An suna ishq - 3 books and stories free download online pdf in Hindi

अन सुना इश्क़ - 3

" नमश्ते मेरा नाम है धनुष और इस देव दास पुर के इलाके का डोन लेकिन लोग मुझे प्यार से धनु बुलाते है " रजनी ने कहा की...

" ओहो अब तो लोग भी अजीब आने लगे है गुंडे के नाम भी प्यार से लेने लगे है " मानना पडेगा कमाल है. कुनाल ने कहा की...

" हमे यहा पर क्यू बुलाया गया है " हमारी क्या जरूरत आ पडी तुमको बताओ. धनुष ने कहा...

" कुच नही रे हमे ना बस तुम्हारे इलाको मे एक एक फेक्ट्री बनवानी है " अगर तुम लोग इस मे मेरि मदद करोगे तो फायदा तुम लोगो का जरुर होगा. कुनाल ने कहा...

" लेकिन तुम्हारे पास तो पुरा देव दास पुर का शाम राज्य पडा है " और हमारे तो इलाके तो काफी छोटे है. इसमे जगह अब नही बची है. और फिर आप वहा फेक्ट्रीस लगाओ के तो वहा अड़चन होगी. रजनी ने कहा...

" देखो आप जितने भी बडे डोन क्यू ना हो लेकिन मे इस चिज मे कभी भी साथ नही दूंगी " और नही कीसि और को इस मे शामिल होने नही दूंगी क्यू की ये आप ठीक नही कर रहे हो. गाव मे सभी तरफ से शुध वातावरण है. इसे मे खराब नही होने दूंगी... धनुष ने कहा की...

" अरे क्या हुआ अगर तुम लोग एक बडी पोस्ट पे रह कर भी मेरा काम नही कर सकते लालत है " ऐसे लोगो पर. ठीक है मत करो मेरि मदद लेकिन अब देखो मे क्या करता हू. कुनाल ने कहा...

" भाई सहाब ये अपनी धमकी ना अपने पास ही रखो तो बेहतर रहेगा आपके लिये " क्यू की हमारी हटी ना तो कहर मच जायेगी. तुम अपने एरिये मे सबको डरा कर धमका कर रखते हौगे यहा तो ऐसा बिल्कुल भी नही चलेगा. रजनी ने कहा...

" बस हमारा एक बार देव दास पुर पुलिस स्टेशन मे ट्रांसपोर्ट होने दो फिर बताईयेंगे हम चिज क्या है " ये तुम्हारे गुंडे का शाम राज्य खतम ना कर दिया ना तो हमारा नाम भी रजनी नही. धनुष ने कहा...

" ओ अच्छा तो ये बात है बेटा ये सब ना तुम लोगो को बहुत भारि पडेगा " अभी तो तुम लोग हमारी मदद नही कर रहे हो लेकिन तुम दोनो के दोनो मेरे पास भी मांगने नही आये तो कहना की हे भगवान ये हमने किस्से पंगा ले लिया. राजीव ने कहा...

" अरे चल चल तेरे जैसे बहुत देखे फाल्तू की धमकी हमे मत दो ठीक है "

यहा पर ये लडाई कुच देर चलती ही रही बाद मे काव्या ने कहा की...

" अरे बस करो अब ऐसे लड़ने से क्या होगा जब जो करेगा तब उसका देखा जायेगा " लेकिन अभी क्या करना है ये तो बताओ. राजीव ने कहा...

" अभी कुच करना नही है अभी चलो अपने अपने घर " अगर हमे ये पता होता की हमे इस लिये यहा पर इस लिये बुलाया गया होगा तो हम यहा पर कभी नही आते और नही हमारे इस दोस्त कुनाल को आने देते. धनुष ने कहा...

" ठीक है अभी तो हम जा रहे है " लेकिन मुलाक़ात जरुर होगी हमारी देख लेना और मिलने के लिये रेडी रहो तुम सब. ये वादा है इस धनुष का. ये कहते हुए धनुष अपनी गाडी लेकर चला गया. और बाद मे वो चार लोग आपस मे बाते करते है की इसका करना क्या है. कुनाल ने अपने बारे मे बोलते हुए कहा की...

" हेल्लॉ मेरा नाम है कुनाल दास और मे पुलिस फोर्च मे हू एस.एच.ऑ. रजनी ने भी अपनी पहचान बताते हुए कहा की...

" हेल्लॉ मेरा नाम तो आप जान ही चुके होन्गे मेरा नाम है रजनी देसाई मे पुलिस फोर्च मे भी हू " और ये जो मेरि दोस्त है कव्या वो भी मेरे डिपार्टमेंट मे है सीनियर की पोस्ट मे है. कुनाल ने कहा...

" वैल अच्छा है मेरा दोस्त भी सेम पोस्ट पे है " सीनियर वाली खैर अच्छी जोडी जमे गी हम चारो लोगो की खैर मज़ा तो आएगा लेकिन दिक्कत की बात तो ये है की हम अलग अलग पुलिस स्टेशन से बिल्लोंग करते है तो क्या करे कुच समझ नही आ रहा है. रजनी ने कहा...

" कोई बात नही मेरे पास एक प्लान है जिससे हम एक ही स्टेशन मे काम कर सकते है " तो सुनो मेरा प्लान ******* ***** ******** **** ****** **** *** ***** रजनी ने कहते हुए सब बताया और बाद मे उसी पे काम करना शुरु कर दिया

《《अब आज के लिये बस इतना ही आगे जान्ने के लिये पढते रहे अन सुना इश्क़》》

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