प्यार Ka જાદુ - 2 Arya Shah द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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प्यार Ka જાદુ - 2

उसका कॉल देखके वो आश्चर्य मैं था, इस समय इसका कॉल? जैसा ही कॉल उठाया और उसके मित्र ने तुरंत ही बोल उठा "भाई तेरे लिए खुश खबरी है।" खुश खबरी ऐसी कोंसी बात है जो में सुनके खुश हो जाऊ? " तूजे याद है की तुने बोला था की कोई लड़की ध्यान में है तो बोलना।" हां तो
"यार मेरी एक फ्रेंड है वो भी सिंगल ही है और वो भी कोई लड़के को ढूंढ ही रही है।" सच्ची? सेम ने चौंकते हुवे बोला,
"हा सच्ची।" पहले तु यह बोल की वो लड़की का स्वभाव कैसा है? "एकदम मस्त है बेफिकर हो जा।"

उसने हस्ते हुवे कहां, वो हसी के पीछे कोनसा रहस्य था वो सेम समझ ही नहीं पाया।


भाई दिखने मैं कैसी है? सेम ने शर्माते हुवे पूछा। "कॉल वह पे ही डिस्कनेक्ट हो गया, सेम को लगा के वो मेरे साथ मजाक कर रहा होगा, भला मुझे कोन पसंद करेगा, दिखने मैं तो जोकर जैसा ही तो लाग रहा हु।
थोड़ी देर बाद सेम के मोबाइल मैं एक नोटिफिकेशन आया, उसने देखा तो वह मित्र का मैसेज, उसने फटाफट मैसेज खोला तो एक लड़की का फोटो था, और नीचे मैसेज थाा
"आई लव यू"
सेम खुशी के मारे नाच ने लगता है।
और इसी दौरान साम को उसके फोन से एक कॉल आया और बोला की में "जानकी" मेरे मैं नंबर सेव नही था इसलिए सामने मेने भी पूछ लिया के कोन जानकी?
उसने बोला "अरे आज दुपहर को बात हुई थी ना राज से!"
हां, अच्छा आपका नाम जानकी है। "हां" अच्छा बोलो क्या काम था? "अरे उसने बोला की आपको काम है!" मुझे? मुझे क्या काम होगा आपसे? "यार तु बुधु ही है, कुछ बोलना था ना आपको?" नही, मुझे क्या बोलना होगा?
"अरे बाबा चलो मैं ही बोल देती हु " आई लव यू"
हाय राम ये सुनने के लिया कान तरस गए थे "आई लव यू टू" यार एक बार और बोलो ना! "सुनो अभी मैं राखती हु" कल स्कूल में मिलेंगे।" ठीक है बोल कर सेम ने कॉल रख दिया।
सेम बेसब्री से दिन काट रहा था, उसको कल जो मिलना था, अचानक सेम को याद आया के वो उसके लिए गिफ्ट लाना ही भूल गया, वो जल्दी से गिफ्ट के दुकान के पास गाया और देखा तो वो दुकान बंध थी
सेम ने जल्दी से मानसी को कॉल किया और बोला की वो कोई अच्छी सी गिफ्ट लेके आए मेरे लिए।
मानसी उसकी साहसे करीबी दोस्त थी, वो उसको हर बात बताता था, पर आज उसने वो बात नही बताई थी, आखिर वो उसको सरप्राइज़ देना जो चाहता था, आज सेम जल्दी ही स्कूल आ गया था, आखिर वो जानकी से मिलने के लिए बेकरार था, आज समय थंब सा गया हो ऐसा सेम महशुष कर रहा था, उसकी निगाह स्कूल गेट पे ही थंब गई है, वो मन ही मन मुस्करा रहा था,और आखिर में जानकी आ ही गई और उसे देख कर सेम बोहत ही खुश हुआ, वो मन ही मन बोलने लगा
"आंखे उसकी ढूंढ रही है मुइको
जाके उसके सामने गले लगा लू क्या?
यूं मेरी आंखे इशारा दे रही है तुझको
कस कर सीने से लगा लू क्या?
यूं सामने आओ,दूर से देखा ना करो मुजको
इश्क है आपसे तो क्या सबके सामने जता लू क्या?"
वो जानकी के पास जा ही रहा था........