Secret Admirer - Part 54 Poonam Sharma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Secret Admirer - Part 54

"हम बस पूछ ही तोह रहे थे की यह दोनो कहां जा रहें हैं। आपको हमें बताने में प्रॉब्लम क्या है, अगर यह आपका हनीमून नही है तोह, और अगर है भी तोह बहुत छोटा है, क्योंकि आप तोह कल ही वापिस आ रहें हैं।" साहिल एक बार फिर कूद पड़ा था। वोह अभी भी बाज़ नही आ रहा था।

"तोह, क्या प्रॉब्लम है अगर यह उसका हनीमून है भी तोह? क्या तुम दोनो जल्द से जल्द चाचा नही बनना चाहते?" सुमित्रा जी ने साहिल की तरफ घूरते हुए कहा और अमायरा एंबारस फील करने लगी। वोह और ज्यादा एंबारस तब महसूस करने लगी जब सबकी नजरों से बच कर कबीर ने चाचा वाली बात पर अमायरा की तरफ देख कर आंख मार दी थी।
"मैं तोह बेसब्र हुई जा रही हूं दादी बनने के लिए और कबीर के बच्चों को देखने के लिए। इशान के पास तोह अभी टाइम है क्योंकि वोह कबीर से छोटा है। अभी कबीर और अमायरा की बारी है हमे बच्चा देने की जिसके साथ हम सारा दिन खेलते रहेंगे।"

सुमित्रा जी बाते की जा रही थी। वोह अपनी खुशी जाहिर कर रही थी की यह दोनो अपनी शादी, अपने रिश्ते को एक चांस दे रहें हैं। और जब एक बार वोह उसके बच्चों को देख लेगी तो वो और बाकी बड़े यानी की इंद्रजीत जी और नमिता जी तीनो मिलकर चार धाम की यात्रा पर चले जायेंगे। यही सोच कर कबीर और अमायरा ने अपने बीच सारी इश्यूज को सॉट आउट कर लिया है और हर मायने में अपनी शादी शुदा जिंदगी अच्छे से निभा रहे हैं। कबीर की नज़रे हटती नही थी अमायरा से, वोह रोज़ उसे अनाथ आश्रम से लेने जाता था। उसे मंदिर लेकर जाया करता था। उसके साथ बाहर घूमने जाता था। उसके साथ वक्त बिताता था। यह सब चीज़े देख कर घर के सभी लोगों को लगने लगा था वो दोनो आगे बढ़ रहें हैं। अपनी शादी को एक चांस दे रहें हैं। फिलहाल अमायरा और कबीर इस मूड में नही थे की घर वालों की गलतफेमी को दूर करे। क्योंकि इससे उन्हें फिर एंबारिसिंग सिचुएशन को फेस करना पड़ता और एक नया विवाद शुरू हो जाता वोह अलग। किसी तरह वह दोनों वहां से निकले और अपनी कार में जा कर बैठे थे। उसके बाद ही अमायरा ने सांस ली थी।

"अब मुझे जानना है की हम कहां जा रहें हैं?" अमायरा ने फिर से पीछे पड़ते हुए पूछा जब उन्होंने काफी सफर तै कर लिया था।

"क्या तुम्हारे पास थोड़ा सा भी सब्र नहीं है?"

"नही। मुझे अभी बताइए।" अमायरा उनसे गुस्सा हो रही थी उसके लिए जो कबीर ने नाश्ते के वक्त उस के साथ किया था लेकिन वोह बता नही सकती थी क्योंकि कबीर फिर उसे इस बात पर चिढ़ाने लगता।

"ठीक है, हम अलीबाग जा रहें हैं। मेरे एक दोस्त का फार्म हाउस है वहां पर। उसने मुझे कितनी बार कहा है की मैं जब चाहूं उसका फार्म हाउस यूज कर सकता हूं। तोह आज मैने उसको सुबह फोन किया था और सारी तैयारियां करवा दी। तुम वहां कभी भी नही गई हो तोह सोचा की तुम्हे मैं वहीं ले चलूं। वोह बीच के पास ही है, तुम्हे पसंद आएगा।"

"पर हम वहां क्या करेंगे? और कौन होगा वहां पर?" अमायरा ने पूछा, वोह कन्फ्यूज्ड हो गई थी वोह दोनो वहां क्यों जा रहें हैं।

"कोई नही। बस एक केयरटेकर है। और किसे बुलाना चाहती हो तुम वहां पर?" कबीर ने मज़ाक करते हुए कहा।

"केयर टेकर। ओके। क्या वोह पूरा दिन वहां रहता है?" अमायरा ने पूछा। अचानक ही वोह घबराने लगी थी अपने आप को कबीर के साथ अकेले दो दिनों तक सोच कर। आज सुबह डाइनिंग टेबल पर जो बाते हुई थी वोह सब उसे याद आने लगी थी।

"नही। वोह सिर्फ खाना बनाएगा, सफाई करेगा और चला जायेगा अपने कॉटेज में जो उसी फार्म हाउस के एरिया में ही है घर के दूसरे हिस्से से थोड़ी दूरी पर है। पर अगर तुम चाहती हो की वोह वहीं रुक तोह हम उसे रोक लेंगे। मुझे लगा था की तुम्हे मेरे साथ वक्त बिताने में ज्यादा इंटरेस्ट होगा ना की केयर टेकर का टाइम टेबल जानने में।" कबीर ने चिढ़ाते हुए कहा।

"हुन्ह्ह्ह.... हां हां ओके।" अमायरा ने हड़बड़ाते हुए कहा। वोह कुछ सोच ही नही पाई।

ज्यादा सोचना बंद करो अमायरा। तुम तो जानती हो कबीर को। तुम उसके साथ एक ही कमरे में कितने महीनो से रह रही हो। तोह आज क्या अलग हो गया?
पर इन्होंने सुबह डाइनिंग टेबल पर मुझे आंख क्यों मारी थी? एस्पीशियली तब जब सुमित्रा आंटी ने कहा था की वोह हमारा बच्चा देखना चाहती हैं। क्या यह भी ऐसा ही सोच रहें हैं? यही वजह है की यह चाहते हैं की हम दोनो अकेले रहें?
छी छी छी मैं यह सब क्या सोच रहीं हूं? वोह तोह जेंटलमैन हैं, बहुत अच्छे हैं। वोह ऐसा कुछ नही करेंगे जो मुझे नही चाहती या फिर नही पसंद।
पर हम ऐसी जगह जा ही क्यों रहें हैं, जहां कोई भी नही है? अगर हूं फॉर्महाउस पर आना था, तोह फैमिली के साथ क्यों नही आए? इससे हम सब की एक छोटी सी पिकनिक भी हो जाती।

ओह मैने सुबह क्यों इन्हे याद दिलाया की हमे कहीं बाहर जाना है? कितनी बेवकूफ हूं मैं।

"क्या ओके। तुम क्या सोच रही हो?" कबीर की आवाज़ से अमायरा का ध्यान भंग हुआ।

"क्या, कुछ नही। मुझे ऐसा लग रहा है की मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है।" उसे कुछ और नही सुझा तोह यही बोल दिया और कबीर ने यह सुनते ही अचानक ही गाड़ी रोक दी।

"तबियत ठीक नहीं लग रही? क्या हुआ है?" कबीर ने पूछा। वोह परेशान हो गया था उसकी खराब तबीयत सुन कर।

"मुझे लग रहा है शायद फीवर है।" अमायरा ने झूठ बोला और कबीर अपना हाथ लगा कर उसका माथा चेक करने लगा।

"मुझे नही लगता। यह तोह नॉर्मल है।" कबीर ने चेक करने के बाद कहा।

"ओह.....शायद नही। मुझे कुछ अजीब लग रहा है। उल्टी जैसी आ रही है। ऐसा अक्सर मेरे साथ होता है जब मैं पैसेंजर सीट पर बैठती हूं।"

"क्या? यह कब शुरू हुआ? हम तोह कितनी सारी जगह पर गाएं हैं , तुमने आज तक कभी कोई कंप्लेंट नही की।"

"हां। यह अभी शुरू हुआ है।"

"ओके। यह शायद सफर की वजह से हुआ है। होता है कभी कभी, पर अब तुम्हे क्या चाहिए? लेमन सोडा? कोई दवाई?" कबीर ने पूछा।






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कहानी अभी जारी है...