उस महल की सरगोशियाँ - 6 Neelam Kulshreshtha द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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उस महल की सरगोशियाँ - 6

एपीसोड - 6

महारानी चिमणाबाई के भाषण से ही सन १९२७ में पूना में भारत के प्रथम स्त्रियों के संगठन अखिल भारतीय महिला परिषद का शुभारम्भ हुआ था. जिसके लिए सरोजिनी नायडू व कमला देवी चट्टोपाध्याय जैसी स्त्रियों ने धन दिया था। वह इस महल की दीवारों में उन विचारों की आहट सुनने की कोशिश करती रही थी कि जो महारानी चिमणाबाई के दिमाग़ में इस शहर में लौटकर सरसराये होंगे कि क्यों नहीं हमारे शहर में स्त्री संगठन बन सकता ?और सच ही सन १९२८ में उन्होंने बड़ौदा आकर इस स्त्री संगठन की स्थापना करके स्त्रियों को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया था।

क्या इसीलिये इनकी पोती राजमाता के नाम के अस्पताल में मनोचिकित्सक है? उसे बहुत रोमांच होता है कि उसने इस राजपरिवार की तीन पीढ़ी के इंटर्व्यू लेकर बहुत नज़दीक से इनके बातचीत के शाही तौर तरीके, मिजाज़ देखें हैं। अस्पताल के उसके कमरे में जैसे ही उसने इंटर्व्यू लेने के लिए पैन खोला वह पोती तुनकमिजाज़ी से बोल उठी थी, "आई हैव ओनली फ़िफ़्टीन मिनट्स। जल्दी इंटर्व्यू ख़त्म कीजिये। आप राज्य परिवारों की महिलाओं पर सर्वे कर रहीं हैं मैंने मीना देवी झाला को फ़ोन कर दिया है, वह दस मिनट में यहां पहुंचतीं होंगी। "

तो इस तरह हुई थी चैनल के लिए मुर्गे फंसाने वाली मीना देवी से मुलाक़ात. प्रिंसेस की तुनकमिजाज़ी देखकर वह मन ही मन मुस्करा उठी थी क्योंकि जानती थी जब उसके प्रश्न फिसलने लगतें हैं, कलम अपने ईज़ाद किये शार्ट हेंड में ताल देती चलती है तो इंटर्व्यू देने वाला इस तरह खो जाता है कि उसे समय का ध्यान नहीं रहता। हुआ भी यही था . थोड़ी देर बाद आकर पच्चीस छब्बीस वर्ष की, लम्बी, भरे बदन वाली किसी रजवाड़े की राजकुमारी मीना देवी झाला, जो यहाँ के एक लोकप्रिय लोकल टी वी चैनल में पी आर ओ [पब्लिक रिलेशन ऑफ़िसर ]है, इस प्रिंसेस की सहेली, उन दोनों को अभिवादन करती बैठकर उनकी बातें सुनती रही थी ।

यहाँ के राजघराने की वह ख़ूबसूरत प्यारी सी राजकुमारी समाज से जुड़ी मानसिक समस्यायों के विषय में बताती भूल गई थी कि उसे पंद्रह मिनट बाद कहीं जाना था। वह उसे छिपी आँखों से देखती जा रही थी जिसे एक मध्यम वर्ग के लड़के से प्यार हो गया था और उसी से शादी करने वाली थी ये खजानों के ढेर में, फूलों में पली नाज़ुक राजकुमारी ।

उसने अपनी कलम बंद की तो मीना देवी झाला व्यग्रता से बोली थी, " प्लीज़ ! हम लोग चलें ?आई एम गैटिंग लेट। "

"ओ श्योर। "

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वह इसी मीना देवी की फ़िएट में बात करती चली जा रही थी।मीना देवी ने अनुरोध किया था, "` मुझे रास्ते में उसी होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में कुछ काम है। यदि आप माइंड न करें तो हम लोग दस मिनट वहाँ रुकते हुये चलें?"

"ओ के। "

जैसे उन्होंने उस इंस्टीट्यूट के प्रिन्सीपल के ऑफ़िस के बाहर पहुंचे, चपरासी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया था। बाहर तक प्रिंसीपल की किसी से फ़ोन पर बात करते हुये आवाज़ आ रही थी, ", "अच्छा आप ऎसा करिये मीना देवी झाला से मिल लीजिये . यू नो शी बिलोंग टु अ रॉयल फ़ेमिली .उसके ` रॉयल एटीकेट्स ` देखने लायक हैं .हमारा जो लोकल टीवी चैनल है उसमें पी आर ओ है ."

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"आपने सही सुना है कि उसकी डाइरेक्टर व ओनर लीना देवी देसाई हैं लेकिन बिल्डिंग हमारी है। "

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"इसलिये मैं कह रहा हूँ कि मीना देवी से कॉन्टेक्ट करिये। "

फ़ोन खत्म होते ही पटेवाला ने उन्हें अंदर जाने के लिये इशारा किया था। वे जैसे ही अंदर गए वे हंस पड़े, ", "थिंक ऑफ़ डेवल-- डेवल इज़ हीयर .वैलकम सोनल अभी तुम्हारी बात चल रही थी ."

"सर !आपने कैसे मुझे याद किया ?" वह उनके सामने बैठते हुए पूछा था व उसका परिचय करवाया था, "इनसे मिलिये, ये हैं जानी मानी जर्नलिस्ट ."

"ग्लेड टु मीट यू। "

फिर वे मीना देवी से कहने लगे थे, "तुम इस वर्ष जर्नलिज़्म डिप्लोमा कर लो . मैं इस वर्ष जर्नलिज़्म क्लास आरंभ कर रहा हूँ ."

` `अब मूड नहीं है . मैं मार्केटिंग में घुस गई हूँ ."

"मैंने तुमसे बात की थी न, हमे युनीवर्सिटी के जर्नलिज़्म डिपार्टमेंट में एन्ट्रेन्स टेस्ट देने वाले छात्रों की लिस्ट चाहिये ."

"सर !वहाँ सेकंड ईयर का स्टूडेंट मेरी जान पहचान का है . मैं अभी उसे फ़ोन मिलाती हूँ ."वह फ़ोन पर नंबर डायल करने लगी थी, "कौन शिरीष बोल रहे हो .?"

सर स्पीकर ऑन कर दिया था.उधर से शिरीष की आवाज़ आई थी, "हाँ ".

" मैं मीना देवी बोल रही हूँ .मेरा एक काम करेगा .मुझे तेरे डिपार्टमेंट की इस बार `एन्ट्रेन्स `में एपीयर होने वाले छात्रों की लिस्ट चाहिये ."

"वो किससे मिलेगी ?"

"ये लिस्ट क्लर्क के पास होती है .हैड से मैंने बात की थी वे तैयार नहीं हैं .तू क्लर्क से बात कर ."

"अगर उसने मना कर दिया तो --"

"तो चार पाँच सौ पकड़ा देना . मैं तुझे बाद में दे दूंगी . "

"चल हट ये गन्दा काम मुझसे नहीं होगा ."

"ओय !अगर नहीं करेगा तो मार्केट में फ़ेल हो जायेगा, एकदम फ़्लॉप जर्नलिस्ट ."वह बड़े नाटकीय स्वर में बोलने लगी, "जानता है जर्नलिस्ट्स का क्या काम है ?पेपर ऑन द टेबल, मनी अन्डर द टेबल -हा----हा--हा ."

इस बात से ख़ुश होकर प्रिंसीपल ने तिरछी आँखों से मीना को शबासी दी थी।

"ये सब मुझसे नहीं होगा ."

"सोच ले मैं बाद में फ़ोन करूँगी ."

उसने सर से कहा था, `ये बन्दा तो हाथ ही नहीं रखने दे रहा। कुछ और सोचतीं हूँ। दस दिनों में लिस्ट आपकी टेबल पर होगी। तो सर !मैं अब निकलती हूँ ."

" ऑफ़िस जा रही हो ?"

 

"जी हाँ, प्रिंसेस ने इनको हमारी डाइरेक्टर से मिलवाने के लिए कहा है, एज़ यू नो शी इज़ ऑलसो अ रॉयल लेडी। ये रॉयल लेडीज़ की लाइफ़ स्टाइल पर सर्वे कर रहीं हैं। "

उन्होंने मुस्कराते हुये कहा, "मैडम जी !कभी हम इंस्टीट्यूट वालों का इंटर्व्यू भी ले लीजिये। "

"आई विल ट्राई। " वह मन ही मन वह कुढ़ गई कि क्या वह `रॉयल एटीकेट्स` वाली सोनल की तरह दुकान खोलकर बैठी है ?

नीलम कुलश्रेष्ठ

kneeli@rediffmail.com