तलाश.. एक औरत के अस्तित्व की - 5 RICHA AGARWAL द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • एक राजा ऐसा भी

    ---### *एक राजा ऐसा भी*  #### _मनकापुर रियासत का संक्षिप्त इ...

  • तुम और मैं - 7

    21 जनवरी की वो सुबह कुछ अलग थी। कान्हा बाइक लेकर आए थे और उन...

  • Bayaan - Part 18

    Part 18  डायरी का आखिरी पन्ना...मेरे हाथ अब काँपने लगे थे। प...

  • मंदिर में तुम - 7

    रात का समय था…कोरिया में लाइट्स चमक रही थीं…और सुनामी अपने क...

  • Sirf Tumhara - 6

    **Sirf Tumhara**  **Part 6**रुद्र की मुट्ठियाँ इतनी जोर से भ...

श्रेणी
शेयर करे

तलाश.. एक औरत के अस्तित्व की - 5

अब तक आपने पढ़ा..
M A के एग्जाम्स खत्म होने के बाद, सुहानी पूर्णतः MBA पेपर की तैयारियों में जुट जाती है। उधर, क्योंकि सुहानी की उम्र बढ़ती जा रही है तो उसके माता पिता को उसकी शादी की चिंता भी होने लगी है।पेपर देकर आयी सुहानी आज बहुत खुश थी पर अचानक हुई इस शादी की बात ने उसका मन खट्टा कर दिया। बाबा ने जिस गंभीरता से मां को आज लड़के के बारे में बताया, लगता है बाबा अब उसकी शादी का मन बना चुके हैं।

अब आगे......

"लड़का काफी पढ़ा लिखा है। MSC BED किया हुआ है । खुद का बिज़नेस करता है । छोटा सा परिवार है । घर में लड़के के मां बाप हैं, और दो बहनें हैं। लाडला, सबसे छोटा और एकलौता लड़का है। हमारी सुहानी बहुत खुश रहेगी वहां । मुझे लगता है बात आगे बढ़ा ही लेनी चाहिए ।"
बाबा माँ को बताए जा रहे थे पर जैसे सुहानी के कान तो सुन्न हो गए थे। उसे कहां कुछ होश बाकी था। एक पल में लगा, जैसे अब कुछ बाकी नहीं रह गया है।
"क्या उसके सपने पूरा होने से पहले ही टूट जाएंगे??"
"खुले आसमान में उड़ान भरने की उसकी ख्वाहिश, क्या बस एक ख्वाहिश ही रह जाएगी??"
"क्या उसको, उसकी ही ज़िन्दगी के फैसले लेने का हक नहीं है??"
सुहानी इसी कशमकश में खोई थी कि मां, बाबा की बात सुनकर एकदम खुश हो गई और बोली.." क्यों ना आप सुहानी के चाचाजी के साथ लड़के वालों के घर ,उनसे मिलने चले जाइए!! इस बहाने उनका घर परिवार भी देख आइएगा, संग संग लड़के वालो को अपने घर आने का न्योता भी दे आइएगा।"
माँ कि बात सुनकर जैसे सुहानी खुद को संभाल ही ना सकी। माँ को तो सब मालूम है ना..!! उसकी ख्वाहिश, उसके सपने, ज़िन्दगी को लेकर आगे की प्लान्स। फिर भी मां ने बाबा को मना करने के बजाय उनकी क्यों लड़के वालों से मिलने के लिए बोला??क्यों नहीं बताया बाबा को कि अभी सुहानी आगे पढ़ना चाहती है। ये उसकी शादी का सही वक़्त नहीं हैं। उसकी मां तो पहले उसकी सहेली, उसकी सखी थीं ना। सब तो बताया था सुहानी ने उनको। यही सब सोच कर वो रोआसूं हो गई थी।
क्यों हमें बचपन से सिखाया जाता है कि बच्चों को मां बाप की बातों को काटना नहीं चाहिए। वो जो करते हैं अपने बच्चों की भलाई के लिए करते हैं। हालांकि सुहानी आज इतनी आहत थी, कि उसके मन में आया कि बगावत कर दे। कह दे बाबा को कि अपनी ज़िन्दगी के फैसले वो खुद लेगी। उसके लिए क्या अच्छा है, क्या बुरा है , इसका फैसला भी वो ही करेगी। वो अच्छे से जानती है उसको ज़िन्दगी से क्या चाहिए। अभी उसे पढ़ना है, अपनी पढ़ाई पूरी करनी है पहले। अपने सपने पूरे करने हैं पहले, तब कहीं शादी का खयाल उसके मन में आएगा। वो चुपचाप बैठे सब सुने जा रही थी, और अपने अंदर उठते तूफ़ान को पिए जा रही थी। लेकिन ये वही संस्कार थे जिनके कारण वो आज मां बाबा से कुछ कह नहीं पाई थी। हां..!! उसको उनका फैसला स्वीकार नहीं था, लेकिन उनके फैसले को वो मना भी नहीं कर पाई थी।