Dogi ka Prem - 1 books and stories free download online pdf in Hindi

डोगी का प्रेम - 1 - चेहरे के भाव पढ लेते है श्वान

मेरी दिन मे दो बार धर्म पत्नी से बात होती थी अक्सर फोन मै ही करता था किन्तु एक दिन मोबाईल पर घंटी बजी टर्न..टर्न मैने देखा कि पत्नी का फोन.. मै खुश हुआ खुशी का कारण यह था कि जब भी पत्नी फोन करती थी तो कोई शुभ समाचार ही देती थी मैने फोन उठाया यह क्या आज पत्नी का नाराजगी से भरा स्वर .. एक ही श्वास मे बेटा व बेटी की डॉगी लाने की जिद, पत्नी ने फोन पर कह सुनाई पत्नी बोली उन्हे रोको वे डॉगी लाने गये है ।

हम पूजा पाठ करने वाले लोग है हमारे घर मे डोगी का क्या काम .. लोग क्या कहेंगे ? घर मे कितने कीटाणु फेलेंगे ? आस पड़ौस के लोग हमारी दरवाजे नही चढेंगे किसी को काट लिया तो बैर होगा, मै साफ सुथरा घर को रखती हूँ ..लेकिन अब घर बीमारियो का अड्डा बन जायेगा
पत्नी सख्त लहजे मे बोली घर मे अब मै रहुंगी या फिर वह डॉगी यह कहकर फोन काट दिया ।

मैने तुरंत बेटे को फोन लगाया उसने फोन रिसीव किया.. बोला पापा हम लेब्रा डोग ले आये हैं 5000 रूपये लगे है यह नस्ल बहुत अच्छी होती है लेब्रा बहुत समझदार होते है
मैने उसकी बात काटकर कहा .. लाने से पहले पूछ तो लेते जाओ इसे वापस करके आवो
बेटा बोला वह अब वापस नही लेगा और लेगा तो पैसे वापस नही करेगा मैने कहा कोई बात नही तुम उसे ऐसे ही दे आवो।

बेटी ने फोन ले लिया और बोली पापा बहुत सुन्दर है इसकी पिक आपको भेजती हूँ आपको अच्छा लगेगा... प्लीज प्लीज पापा रहने दो ना ..मैने कहा तुम्हारी मम्मी को पसंद नही है ..पापा पापा हम मम्मी को मना लेंगे ऐसा कहकर डॉगी से लाड करती हुई बोली कितना क्यूट है, मैने उनको इतना खुश देखकर कह दिया चलो तुम ले ही आये तो ठीक है पर इसका सारा ध्यान तुम्हे ही रखना होगा मै इसे बाहर घुमाने नही ले जाऊंगा मैने पूछा कितने दिन का है ? बेटी बोली अभी एक महिने का भी नही हुआ है मैने कहा तब तो यह सूसू पोटी घर मे कही भी करेगा बेटी बोली हमने डोग वाले से सब समझ लिया है उसने कहा है यह जब भी दूध पीयेगा पोटी जायेगा तो तुम इसे बाहर ले जाना । मैने पूछा नर है या मादा ? बेटा गाड़ी चलाते हुए बोला पापा फिमेल हैै डॉग वाले ने इसका सैल लेटर भी दिया है और इसका हेल्थ कार्ड भी बनाकर दिया है इसके टीटनस का इंजेक्शन लगा दिया है कुछ इंजेक्शन ओर लगने है पापा अब यह इंसान की तरह हो गया है इसे अगर किसी कुत्ते ने काट लिया तो हमारी तरह इसको रेबीज हो सकता है ।

कुछ देर बाद बेटा बेटी डॉगी को लेकर घर पहुँचे बेटा बेटी अपनी मम्मी की डाट के लिए पहले से ही खुद को तैयार करके आये थे ।

मम्मी की नजर जैसे ही उन पर पड़ी दोनो बच्चो ने नजरे नही मिलाई, मम्मी गंभीर ..मुख पर कोई कौतुहल नही बस एक दम शान्त .. सिर्फ मौन से ही विरोध ।

पत्नी चुप्पी तोड़ते हुए बोली मना करने पर भी क्यो लेकर आये कल इसे वापस करके आवो वर्ना तुम भी बाहर ही रहो । रात हो गयी थी सर्दियो का मौसम था बेटा बोला मम्मी बाहर ठंड मे मर जायेगा इसे अंदर ही ले आंऊ .. पत्नी व्यंग से बोली इसके लिए दूसरा घर खरीद ले वही रख लेना । बेटे बेटी ने एक कागज का डिब्बा (कार्टून) लिया और उसमे कपड़ा बिछाकर उसमे बैठा दिया डॉगी दुबकर उसमे बैठ गया । मेरी माता ने भी डॉगी की तारीफ की बोली सोहणा है । माता से पत्नी बोली मा अभी यह अच्छा लग रहा है जब घर मे गंदगी करेगा बर्तनो मे मुँह लगायेगा तब देखना यह कितना सोहणा लगता है ।
मैने घर पर फोन किया पत्नी की वही रामायण शुरू ..मैने कहा बच्चे कितने खुश है रख लेने दो डॉगी को ..अब तो पत्नी ने कहते देर नही की ..अच्छा तो आप भी इनसे मिले हुए हो ।

क्रमश--

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