Secret Admirer - Part 46 Poonam Sharma द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Secret Admirer - Part 46

अमायरा नींद में थी। वोह हल्का सा हिली तो उसने पाया की उसकी बगल में खाली जगह है। यानी की कबीर उसके पास बैड पर नही सो रहा था। उसने किसी तरह अपनी एक आंख खोल कर अपने फोन में टाइम देखने की कोशिश की। अभी तो सुबह के साढ़े चार बजे थे। उसने हाथ लगा का कर चैक किया तोह पाया कबीर की साइड वाली जगह काफी ठंडी थी इसका मतलब वोह अभी अभी उठ कर नही गया है बल्कि काफी देर से बैड पर आया ही नहीं था। अमायरा और कबीर के कमरे के अंदर से ही एक और कमरा था, वोह था कबीर का स्टडी रूम। अमायरा ने नज़रे घुमा कर कमरे में चारों ओर देखा उसे उस छोटे से स्टडी रूम से हल्की रोशनी आती दिखी। उसे कबीर की पीठ नज़र आ रही थी लेकिन इतना पता चल रहा था की कबीर अपने लैपटॉप पर काम कर रहा है। इस वक्त काम करने का मतलब सिर्फ एक ही था की वोह अपना फ्राइडे का सारा काम अमायरा की वजह से जो नही कर पाया वोह, वोह अब कर रहा था। अमायरा को जैसे ही यह रियलाइज हुआ उसे बुरा लगने लगा। अमायरा अपना कल का दिन एंजॉय करने में इतना बिज़ी थी की उसने नोटिस ही नही किया की कबीर ने एक भी कॉल का जवाब नही दिया था। वोह दोनो रात को करीब बारह बजे घर वापिस आए थे और आते ही तुरंत सो गए थे। और इस वक्त कबीर काम कर रहा था इसका मतलब वोह चार घंटे भी पूरे नही सोया था।

शायद कबीर इस बात से फ्रस्ट्रेट हो जाए और अपना यह नया जुनून सिर पर चढ़ाया है मेरे साथ वक्त बिताने का वोह उतर जाए।

अमायरा अपने आप को मानने की कोशिश करने लगी लेकिन उसे राहत महसूस नही हो रही थी। वोह अगले एक घंटे तक इधर उधर करवट बदलती रही और फिर फाइनली उसने सोना छोड़ दिया। वोह सीधे बाथरूम में घुसी और एक रिलैक्सिंग शावर लेने के बाद ही वापिस निकली। कबीर अभी अपने काम में इतना व्यस्त था की वोह एक इंच भी अपनी सीट से नही हिला था। अमायरा ने सोचा की उसके लिए कॉफी बना कर ले जाती हूं। बस इतना ही तोह वोह कर सकती थी अपनी गिल्ट को कम करने के लिए।

"गुड मॉर्निंग।" अमायरा ने विश करते हुए कॉफी का मग टेबल पर रख दिया।

"गुड मॉर्निंग! तुम इतनी जल्दी उठ गईं। और नहा भी ली हो। स्ट्रेंज।" कबीर उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देख रहा था।

"हां। बस ऐसे ही। आप कब उठे?"

"तीन बजे के आसपास। कुछ रिपोर्ट्स चैक करनी थी। एक ऑडिट होने वाला है और मैं बस खुद से डबल चैक करके श्योर होना चाहता था। यह सब छोड़ो। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम इतनी सुबह सुबह उठ गई। अब हम एक साथ बैठ कर नाश्ता कर सकते हैं। क्या तुम मेरे लिए वेजीटेबल दलिया बना सकती हो, प्लीज़? आज मुझे जल्दी निकलना है। मुझे लगा था की तुम तो देर से उठोगी तोह मैं महेश को कह कर बनवा लूंगा। पर मुझे उसके हाथ का बना दलिया अच्छा नही लगता। वैसे मैं झूठ नही बोलता की तुम बहुत अच्छा खाना बनाती हो। एक सिंपल सा दलिया भी तुम्हारे हाथों से बन कर स्वादिष्ट बन जाता है।" कबीर ने कहा और अमायरा मुस्कुराने लगी कबीर की दिल से की गई तारीफ सुन कर।

"मैं बना दूंगी। आप तैयार हो जाइए, तब तक दलिया भी तैयार हो जाएगा। आप नीचे आ जाइएगा। वैसे आज तोह सैटरडे है, आप आज भी ऑफिस जायेंगे?"अमायरा ने पूछा।

क्या तुम मायूस हो गई हो?
नही। बिलकुल नहीं।


"हां। क्योंकि मैं कल ऑफिस नही गया था और अब मंडे भी नही जाऊंगा तोह इसलिए मुझे थोड़ा जरूरी काम है ऑफिस में। थैंकफुली की कल मैं घर पर ही रहूंगा और वर्क फ्रॉम होम रहेगा लेकिन आज तो जाना ही पड़ेगा।" कबीर ने कहा और अमायरा को एक पल के लिए भी नही लगा की कबीर के लहज़े में थोड़ी सी भी शिकायत या उसने ताना मारा हो। वोह सच में अपना काम उससे शेयर कर रहा था ना की कोई शिकायत कर रहा था।

"और वैसे भी तुम तोह बिज़ी हो शादी की तैयारियों में और अनाथ आश्रम में। तोह मेरे लिए ये अच्छा होगा की मैं अपने आप को बिज़ी रखूं काम में नही तोह मैं तुम्हे बुरी तरह मिस करता।" कबीर ने शरारती मुस्कुराहट से कहा। और अमायरा शर्माती हुई किचन की तरफ चली गई। उसने महसूस किया की कबीर के इतने सिंपल से स्टेटमेंट से भी वोह कितना असहज हो जाती है।

थोड़ी देर बाद कबीर नाश्ता करके ऑफिस चला गया। लेकिन जाने से पहले उसने अमायरा का बहुत मेहनत और मुश्किल से मिलने वाला हग 🤗 ले ही लिया था। और अपने कहे मुताबिक एक अच्छे और लविंग पति के नाते उसने अपने प्यार अंक उसके गाल पर छोड़ दिया था। क्योंकि यह एक वीकेंड था इसलिए अभी तक बाकी के लोग नही उठे थे। और वोह भी आठ बजे तक अपना नाश्ता कर चुकी थी।

कबीर के जाने के बाद जब अमायरा अपने कमरे गई तोह वोह बीते दिन के बारे में सोचने लगी। वोह सब याद कर रही थी की वोह कहां कहां गई और क्या क्या किया। उसने महसूस किया की उसे भी अच्छा लगता है कबीर के साथ वक्त बिताना। उसे याद ही नहीं था की कब आखरी बार वोह इतना हसी थी और उसने इतना मज़ा किया था। उसने अपने ही सिर पर एक चपत लगाई की वोह क्या क्या सोच रही थी कबीर के बारे में की वोह कुछ बड़ा करेगा, उसके साथ रोमांटिक और फ्लर्टी रहेगा पूरा दिन। क्या वोह डर नहीं रही थी? उसके रोमांटिक होने से और बार बार अपना प्यार जाहिर करने से? थैंकफुली कबीर ने ऐसा कुछ नही किया था। वोह कितनी सहज थी उसके साथ पूरा दिन। बल्कि आज सुबह ऑफिस जाने से पहले कबीर ने खुद ही आकर उसे हल्का सा हग कर लिया था और उसके गाल पर प्यार से चूम लिया था। इससे पहले की अमायरा विरोध करती कबीर बिना उसे छेड़े ऑफिस के लिए निकल गया था।

इतना तोह मैं हैंडल कर सकती हूं। कम से कम वोह ज्यादा भावुक तोह नही हैं। अगर वोह उसे छेड़ना बंद करदे तोह वोह सब मैनेज कर सकती है। और महीना खतम होने से पहले ही कबीर अपनी यह कोशिश खुद ही छोड़ देगा।

पर अगर उन्होंने मंडे को कुछ किया तोह? ओह नो। शायद मुझे तैयार रहना चाहिए उसके लिए की अगर उन्होंने कुछ किया तोह मैं क्या करूंगी।


अमायरा ने अपने कमरे में बैठे बैठे कई सारे प्लान बना लिए की कैसे कबीर को टैकल करेगी अगर उसने फ्लर्टिंग की तोह मंडे को और आने वाले प्यार महीने में। थोड़ी देर बाद उसे सुमित्रा जी ने बुला लिया और वोह दोनो शादी की शॉपिंग के लिए चली गई। आज कबीर उसे लेने अनाथ आश्रम नही आया था क्योंकि पहले ही अमायरा दुपहर में गई थी अनाथ आश्रम, शादी की शॉपिंग की वजह से और थोड़ी देर अनाथ आश्रम में रहने के बाद वोह फिर चली गई थी सुमित्रा जी के साथ शॉपिंग पर। जब वोह शाम को घर पहुंची तब तक भी कबीर ऑफिस से नही आया था लेकिन एक सरप्राइज़ था जो उसका इंतजार कर रहा था। जब वोह अपने कमरे में आई तोह उसे कुछ शॉपिंग बैग्स मिले फ्लोर पर रखे हुए। उसने जिज्ञासा से खोल कर देखा तोह उसमे वोही कपड़े थे जो उसने कल मॉल में ट्राय किए थे। सभी अच्छे से तै बना कर एक बॉक्स में पैक्ड थे। उसे तोह यकीन ही नहीं हो रहा था की कबीर ने उनमें से ज्यादा तर सब ही उसके लिए खरीद लिया था। जब वोह ट्राय कर रही थी मॉल में तोह उसने सोचा था की वोह इनमे दो या तीन खरीद लेगी लेकिन सब तो बिलकुल नहीं। जब वोह ट्राय कर रही थी तोह उसने कहा था की वोह इस तरह के फैंसी कपड़े नही पहनती है पर फिर भी कबीर ने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया था और अमायरा सेल्स गर्ल के सामने कोई सीन क्रिएट नही करना चाहती थी इसलिए वोह फिर चुपचाप कपड़े ट्राय करने लगी थी। और अब इतने सारे कपड़े देख कर वोह थोड़ी सरप्राइज्ड थी और बहुत ज्यादा शॉक्ड थी। कबीर देर रात घर वापसी आया और उसके कमरे में आते ही अमायरा ने सवाल करने शुरू कर दिए। कबीर ने ये कह कर बात खतम करनी चाही की उसने सच में यह सब कल ही खरीद लिया था वरना वोह इतने सारे कपड़े उससे क्यों ट्राय करवाता? क्योंकि वोह इतने सारे बैग्स लेकर पूरे मॉल में नही घूमना चाहता था इसलिए उसने यह घर पर डिलीवर करने के लिए कह दिया था। और यह भी की वोह उसकी खाली अलमारी को देख देख कर बोर हो चुका है। जबकि अमायरा के लिए उसकी अलमीरा भरी हुई थी हां भले ही कबीर के डिजाइनर कपड़ों के कंपेरिजन में उसके पास कम कपड़े थे, बल्कि बहुत कम। जब अमायरा ज्यादा विरोध करने लगी तो कबीर ने अपना हुकुम का इक्का फेंका। उसने कहा की वोह बहुत थक गया है और सोना चाहता है। अमायरा अब इसके बाद उससे और आगे बहस या लड़ाई कैसे करती। वो जानती थी कबीर ने उसे पहले स्टोर में ही सब खरीदने के बारे में क्यों नही बताया था क्योंकि फिर वोह दूसरे स्टोर में जाने से इंकार कर देती।

संडे भी इसी तरह कब गुज़र गया पता ही नही चला। उसके पास बहुत सारा काम था की उसे फुरसत ही नही मिली कुछ सोचने के लिए।

मंडे की सुबह जब वोह सोकर उठी तोह उसने देखा कबीर पहले से ही उठ कर तैयार हो चुका है। कबीर आज कैजुअली ड्रेस्ड हुआ था। आज उसने जींस और पोलो टी-शर्ट पहना हुआ था जो की वोह रेयर ही पहनता था। अमायरा को थोड़ा अजीब लग रहा था उसे बिना फुल सूट में देख के जो वोह ऑफिस के लिए पहनता था, टी-शर्ट और जॉगर्स जो वोह रात में पहनता था और कुर्ता पायजामा जो वोह पूजापाठ के दौरान पहनता था।

"गुड मॉर्निंग! स्वीटहार्ट ❤️।" कबीर ने झुक कर अमायरा के माथे को चूम लिया और अचानक अमायरा की सांसे ही रुक गई।

"आप इस तरह से तैयार क्यों हुए हैं?" अमायरा ने पूछा, वोह अभी भी अपनी सांसों को नॉर्मल करने की कोशिश कर रही थी और साथ ही वोह बैड पर अपनी कंफर्टेबल पोजीशन भी नही छोड़ना चाहती थी।

"उउह्ह्ह....हम कहीं जा रहें हैं और वहां जाने के लिए हमे इसी तरह कैजुअल तैयार होना होगा। तुम भी जल्दी से तैयार हो जाओ। समथिंग कैजुअल, नथिंग टू लूज। शायद एक जींस और टी शर्ट ही सही रहेगा।"

"हम कहां जा रहें है?" अमायरा ने पता लगने की कोशिश की।

"तुम जानती हो। बताने की जरूरत नहीं है, हम नाश्ता बाहर करेंगे, तोह जितनी जल्दी तुम तैयार होगी, उतनी जल्दी हम निकल जायेंगे और नाश्ता समय पर कर पाएंगे।" कबीर ने जवाब दिया। वोह उसके किसी प्लान को सफल नहीं होने देना चाहता था।

अमायरा जल्दी से तैयार हो गई। उसने अपनी पुरानी जींस और कल जो नई टी शर्ट खरीदी वोह पहनी। क्योंकि वोह टी शर्ट कबीर की चॉइस थी इसलिए वोह किसी भी मुकाबले उससे कम नहीं लगना चाहती थी और उसे किसी के सामने एंबारेस नही होना पड़ेगा। कबीर मुस्कुरा पड़ा जब उसने देखा की अमायरा ने उसकी खरीदी हुई टी शर्ट पहनी है।









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