तस्वीर का सच - १ Saroj Verma द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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तस्वीर का सच - १

अच्छा तो बच्चों कैसा लगा घर?
समीर ने सारांश और कृतज्ञता से पूछा।।
घर तो बहुत ही अच्छा है पापा लेकिन आपको नहीं लगता कि शहर से थोड़ा दूर है,सारांश ने अपने पापा समीर से कहा।।
हां दूर तो है लेकिन इतना बड़ा घर शहर के अंदर मिलना आसान नहीं था और ना शोर ना शराबा, एकदम शांत जगह है और फिर इतना बड़ा बगीचा भी तो है,बगीचे में झूला भी डला है और सामने इतना खूबसूरत तालाब है जिसमें बतखें तैर रही है अभी रह लो,तुम लोगों का मन ना लगे तो फिर से शहर वाले घर में वापस चल चलेंगे, अभी शहर वाला घर बेचा थोड़े ही है।।
ठीक है पापा!!सारांश बोला।।
अरे,समीर कहां हो? समृद्धि ने आवाज लगाई।।
यहां हूं, डियर!! बालकनी में बच्चों के साथ,समीर बोला।।
समीर तुम्हें नहीं लगता कि तुमने कुछ ज्यादा बड़ा घर खरीद लिया है ,वो भी इतनी पुरानी डिजाइन का और खरीदने से पहले ना ही पूछा और ना ही दिखाया,बस सीधे सरप्राइज बोल कर रहने के लिए लिवा लाए, समृद्धि शिकायत करते हुए बोली।।
तुम भी ना डार्लिंग!! इतना नाराज़ क्यो होती हो?अभी दो महीने तक तो बच्चों की छुट्टियां है, अभी रहकर देख लो , नहीं मन लगा तो शहर वाले घर में वापस चल चलेंगे, इतनी टेंशन मत लो अभी पुराना घर बेचा थोड़े ही है,समीर ने समृद्धि को समझाते हुए कहा।।
ठीक है,तुम कह रहे हो तो, समृद्धि बोली।।
तो फिर चलों,आज ही इस घर के लिए कुछ एंटीक पुराना फर्नीचर खरीद कर लाते हैं,अब घर एंटीक है तो फर्नीचर भी एंटीक ही होना चाहिए।।
यार! मैं आराम करना चाहता था, ऐसा करो मैं बच्चों के साथ घर पर रहता हूं तुम जाकर ले आओ,समीर बोला।।
समीर तुम्हारा हमेशा से यही रहता है, शुरुआत तो तुम कर देते हो, खत्म मुझे करना पड़ता है, समृद्धि बोली।।
चली जाओ ना डार्लिंग,समीर बड़े प्यार से बोला।।
अच्छा ठीक है अपना कार्ड लाओ,मैं अपने पैसे खर्च नहीं करूंगी, समृद्धि बोली।।
लो भाई,ऐसी भी क्या बात है?समीर ने कहा।।
और जाते जाते समृद्धि बोली, बच्चों को कुछ फ्रूट्स काटकर खिला देना।।
ठीक है!! समीर बोला।।
अच्छा, बच्चों तुम लोग यही खेलों, मैं तुम लोगों के लिए फ्रूट्स काटकर लाता हूं,समीर ने कहा।।
ओ.के.पापा बच्चों ने कहा।।
समीर किचन की ओर गया, बैग में से कुछ एपल और चाकू निकाले और प्लेट में काटने लगा तभी उसकी उंगली में चाकू लग गया, चाकू ज्यादा तेजी से लगा था,खून टपक टपक कर नीचे फर्श पर गिर रहा था,समीर को कोई भी कपड़ा नहीं मिल रहा था कि वो हाथ में लगा लें क्योंकि अभी सामान अनपैक नहीं हुआ था, उसने अपना रूमाल निकाला और उंगली पर रख लिया,देखा तो किचन के फर्श बहुत सारा खून टपक गया था।।
फिर सारांश को आवाज देकर बुलाया..बेटा सारांश.. देखना बेटा,जरा टेबल पर नेपकिन पेपर रखें होगे,ले आना यहां फर्श पर खून गिर गया है।।
जी पापा लाया!! और सारांश ने नेपकिन पेपर ले आया।
समीर ने सारांश से कहा,बेटा खून तो पोछना।।
किस जगह पाप, सारांश ने पूछा।।
समीर बोला,इधर पर जहां मैं पहले खड़ा था।।
लेकिन पापा आप कहां खड़े थे, यहां तो कहीं भी खून नहीं दिखाई दे रहा।।
फिर समीर ने ध्यान से देखा, वाकई खून कहीं नहीं था।।
समीर बोला, अभी तो यही था, कहां गया।।
पापा लगता है आपको कोई वहम हुआ है,सारांश बोला।।
नहीं बेटा,देख मेरी उंगली कटी है,समीर ने उंगली से रूमाल हटाया तो वाकई वहां कोई भी चाकू से कटे का निशान नहीं था।।
लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है,समीर सोच रहा था।।
फिर उसने कटे हुए फल बच्चों को दे दिए और बैठकर सोचने लगा कि ऐसा कैसे हुआ।।
थोड़ी देर में कृतज्ञता बोली, पापा मैं तालाब के पास जाऊं,बतख देखने।।
समीर बोला, ठीक है लेकिन पानी के नजदीक मत जाना,बस बतखो के साथ खेलकर वापस आ जाना।।
कृतज्ञता बोली, थैंक्यू पापा और चली गई खेलने।।
उधर समीर झूला झूल रहा था तो पता नहीं एक मरा हुआ चमगादड़ पेड़ से उसके ऊपर गिरा,वो चीखकर झूले से दूर भागा।
चीख सुनकर,समीर बाहर आया,पूछा कि क्या हुआ?
सारांश ने कहा, पापा देखिए,ये कुछ मेरे ऊपर पेड़ से गिरा था तो मैं डर गया।।
समीर बोला,ये तो चमगादड़ है, यहां जंगल ज्यादा है इसलिए शायद आ जाते होंगे।।
तब तक कृतज्ञता भी आ गई थी चीख सुनकर, उसके हाथों में एक पुरानी सी गुड़िया थी।।
समीर ने पूछा,ये कहां से मिली।।
कृतज्ञता बोली, पापा!! उधर तालाब के पास एक लड़की बेटी थी लम्बे बालों वाली,उसी ने दी।।
समीर बोला, ठीक है।।
तब तक समृद्धि भी आ गई थी शापिंग करके, एक छोटा ट्रक भी था सामान से भरा हुआ,वो अपनी पसंद का फर्नीचर ले आई थी।।

क्रमशः___
सरोज वर्मा___