तकदीर धृतराष्ट्र सुमन द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

तकदीर

वर्ष 2014 में वजीर एक्स नाम की एक क्रिप्टो करेंसी की एप्प लाॅन्च हुई, मैंने तैयारी के साथ साथ एक होटल में पार्ट टाईम कैशियर का काम करना शुरू किया वेतन सात हजार के लगभग था, सुबह अपनी कोचिंग से मैं 10 बजे तक फ्री होकर के होटल पहुंचता, कुछ समय पढ़ता वहीं और फिर एक मित्र ने वजीरएक्स के बारे में बताया मैंने अपनी पहली तनख्वाह से लगभग 06 माह तक कुछ रूपयों से एक क्रिप्टो करेंसी का टोकन खरीदा और फिर छोड दिया। इस बीच मैंने निरंतरता से पढ़ाई और काम पर फोकस किया। समय बीतता गया, मुझे लगा नौकरी मेरी पढ़ाई में बाधक है तो मैंने घर पर ही पढ़ना शुरू कर दिया। जीवन भी एक अजीब सी पहेली है, लगभग मुझे सरकारी नौकरी की तैयारी करते हुए 07 साल से अधिक का समय हुआ मगर कभी मैरिट में नाम नहीं आया कभी न्यायालय से ही सलेक्शन लिस्ट खारिज कर दी गयी, अब तो घरवालों ने भी यकीन कर लिया कि यह पढ़ता लिखता नहीं है, और महिला मित्र जिसने कि साथ जीने मरने की कस्में खायी थी वह भी मुंह फुलाते हुए एक लेखा लिपिक के साथ विवाह कर चलती बनी।
जीवन में बेहद ही निराशाजनक पल चल रहा था तो मैंने एक चिप्स और कोड्रिंग की बोतल ली और नजदीक के एक नदी के छोर पर चला गया, बहती हुई नदी को देखना मेरा मुख्य शौक है, बहती हुई नदी, जीवन में चल रहे अनेक परेशानियों को भुलवा देती है और निरंतर हर परिस्थिति में चलते रहने की सीख देती है। अचानक मैंने कुछ लडकों के आने की आवाज सुनी तो देखा कि कुछ 18-20 वर्ष के बच्चे मेरी तरफ आ रहे हैं, वह भी मेरे बगल में बैठ करके गप्पें मारने लगे। मैं एक शांत माहौल चाहता था, तो मैं वहां से जाने लगा तभी उनमें से एक ने अपने मित्र से कहा कि क्रिप्टो का बाजार आजकल गर्म हो गया है बिटकोईन तो 50 लाख का हो गया है। यह बातें मेरे भी कान में पड़ी मगर मैंने इसका नजरअंदाज किया और नदी के दूसरे छोर की तरफ चल दिया। बैठे -बैठे मैंने अपना क्रिप्टोकरेंसी का एप्लिकेशन पुनः डाउनलोड किया और अपना खाते का पासवर्ड डाला, अपना बैलेंस चैक करने के लिए मैंने बैलेंस पर क्लिक किया तो मेरे पैरों तले जमीन ही खिसक गयी। मैंने देखा कि मेरी खरीदी हुई क्रिप्टोकरेंसी से मेरे खाते में लगभग 80 लाखा रूपये हो चुके थे। दिमाग में अजीब-अजीब से ख्याल आने लगे, उनमें से 5000 रूपये मैंने तुरन्त अपने खाते मंे भेजे और खाते में तुरंत ही पैसा भी आ गया। अब तो खुशी और गम का मिलाजुला सा अनुभग लगने लगा।
लगभग रात के 11 बज गये सोचते सोचते कि यह कैसे और क्या हो गया!!! मैं घर की तरफ गया और सो गया किन्तु नींद ही नहीं आयी, सुबह सुबह मैं तैयार होकर के सीधे अपने क्षेत्रीय विधायक जी के पास गया और उनसे व्यक्तिगत रूप से मिला, मैंनें कहा मा0 विधायक जी मैंने लगभग 07 साल से अधिक सरकारी नौकरी की तैयार की है, मेरा सपना है कि मैं सरकारी नौकरी लगूं इस बीच कभी भ्रष्टाचार और कभी किस्मत की वजह से हर जगह से मुझे ठोकर ही लगी, मैं आपका लगभग 10 लाख तक दे सकता हूं मुझे सरकारी नौकरी दिलवा दो। विधायक जी मंझे हुए खिलाडी थी, उन्होंने कहा 10 नहीं 25 तक दो तो नायब तहसीलदार में करवा देते हैं, मैंने भी सीधे हां कह दिया और तुरंत ही पांच लाख एडवांस दिये और कहा कि महोदय ज्वायनिंग पर बाकी की रकम आपके पास दे दी जायेगी।
आज तहसील के तहसीलदार कार्यालय मे बतौर तहसीलदार के रूप में बैठकर महसूस हुआ कि जिंदगी एक मजाक सा भी है जो किसी को किसी भी स्तर पर पहुंचा सकती है।

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Suman Gupta

Suman Gupta 6 महीना पहले

Mkumar

Mkumar 6 महीना पहले

Ratna Pandey

Ratna Pandey मातृभारती सत्यापित 7 महीना पहले