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डोगी का प्रेम - 8 - चेरी का शत्रु भाव
द्वारा कैप्टन धरणीधर

जिस तरह इंसान को किसी व्यक्ति से अनबन हो जाती है या शत्रुता हो जाती है तो..वह उन सबको शत्रु मानने लगता है जो उस व्यक्ति से संबंध रखते ...

डोगी का प्रेम - 7
द्वारा कैप्टन धरणीधर

सत्य कहूँ तो चेरी को भगवान ने बात करने के लिए जबान नही दी ..बाकि समझती सब थी ..खुशी किसी की भी हो छुप नही सकती ..जानवर जब खुश ...

डोगी का प्रेम - 6
द्वारा कैप्टन धरणीधर

मेरी पोस्टिंग अरूणाचल में गच्छम क्षेत्र में थी, रात्रि के लगभग 10 बजे होंगे ..मै तो सो गया था ..क्योकि अरूणाचल में सूर्यास्त जल्दी हो जाता है ..मोबाइल की ...

डोगी का प्रेम - 5
द्वारा कैप्टन धरणीधर

एक दिन बिटिया अपने काम से फोर व्हिलर लेकर बाजार में जा रही थी बाहर चेरी ने गाड़ी को पहचान लिया और गाड़ी के पीछे दौड़ती हुई पीछा करने ...

डोगी का प्रेम - 4 - श्वानों के संकेत क्या बताते हैं ?
द्वारा कैप्टन धरणीधर

जो भी श्वानों से प्रेम करते हैं वे उन्हें पालते हैं उनके साथ बहुत सा समय बिताते हैं । कई बार वे भी नहीं समझ पाते उनका श्वान क्या ...

डोगी का प्रेम - 3 - मन की बात कैसे प्रगट करते हैं?
द्वारा कैप्टन धरणीधर

श्वानों में बहुत समझ होती है वे साथ रहते रहते अपनी इच्छा प्रगट करने के तरीके खुद ढूंढ लेते हैं । भगवान ने इंसानों की तरह उन्हें भाषा बोलने ...

डोगी का प्रेम - 2 - चेहरे का भाव पढ लेते हैं श्वान
द्वारा कैप्टन धरणीधर

डॉगी का नाम करण -मेरी ड्यूटी अरूणाचल में थी हमारे आर्मी के अंदर भी डॉग स्कॉट होती है , हमारे पास भी एक फेमेल डॉग था । मैने दूसरे ...

डोगी का प्रेम - 1 - चेहरे के भाव पढ लेते है श्वान
द्वारा कैप्टन धरणीधर

मेरी दिन मे दो बार धर्म पत्नी से बात होती थी अक्सर फोन मै ही करता था किन्तु एक दिन मोबाईल पर घंटी बजी टर्न..टर्न मैने देखा कि पत्नी ...

जतिंगा में पक्षी आत्महत्या
द्वारा राजनारायण बोहरे

पक्षियों की आत्महत्या का रहस्य पक्षियों की अज्ञात आत्महत्या:जतिंगा राजनारायण बोहरे: लगभग एक सौ वर्ष पहले की सच्ची कहानी है यह !आसाम के घने जंगलों में निवास करने वाले ...

दो थे बैल-इक हीरा इक मोती
द्वारा ramgopal bhavuk

‘भैया मोती, मुझे मुंशी प्रेमचन्द्र के समय की बातें याद आ रही हैं। उन्हें हमारी कितनी चिन्ता रही होगी, उनके कारण लोग हमें भूले नहीं हैं, लेकिन वह जमाना ...

जानवर और चरवाहा
द्वारा Shubham Rawat

गाँव से हट कर नदी के किनारे बसा एक छोटा सा घर। उस घर में 'मेर' परिवार रहता है; जिनकी आजीविका खेती-बाड़ी से होती है। खेती-बाड़ी से कमाई उतनी ...

मलंगी ने
द्वारा राजनारायण बोहरे

राजनारायण बोहरे की कहानी मलंगी मैंने एक नजर चारों ओर देखा, तो पाया कि वहाँ केवल बच्चे ही नहीं थे, बल्कि मोहल्ले-भर की औरतें भी जुट आई ...