अंधेरा कोना - 2 - अनजान मुसाफिर Rahul Vyas ¬ चमकार ¬ द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

अंधेरा कोना - 2 - अनजान मुसाफिर

मैं लाला भाई की बात सुन रहा था, मुझे यह स्पष्ट हो गया कि यह मेरा एक अजनबी के साथ डरावना अनुभव था, जिससे मैं मिला था। मैं पैसे देकर गैरेज वाले हरमीत सिंह के पास गया, जो पिछले तीन दिनों से बंद था; यह आज खुला। उसके पास जाकर मैंने उसे बताया कि मुझे कैसा अनुभव हुआ। मेरी बात सुनकर वह भी हतप्रभ रह गया। मैं और हरमीत बाते कर रहे थे तब वहा एक तीसरा व्यक्ति भी मौजूद था और वह राजकुमार उर्फ राज था, वह हमारे कॉलेज के बायो केमिस्ट्री का छात्र था, वह बहुत घमंडी था, वो हमेशा कहा गया हो उससे उल्टा करता था। हमारी बाते सुनकर उसने तय किया कि वह भी उस जगह पर जाएंगे और वहां जाकर ओपन चैलेंज करेगा जब कोई नहीं आएगा उधर तो मोबाईल मे शूटिंग करके वापस आएगा। उसकी योजना के अनुसार दो दिन बाद रात को वो धीरे से उस रास्ते पर जाने लगा। धीरे-धीरे वह सड़क की ओर चल रहा था, सड़क बहुत डरावनी लग रही थी, सड़क की रोशनी भी नहीं थी, यह सड़क लगभग दस मिनट के अन्तर तक थी , वह थोड़ा आगे चला फिर रुक गया। अपनी कमीज के बायें हिस्से को उठाकर कमर पर हाथ रखकर वह बोलने लगा। "क्या कोई भूत है? !! मेरे खिलाफ आओ, देखो कौन है,

मैं विज्ञान का छात्र हूं, मुझे ऐसी बकवास पर विश्वास नहीं है, चलो मैं भी देखता हूं कौन आता हैं"।

राज ने सोचा कि कोई आदमी होगा और उसकी खुली चुनौती उसके खिलाफ आएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ, कोई नहीं आया। जब कोई नहीं आया तो उसने अपने मोबाइल में नाइट मोड में शूटिंग शुरू कर दी, और कुछ शूटिंग की। अब सवाल यह था कि उसके मोबाइल में नेटवर्क नहीं था इसलिए वह इंटरनेट का उपयोग नहीं कर सकता था इसलिए उसे अपने मोबाइल में सड़क नहीं दिख रही थी। अब वह भ्रमित था क्योंकि यह बहुत अंधेरा था। अब राज को पसीना आ रहा था और वह यह तय नहीं कर पा रहा था कि वह कहाँ से आया है।बार-बार वह अपना मोबाइल फिर से चालू कर रहा था लेकिन नेटवर्क नहीं आ रहा था जो एक तकनीकी खराबी थी।

उसका मुह भी अब सूख रहा था, उसे यह भी नहीं पता था कि आगे जाना है या पीछे, उसका दिमाग अब गलत सोचने लगा था, भूत की अफवाह अब सच हो रही थी। सड़क के किनारे के पेड़ उसे डरावने लग रहे थे, पेड़ों की शाखाएँ और टहनियाँ किसी के लंबे बाल और आसमान का काला अँधेरा ऐसा लग रहा था जैसे उसने कुछ काले कपड़े पहने हों और आसमान के टिमटिमाते तारे लग रहे हों किसी की आंखें उसे देख रही हों। निराश होकर राज जमीन पर बैठ गया, अब उसके पास सुबह आने का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं था और सवाल था कि सुबह कोई आएगा या नहीं।

राज घमण्डी था पर बड़ा वीर था, उसने हिम्मत जुटाई और उठकर सड़क पर चल दिया, थोड़ा चलते ही उसे कुछ दिखा,आगे एक स्ट्रीट लाइट थी, जहा उसे एक साया दिखा उस साये के साढ़े पांच फुट पीछे एक आदमी था, वह 50-55 साल का लग रहा था और गम्भीरता थी उसके मुंह पर,

पेलो: रास्ता भटक गए हों नौ जवान ?

राज (झिझकते हुए): हाँ - हाँ

पेलो: हम्म, कोई बात नहीं मैं तुम्हें रास्ता दिखाता हूँ, मेरे साथ आओ।

राज ने थोड़ी हिम्मत जुटाई और अजनबी का पीछा करने लगा, पांच मिनट बाद ही राज को अपने इलाके की स्ट्रीट लाइटें थोड़ी दूर देखने लगी, उसकी जान में जान आई, राज ने हिम्मत जुटाई और उससे पूछा

राज: तुम कौन हो? क्या तुम यहाँ रहते हो इस क्षेत्र के बारे में झूठी अफवाहें क्यों हैं?

पेलो: देखो बेटा! मैंने इस क्षेत्र के बारे में भी किसी को बताया है, लेकिन मैं फिर से कहूंगा कि मुझे नहीं पता कि क्या सच है, मैं 54 साल का हूं, डॉक्टर ने मुझे पक्षाघात के प्रभाव के कारण चलने के लिए कहा है, इसलिए मैं यहां चल रहा हूं। रात को यहां जानवरों की तस्करी होती है, इसलिए यहां ऐसी अफवाहें फैलाई जाती हैं ताकि कोई यहा आ न सके अच्छा अब तुम जाओ, अगर कोई तुम्हें देख लेगा तो तुम मुसीबत में पड़ जाओगे।

राज: बहुत-बहुत धन्यवाद, लेकिन हाँ ! अपना नाम तो बताएं

पेलो: कौन जानता है कि वह कौन है!

इतना कहकर वह आदमी पलक झपकते ही गायब हो गया।

राज एक अनजाने रास्ते से वापस आया। वह चारों ओर देख रहा था। यह सीमेंट के एक छोटे से ढेर की तरह लग रहा था। वह याद करने की कोशिश कर रहा था कि उसके पूरे परिसर में जगह कहाँ से आई थी।

ऐसा करने के बजाय वह सकुशल अपने कमरे में पहुंच गया। अगली सुबह वह हरमीत सिंह के पास गया और उसे वो जगह के बारे में पूछा कि एसी जगह कहा है जहा सिर्फ मिट्टी का ढेर हो और सीमेंट की तकती हो, हरमीत ने बाते सुनकर उसे जगह दिखाई और राज वहां गया और वह सीन देखकर पसीने से तरबतर हो गया।कई साल पुराना लग रहा था वो एक कब्रिस्तान था जो पीछे के रास्ते से बंद था और उसका पैर एक अखबार के पेज पर पड़ा जो 25 साल पुराना था जिसमें लिखा था कि "एक 54 वर्षीय तस्कर की हत्या जिसे पिछले कुछ दिनों से लकवा था। 30 साल से तस्करी कर रहा था। लेकिन उसने लकवा के कारण तस्करी बंद कर दी थी।

राज की आंखें बाहर आ गई , वह उस आदमी का वाक्य याद कर रहा था "कौन जानता है कि वह कौन है"!!

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Sakshi garg

Sakshi garg 1 महीना पहले

Sanjiv Vyas

Sanjiv Vyas 4 महीना पहले

uttam....uttam

Rupa Soni

Rupa Soni 4 महीना पहले

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