नमकीन चाय एक मार्मिक प्रेम कथा - अध्याय-7 Bhupendra Kuldeep द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

नमकीन चाय एक मार्मिक प्रेम कथा - अध्याय-7

अध्याय – 7

रायपुर में प्लेटफार्म पर खड़े होकर रमेश गाड़ी की टाईमिंग देख रहा था। रायगढ़ की आरे से आने वाली ट्रेन समय पर थी। दस मिनट की प्रतीक्षा के बाद आखिर ट्रेन प्लेटफार्म पर आ ही गई।
रमेश को प्लेटफार्म पर आया देखकर चंदन कंट्रोल नहीं कर पाया। वह उसके नजदीक आया और उससे लिपट गया। वह सुबक-सुबक कर रोने लगा।
क्या हो गया चंदन ? फिर से रो रहे हो, रमेश ने कहा।
हाँ यार थोड़ा सेंटी हो गया था। तुमको देखकर संभाल नहीं पाया। चल चलते हैं।
दोनों मिलकर चंदन के फ्लैट पर आ गए।
अच्छा हुआ ये फ्लैट मैंने अब तक रखा है। वरना रहने के लाले पड़ जाते। चंदन बोला।
क्यों भाई ? मेरा घर नहीं है क्या ?
है ना। जब मन करेगा वहाँ रहने आ जाऊँगा।
अच्छा, अच्छा ये बता रायगढ़ में काम कैसा था ?
काम तो अच्छा है यार। छोटी जगह है, डॉक्टर्स की संख्या भी कम है तो आराम ज्यादा मिलता है। चंदन बोला।
पर बॉस तेरे परफारमेंश से खुश हैं जल्दी तेरा प्रमोशन हो सकता है। सेल्स मैनेजर के लिए।
अच्छा ये तो खुशी की बात है, चंदन बोला।
ठीक है फिर मैं जाता हूँ। आज तो तेरी कुक आएगी नहीं इसलिए खाना खाने शाम को घर आ जाना। सुमन से भी तेरी मुलाकात हो जाएगी।
हाँ सुमन से तो मिलना ही है। मेरे यहाँ आने की एकमात्र वजह वही है। शाम को आता हूँ।
शाम को फ्रेश होकर चंदन रमेश के घर पहुँच गया। सब लोग हाल ही मैं बैठे थे उसने जाकर रमेश के माता-पिता के पैर छुए फिर रमेश से पूछा।
सुमन कहाँ है ?
सुमन अपने कमरे में है। रमेश बोला
मैं उससे जाकर मिलता हूँ।
ठीक है जाओ। रमेश बोला तुम्हें देखकर वो खुश हो जाएगी।
चंदन ने दरवाजे से देखा सुमन बेड पर अकेली बैठी हुई थी।
क्या मैं अंदर आ सकता हूँ।
ओह! चंदन जी, आईये।
कैसी हो गर्लफ्रैंड ?
आपको इससे मतलब ?
अच्छा मैडम तो नाराज है मुझसे। चंदन बोला।
क्यों नहीं होऊँगी ? बड़े बॉयफ्रैंड बने फिरते हो आप, कभी गर्लफ्रैंड का ख्याल आया।
कान पकड़ूँ या उठक-बैठक करूँ। क्या करना है बताओ ?
कुछ मत करो चुपचाप बैठे रहो आप। आज ख्याल आया अपने दोस्त का। उसकी आँखे गीली थी।
चंदन ने अपनी ऊँगलियों से उसके आँसू पोछे और कहा।
ख्याल तो रोज आता था सुमन। बस अपनी उलझनों में उलझ कर रह गया था।
वापस कैसे आ गए रिया की कुछ खबर मिली क्या ?
हाँ मिली ना एक भीषण हादसे में शायद उसकी मौत हो गई।
अरे! तुम तो इसे बहुत आसानी से बोल दे रहे हो, तुम्हें तकलीफ नहीं होती। ये बात कहकर।
होती है सुमन, पर तुम्हारी तकलीफ के आगे मेरे तकलीफ का कोई मोल नहीं। आज मैं तुम्हारे सामने बहुत छोटा महसूस कर रहा हूँ। तुमको भी तमाम खुशियों का हक है जो सबको है, जो मुझे है। चंदन बोला।
पर क्या करूँ, चंदन जी, मैं हेल्पलैस हूँ। मेरा शरीर मेरा साथ नहीं दे रहा है। मैं जानती हूँ कि मैं धीरे-धीरे मर रही हूँ। मैं कैसे खुश रहूँ, यह कहकर वह रोने लगी।
चंदन थोड़ा आगे बढ़ा और उसको सीने से लगा लिया। सुमन अब भी सुबक रही थी। चुप हो जाओं सुमन। शरीर को बोलो कि तुम मुझे चाहे जितनी तकलीफ दो पर मरते दम तक मैं खुश रहूँगी।
मुझमें हिम्मत नहीं है चंदन जी। मैं टूटते जा रही हूँ, वो अब तक चंदन के सीने से लिपटी थी।
तुम लोगों से मिलो सुमन, बाहर निकलो, घूमने जाओ, खुली हवा में सांस लो, हर खुशी को जिओ, तुम्हें अच्छा लगेगा। जी भरकर जिओ, ताकि मरते वक्त ये ना लगे कि कुछ रह गया जो मैं नहीं कर पाई। खुशियों को अपने सामने बौना कर दो सुमन। जितना संभव हो अपने सपनो को पूरा करो। तुम खुद नहीं कर सकती तो मुझे बताओ मैं तुम्हारे सपनों को पूरा करूँगा।
अब उसने सीने से अपना चेहरा ऊपर उठाया और चंदन की आँखों में आँखे डालकर बोली।
पक्का पूरा करेंगे आप मेरे सपने को ? सुमन बोली।
तुम्हारी सौगंध सुमन अगर मेरी क्षमताओं में होगा तो जान देकर भी पूरा करूँगा।
तो सुनिए, मुझे मरने से पहले माँ बनना है।
चंदन डरकर एकदम पीछे हट गया।
सुमन!! वह एक क्षण के लिए ठिठक गया।
बोलिए ना, पूरा करेंगे आप। मुझे माँ बनना है, कम से कम बचे हुए एक हिस्से से तो अपने बच्चे को दूध पिला सकूँ।
चंदन का दिल एकदम पसीज गया। वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं रहा।
क्या हुआ चंदन जी। क्या मैंने आपसे कुछ गलत डिमांड कर दी।
नहीं सुमन। तुमने तो अपने मन की सच्ची बात कही है। इसमें कुछ भी गलत नहीं, तुमने एकदम सही डिमांड रखी की है। वह अवचेतन मन से उठा और सुमन के माथे को चूम लिया। उसके गाल को धीरे से दो बार थपकी दी और चुपचाप बाहर निकल गया। सुमन हतप्रभ होकर उसे देखते रह गई।
खाना खाकर वो सीधे अपने फ्लैट पर आ गया। बिस्तर पर लेटते ही अपने जीवन में घट रही घटनाओं पर चिंतन करने लगा। असल में वो अपने होने का अर्थ जानना चाहता था। किसलिए ईश्वर ने उसे यहाँ भेजा है, रिया से प्रेम करने या फिर सुमन को सहारा देने। रिया जीवित है या नहीं है। ये तो वो नहीं जानता था परंतु ये अवश्य जानता था कि सुमन जीवित है और उसकी आँखों के सामने वो मर रही है। उसने तो कल्पना भी नहीं की थी कि सुमन कुछ ऐसा डिमांड करेगी। वो उसकी इच्छा कैसे पूरी करेगा।
मैं रिया को धोखा नहीं दे सकता। मैंने रिया से सच्ची मोहब्बत की है। परंतु दुनिया में और कौन है जो इतना बड़ा बलिदान करके एक मरते हुई लड़की की इच्छा पूरी करेगा। क्या अच्छा है ईश्वर और क्या बुरा है मैं बिल्कुल समझ नहीं पा रहा हूँ मेरी मनः स्थिति एकदम कसमकस में है, मेरी मदद करो भगवान, मेरी मदद करो। ऐसा सोचते सोचते वह गहरी नीद में चला गया। उसकी अन्तरात्मा ने उसे झकझोर के रख दिया था। उसको कुछ भी विकल्प दिखाई नहीं दे रहा था। सुबह जब वो उठा तो वो विकल्प तलाश चुका था। उसने निश्चय किया कि वो सुमन का साथ देगा। वो उठा और तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गया।
उसने तय कर लिया था कि आज वो सुमन को जाकर बता देगा और पूरे परिवार के सामने अपनी बात रखेगा। बड़ा साहस चाहिए अगर इंसान को इस तरह का निर्णय लेना हो। चंदन जानता था इस बात को पर अब उसका निर्णय चट्टान की तरह अटल था। दिन भर वो रमेश के साथ रहा, परंतु इस संदर्भ में उसने कोई बात नहीं की। उसने सोचा पहले सुमन से बात करेगा फिर घरवालों को बताना उचित होगा।
शाम को ऑफिस के बाद वो फ्रेश होकर रमेश के घर पहुँचा। बाकी दिनों की तरह आज भी सभी लोग हॉल में बैठकर बातें कर रहे थे और सुमन अपने कमरे में थी।
अरे आओ चंदन बैठो। चाय पियोगे ?
नहीं। सुमन कहाँ है ?
वहीं अपने कमरे में। जाओ उससे मिल लो।
ठीक है मैं उससे मिलकर आता हूँ।
क्या मैं अंदर आ सकता हूँ सुमन ?
आप बार-बार पूछते क्यों हैं अंदर आने के लिए। सुमन ने बेड पर बैठे-बैठे ही कहा।
तुम लड़की हो ना सुमन।
तो ? सुमन ने फिर पूछा।
तो मर्यादा रखना जरूरी है ना।
पर मैंने तो आपको मर्यादा तोड़ने वाला ढूढने का आग्रह किया था।
उसी का तो जवाब देने आया हूँ सुमन।
बताइये ?
देखो सुमन मेरे लिए तो संभव नहीं कि इतनी जल्दी और इन परिस्थितियों में तुम्हारी इच्छा, तुम्हारे सपनों को पूरा करने के लिए किसी को खोज पाऊँ। इसलिए मैंने एक फैसला लिया है।
क्या ? सुमन ने पूछा।
मुझसे शादी करोगी ?
सुमन एकदम चुप हो गई।
मैं एक अनाथ लड़का हूँ सुमन। मुझे अपने माता-पिता और खानदान का कोई ज्ञान नहीं। अगर ऐसे लड़के को अपने लायक समझती हो तो मुझे स्वीकार कर लो।
नहीं, नहीं चंदन जी, मैं अपने स्वार्थ के लिए आपका जीवन बर्बाद नहीं कर सकती। सुमन रोने लगी।
मेरा तो पहले ही जीवन बर्बाद हो रहा था सुमन। रिया के जाने से मैं अपने आप को मार डालना चाहता था। मेरे आज जीवित रहने की वजह सिर्फ तुम हो।
नहीं चंदन जी मैं ये नहीं कर सकती, और जरूरी थोड़ी है कि मेरा हर सपना पूरा किया जाए। सबके जीवन में कुछ सपने अधूरे छूट जाते हैं। आप पहले से ही एक बंधन में है। रिया के प्रेम बंधन में, और अपने स्वार्थ के लिए मैं आपको रिया को भुलाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। ये मुझसे नहीं होगा।
मैं क्यों भूलना चाहूँगा रिया को सुमन। बल्कि मैं तो तुम्हें रिया समझकर प्यार करूँगा। उसके हिस्से की सारी खुशियाँ मैं तुम्हे देना चाहता हूँ।
और अगर वो मेरे जीते जी वापस आई तो ?
अभी तो कोई भी नहीं जानता सुमन को वो जीवित भी है कि नहीं। अगर वो इस धरती पर है और वापस भी आएगी तो भी मेरा निश्चय दृढ है। मेरा ईश्वर जानता है कि मैं कोई गलत फैसला नहीं कर रहा हूँ और अगर वो वापस आई भी तो इस बात को अवश्य समझेगी। वो एक बुलंद हौसले वाली न्यायपरक लड़की है मुझे उसे समझाने की जरूरत नहीं पडे़गी।
तुम मुझ स्वीकार करोगी कि नहीं ये बताओं तभी मैं तुम्हारे परिवार से बात करूँगा। चंदन बोला।
मेरे नजदीक आईये। सुमन बोली।
चंदन जैसे ही नजदीक गया सुमन उससे लिपट गई। चंदन ने भी खुले दिल से उसे अपनी बाहों में समेट लिया।
दो मिनट दोनों यूँ ही चुपचाप खड़े रहे फिर चंदन ने कहा।
मैं अंकल-आंटी और रमेश से बात करता हूँ सुमन।
सुमन पीछे हट गई। चंदन पीछे पलटा और जाने लगा तभी सुमन उसका हाथ पकड़ लिया।
क्या हुआ ? चंदन ने पूछा।
थैंक्यू बॉयफ्रैंड।
वेलकम गर्लफ्रैंड। पर थैंक्यू भर से अब काम नहीं चलेगा। थैंक्यू की जगह कुछ और देना होगा।
क्या ?
बताऊँगा। चंदन हंसते हुए बोला।
बदमाश। अभी से आप चालू हो गए।
अब इतनी हॉट लड़की सामने खड़ी हो तो जी तो करेगा ना ?
निकलो यहाँ से। सुमन बोली।
अच्छा बाबा जाता हूँ ।
चंदन हॉल में आया तो सभी लोग वहीं पर बैठे हुए थे।
अरे आओ चंदन। बात हुई तुम्हारी सुमन से। ऐसी एक दो दिन में आ जाया कर यार। सिर्फ तुम्हीं हो जिससे मिलकर वो खुश होती है। रमेश बोला।
अंकल-आंटी और रमेश। मुझे आप सभी से एक बात करनी है।
हाँ बोलो चंदन। रमेश ने कहा।
तुम्हें तो मालूम है रमेश मैंने रिया से कितना प्रेम किया है और उसके ना आने से अपने अपको बर्बाद कर डालना चाहता था। उस दिन जब तुमने फोन किया और कहा कि हम एक साथ मिलकर दुखों का सामना कर सकते हैं तो मुझे लगा कि मेरा पहला परिवार तो आप ही लोग हो। सो मैं अपने परिवार का साथ देने यहाँ चला आया। कल जब मैंने सुमन से बात की थी तो उसने मुझे अपने दिल की बात बताई उससे मैं बुरी तरह आहत हो गया।
ऐसी कौन सी बात है चंदन ? रमेश ने पूछा।
सुमन माँ बनना चाहती है रमेश।
ओह! ये कैसे संभव है चंदन। एक तो उसके शरीर मे कैंसर की दवाईयाँ जा रही है और दूसरा इन परिस्थितियों को जानते हुए कि वो ज्यादा दिन जीवित नहीं रहेगी, कौन उससे शादी करेगा ?
मैं करूँगा रमेश। चंदन बोला।
तुम पागल हो गए हो चंदन। तुम तो सारी परिस्थितियों को अच्छे से जानते हो फिर तुम अपना जीवन बर्बाद क्यूँ करना चाहते हो ?
अपनी फैमिली को सपोर्ट करने से जीवन बर्बाद होता है क्या रमेश। उल्टा दुगुनी खुशी मिलती है। जीवन मैं पहले बर्बाद कर रहा था रिया के ना मिलने से। मैंने सुमन को बड़ी मुश्किल से कनवींस किया है, अब आप लोग भी कनवींस हो जाइए प्लीज।
हमें कोई आपत्ति नहीं है बेटा। रमेश के पिता ने कहा रमेश की आँखों से आँसू आ गये वो उठकर चंदन को गले लगा लिया।
रमेश एक सप्ताह के अंदर पूरी तैयारी करो हम अपनी बेटी की शादी धूमधाम से करायेंगे। उसको ये ना लगे कि हमने कुछ कमीं की। रमेश के पिता ने कहा।
जी पिताजी। मैं करता हूँ एक मिनट जाकर सुमन को भी बता देता हूँ। रमेश बोला।
आओ चंदन तुम भी चलो सुमन के पास । रमेश बोला।
सुमन शांत बैठी थी। उसे थोड़ा भय लग रहा था और अचानक उसने चंदन और रमेश को अंदर आते देखा। वो सिर झुकाए रखी थी।
सुमन इधर देखो। रमेश ने पूछा।
सुमन ने सिर झुकाए रखा।
क्या ये लड़का तुमको पसंद है। शादी करोगी इससे ?
सुमन ने हाँ में सिर हिला दिया।
तुम जानती हो ना येरिया से प्रेम करता है।
सुमन ने फिर से हाँ में सिर हिलाया।
तब भी करना चाहती हो शादी ?
सुमन ने फिर से हाँ में सिर हिलाया।
इधर आओ। रमेश ने कहा।
सुमन उठकर रमेश के पास आई। रमेश ने उसका सिर उठाया और उसके माथे को चूम लिया।
खुश रहो। एक सप्ताह के अंदर मैं तुम दोनो की शादी करा दूँगा और सारे रश्मो रिवाज के साथ इतने धूमधाम से कराऊँगा कि सारा शहर देखेगा।
तुम्हारी कोई और इच्छा हो तो बताओं उसे मैं अवश्य पूरा करँगा। रमेश बोला।
और मैं भी, चंदन बोला।
थैंक्स चंदन।
थैंक्स किसलिए यार।
बस ऐसे ही।
चंदन मुस्कुरा दिया।
चलो अब मैं चलता हूँ, कल ऑफिस में मिलते हैं।
दूसरे दिन रमेश ने शादी की तैयारियाँ चालू कर दी। उसमें चंदन भी उसको मदद कर रहा था। क्योंकि उसके बगैर तो ये संभव नहीं था एक बड़े से मैरिज हॉल को बुक किया गया था, सारे अरेंजमैंट किए गए। सारे रिश्तेदारों को तथा सारे मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया।
जिस दिन रश्मों की शुरूआत होनी थी उसी दिन सुमन की तबियत बिगड़ गई।
रमेश सुमन को लेकर अस्पताल जाने लगा तो सुमन बोली।
भैया, चंदन जी को बुलाइये।
पहले तुम अस्पताल चलो। रमेश बोला।
बुलाईये ना भैया प्लीज। मैं चाहती हूँ वो मुझे इस स्थिति में देखे और मेरा इलाज होते भी देखें।
रमेश ने चंदन को बुलवा भेजा।
क्या हुआ सुमन ? चंदन आते ही बोला।
वो जोर-जोर से हाँफ रही थी। उसे गले की गाँठ में दर्द हो रहा था।
देख लो चंदन जी। मेरे साथ आपको ऐसे ही जीना है अब भी वक्त है आपके पास विचार कर लीजिए। सुमन बोली।
मुझे क्या इतना कमजोर समझती हो सुमन। कि मेरी परीक्षा लेने के लिए बुलाई हो। मुझे तुम्हारे अविश्वास से बहुत तकलीफ हुई सुमन। तुमने मुझे चोट पहुँचाया । उसकी आँखे गीली हो गई।
सुमन ने चंदन का हाथ पकड़ा और कहा - मुझ माफ कर दीजिए चंदन जी। मेरा आपको चोट पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। चलिए मुझे हॉस्पिटल ले चलिए।
सुमन को गाड़ी में बिठाओं रमेश, हॉस्पिटल लेकर चलते हैं।
डॉक्टर ने बताया कि दिन ब दिन गाठें बड़ी होती जा रही है वो उन्हें दवाईयों से रोकने की कोशिश तो कर रहे है। परंतु रेडियोथेरेपी भी चालू करनी पड़ेगी।
मैं नहीं कराऊँगी रेडियोथेरेपी सुमन बोली।
अरे यार तुम भी क्या करती हो। हम डाक्टर साहब आपके मुताबिक ही चलेंगे। कब से चालू करनी होगी रेडियोथेरेपी। चंदन बोला।
शादी का कार्यक्रम हो जाए फिर प्रत्येक 15 दिन में एक बार चालू करेंगे।
अच्छा डॉक्टर साहब मुझे एक चीज पूछनी थी, सुमन के माँ बनने की संभावना कितनी है ?
ये तो मैं आश्वस्त होकर नहीं कह सकता क्योंकि कैंसर की दवाईयों से हारमोनल इम्बैलेंस हो जाता है। अगर हारमोन्स को ठीक किया जा सके तो माँ बन सकती है। इसके लिए कैस हिस्ट्री के साथ आपको किसी गायनकालोजिस्ट से सलाह लेनी पड़ेगी।
अच्छा सर थैंक्यू। इसका दर्द तो इन दवाईयों से चला जाएगा ना ?
हाँ पर बीच-बीच में उठते रहेगा। जल्द ही रेडियोथेरेपी करनी पडे़गी।
ठीक है डॉक्टर साहब।
वो सुमन को घर ले आये। डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया था करके सुमन सो गई थी। इस दिन की सभी रश्मे अधूरी रह गई।
अगले दिन वह थोड़ा बेहतर फील कर रही थी। इसलिए तैयार होकर सभी संस्कारों में भाग ली। जब भी विवाह का ढोल उसके आंगन में बजता था वो इमोशनल हो जाती थी।
अगले दिन उसके फेरे थे। सुमन ने तो इन सब की कल्पना भी नहीं की कि उसको ये सब मिल जायेगा। ईश्वर उस पर अचानक बहुत मेहरबान हो गया था। फेरे के वक्त उसकी आँखे जब भी चंदन की ओर देखती, गीली हो जाती थी। चंदन उसकी ओर देखकर मुस्कुरा देता था, और अगले दिन उनका धूमधाम से रिसेप्शन हुआ। उनके परिवार और समाज के सैकड़ो लोग इस शादी में पहुँचे थे और ज्यादातर लोगों को सुमन के बारे में ज्ञात था कि वो कैंसर जैसी भयानक बीमारी से जूझ रही है और चंदन उसे हिम्मत दे रहा है इसलिए लोगों के मन में चंदन के लिए ज्यादा संवेदनाएँ थी।
शादी के बाद विदाई के वक्त रमेश ने चंदन से कहा तुमने अपने अहसान तले हमको दबा दिया दोस्त।
ऐसा क्यों बोल रहे हो रमेश। इसमें मेरा भी तो स्वार्थ था मुझे भी तो रिया के गम से उबरना था। हमने सिर्फ एक दूसरे की मदद की है एहसान नहीं किया है। आईंदा ऐसी बात कभी मत करना वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
रमेश ने मुस्कुराकर उसे गले लगा लिया।
अच्छा दोस्त अब मुझे सुमन को घर ले जाने की इजाजत दो। चंदन बोला।
सारा परिवार सुमन को विदा करने के लिए इकट्ठा हो गया। चंदन और सुमन ने सबके पैर छुए और गाड़ी में बैठ गए।
गाड़ी वहाँ से निकली और सीधे चंदन के फ्लैट के नीचे आकर रूकी।

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Bhupendra Kuldeep मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

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