रेज़्यूमे वाली शादी - भाग 1 Daanu द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

रेज़्यूमे वाली शादी - भाग 1

यह कहानी है, दो लोगों की जो शुरू वहाँ से होती है, जहाँ पर बड़ी-बड़ी प्रेम कहानियां खत्म हो जाती है, उस दिन उस बड़े से घरेलू रेस्टोरेंट में एक चकोर मेज़ के आमने सामने वाली कुर्सियां लिए बैठे थे, ये दोनों, "अब बताओ मुद्दा क्या है?", "मुद्दा क्या है, दी ग्रेट अवनी को यह भी नहीं पता की मुद्दा हमारी शादी है मैडम!" यह सुनते ही अवनी की मंद सी मुस्कुराहट हल्के से चिड़चिड़ेपन में बदलती दिखी, जिसके साथ वो बोली "शादी, हमारी शादी, दी ग्रेटेस्ट ऑफ ग्रेट निलय वाधवा, मुझसे शादी करना चाहते हैं?, मजाक़ ना जा कर किसी और के साथ करो", "मजाक क्या कह रही हो यार, बाई दी वे ग्रेटेस्ट जैसा कोई वर्ड नहीं होता", "हाँ, पता है, तुम्हारे लिए ही बनाया है ताज़ा ताज़ा", अवनी नाक चढ़ाते हुए बोली, "पर यार सोचो अगर मजाक ही करना होता तो तुम्हारे और मेरे घरवालों को इसमें शामिल क्यों करता, मैं सच कह रहा हूं, अवनी और अगर मुझ पर यकीन नहीं था तो वादा निभाओ डॉट कॉम पे मेरा प्रोफाइल क्यों लाइक किया, क्यों हमसे मिलने के लिए हाँ करी?", निलय ने सफाई दी, "वो तो... वो तो मुझे लगा तुमने गलती से कर दिया होगा या कुछ, फिर सोचा क्यों ना मैं भी कर दो इसी बहाने तुमसे मिलना हो जायेगा, और तुम्हारा हाल चाल भी ले लूंगी", अवनी ने निलय को समझाते बोला, "और शादी, तुम्हें मुझसे शादी नहीं करनी है?", "सच कहुँ तो तुमसे शादी के बारे में मैंने सोचा ही नहीं", "तो अब सोच लो, 2 मिनट दिए तुम्हें", "ना", "हाँ?", "ना बोला मैंने तुम्हें सुनाई कम देता है?", "ना ही बोलना था, तो कम से कम 2 मिनट तो पूरे ले लेती इतना भी दिल नहीं दुखाना था मेरा, वैसे क्या मैं जान सकता हूं कि क्या वजह है, इतने गुड लुकिंग हैंडसम और तुमसे ज्यादा कमाने वाले लड़के को मना करने की, अच्छा ठीक है तुमसे ज्यादा नहीं तो तुम्हारे बराबर तो कमा ही लेता हूँ", अवनी की बड़ी हुई आंखों को नरम करने के लिए, निलय खुद को तुरंत ठीक करते हुए बोला ।
"हैंडसम, गुड लुकिंग और स्मार्ट, मैं ना तुम्हें तब से जानती हूं जब तुम स्मार्ट का 'स' भी ठीक से नहीं बोल पाते थे, और उस बच्चे निलय के आगे, इस बड़े निलय के हैंडसम और गुड लुक देख पाना बहुत मुश्किल है, पर मुझे ये बताओ कि तुम्हें मुझसे शादी क्यों करनी है?", "क्योंकि मार्केट में उपलब्ध विकल्पों में से तुम मेरे लिए बेस्ट हो", "तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता है, खैर मुझे नहीं करनी तुमसे शादी, तो फिर चले अब?"
"किसी से तो शादी करोगी, तो फिर मुझसे क्यों नहीं?, वो भी तब जब तुम अरेंज मैरिज ही कर रही हो ", अवनी को मनाने का आखिरी प्रयास करते हुए निलय बोला, "क्योंकि मिस्टर निलय वाधवा, एक म्यान में दो तलवारे नहीं टिक सकती, ओर मैं और तुम बिल्कुल उन तलवारो के तरह हमेशा एक दूसरे से लड़ते भिड़ते ही रहे हैं.. क्यों हमारी वो कॉलेज वाली लड़ाई भूल गए क्या?", "भूलना चाहूँ भी तो तुम मुझे भूलने कहाँ देती हो, आख़िर मिस अवनी मेहरा उस समय सही जो थी, वैसे देखो, अब तो अपनी गलतियां माननी भी सिख गया हूँ, अब तो हाँ कर सकती हो", निलय ने जवाब दिया।
"देखो अगर मैं सोचूँ भी तो बचपन से आज तक हम सिर्फ लड़े ही है, कभी क्लास में फर्स्ट पोजीशन के लिये, कभी ग्राउंड पे, और कभी यूँ ही, हमने कभी एक दूसरे को जाना ही नहीं", "हाँ तो क्या हुआ, अब जान लो", "अभी जान लो... तुम्हें पता भी हैं, की यहाँ अगर मैंने अभी हाँ कहा, तो अगले महीने ही शादी करा देंगे ये लोग", "सीरियसली, अगर ऐसा था, तो मिलने क्यों आई?", "क्योंकि शायद मझे भरोसा था कि मैं यहाँ से ज्यादा सेफ कहीं और नहीं हो सकती", अवनी अपने चेहरे को चढ़ाते हुए बोली।
"तो एक काम करते हैं हम ना यहाँ से जाकर ना कर देंगे और फिर उसके बाद 1 महीने के लिए, नहीं चलो कम से कम 2 महीने के लिए डेट करते हैं क्योंकि कहीं ना कहीं जानने वाली बात को मैं भी मानता हूँ, पर फिर भी कह सकता हूं कि मुझे जितना चाहिए उतना मैं तुम्हें जानता हूं , और फिर अगर तुम्हें सही लगे तो हम अपने घर वालों को बता देंगे और उनसे ज्यादा खुश कोन ही होगा क्योंकि उनके लिए तो यह अरेंज मैरिज ही होगी, क्या कहती हो मुझे अपने 8 हफ्ते तो दे ही सकती हो, प्लीज....", "हाँ ठीक है पर इस बीच अगर उन्होंने कोई और ढूंढ लिया तो?", "तो क्या मना कर देना हर्ट करने का जिम्मा सिर्फ मेरे लिए ही उठाया है क्या तुमने,पागल लड़की", "तुम्हें नहीं लगता तुम ज्यादा ही फ़्रैंक हो रहे हो, इतने भी अच्छे दोस्त नहीं है हम, और मुझे इसके बारे में सोचने का टाइम चाहिए थोड़ा", अवनी का टेबल पर पड़ा फोन उठाते हुए निलय बोला, "उम्मीद थी की लॉक नहीं होगा और नहीं है, उसमें कुछ टाइप करके पकड़ाते हुए बोला, "ये मेरा नंबर है आज रात तक का टाइम है तुम्हारे पास हाँ बोलने का और उसके बाद ना तुम कभी भी कह सकती हो, तुम्हारी इच्छा से जरूरी और कुछ नहीं होगा, चलो अब चले!!", इतना बोलते ही निलय अपनी कुर्सी से उठ गया और बोला, "हमारे कॉफी के खाली गिलासों पर और हमारी इस टेबल पर भीड़ की बड़ी नजर है, इससे पहले हमें कोई यहाँ से धक्का दे हम अपने घर वालों के पास चलते हैं"।

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Daanu

Daanu मातृभारती सत्यापित 4 महीना पहले

Indu Talati

Indu Talati 10 महीना पहले

Mina Tulsiyan

Mina Tulsiyan 11 महीना पहले