The Author vishvnath yadav फॉलो Current Read बात बिगड़ी है कुछ इस तरह - 2 By vishvnath yadav हिंदी प्रेम कथाएँ Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books ठूँठ हो चुकी संवेदनाएं बात सन् 1977 की है देश में आपातकाल ख़त्म हो चुका था और जनता प... बंद दरवाजे का रहस्य। बंद दरवाज़े का रहस्यबरसात की एक ठंडी शाम थी। आरव अपनी नई नौक... पांच वादों की दुल्हन - भाग 3 ---*नॉवेल: "पांच वादों की दुल्हन"* *Chapter 3: पहली रात का स... संघर्ष से सफलता तक संघर्ष से सफलता तकएक छोटे से गाँव में रहने वाला आदित्य बचपन... आप ही लोगों को सिखाते हैं कि वे आपके साथ कैसा व्यवहार करें जिस बात को आप बार-बार स्वीकार करते हैं, वही धीरे-धीरे आपके ल... श्रेणी लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी उपन्यास vishvnath yadav द्वारा हिंदी प्रेम कथाएँ कुल प्रकरण : 6 शेयर करे बात बिगड़ी है कुछ इस तरह - 2 (2.9k) 3.4k 7.5k उसके बाद सब लोग शादी में मगन थे । मंडप में शादी का रस्म चल रही थी। और मैं एक कोने में एक कुर्सी पे बैठ के उसका इंतजार कर रहा था और घर के गेट को में बार बार देख रहा था दो से तीन घंटा इंतजार करने के बाद करीब 3 बजे वो मंडप के तरफ आते दिखी । उसको देखते ही समझो मैं ख्वाबों में खो सा गया उसे ही देखते रह गया । उसके बड़ी बड़ी सी आंखे उसके काले सुनहरे बाल। एकदम हुसन के पारी जैसी दिख रही थी। बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसे देखते ही मैं सपनो में खो गया था। और मन ही मन में सोच रहा था इसी के लिए में अब तक सिंगल था। और ये भी सोच लिया था अब अपनी पूरी जिंदगी इसके साथ ही बिताना है। वो जो बोलता हैं ना Love at first sight बस वही मेरे साथ होगया था। इतने में उसकी नजर मेरे पे पारी तो वो थोरी सी मुस्कुराई और फिर घर के तरफ चल गई । अब मुझे उसे बात करने का मन कर रहा था। कैसे करू कैसे करू सोचते सोचते मैने उसके नंबर पे कॉल किया कोई नही कॉल उठाया फिर मैने मैसेज किया उसका भी कोई जवाब नही आया । फिर मेरे से रहा नही गया तो मैने पानी पीने के बहाने उसके घर के तरफ जाने लगा 10 से 15 कदम जाने के बाद ही देखा की वो गेट के सीढ़ी पे बैठी थी एक बच्चा को लेके। फिर मैने पीछे से ही उसे देख रहा था फिर उसकी नजर जैसे ही मुझ पे पारी तो वो हंसते हुए घर के अंदर जाने लगी इतने में मैंने उसके गोद से बच्चा को ले लिया और फिर मंडप के पास जाके बैठ गए, कुछ देर बात मुझेे मालूम हुआ वो बच्चा उसका भाई है वो भी मस्त था लग रहा था जैसे मुझे जनता है मेरे साथ खेलने लगा थोड़ा भी नही रोया । करीब एक घंटा बाद वो फिर मंडप के पास आई और चुप चाप से बैठ के शादी देख रही थी और कभी कभी मुझे देख रही थी । फिर सुबह हो गई और तब तक शादी भी खत्म होगई और दुल्हन के बिदागरीर का समय होगया था । लेकिन उस समय भी मैं यही सोच रहा था अब इसके बाद कब मिलुगा उस से पता नही। उसके बाद जब दुल्हन को लेके सब गाड़ी में बैठने जा रहे थे तभी फिर मैं उसको देखा। सबलोग रो रहे थे वो भी थोरी थोरी रो रही थी। उसके बाद हमलोग सब घर आगाये आने के बाद भी में उसके बारे में ही सोच रहा था और अपना मोबाइल बार बार देख रहा था उसका कोई कॉल या मैसेज तो नही आया। ऐसे ही करते करते 3 तीन बीत गया और कोई कॉल या मैसेज नही आया था। चौथे दिन के रात को करीब 10 बजे मेरे नंबर पे कॉल आता है और मेरे भाभी ने कॉल रिसीव कर लिए तो मेरे भाभी पूछने लगे अंजली से तुम इस नंबर पे कॉल की तुमको कैसे पता की विकेश का मोबाइल मेरे पास है तो वो थोड़ा घबरा गई और फिर बोली मम्मी आप से बात करेगी इसीलिए मैंने कॉल किया विकेश जी के नंबर पे। भाभी बोले ठीक है। वोलोग जब बात कर लिए तो मैने भाभी से मोबाइल लिया । और फिर अपने छत पे चला गया और तुरंत उसको मैसेज किया । और उसका जवाब का इंतजार करने लगा 5 मिनट के अंदर उसका जवाब आगया। उस दिन पहली बार हमदोनो ने पूरी रात मैसेज पे बात किया। वो पल मेरे लिए बहुत खुशी का पल था सुबह का 5 बज गया फिर भी हमलोग का बाते खत्म नही हो रही थी 😊😊🤗 ‹ पिछला प्रकरणबात बिगड़ी है कुछ इस तरह - 1 › अगला प्रकरण बात बिगड़ी है कुछ इस तरह - 3 Download Our App