प्रतिशोध - 10 - अंतिम भाग Ashish Dalal द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

प्रतिशोध - 10 - अंतिम भाग

(१०)

रात को काफी देर तक लेपटॉप पर काम करते हुए नैतिक जाग रहा था । उसके कमरे की लाइट चालू देख राधिका उसके कमरे में दाखिल हुई । उसकी नजर लेपटॉप की स्क्रीन पर पड़ी । नैतिक ने कुछ छिपाने का यत्न किया तो राधिका ने उसका हाथ पकड़ लिया ।

‘पिछले कई दिनों से देख रही हूं । तू अब भी फेसबुक और इन्स्टाग्राम पर उसकी पोस्ट क्यों पढ़ता है ? तू आखिर चाहता क्या है जिन्दगी में ?’

‘जानना चाह रहा था कि वह खुश है भी या नहीं ।’ नैतिक ने जवाब दिया ।

‘अब वह जिये या मरे उससे तुझे क्या लेना देना । उसके बारें में सोचकर अपना दिमाग न खराब कर ।’ राधिका ने कहा और जबर्दस्ती से नैतिक के हाथ से लेपटॉप लेकर बंद कर दिया ।

‘फर्क तो पड़ता है । बचपन की दोस्त जो ठहरी ।’ जवाब देते हुए नैतिक के चेहरे पर एक रहस्यमयी हंसी छा गई ।

‘पगला गया ही तू । चल बहुत रात हो गई है । सो जा अब ।’ उसके कमरे की लाइट बंद कर राधिका कमरे से बाहर निकल गई ।

तभी नैतिक के मोबाइल की रिंग बजने लगी । नैतिक ने मोबाइल हाथ में लिया तो श्रेया का नाम इस वक्त अपनी मोबाइल स्क्रीन पर झलकता देखकर चौंक गया । इस वक्त रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे । उसने कुछ देर मोबाइल की रिंग बजने दी और फिर अचानक ही कुछ सोचकर उसने मोबाइल का ग्रीन बटन दबा दिया ।

‘हैल्लो !!’ कॉल कनेक्ट होने पर नैतिक ने कहा लेकिन जवाब में उसे श्रेया की चुप्पी महसूस हुई ।

नैतिक फिर से बोला, ‘हैल्लो !!’

श्रेया अब भी चुप थी । नैतिक ने वापस कुछ जोर से कहा, ‘हैल्लो श्रेया ?’

अब श्रेया ने जवाब दिए बिना उसका फोन कट कर दिया । वह अभी श्रेया की इस शंकास्पद व्यवहार के बारें में सोच ही रहा थी उसके उसके मोबाइल पर व्हाट्स एप मैसेज आया । 

‘आय एम सॉरी नैतिक । मैंने तुम्हारी जिन्दगी तबाह कर दी । इसका प्रायश्चित अपनी जान देकर भी करना पड़े तो अब कोई गम नहीं है । लव यू नैतिक ! गुड बाय ।’

अभी कुछ देर पहले श्रेया का उसे फोन कर कुछ नहीं बोलना और फिर अब उसका यह मैसेज पाकर नैतिक परेशान हो गया । उसका मन किसी अनहोनी होने की आशंका से भर गया । उसने तुरंत ही श्रेया का नम्बर डॉयल किया लेकिन मोबाइल की रिंग बजकर बंद हो गई । उसने फिर से एक पल की देरी किए बिना उसका नम्बर डॉयल किया लेकिन इस बार भी उसे निराशा ही हाथ लगी ।

‘नहीं श्रेया तुम ऐसा नहीं कर सकती ...’ वह मन ही मन बुदबुदाया और उसने तुंरत ही अपने मोबाइल से एक नम्बर डॉयल किया । 

‘बोल नैतिक । अब इत्ती रात को क्या काम पड़ गया ?’

‘अजय, तू जल्दी से श्रेया के घर जा और ...’ नैतिक ने कॉल जुड़ते ही हड़बड़ाहट में अजय से कहा । अजय उसका और श्रेया का कॉलेज के दिनों का कॉमन फ्रेण्ड था जो अब तक नैतिक के संपर्क में था ।

नैतिक की बात पूरी होने के पहले ही उसने उसकी बात काटते हुए जवाब दिया, ‘अभी ? क्यों क्या हुआ ? आधी रात को उसके घर जाना ....? ना रे बाबा ! मेरे भी बीबी बच्चे है ।’

‘तू मेरी बात पूरी तरह से सुन तो सही । अभी श्रेया का फोन आया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं फिर वाट्सएप पर गुड बाय का मैसेज छोड़कर अब मेरा फोन नहीं उठा रही है । पता नहीं क्या हो गया उसे ? मुझे डर है की वो कहीं कुछ ऐसा वैसा न कर ले । मैं अभी गांव से निकल रहा हूं लेकिन मुझे वहां पहुंचते हुए आधा घंटा तो हो ही जाएगा । तू तो उसके घर के नजदीक ही रहता है यार, दो मिनिट में पहुंच जाएगा ।’ नैतिक ने घबराहट में जल्दी जल्दी से कहा । 

नैतिक की बात सुनकर अजय ने कहा, ‘ठीक है, जाता हूं । कुछ नहीं होगा श्रेया को । वो इतनी कमजोर नहीं है कि जिंदगी से हार मान ले । तुम दोनों को अब भी एक दूसरे से प्यार है तो फिर अलग हुए ही क्यों ? तुम दोनों ने खुद ही अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली ।’ 

नैतिक ने अजय को थैंक यू कहा और तुरंत ही श्रेया के घर की तरफ जाने को तैयार हो गया । संयोगवश इस वक्त कमरे के दरवाजे के पीछे लगी खूटी पर श्रेया की पसंद का उसकी ऑफ व्हाइट और ब्लू जींस की जोड़ी लटक रही थी । उसने जल्दी से वो ही कपड़े पहन लिए अपने कमरे से बाहर निकल आया । 

राधिका ने आहट पाकर उसे इस वक्त बाहर जाते देखा तो टोका, ‘नैतिक !! इस वक्त कहां जा रहा है ?’

‘अभी अभी एक दोस्त का फोन आया था । वह बहुत मुसीबत में है तो जाना ही होगा । जल्दी ही लौट आऊंगा ।’ कहते हुए नैतिक घर से बाहर निकल गया ।

‘लोगो की भलाई करने की आदत में खुद की जिंदगी की भी परवाह नहीं करता । हे भगवान् ! सब ठीक करना ।’ मन ही मन बड़बड़ाते हुए राधिका वापस अपने कमरे में चली गई ।

नैतिक रात के अंधेरें में सुनसान पड़ी सड़क पर तेजी से बाइक दौड़ा रहा था । उसने ईयर फोन मोबाइल से कनेक्ट कर रखा था ताकि अगर अजय का फोन आये तो बिना रुके वह उससे बात कर सके । इतनी ही देर में उसके मोबाइल पर रिंग आई । 

‘हैल्लो !’

‘नैतिक, श्रेया दरवाजा नहीं खोल रही है । शायद सो गई होगी ।’ अजय श्रेया के घर के दरवाजे के बाहर खड़ा था और नैतिक से फोन पर बात कर रहा था ।

नैतिक ने फौरन उसे जवाब देते हुए कहा, ‘तू मकान के पीछे की तरफ जा । वहां उसके बेडरूम की खिड़की को जोर से खटखटा ।’   

‘तू पागल हो गया है ? रात को किसी के बेडरूम की खिड़की के पास मुझे किसी ने देख लिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे । मैं तेरे आने ला इन्तजार करता हूं । तू आ जा ।’ अजय ने उसे ऐसा करने से मना करते हुए कहा ।

‘अजय ! प्लीज यार ! कुछ नहीं होगा और हुआ तो मैं आ ही रहा हूं । इस वक्त मेरे प्यार की जिंदगी तेरे हाथों में है प्लीज दोस्त !’ नैतिक फोन पर गिड़गिड़ाया ।

नैतिक की कांपती हुई आवाज सुनकर अजय को सच में कुछ गलत होने की आंशका होने लगी और उसने ‘ठीक है । जाता हूं ।’ कहकर फोन डिस्कनेक्ट कर दिया ।

श्रेया के बेडरूम की एक खिड़की आधी खुली हुई थी । उसने हिम्मतकर खिड़की से अन्दर झांकने की कोशिश की । कमरे के अन्दर नाईट लैम्प की मध्यम रोशनी छाई हुई थी । उसे सबकुछ स्पष्ट सा तो नहीं दिखाई दे रहा था लेकिन उसे श्रेया बिस्तर पर अनमनी से बैठी हुई नजर आ रही थी । उसके एक हाथ में पानी का गिलास था और एक हाथ की मुट्ठी में उसने कुछ दबा रखा था । अजय थोड़ी देर उसकी हरकतों पर गौर करता रहा । वह बार बार अपनी बंद मुट्ठी खोलकर कुछ देख रही थी ।

तभी अजय ने खिड़की पर अपना हाथ मारा । आवाज होने से श्रेया का ध्यान खिड़की की तरफ गया ।

‘श्रेया !’ अजय धीमे से बुदबुदाया ।

तभी श्रेया अपनी जगह से उठ खड़ी हुई और पानी का गिलास बेड के पास साइड टेबल पर रखकर वह खिड़की के पास आ गई और एक हाथ से खिड़की बंद करने लगी । अजय ने खिड़की से अन्दर अपना हाथ डालकर उसे ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया । 

‘श्रेया ! मैं अजय हूं । मेरी बात सुन लो प्लीज ! नैतिक ने मुझे अभी यहां भेजा है और वह भी आ रहा है कुछ देर में ।’ 

अजय ने कहा तो श्रेया ढ़ीली पड़ गई । उसने अपना हाथ खिड़की पर से हटा लिया । इतनी देर में अजय ने अपने मोबाइल की फ्लेश लाइट चालू कर श्रेया के चेहरे पर डाली । श्रेया का चेहरा इस वक्त भावविहीन था । तभी अजय की नजर उसकी मुट्ठी की तरफ पड़ी ।

‘ये क्या है तुम्हारी मुट्ठी में और इतनी रात बिस्तर पर बैठकर क्या सोच रही थी ? आर यू ओके ?’ अजय ने पूछा ।

अजय की बात सुनकर श्रेया ने अपना हाथ थोड़ा ऊंचा कर मुट्ठी खोलकर हथेली में थाम रखी नींद की गोलियों को एक बार फिर से देखा और एक फीकी से हंसी के साथ बोली, ‘कुछ नहीं जिंदगी के साथ खेल रही हूं ।’

अजय को श्रेया की कही बात का मर्म पूरी तरह से तो नहीं समझ सका लेकिन इस वक्त नैतिक ने जिस तरह घबराहट के मारे फोन कर इधर आने को कहा था उसे यादकर वह श्रेया का इरादा समझ गया ।

‘श्रेया ! प्लीज डोन्ट डू दिस ! दरवाजा खोलो । तुम्हें नैतिक की कसम ।’ अजय ने उसे भावनात्मक रूप से अपने बातों में उलझाना चाहा ।

‘नैतिक ! मेरा नैतिक... लेकिन मैं तो उसे खो चुकी हूं ।’ श्रेया के चेहरे पर अब एक रहस्यमयी हंसी थी ।

‘नहीं श्रेया । वह अब भी तुम्हें अपनी जान से ज्यादा प्यार करता है । वह बस आता ही होगा अभी ।’ अजय ने श्रेया को समझाने का प्रयास किया ।

‘तब तो मुझे जल्दी से जाना होगा । मैंने उससे वादा किया था कि अब कभी उसकी जिंदगी में वापस नहीं आऊंगी ।’ श्रेया ने कहते हुए खिड़की बंद करने का प्रयास किया ।

‘श्रेया ! पागल मत बनो । दरवाजा खोलो ।’ यह नैतिक की दर्दभरी आवाज थी । वह श्रेया की अभी कही बात वहां आकर सुन चुका था । 

तभी श्रेया ने आगे बढ़कर बाहर की लाइट चालू कर दी और नैतिक का चेहरा गौर से देखने लगी । नैतिक घबराया हुआ सा खिड़की के पास खड़ा हुआ था । अजय अब उससे कुछ दूरी पर था । 

‘तुम आ गए । तुम्हें आखरी बार देखने की हसरत पूरी हो गई ।’ कहते हुए श्रेया ने अपनी मुट्ठी में थाम रखी सारी गोलियां अपने मुंह में डाल ली और तेज कदमों से बिस्तर की तरफ जाकर पानी का गिलास टेबल पर से उठाकर पूरा गिलास पानी पी लिया । 

यह सबकुछ आंख के एक पलकारे में ही हो गया । 

‘नहीं श्रेया ....नहीं ...’ नैतिक चीखा । उसने फुर्ती से खिड़की के अन्दर हाथ डालकर खिड़की के पास रहे दरवाजे की चिटकनी खोलने का यत्न किया लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया । तभी वह इस वक्त कोई और उपाय न पाकर दरवाजे को पूरी ताकत लगाकर जोर जोर से धक्का देने लगा । अजय अब उसकी मदद कर रहा था ।  

तभी अन्दर से कुछ गिरने की आवाज आई । नैतिक ने खिड़की से अन्दर झांका । श्रेया का हाथ लगने से ड्रेसिंग टेबल पर रखा हुआ कांच का फ्लावर पॉट नीचे फर्श पर गिर कर टूट गया था और श्रेया वहीं अपने घुटनों पर बैठकर अपने पेट को पकड़कर दर्द से तड़प रही थी । यह सब देखकर नैतिक और ज्यादा परेशान हो गया । उसने अजय से कहा, ‘प्लीज, कॉल वन जीरो एट इमिडीएट ।’

अजय अपने मोबाइल से कॉल करने लगा और नैतिक फिर से दरवाजे को खोलने की कोशिश करने लगा । शोर सुनकर श्रेया के पड़ौस में रहने वाले वर्मा जी जाग गए और कुछ आशंका होने पर वे अपने बेडरूम खिड़की से चिल्लाये, ‘कौन है वहां ?’

नैतिक हड़बड़ाहट में श्रेया के दरवाजे पर पूरी ताकत लगाकर वार किए जा रहा था । वर्मा जी को कोई जवाब नहीं मिलने पर हिम्मतकर वे बाहर आये । 

‘कौन है वहां ?’ दोनों घरों के बीच रही कम्पाउंड वॉल के पास खड़े होकर उन्होंने अजय और नैतिक पर नजर डाली । नैतिक को पहचानने में उन्हें देर नहीं लगी । उन्हें देखकर नैतिक को अचानक से याद आया कि श्रेया की मम्मी बाहर जाने पर अक्सर एक चाबी उनके यहां छोड़ जाया करती है ।

वर्मा जी की आवाज सुनकर नैतिक अब उनकी तरफ मुड़ा और घबराहट भरे स्वर में उनसे पूछा, ‘अंकल, आपके पास श्रेया के घर की एडिशनल चाबी है ?’

‘हां ! वन्दना जी एक चाबी मेरे यहां छोड़कर गई है । लेकिन तुम इस वक्त यहां क्या कर रहे हो ?’ नैतिक की बात सुनकर वर्मा जी ने पूछा ।

‘श्रेया ने सुसाइड अटैम्प किया है ।’

‘क्या ?’ नैतिक का जवाब सुनकर वर्मा जी चौंक गए । बिना कुछ कहे वे फौरन अन्दर चले गए और अगले ही चाबी लेकर वे मुख्य दरवाजे पर आकर खड़े हो गए ।

‘उसने अन्दर से चिटकनी नहीं लगाई होगी तो लॉक खुल जाएगा ...’ लॉक खोलते हुए वर्मा जी बोले । अगले ही पल दरवाजे को अन्दर की तरफ उन्होंने धक्का दिया और बोले, ‘शुक्र है दरवाजा खुल गया ।’

नैतिक दौड़कर बेडरूम में पहुंच गया । श्रेया फर्श पर अर्ध बेहोशी की हालत में पड़ी थी । उसकी हथेली पर टूटे हुए फ्लावर पॉट का कांच चुभने से हल्का सा खून भी बह रहा था । कुछ देर पहले उसे हुई उल्टी की बास से पूरा कमरा दुर्गन्ध से भर गया था । नैतिक ने श्रेया के पास बैठकर उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसके गालों पर हल्की सी चपत लगाते हुए कांपते हुए स्वर में बोलने लगा, ‘श्रेया, उठो । तुम ऐसा नहीं कर सकती ।’ 

श्रेया अपनी आंखें खोलने का प्रयास कर रही थी लेकिन उसकी आंखें खुल नहीं पा रही थी । तभी उसके होंठों पर थोड़ी सी हरकत हुई । नैतिक से ध्यान से उसे सुनने का प्रयास किया लेकिन वो टूटे हुए शब्दों में केवल नैतिक का नाम ही बोल पाई ।

इतनी देर में एम्बुलेंस भी आ गई और एम्बुलेंस की आने की आवाज सुनकर कॉलोनी के कुछ और लोग भी जागकर वहां जमा हो गए ।

XXXXX

चार दिनों के बाद श्रेया की हालत थोड़ी सुधार पर थी । नैतिक इन चार दिनों में अस्पताल से एक पल के लिए भी बाहर नहीं गया । इन चार दिनों में वह खुद अपने आपको भी जिन्दगी और मौत से जूझता हुआ महसूस कर रहा था । 

डॉक्टर ने आज श्रेया का हालचाल जानने के लिए आई सी यू में जाने की इजाजत दी थी । अपनी आंखों के आंसू पोंछते हुए वन्दना के आई सी यू से बाहर आते ही नैतिक अन्दर गया ।

श्रेया जाग रही थी । ऑक्सिजन मास्क उसकी नाक पर लगा हुआ था और उसका चेहरा फीका पड़ चुका था । नैतिक उसके सिरहाने आकर खड़ा हो गया और उसे ध्यान से देखने लगा । श्रेया उसे देखकर मुस्कुराई । जवाब में नैतिक उसके सिर पर हाथ फेरकर ईश्वर का आभार मानते हुए बोला, ‘थेंक्स गॉड !’

तभी अचानक श्रेया ने उसकी तरफ से अपनी आंखें फेर ली और उसका चेहरा भावविहीन हो गया । नैतिक ने उसका हाथ छूना चाहा तो श्रेया ने चीखने की कोशिश की । उसकी सांसे तेज हो गई । तभी वहां मौजूद नर्स ने नैतिक से कहा, ‘अब आप बाहर चले जाइए सर ।’ 

‘लेकिन ....क्या हो गया है श्रेया को अचानक ? वो इस तरह से क्यों रिएक्ट कर रही है ?’ नैतिक ने पूछा ।

‘ऐसे केसिज में अक्सर शार्ट टर्म मेमोरी लोस हो जाता है । आपकी पेशेंट अभी उसी सिचुएशन से गुजर रही है । प्लीज डोंट डिस्टर्ब हर । आप इस वक्त बाहर चले जाइए ।’ नर्स ने श्रेया के हाथ में इंजेक्शन देते हुए नैतिक से कहा ।

नैतिक की आंखों में आंसू उभर आये और वो चुपचाप बाहर आकर कोरिडोर में लगी बेंच पर आकर बैठ गया । इस वक्त राधिका भी अस्पताल में ही मौजूद थी । नैतिक की आंखों में आंसू देखकर उसने उसकी हथेली को धीरे से दबाया । 

नैतिक ने उसकी तरफ देखा और फिर अपनी जगह से खड़ा हो गया । दीवार पर सिर रखकर अब वह रो रहा था । उसे इस हालत में देखकर राधिका के साथ वन्दना भी उसके पास आकर खड़ी हो गई । 

‘मुझसे प्रतिशोध की आग में जलते हुए बहुत बड़ी गलती हो गई । मैंने खुद अपने हाथों से अपनी श्रेया को मौत के करीब पहुंचा दिया ।’

‘कुछ नहीं होगा श्रेया को । वो बिल्कुल ठीक हो जाएगी ।’ नैतिक की बात सुनकर वन्दना ने डरते हुए कहा । 

नैतिक पीछे मुड़कर एक बार वन्दना को देखकर मुस्कुराया और फिर राधिका को देखकर जोर से हंसा । दोनों को नैतिक का यह अप्रत्याशित सा व्यवहार समझ नहीं आया । वे दोनों कुछ रिएक्ट कर पाती इससे पहले ही नैतिक जोर जोर से गाने लगा । 

‘ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो । भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी ।

मगर मुझको लौटा दो । बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी ।’ 

राधिका ने उसका हाथ पकड़ लिया लेकिन नैतिक अपनी ही धुन में दो कदम आगे बढ़ा और आई सी यू के दरवाजे के पास आकर फिर जोर से गाने लगा, ‘वो बारिश का पानी, बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी ।’ 

‘नैतिक ! सम्हाल अपने आपको । ये क्या पागलपन कर रहा है ।’ राधिका जोर से चीखी ।

जवाब में नैतिक राधिका से लिपटकर रोने लगा । 

‘सबकुछ खत्म हो गया मम्मी । पहले उसने मेरी जिंदगी बर्बाद की और अब मैंने उसकी जिंदगी नरक बना दी ।’

‘अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है । सब ठीक हो जाएगा ।’ राधिका ने उसे समझाने का प्रयास किया । तभी वन्दना भी वहां आ गई ।

‘नैतिक ! सम्हालो बेटा अपने आपको ।’ वन्दना ने उसके सिर पर हाथ रखा ।

‘आंटी ! आपको तो सबकुछ ठीक करना आता है न ? आप मेरे और श्रेया के टूटे हुए खिलौने भी जोड़कर देती थी ना ? आप...आप प्लीज... इस बार सब ठीक कर दो । प्रामिस हम फिर से नहीं झगड़ेगें ।’ अचानक से नैतिक ने वन्दना का हाथ कसकर पकड़ लिया ।

वन्दना को नैतिक के इस तरह के व्यवहार में कुछ अजीब सा महसूस हुआ । उसने नैतिक को अपनी छाती से लगा लिया और बोली, ‘श्रेया अब ठीक है । तू अपने आपको सम्हाल ।’

‘ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो । भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी ।

मगर मुझको लौटा दो । बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी ।’ 

तभी नैतिक फिर जोर से गाने लगा और इस बार गाते हुए वो कोरिडोर से आगे जाते हुए सीढ़ियां उतरने लगा । तभी नर्स ने आई सी यू से बाहर निकलकर आवाज लगाई, ‘मि. नैतिक !’

नैतिक ने सुना नहीं तो राधिका जोर से चिल्लाई, ‘नैतिक !’

नैतिक ने पीछे मुड़कर देखा तो नर्स ने आगे कहा, ‘पेशेंट आपको बुला रही है ।’

नैतिक की आंखों में एक बार फिर से चमक आ गई और वो तेज कदमों से चलता हुआ आई सी यू रूम के अन्दर दाखिल हो गया ।

उसे देखकर श्रेया की आंखें गीली हो गई । वो नैतिक से कुछ कहना चाह रही थी लेकिन ऑक्सिजन मास्क लगा होने से वो बोल नहीं पा रही थी । नैतिक ने आगे बढ़कर उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया । श्रेया ने भी हल्के से उसकी हथेली को दबाया । नैतिक अब अपना सिर झुकाकर उसके कानों में कहने लगा, ‘आय एम् सॉरी श्रेया । मैं अब कभी तुम्हें परेशान नहीं करूंगा । तुम जल्दी से ठीक हो जाओ फिर हम दोनों साथ रहेंगे ...कभी भी जुदा न होने को ।’

नैतिक की बात सुनते हुए श्रेया के चेहरे पर एक मुस्कान छा गई । नैतिक अभी भी उससे कहे जा रहा था, ‘मैं अब तुमसे कभी दूर नहीं जाऊंगा । तुम भी मुझसे दूर मत जाना । आय लव यू श्रेया ।’   

तभी नैतिक ने महसूस किया कि श्रेया के हाथ की पकड़ उस पर ढ़ीली पड़ गई है । उसने श्रेया के चेहरे को ध्यान से देखा । वो अब भी मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी । तभी अचानक से उसकी सांसें जोर से चलने लगी । नैतिक ने घबराकर नर्स की तरफ देखा ।

नर्स ने श्रेया की पल्स चैक की और तुरंत की डॉक्टर को फोन किया । श्रेया अब सांस लेने में दिक्कत महसूस कर रही थी । नर्स ने श्रेया का हाथ पकड़ कर उसे इंजेक्शन देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया लेकिन तब तक श्रेया ने अपना सिर एक तरफ झुका लिया । उसकी आंखें बंद हो चुकी थी और उठती हुई सांसें थम चुकी थी । नैतिक बदवहास सा खड़ा सबकुछ देख रहा था । तभी डॉक्टर ने अन्दर प्रवेश किया और श्रेया को चैक किया । कुछ देर बाद कुछ प्रयास करने के बाद वे नैतिक की तरफ मुड़े और उसके कंधे पर हाथ रखकर सांत्वना देते हुए बोले, ‘आय एम् सॉरी । शी इज नो मोर ।’

नैतिक ने जैसे डॉक्टर की बात सुनी ही नहीं और चुपचाप भारी कदमों से चलकर आई सी यू से बाहर जाने लगा ।

‘बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी । मुझको लौटा दो ।’ धीमे स्वर में बुदबुदाता हुआ वह कोरिडोर में लगी बेंच पर बैठ गया । राधिका और वन्दना उसका इस तरह का रिएक्शन समझने की कोशिश कर ही रही थी कि डॉक्टर ने आई सी यू से बाहर निकलते हुए वन्दना से कहा, ‘हम आपकी बेटी को नहीं बचा सके । सॉरी ।’

डॉक्टर की बात सुनकर वन्दना को लगा वो गिर जाएगी लेकिन तभी राधिका ने उसे सहारा देकर सम्हाला और दोनों अन्दर चली गई । 

अब कोरिडोर में सबकुछ शांत था ।

समाप्त

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Suresh

Suresh 1 साल पहले

Madhu Sonie

Madhu Sonie 1 साल पहले

Swarnim Pandey

Swarnim Pandey 1 साल पहले

Anil Bazaz

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Mamta Mishra

Mamta Mishra 1 साल पहले