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काला धन

काला धन

धर्मपुर गांव में बिमला नाम की एक बूढ़ी औरत रहती थी।उसे दो बच्चे थे एक बेटा और एक बेटी।बिमला के पति के गुजर जाने के बाद बड़ी मेहनत से उस ने अपने बच्चो को पाल पोसकर बड़ा किया था।बेटी रमा और बेटा रमेश दोनो  ही बिमला के आंखो के तारे थे ।रमा थोड़ी सांवली थी इसलिए उसकी शादी एक गरीब घर में ही हो गई थी।उसकी रंग रूप की वजह से कोई भी बड़े घर का रिश्ता रमा के लिए आ ही नही रहा था इसलिए रमा का यही भाग्य है सोचकर बिमला ने उसकी शादी गरीब घर में ही कर दी ।रमा का पति किसान था ।जैसे तैसे दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर लेता था।रमेश को  पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी मिल गई थी।धर्मपुर के पास ही एक बड़ी फैक्ट्री थी वही रमेश काम करता था।रमेश की शादी शांति से हो गई थी और तब से रमेश जोरू का गुलाम सा हो गया था।शांति अच्छे घराने से थी इसलिए उसे ऐश आराम में जीने की आदत सी लग गई थी।वो घर का आधा काम बिमला से ही कराती ।बिमला का उसके बेटे के सिवा कोई और सहारा नही था तो वो चुप चाप शांति की सारी बाते मान लेती ।

बिमला घर के बरामदे में सब्जी काट रही थी ।वही उसके नजदीक रमेश अखबार पढ़ रहा था।तभी रमेश का दोस्त लल्लन वहा आया ।

" क्या हाल है रमेश भाई  ? सुबह सुबह दुनिया की जानकारी ले रहे हो क्या ?  "

लल्लन ने घर के अंदर आते आते ही पूछा ।

रमेश ने अपनी नजर अखबार से उसकी तरफ घुमाई और खुश होकर बोला," अरे आओ, आओ लल्लन ।तुम बड़ी सुबह सुबह टहलने निकले हो ? "

लल्लन अंदर  आकर रमेश की बगल में बैठ गया।तभी रमेश ने रसोई की तरफ देखकर शांति से कहा," सुनती हो ? लल्लन आया है जरा चाय तो बनाना दो कप।"

शांति ने भी अंदर से चिल्ला कर जवाब दिया ," हा सुन रही हु ।लाती हु ।"

लल्लन ने बिमला की तरफ देखा और बोला," क्या अम्मा इस उम्र में ये सब क्यों कर रही हो ? अभी तो ये तुम्हारे आराम करने के दिन है ।"

बिमला झूट मुठ हस्ती हुई बोली," अरे बेटा कितना आराम करूंगी ? बैठे बैठे मन नही लगता इस लिए करती हु थोड़ी बोहत शांति को मदद ।बेचारी वो भी अकेली क्या क्या करे ?"

लल्लन और रमेश फिर से बाते करने लगे ।लल्लन अपनी   आंखे छोटी कर के रमेश की तरफ देखते हुए बोला," रमेश तूने रात की खबर सुनी ?सरकार ने पुरानी  नोट बंदी की है और वो भी पाच सौ के पुराने नोटों पर ही बंदी करा दी है।"

रमेश भी थोड़ा गंभीर होते हुए बोला," हा ,लेकिन उस से हम जैसे का कोई नुकसान तो होगा  नही ?अब बस काले धन वालो के हलक से अनाज का एक दाना नीचे न उतरेगा।भाई मेरा पैसा तो बैंक में मेरे खाते पर ही है और मैं शुरू से अपने ज्यादा तर काम ऑनलाइन पेमेंट से करता हू।तो सरकार के इस फैसले से मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।"

लल्लन भी अपने कंधे उड़ाते हुए बोला," हा ये भी सही है लेकिन सोचो जिनके पास ऐसे पाच सौ रुपए के ही नोट होंगे उनका क्या होगा? "

बिमला लल्लन और रमेश की बात गौर से सुन रही थी वो बीच में ही बोल पड़ी," मतलब अब क्या पाच सौ रुपए का नोट बजार में नही चलेगा?"

लल्लन मुस्कुराकर बोला," नही अम्मा अब पाच सौ का पुराना नोट बिल्कुल नही चलेगा।अच्छा फसाया है सरकार ने ऐसे अचानक फैसला लेकर।"

बिमला सोच में पड़ गई थी और थोड़ा परेशान सी हो गई थी। उस ने फिर से लल्लन से पूछा," ऐसे अचानक कैसे नोट बंदी करा दी सरकार ने ? मतलब जिनके पास पाच सौ के पुराने नोट हो वो लोग क्या करेंगे भला ? उनका पैसा तो कागज बराबर ही हो गया ना?"

रमेश बिमला की तरफ हैरानी से देखकर बोला," अरे अम्मा तुम क्यों इतना परेशान हो रही हो लेकिन ? "

बिमला जैसे तैसे हस्ते हुए बोली," मै कहा परेशान हो रही हू लल्लन बेटे  ? मैं तो बस जानकारी के लिए पूछ रही हू।"

तभी शांति अंदर से चाय के दो कप लेकर आई और लल्लन और रमेश को चाय देकर अपनी नाक टेढ़ी करके बिमला की तरफ देखकर बोली," इनके पास तो फूटी कौड़ी तक नही तो पाच सौ के नोट की फिक्र इन्हे क्यों होने लगी? "

लल्लन भी बिमला  की तरफ देखकर फिर शांति से बोला," हा भाभीजी की बात भी सही है और अम्मा जिनके पास पाच सौ रुपए के पुराने नोट है उनके लिए सरकार ने आठ दिनों की मोहलत दे रखी है की भाई आठ दिन में अपने पास के सारे पाच सौ रुपए के नोट बैंक में जमा करो और उनके बदले नए नोट ले जाओ और अगर आठ दिन में वे नोट नही बदल पाए तो पुराने नोटों की कीमत कागज बराबर।ऐसे ही तो अब जो  भी नोट बदलने बैंक जायेगा ।सरकार उसके पैसे का हिसाब रखेगी और उसके हैसियत से ज्यादा पैसा उसके पास होगा तो सरकार उन पैसों की जानकारी निकालेगी और देश का सारा काला धन बाहर आ जायेगा ये योजना है हमारे प्रधान मंत्री जी की ।"

लल्लन की बात सुनकर बिमला मन ही मन कुछ सोच रही थी।लल्लन थोड़ी देर रुक कर वहा से चला गया।रमेश भी तैयार होकर फैक्ट्री चला गया।शांति पड़ोस में अपने सहेली के पास जाकर बैठी थी।घर में कोई नही है ये देख बिमला चूल्हे के पास गई और उसके बगल वाली पत्थर को उस ने थोड़ा हटाया और नीचे मिट्ठी में दबाया हुआ एक छोटा सा डिब्बा बाहर निकाला ।उसे खोल कर उस ने पैसे गिने  तो पूरे पाच हजार रूपए थे लेकिन उस में पाच सौ रुपए के आठ  नोट थे।उन्हे देखकर बिमला को फिक्र होने लगी ।कुछ भी करके वो पुराने नोट बदल कर नए नोट लाना जरूरी था।पिछले तीन साल से थोड़े थोड़े पैसे जोड़कर उस ने वो पूंजी अपनी बेटी रमा के लिए बनाई थी ताकि जब उसे बच्चा हो ।वो रमा के बच्चे के लिए कोई सोने का गहना बना सके ।रमा को कुछ अच्छा खिला पिला सके लेकिन अभी वो पाच सौ रुपए के नोट बदले नही गए तो उनकी कोई कीमत ही नही रहने वाली थी।बिमला ने कुछ सोचा और वो पाच सौ रुपए के नोट अपनी साड़ी के पल्लू में बांधकर उस ने वो डिब्बा जहा था वही छुपा दिया और घर से बाहर निकल पड़ी ।पैदल चलकर वो गांव के बैंक तक आ गई लेकिन वहा पर लगी हुई लंबी लंबी कतारें देखकर तो बिमला सेहम सी गई।सारा दिन उस कतार के खत्म होने का इंतजार करके भी बिमला का नंबर नही आया तो वो हताश होकर वापस घर लौट आई।

बिमला को घर आता देख शांति रमेश की तरफ देखकर बरस पड़ी," लो जी, आ गई आपकी अम्मा। यहां मैं सारा दिन काम करू ।इनके लिए खाना बनाओ ।इनके कपड़े धो और आपकी अम्मा मुझे थोड़ी मदद करने के बजाए घूमती रहे? मतलब सब कुछ मै ही करू ? क्या बस यही काम कराने के लिए मुझे ब्याह कर लाए थे ? अपनी अम्मा को आप कुछ बोलोगे या नही?"

शांति की बात सुनकर रमेश बिमला की तरफ देखकर बोला," अम्मा कहा गई थी ? बाहर घूमने से अच्छा है ना थोड़ा शांति की मदद कर दो ?"

बिमला रसोई की तरफ जाते हुए बोली," बेटा थोड़ा जी घबरा रहा था इसलिए मंदिर में गई थी। मैं अभी रोटियां सेंक देती हु।"

शांति मुंह टेढ़ा करते हुए बोली," रहने दो अम्मा जी मैने बना दिया है खाना ।अब आप घूमती रहोगी तो मैं क्या अपने पति को भूखा रखूंगी ? बस खाने के बाद बर्तन धो देना।"

बिमला ने अपना सिर हा में हिलाया ।खाना खाने के बाद बिमला ने बर्तन धो कर रखे और बरामंदे में सो गई ।रात भर वो यही सोच रही थी कि कल सारा काम निपटा कर सुबह सुबह ही बैंक जाना चाहिए ।सारी रात इसी सोच में उसे नींद ही नहीं लग रही थी।सुबह सुबह शांति से पहले ही उठकर उस ने घर का काम करना शुरू कर दिया।पूरे घर में झाडू पोछा किया उसके बाद रोटियां सेंकने  लगी । रोटी के बाद सब्जी बनाई ।रमेश का डिब्बा बनाकर रखा ।शांति और रमेश के लिए चाय भी बनाई।शांति उठी तो बिमला ने सारा काम किया है ये देख खुश हुई।उसे लगा कल रमेश ने डाटा था इसलिए आज अम्मा ने सारा काम कर दिया है।सुबह सुबह घर में  शांति का शोर सुनाई नही दे रहा था इसलिए रमेश का दिन भी आज अच्छे से शुरू हुआ था।रमेश तैयार होकर फैक्ट्री चला गया।उसके बाद बिमला ने थोड़ा झिझकते हुए ही शांति से पूछा,"बहु सारा काम हो गया है तो क्या मैं थोड़ी देर मंदिर जाकर आऊ?"

शांति बिमला की तरफ हैरानी से देखकर बोली," अम्मा क्या बात है आज कल रोज ही मंदिर जाने लगी हो ? "

बिमला सिर झुकाए बोली," ऐसी कोई बात नही बहु ।"

शांति फिर टीवी के सामने बैठते हुए बोली," ठीक है,ठीक है । जाइए लेकिन जल्दी वापस आ जाना ।शाम को खाना भी बनाना हैं।"

बिमला हा में सिर हिलाते हुए बोली," हा बहु आ जाऊंगी।"

बिमला तेजी से कदम बढ़ाते हुए बैंक की तरफ चल पड़ी लेकिन वहा जाकर उसने देखा कि कल से भी ज्यादा लंबी लाइनें तो आज लगी हुई है।बिमला भी कतार में खड़ी हो गईं ।दोपहर में बैंक कर्मचारियों की खाने के लिए छुट्टी हो गई लेकिन बिमला फिर भी वही रुकी रही।जैसे जैसे शाम ढलने लगी बिमला परेशान होने लगी ।अभी भी इतनी ज्यादा लंबी कतार थी कि दो दिनों तक तो उसका नंबर नही आने वाला था।उस दिन भी बिमला निराश होकर घर लौटी ।रात का खाना बनाकर वो बैठी रही तभी रमेश फैक्ट्री से वापस आया ।अपनी कमीज उतारते हुए उस ने बिमला से पूछा," अम्मा आप बैंक के पास क्या कर रही थी दोपहर को ? "

रमेश का सवाल सुनकर बिमला थोड़ा घबरा गई और हड़बड़ा कर बोली," वो..बेटा मैं वहां जकीरा मौसी के घर की तरफ गई थी ।उन से मिले बड़े दिन हुए थे इसलिए तो आते आते बैंक के पास लगी कतार देखते हुए खड़ी थी वहां ।आज कल बड़ी भीड़ जमा हो रही है ना वहा ?"

रमेश भी अपना चेहरा तौलिया से पोछते हुए बोला," हा ।लोग अपने नोटो को बदल कर ले रहे है ना इसलिए भीड़ होती है ।खैर वो छोड़ो ये बताओ जकिरा मौसी कैसी है?"

बिमला सोचते हुए बोली," हा ठीक है वो ।तुम्हारे और शांति के बारे में पूछ रही थी।"

अगली सुबह भी बिमला ने घर का सारा काम कर दिया था । शांति तो हैरान हो गई थी।बिमला आज भी रमेश के फैक्ट्री जाते ही घर से बाहर निकल पड़ी लेकिन आज भी वो हताश होकर ही घर लौटी ।वो मन ही मन में सरकार को बुरा भला कह रही थी।

रमेश रात को थोड़ा सोच में था ये देख शांति ने पूछा," क्या हुआ जी आप इतने क्यों परेशान हो?"

रमेश सोचते हुए बोला," कुछ नही आज जकिरा मौसी मिली थी । कल अम्मा बोल रही थी ना की कल वो जकीरा मौसी के घर गई थी लेकिन मौसी तो बोली अम्मा आई ही नहीं।फिर अम्मा ने हम से झूट क्यों बोला होगा?"

शांति भी धीरे से बोली," आज कल अम्मा का कुछ चल जरूर रहा है जी।आज पड़ोस वाली रेखा भी बता रही थी की आज भी अम्मा बैंक की तरफ गई थी ।मुझे तो लगता है जरूर अम्मा ने कोई न कोई काला धन जमा कर रखा है।आपने देखा नही आज कल अम्मा कितनी गुमसुम रहती हैं और घर का सारा काम भी बिना बोले करती है और इतना ही नही आप के फैक्ट्री जाते ही अम्मा भी घर से बाहर निकल जाती है।मंदिर के बहाने जरूर बैंक जाति होगी।"

रमेश हैरान होकर बोला, " अरे अम्मा के पास कहा से आएगा पैसा? और होता तो भी हमे न पता चलता अब तक ?"

शांति अपनी आंखें बड़ी बड़ी करके बोली," नही जी मैं सोच रही हू बिल्कुल वैसा ही होगा ।क्या पता बाबूजी ने मरते वक्त दिए होंगे पैसे अम्मा को रखने के लिए ।वरना आप ही सोचिए अम्मा रोज बैंक की तरफ क्यों जाति है ? "

रमेश भी शांति की बात सुनकर सोच में पड़ गया और बोला," तो अब हम क्या करे?"

शांति थोड़ा खुश होकर बोली," हम अम्मा को कल बैंक जाने देते है और हम भी उनका पीछा करते हैं ।अगर वो सच में बैंक गई और नोट बदलते हुए दिखाई दी तो अम्मा के पास जरूर काला धन होगा।"

रमेश को भी उसकी बात सही लगी ।सुबह  शांति ही अम्मा से पहले उठ गई और घर का काम करने लगी ।रमेश भी आज जल्दी ही फैक्ट्री चला गया।रमेश के जाते ही शांति बिमला के पास आकर हस्ते हुए बोली," अम्मा जाइए आप को मंदिर जाना होगा ना? घर के काम मै कर लूंगी।इस उम्र में आपको ज्यादा काम नहीं करना चाहिए ।मै हु ना यहां जाइए आप।"

बिमला शांति की बात सुनकर हैरान रह गई लेकिन उसका जाना भी जरुरी था इसलिए वो जल्दी से चली गई।बिमला के जाते ही रमेश फिर से घर के अंदर आया और शांति से बोला," चली गई क्या अम्मा?"

शांति भी खुश होकर बोली," हा अभी अभी घर से निकल गई है । चलिए हम भी चलते है।"

दोनो घर को ताला लगाकर अम्मा के पीछे पीछे चले गए।अम्मा सीधे बैंक की तरफ चली गई और कतार में लग गई ।रमेश और शांति छुप कर देख रहे थे ।आज बिमला का नंबर काफी नजदीक था बस बिमला के आगे चार लोग बचे थे ।बिमला ने अपने साड़ी के पल्लू की गांठ खोलकर उस में  से पांच सौ रुपए के पुराने नोट निकाले।तभी रमेश और शांति बिमला के पास आ गए।शांति एक नजर बिमला पर डालते हुए रमेश से बोली," लो देखो अपनी आंखो से। मैं न कहती थी जरूर अम्मा के पास काला धन है ।देखो, देखो अम्मा के पास पुराने पाच सौ के कितने सारे नोट हैं।पता नही कितने दिन से बैंक आ रही है।अब तक कितने सारे नोटो को बदलवा चुकी है।चार महीने पहले जब घर का राशन खत्म हुआ था और आप की पगार नही हुई थी ।घर में खाने के लाले पड़े थे ।अम्मा के पास इतने पैसे होकर भी वे चुप बैठी रही एक कौड़ी तक नहीं दी की हम राशन भरे और आज देखो कैसे नोट पे नोट बाहर आ रहे हैं ?"

रमेश भी बिमला की तरफ देखकर बोला," अम्मा अगर तुम्हारे पास इतने सारे पैसे थे तो मुझे बता देती ।मै ला देता बदलवा के नोट ।हम तो तुम्हारे अपने है फिर हम से क्यू छुपाया तुमने ?"

बिमला के चेहरे का रंग उड़ गया था रमेश और शांति को वहा देखकर ।वो घबरा कर बोली," नही बहु।आज ही मेरा नंबर आया है और बस इतने ही रुपए है मेरे पास।मैने ये तीन साल से जमा कर रखे है ।रमा पेट से है ना ?तो सोचा उसके लिए कुछ अच्छी खाने की चीजे ले लू ।बेचारी गरीब है उसके बारे में कौन सोचेगा? "

शांति बिमला के हाथ से पैसे छीनते हुए बोली," तो हम कौनसे अमीर है? पैसों की जरूरत तो हमे भी है और रमा के बारे में उसका पति सोच लेगा ।आप रहती हमारे पास हो ।खाती पीती भी हमारा ही हो और पैसा बेटी पे खर्च करना चाहती हो?ये लो जी नोट बदल कर ले आओ ।मै और अम्मा घर चले जाते है।इस बार हम दिवाली अच्छे से मनाएंगे इन पैसों से ।आप मेरे लिए बनारसी साड़ी ले आना और अपने लिए नया कुर्ता सिलवा लेना।"

रमेश बिमला की जगह खड़ा हो गया और शांति बिमला का हाथ पकड़कर उसे घर ले गई।बिमला की तीन साल की जमा पूंजी एक पल में उस से छीन ली गई और उसका रमा के बच्चे के लिए सोने का गहना बनाने का सपना भी अधूरा रह गया।बिमला का काला धन अब रमेश और शांति के दिवाली की खरीदारी में बट गया था।

समाप्त


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सौरभ कटारे

सौरभ कटारे 2 महीना पहले