मेरी बेटी मिल गयी - 2 S Sinha द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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मेरी बेटी मिल गयी - 2

Part - 2

पहले अंक में आपने पढ़ा था -  रागिनी की नासमझी से विवाह के पहले ही वह प्रेग्नेंट हो गयी थी पर उसकी माँ ने उसका कॉलेज जाना बंद कर दिया था. अब आगे.....

उस दिन रागिनी को खाना नहीं मिला. उषा ने फोन कर अपने बड़े भाई को बुलाया.अगले दिन उनका भाई आया और साथ में अपनी माँ यानि रागिनी की नानी को भी ले आया. उषा ने उन्हें सारी बातें विस्तार से बताई. नानी ने रागिनी का कमरा खुलवाया और कहा “ पहले इसे कुछ खाने पीने को दो. इसके साथ साथ इसकी कोख में पल रही संतान भी भूखी है. अभी दो जानों को भूखे प्यासे क्यों तड़पा रही हो ? “

फिर रागिनी की नानी, मामा और माँ तीनों बैठ कर सलाह मशवरा करने लगे. नानी ने पूछा “ कौन सा महीना चल रहा है ?”

रागिनी की माँ बोली “ मेरे ख्याल से चार महीने से कुछ ज्यादा ही होगा. इस कलमुंही ने हमें कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ा. इनकी कम्पनी के मालिक ने कहा था कि रागिनी अगर बी ए नहीं तो कम से कम इंटर कर ले तब उसे नौकरी दे देंगे. मेरी पगार बहुत कम है और चार चार जनों का पेट भरना है और तीन बच्चों की पढ़ाई लिखाई. मैंने सोचा था कि रागिनी नौकरी करने लगेगी तो उसे कोई बेहतर ढंग की नौकरी मिलेगी और पगार भी ज्यादा होगा. तब हालत कुछ सुधर जाएगी. “

काफी विचार करने के बाद रागिनी की माँ ने कहा “ हमलोग रागिनी को साथ ले जा रहे हैं. प्रसव तक वहीँ रहेगी. इतने दिन हो गए तब बच्चे में जान आ गयी है, उसकी हत्या नहीं करनी चाहिए. प्रसव के बाद अगर बच्चा जीवित रहा तब रागिनी को बिना बताये चुपचाप उसे किसी अनाथालय में छोड़ देंगे पर रागिनी को उसके बच्चे की मौत की खबर देंगे. फिर किसी अच्छे से लड़के से रागिनी की शादी करवा देंगे हमलोग. “

उषा रागिनी और दोनों बच्चों के साथ अपने पीहर गयी और कुछ दिनों के बाद रागिनी को वहीँ छोड़ कर वापस आ गयी. रागिनी ने मामा से कहा “ आपलोग मुझे प्राइवेट पढ़ाई करने दीजिये. मैं घर पर रह कर ही पढ़ाई जारी रखूंगी. “

“ हाँ, क्यों नहीं इस में बुरा क्या है ? “

रागिनीं ने समय पर एक बच्ची को जन्म दिया. उसकी बच्ची सुंदर थी पर उसकी गर्दन पर दायीं तरफ बड़ा सा काला धब्बा था. उसे बताया गया कि बच्ची बहुत कमजोर है और उसे जॉन्डिस भी हुआ है. इसलिए बच्ची को इलाज के लिए रागिनी के पास नहीं रखा गया है. रागिनी को अस्पताल से अगले ही दिन डिस्चार्ज कर दिया गया. उस के एक सप्ताह बाद रागिनी को बताया गया कि उसकी बच्ची को डॉक्टर नहीं बचा सके और पीलिया से उसकी मौत हो गयी और उसे दफना दिया गया है. पर सच तो यह था कि रागिनी को अन्धकार में रखा गया. उसकी नानी और मामा ने सोचा कि अपने या रागिनी के शहर के अनाथालय में बच्ची को छोड़ने से कहीं भेद न खुल जाए, इसलिए उन्होंने बच्ची को निकट के किसी शहर के अनाथालय में छोड़ दिया.

रागिनी को अपनी बच्ची खोने का बहुत दुःख था. वह वापस अपने घर नहीं जाना चाहती थी. मामा के यहाँ रह कर उसने प्राइवेट इंटर पूरा किया और फिर प्राइवेट बी ए की तैयारी में लग गयी.

इधर रागिनी की माँ अपने पति की कम्पनी में प्यून की नौकरी कर अपने दो बच्चों के साथ गुजारा कर रही थी. कम्पनी के मालिक किशोर और उनकी पत्नी दोनों संतानोपत्ति में सक्षम नहीं थे. उन्होंने किसी बच्ची को गोद लेने का फैसला किया. दो वर्षों के बाद किशोर पत्नी के साथ अपने ससुराल गया था और वहीँ के अनाथालय से उन्होंने एक बच्ची को गोद लिया.इत्तफ़ाक़ से वह बच्ची और कोई नहीं रागिनी की ही बच्ची थी, बच्ची का नाम उन्होंने राधा रखा.

इस बीच रागिनी की माँ अक्सर बीमार रहने लगी थी. रागिनी वापस अपने घर आयी. उसने सुरेश के बारे में जानना चाहा. उसने सोचा कि अब जब प्रेग्नेंसी की समस्या नहीं रही तब सुरेश को शादी करने में कोई परेशानी नहीं होगी.  उसे पता चला कि सुरेश की शादी कुछ ही महीने पहले हो गयी है. रागिनी को अपना पहला प्यार नहीं मिल सका, इस बात का उसे दुःख था. एक बार उसके मन में आया कि सुरेश को फोन कर बात करे पर तुरंत दूसरे पल मन ने उसे ऐसा करने से रोक दिया था.

रागिनी कम्पनी के मालिक किशोर से मिलने गयी और बोली “ सर, आजकल मम्मी की तबीयत ठीक नहीं रहती है इसलिए यदि सम्भव है तो उसकी जगह मुझे नौकरी पर रखने की कृपा करें. “

“ श्योर, मैंने तो पहले ही कहा था कि रागिनी बी ए कर लेगी तो उसे हम उसके पिता के स्थान पर क्लर्क रख लेंगे. “

“ मैं बी ए का प्राइवेट एग्जाम दे रही हूँ और दो महीनों में रिजल्ट भी आ जायेगा. “

“ गुड,तब फिलहाल तुम अस्थायी तौर पर ज्वाइन करोगी और ग्रेजुएशन के बाद तुम्हें परमानेंट कर दिया जायेगा. “

“ थैंक्स सर. “

“ तुम थोड़ी देर में जा कर अपना जोइनिंग लेटर ले लो. “

रागिनी अगले ही दिन से ऑफिस जाने लगी. अभी वह परमानेंट रेगुलर स्टाफ नहीं थी इसलिए उसे वेतन कुछ कम मिलता फिर भी माँ की तुलना में ज्यादा ही था. तीन महीनों के अंदर रागिनी ने बी ए कर लिया. अब उसे जल्द ही परमानेंट नौकरी की उम्मीद थी, उसने मालिक किशोर को इसके लिए रिमाइंड किया.

किशोर बोला “ मुझे याद है रागिनी. मेरी वाइफ की तबीयत बहुत खराब है, मैं उसे ले कर आज ही दिल्ली जा रहा हूँ. आने के बाद अविलम्ब मैं तुम्हें रेगुलर कर दूँगा. “

किशोर पत्नी के इलाज के लिए दिल्ली गया. वहाँ पता चला की उसकी पत्नी को कैंसर है और वह सीरियस है. वह ज्यादा से ज्यादा दिन जिए और तकलीफ भी कम हो, इसके लिए डॉक्टर यथासम्भव कोशिश करेंगे. इसलिए कुछ दिनों तक उसे दिल्ली में ही रुकना होगा. इधर कम्पनी के जेनरल मैनेजर के मन में अलग प्लान था. वह रागिनी को परमानेंट नहीं कर अपनी सेक्रेटरी को रेगुलर करना चाहता था. सेक्रेटरी ने अपने हुस्न,नाज नखरों और अदाओं से उसे अपने वश में कर लिया था. उसने अपने जनरल मैनेजर को खुश रखने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी. रागिनी को इस बात की भनक मिली तब उसने मालिक किशोर को इसकी सूचना दी. किशोर ने कहा “ तुम घबराओ मत. तुम्हारा आर्डर मैं यहीं से जेनरल मैनेजर को फैक्स कर दूँगा. हो सकता है मुझे अभी यहाँ काफी दिन रुकना पड़े. फैक्स की कॉपी तुम्हें भी कूरियर कर दूँगा. उसे ले कर तुम अपना जोइनिंग डायरेक्ट पर्सनल में दे दो बाकी सब मैं आ कर ठीक कर दूँगा. और हाँ, एक और बात. रेगुलर होने के बाद तुम कम्पनी क़्वार्टर की हक़दार हो जाओगी. मैं क़्वार्टर अलॉटमेंट का आर्डर भी साथ में फैक्स कर देता हूँ. तुम चाहो तो अपना मकान किराये पर दे कर कम्पनी के क़्वार्टर में शिफ्ट कर सकती हो. तुमलोगों को कुछ अतिरिक्त आमदनी हो जाएगी. “

“ सर, आपका शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास पर्याप्त शब्द नहीं हैं. भगवान् आपकी पत्नी को यथाशीघ्र स्वस्थ करें. “

रागिनी को इतनी जल्दी इतना कुछ मिलने की उम्मीद नहीं थी. वह बहुत खुश हुई और उसने अपनी मम्मी को इस बात की जानकारी दी. यह जानकार उसकी मम्मी और भाई बहन सभी खुश हुए. रागिनी बोली “ अब इंदु और अनुज दोनों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं है, वे मेडिकल या इंजीनियरिंग जो भी पढ़ना चाहें, पढ़ सकते हैं.

रागिनी ने रेगुलर नौकरी ज्वाइन किया और उसे कम्पनी का क़्वार्टर भी अलॉट हुआ. दो सप्ताह में वह माँ और भाई बहन के साथ क़्वार्टर में शिफ्ट कर गयी. इधर किशोर की पत्नी दिल्ली के अस्पताल में मौत से लड़ रही थी पर एक महीने के अंदर उसने मृत्यु के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

पत्नी की अंतिम क्रिया सम्पन्न होने के बाद ही किशोर कम्पनी के ऑफिस आ सका था. जितने दिनों तक किशोर दिल्ली में था उसने अपनी बेटी राधा को अपनी माँ के पास भेज दिया था. अब किशोर ने माँ और बेटी राधा को अपने यहाँ बुला लिया था. किशोर कभी कभी राधा को अपने साथ दफ्तर ले जाता. दफ्तर में रागिनी का सामना जब कभी राधा से होता तब उसकी ओर आकर्षित होकर वह देर तक उसे देखती रहती. राधा उसे बहुत प्यार करती. राधा की उम्र अभी पांच साल के लगभग थी. किशोर ने रागिनी को अपना सेक्रेटरी बना कर अपने पास वाले  चैम्बर में उसको ऑफिस दिया. उनके बीच एक शीशे की दीवार थी. राधा जब आती और रागिनी को देखती तब उसी के चैम्बर में चली जाती, राधा भी रागिनी से काफी घुलमिल गयी थी.

क्रमशः

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