वो थॉमस था Devendra Prasad द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • Rajkumar

    आचार्य गंधर्व ने करीब १९ साल के युवा राजकुमार के हाथ मे तलवा...

  • उसकी साया !! - 3

    यादों की जंगमल्हार ने देखा कि उसका अपना हाथ अब पूरी तरह पारद...

  • तेरे मेरे दरमियान - 107

    उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी...

  • विक्री - 6

    एक पल में सब कुछ बदल जाता है। यह बात मीरा ने आज तक सिद्धांत...

  • छोटी बेटी

    तृषा अपने घर की छोटी बेटी है। शुरू से बहुत जिद्दी नक्चड़ी ,आल...

श्रेणी
शेयर करे

वो थॉमस था

बात उन दिनों की है जब मै श्री रामेश्वर मंदिर में रहता था / उस वक्त हम मंदिर में नए नए आये थे / मेरी उम्र करीब ६ साल थी/ मेरे पिताजी मंदिर के पुजारी थे / पहले तो पिताजी मंदिर में सुबह शाम आरती पूजा करने के लिए आते थे परंतु मंदिर वालो के आग्रह करने पर वे हमें भी मंदिर में ले आये / मंदिर में हमें रहने के लिए एक कमरा मिला जिसमे हम रहते थे मतलब माँ -पिता जी मेरी दोनों बहने और मै / मंदिर अंदर से काफी बड़ा था मंदिर के बाहर एक चाय की दुकान थी जो की काव्या के पिताजी की थी वे सब भी मंदिर के अंदर एक कमरे में रहते थे उनके घर में पांच सदस्य थे काव्या उसके माँ पिता और उसके दोनों बड़े भाई साहिल और अमित / इनके आलावा मंदिर में एक ७० साल का बूढ़ा आदमी रहता था जिसका नाम थॉमस था / वह एक कमरे में अकेला रहता था हलाकि उसकी तीन बैठी भी थी जो अलग कही और रहा करती थी / थॉमस खुद से ही खाना बनाता, बर्तन धोता अकेले रहने के कारन वह अपने घर के सारे काम किया करता था / काव्या के दोनों बड़े भाई थॉमस को बड़ा ही परेशान किया करते थे कभी उसे अचानक से तेज आवाज करके उसे डरा दिया करते थे तो कभी उसकी कमरे की दीवार पर मूत्र कर दिया करते थे परन्तु थॉमस को इन सब बातो से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था वह सिर्फ अपने में ही मस्त रहता था लेकिन वह कभी- कभी उन दोनों को तेज आवाज में डट फटकार भी लगा दिया करता था / मै थॉमस से ज्यादा मिलता नहीं था लेकिन जब में खेल रहा होता था तो थॉमस मुझसे कहता की पढोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलोगे कूदोगे तो बनोगे ख़राब लेकिन में हमेशा इसका उल्टा जवाब देकर वहा से भाग जाया करता था जब वह मुझसे ऐसा कहता तो वह मुझे अच्छा न लगता हलाकि थॉमस वास्तव में बहुत ज्ञानवान व्यक्ति था अधिक उम्र होने के कारण भी उसमे बिलकुल आलस्य नहीं था वह रोज दो- तीन बार अंदर कॉलोनी में जाया करता था और वह अपने सभी काम भी काफी कुशलता से किया करता था तथा मंदिर में शौचालय नहीं होने के कारण भी उसे इसके लिए बाहर तालाबों में ही जाना पड़ता था / एक दिन थॉमस सुबह से शाम तक गायब रहा और उसके कमरे में ताला लगा हुआ था काव्या के छोटे भाई ने उसके कमरे में ताला लगा देखा तो उसने कहा की आज यह कहाँ गायब हो गया तो इस पर उसकी माँ ने कहा कि पता नहीं गया होगा कही हमें क्या करना? रात्रि से सुबह हो गई लेकिन थॉमस का कहि कोई पता नहीं सबने सोचा कि अपनी बेटियों के घर गया होगा और सब अपने -अपने दैनिक काम में व्यस्त हो गये मै भी रोज कि भाति अपने स्कूल चला गया लेकिन जब दोपहर को काव्या का बड़ा भाई साहिल शौचालय को गया तभी उसे वहा एक आदमी पड़ा हुआ मिला जब उसने उसे देखा तो वह और कोई नहीं थॉमस ही था उसने उसे देखने के बाद सब लोगो को बुलाया सब उसे लेकर उसके घर तक लाये पर वह जब सबने उसे देखा तो थॉमस ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था जब मै अपने स्कूल से आया तो देखा कि थॉमस के घर के बाहर भीड़ लगी है मेने उस भीड़ को देखा तो अपनी मम्मी से पूछा कि यह क्या हो रहा है मम्मी ने कहा कुछ नहीं बेटा शांति से बैठ जा / धीरे धीरे समय बीतता गया अब थॉमस को गए हुए पंद्रह दिन से अधिक हो गए थे मेरे मन भी उसके बारे मै पता लगाने कि जिज्ञासा जगी मेने मम्मी से पूछा कि थॉमस कहा गया है मम्मी ने कहा वो मर गया है मेने उत्तर दिया कि कब तक आएगा मम्मी ने कहा कि मरने के बाद कोई वापिस नहीं आता/ मै उस समय काफी सोच मै पड़ गया कि आखिर थॉमस ऐसी कौन सी जगह गया है ?