बात बिगड़ी हैं कुछ इस तरह - 4 vishvnath yadav द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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बात बिगड़ी हैं कुछ इस तरह - 4

जब किसी को कोई नही मिलता है। उसके बाद अगर कोई मिल जाता है तो वह उसको सब कुछ मान लेता है। अपना सब कुछ निछावर कर देता है उस पे ।। आगे पीछे कुछ नही सोचता है। नही ही पास्ट और फ्यूचर के बारे में सोचता है। जो है सब वही हैं। उस समय अगर कोई आपको उसके बारे मे एक भी शब्द बुरा बोल दे तो आपसे बर्दास्त नही होता। क्यू की आप हमेशा उसका अच्छा सुनना पसंद करते हो।
मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा था। लेकिन बहुत अच्छा लग रहा था।
कुछ दिन बाद वो हॉस्टल छोर के एक रूम में शिफ्ट हो गई अपनी बहन के साथ। इसके बाद हमलोग का आपस में बात होना थोड़ा बढ़ गया। अब दिन भर में 3 से 4 बार फोन आ ही जाता था। ऐसे ही 1 से 2 महीने चला ।
एक दिन मैं नाइट ड्यूटी पे था तो उसका कॉल आता है। थोरी देर बात करने के बाद मैं बोला ठीक है आप सो जाओ मुझे थोड़ा काम है। इतना बोल के मैने कॉल कट कर दिया । और मैं अपना काम करने लगा। फिर थोरी देर बाद कॉल आता है। और बोलती है मुझे नींद नही आराही है। थोड़ा देर बात कीजिए ना।
ये सुनने के बाद मैं मन ही मन थोड़ा मुस्कुराया। क्यों की वो
बहुते प्यार से बोली थी। फिर मैं उसे ना नही बोल पाया।
Me - बोलिए क्या हुआ।
She - ज्यादा कुछ नही बस आपसे बात करने का मन कर रहा था।
Me - ज्यादा बात मत कीजिए नही तो प्यार हो जायेगा ।
She - होजाएग क्या हो गया ।
Me - क्या बोले ?
मैने जान बूझ के दुबारा पूछा लेकिन वो दुबारा बोली कुछ नही।
लेकिन अब तो मुझे मालूम हो गया था। मुझे ही नही इसको भी प्यार हो गया है। मैं तो उस दिन इतना खुस होगया की मेरे चेहरे से मुस्कुराहट जा ही नही रहा था।। इतना excitement मै शब्द में बया नही कर सकता ।।
लेकिन मैंने उसको कुछ भी नही बताया उस समय बस ऐसे ही normally बात करता रहा।
कुछ दिन तक ऐसे ही बात चलता रहा। फिर एक दिन थोड़ा सोचने के बाद मैंने फैसला लिया की आज मम्मी को बताना हैं अंजली के बारे में। क्यों की पापा को तो बोल नही सकते थे। तो मम्मी को बताना थोड़ा आसान लगा। फिर मैं उसी समय मम्मी को कॉल किया और थोड़ा बात करने के बाद मैंने बोला मम्मी भाभी के एक जो रिलेटिव थी ना अंजली आप उसको देखे हो। मम्मी बोली कोन अंजली तो मैने बोला भाभी के बुआ की बेटी । तो मम्मी बोली हां उसको तो देखी हु। मैने बोला उसका result आया हैं। बहुत अच्छा नंबर आया है। उसके बाद मैं थोड़ा हिम्मत कर के बोला मैं उस से बात करता हु। इतना सुनते ही । मम्मी भड़क गई
फिर मैं बोला कभी कभी । मम्मी बोली बात करने की कोई जरूरत नही है। दूर रहो ये सब से आगे चल के हमलोग का रिलेशन खराब हो सकता हैं। इसीलिए ये सब ठीक नही होता हैं।
थोरी देर चुप रहने के बाद मैं बोला ठीक है। मम्मी फिर बोलती हैं अगर बात करेगा तो पापा को बता दुगी। मैं बोला ठीक हैं मैं बात नही करूंगा आप पापा को मत बोलना। इतना बोल के मैं कॉल कट कर दिया। फिर मैं बैठ के सोचने लग गया। क्या करू क्या करू ................
अब ये बात मेरे मन से निकल ही नही रहा था। लेकिन मैंने उतना सोचा नही फिर। मन ही मन बोला चलो ठीक हैं बाद में देखेगे।। लेकिन अंजली से बाते हो ही रही थी। इसके बाद तो और ज्यादा ही होने लगा था। लेकिन मैं उसको ये सब कुछ नही बताया था। एक दिन वो बोली आप घर कब जाओगे। मैने बोला रक्षा बंधन में जाऊंगा इतने में वो बोली मैं भी घर जा रही हु रक्षा बंधन में । मैं बोला ठीक हैं
वो बोली आप आयेगा ना मुझ से मिलने। मैं बोला शायद ये मुमकिन नही है अभी। तो बोली आपके भैया आयेंगे ना दीदी को लेके तो आप भी आजाएगा ना उनके साथ। मैं बोला ठीक हैं । लेकिन मैं वादा नही कर सकता हु। तो बोली ठीक हैं।
कुछ दिन बाद मैं घर गया। तो रात में सब खाना खाने के लिए बैठे थे। सब थे मम्मी , पापा , भैया और भाभी भी थे। तो मम्मी बोली अभी भी तुम अंजली से बात करते हो । इतना सुनते ही मैं थोड़ा डर गया और धीरे से बोला कभी कभी इतना सुन्नते ही पापा बोले क्यू बात करता है। कभी कभी वो लोग अच्छे नही हैं। बहुत घमंडी हैं सब । पापा ऐसे ही गुस्सा में बोल रहे थे। मैं चूप चाप सुन रहा था।
उसके बाद हमलोग खाना खा के सोने के लिए चले गए। उसके तुरंत बाद भाभी मेरे पास आते है। और बहुत ही अच्छे से पूछने लग जाते है। कब से बात कर रहे हो आप दोनो।
ये सुनने के बाद मुझे लगा ये सही इंसान है जो हमलोग का मदद कर सकते है। तो मैंने उनको सब कुछ बता दिया।
तो भाभी बोले आगे क्या सोचे है। मैने बोला पहले अंजली से पूछना हैं वो क्या सोचती हैं। उसके बाद मैं फिर से मम्मी से बात करूंगा लेकिन उस से पहले अंजली के मम्मी पापा से बात करेंगे। हा लेकिन अंजली हां बोलेगी उसके बाद।।
इतना सुनने के बाद भाभी बोले ठीक है। फिर मैने भाभी को बोला किसी से मत बोलिएगा अभी।