingivitis and periodontitis.

(९) लार मूंह में स्नेहक-ल्युब्रिकेंट (lubricant)का कार्य करती है और मूंह की अंत: त्वचा Protecting oral mucosa) पर आच्छादित होकर उसे खुराक़ चबाते समय होने वाली इजा से बचाती है।

(१०) लार बफर का काम करती है और मूंह में पी एच ६.२-७.४ बनाए रखती है। अतः दांतों को एसीड से होने वाले नुक़सान से बचाव करती है।

(११) लार में Carbonic anhydrase(gustin) नामक उत्सेचक होता है जो स्वादाकुंर( taste buds)के विकास में सहायक होता है।

(१२) लार में EGF नामक पदार्थ मूंह,अन्न नलिका और जठर की पेशियां को मजबूती प्रदान करता है।उन में होने वाले अल्सर से आरक्षित करता है। (Salivary EGF is responsible for the oro- esophageal and gastric tissue integrity and healing of oral and gastroesophageal ulcers)
लार ग्रंथियों में आयोडीन और मौखिक स्वास्थ्य :पौष्टिकता संबंधी, ऑक्सीकरणरोधी और कोशिका विघटन प्रवर्तन जैसे कार्यों और संभावित ट्यूमर-विरोधी गतिविधियों के कारण आयोडाइड मौखिक और लार ग्रंथियों के रोगों की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

भोजन को अच्छी तरह न आपके लिए निम्न समस्याएं खड़ी कर सकता है।भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए काफी नुकसानदायक होने के साथ ही आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ भी है। जल्दी-जल्दी खाना खाने और ठीक से न चबाने से आपको पाचन संबंधी कई नुकसान हो सकते है। भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाने से शरीर को न्यूट्रीशन और एनर्जी मिलती है। भोजन को ठीक से चबाने से पोषक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है और खाने को अच्छी तरह से चबाने के लिए समय अधिक लगता है, इसलिए धीमे गति से खाना खाना बेहतर है।

भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए नुकसानदायक है इस लिए भोजन को अच्छे से चबाकर खाया जाना जरूरी है। जब आप खाना खाते है, तब चम्मच या कांटे को ओवरलोड न करें। मुंह में खाने के कौर रखने के बाद होंठ बंद करें और चबाना शुरू करें। खाने को जीभ के अगल-बगल घुमाये और जबड़े को थोड़ा घुमाएं। खाने के हर कौर को काटने के साथ 32 तक गिनती कर धीरे-धीरे चबाएं। खाने के प्रकार के आधार पर आपको कम या ज्यादा समय की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद आप खाने को निगल सकते है। यदि आपको पाचन से संबंधित समस्याएं है तब आप खाने के साथ पानी न पियें। खाना खाते समय पानी पीने से शरीर में एंजाइम्स पतले हो कर पाचन प्रक्रिया धीमी- मंद हो जाती है, जिससे खाना टूटने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। यदि आपको पाचन संबंधी विकार जैसे गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स (Gastro-esophageal reflux- GERD)रोग है तो खाना खाते समय पानी पीना आपके लिए दिक्कत बढ़ा देगा।

भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए कैसे नुकसानदायक है?
भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते है।भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए नुकसानदायक होने के साथ ही आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है।

भोजन को अच्छी तरह न चबाने से होने वाली परेशानियां :Adverse effects of not chewing well:
भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए नुकसानदायक तो है ही इससे पाचन तंत्र गड़बड़ भी हो जाता है। यदि शरीर खाने को पूरी तरह से तोड़ने के लिए जरूरी एंजाइम्स का पूरी तरह से उत्पादन नहीं कर सकता है, तब पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए लिए कई समस्याएं खड़ी कर सकता है।

सही तरह से खाना खाने के अन्य टिप्स
भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए नुकसानदायक है इसलिए भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाना जरूरी है। भोजन को अच्छी तरह न चबाना आपके लिए पाचन की समस्याओं का कारण बनता है वहीं भोजन को चबा-चबाकर खाने से आपका स्वास्थ्य पहले से बेहतर बनता है।

पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए खाने के अन्य टिप्स इस प्रकार है।
(१) खाने से 30 मिनट पहले या बाद में पानी पियें, लेकिन खाना खाने के साथ नहीं। इससे पाचन की क्षमता बढ़ती है।
(२) खाने के ठीक बाद कॉफी न पिएं। इससे आपको सीने में जलन होने के साथ ही तुरंत मोशन के लिए जाना पड़ सकता है।
(३) खाने के ठीक बाद फलों और प्रोसेस्ड फूड व मिठाइयां खाने से बचें। (४)सुगंधित खाद्य पदार्थ जल्दी पच जाते हैं और गैस और सूजन का कारण बन सकते हैं।
(५)खाने के तुरंत बाद व्यायाम करने से बचें।
(६) खाना खाने के बाद टहलने जाएं, इससे पाचन शक्ति बेहतर हो जाती है।

गेहूं रोटी या बाजरे व ज्वार की रोटी को 32 बार चबाकर खाएं जब तक उसका जूस न बन जाए। इससे आपको भूख भी कम लगेगी और रोटी भी जल्दी पचेगी।इससे शरीर में उसके इस पाचन में आसानी होती है। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने से दांतों के बीच भोजन के कण नहीं फसते। चूंकि इस प्रक्रिया में लार तेजी से बनती है इसलिए मुंह के भीतर के कण आसानी से शरीर के भीतर चले जाते हैं। साथ ही, सांसों की दुर्गंध व कैविटी से भी बचाव होता है।

बढ़ती उम्र में भोजन की अहमियत:
आज लोगों की औसत उम्र बढ़ गई है. ऐसे में हमें रहन-सहन को सेहतमंद बनाने की चुनौती से ज़्यादा जूझना पड़ रहा है। अगर हम स्वस्थ जीवन-शैली नहीं अपनाते हैं, तो हमारा समाज बुज़ुर्ग, कमज़ोर और विकलांग लोगों से भर जाएगा।
बुढ़ापे में पोषण की अहमियत बढ़ जाती है। वजह साफ़ है। इस उम्र में भूख कम लगती है. लोग कम खाते हैं। खाने में दिलचस्पी नहीं लेते। इससे शरीर का वज़न घट जाता ह। कमज़ोरी आ जाती है। इससे भूलने वाली बीमारी यानी अल्ज़ाइमर होने का ख़तरा बढ़ जाता है।

खाना एक सामाजिक अनुभव है। बुढ़ापे में जीवनसाथी के चले जाने या परिवार से बिछुड़ने के बाद अकेले खाना लोगों से खाने से हासिल होने वाली तसल्ली और ख़ुशी छीन लेता है। फिर चबाने और निगलने में भी बुढ़ापे में दिक़्क़त होती है।६५ साल की उम्र में २७% बुजुर्गो के सभी दांत गिर जाते है।इससे खाने का स्वाद और ख़ुशबू नहीं महसूस होती। नतीजा ये कि खाने की ख़्वाहिश और भी कम हो जाती है क्योंकि लोग उससे मिलने वाली ख़ुशी से महरूम हो जाते हैं।हमें याद रखना चाहिए कि ज़िंदगी के हर दौर में खाना केवल हमारे शरीर का ईंधन भर नहीं है। ये ऐसा सामाजिक-सांस्कृतिक तजुर्बा है, जिसका लुत्फ़ उठाया जाता है।
हम सब खाने के एक्सपर्ट हैं, क्योंकि हम रोज़ खाते हैं।इसलिए हमें हर बार खाने को लुत्फ़ लेने के मौक़े के तौर पर देखना चाहिए। और ये समझना चाहिए कि अच्छा और स्वादिष्ट खाना हमारी सेहत के लिए कितनी नेमतें ले आता है।

“Nature will castigate those who don’t masticate.”
― Horace Fletcher
अर्थात् जो खुराक़ को अच्छी तरह से चबाकर नही खाते उन्हें कुदरत सजा देती है।

Mastication (chewing), in which food is crushed and mixed with saliva to form a bolus for swallowing, is a complex mechanism involving opening and closing of the jaw, secretion of saliva, and mixing of food with the tongue.
Castigate means to punish
खुराक़ अच्छी तरह से चबाकर खाएं और स्वास्थ्य और तंदुरुस्त रहे।

माहिती संकलन: डॉ भैरवसिंह राओल

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