दहेज एक विनाशकारी चिंगारी - 3 Uday Veer द्वारा महिला विशेष में हिंदी पीडीएफ

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दहेज एक विनाशकारी चिंगारी - 3

(एक लड़की बगीचे में खड़ी हुई किसी का इंतजार कर रही है, कभी बैठ जाती है, कभी उठ कर टहलने लगती है, और इस तरह उसे आधे घंटे से ज्यादा हो जाता है| आखिर तंग आकर चलने के लिए कदम बढ़ाती है, तभी उसे पीछे से कोई आवाज देता है, और वो रुक जाती है)

(वह एक लड़का है, पास आता है और आकर खड़ा हो जाता है, लड़की गुस्से में दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती है)

(लड़का जिसका नाम ‘वीर’ है लड़की उसे ‘वीर जी’ बुलाती है| लड़की का नाम ‘महिमा’ है लड़का उसे ‘माही’ बुलाता है| दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं)

वीर:- अरे, लगता है आज थोड़ी देर हो गई, एम सॉरी ‘माही’ मुझे कुछ जरूरी काम था, इसलिए देर हो गई| (मगर महिमा कोई जवाब नहीं देती है) तुम्हें पता है आज मैं बहुत खुश हूं, तुम्हें भी बताना है, अगर तुम नहीं सुनना चाहती तो कोई बात नहीं, फिर मैं जाता हूं|

महिमा:- हां सही है, मैं यहाँ खड़ी खड़ी मारी जा रही हूं, और तुम्हे कुछ पड़ी ही नहीं है| (और रोने लगती है)

वीर:- अरे माही, तुम्हारे लिए ही तो मैं यहां आता हूं, और वैसे भी तुम्हारे सिवा मेरा है ही कौन जिसे मैं अपने दिल की बात समझा सकूं या कह सकूं|

महिमा:- क्या बात है? आज बहुत खुश लग रहे हो|

वीर:- आज लक्ष्मी का फोन आया था, वह बहुत खुश लग रही थी, उसके घर अब सब कुछ ठीक है|

महिमा:- यह तो अच्छी खबर है, वैसे भी तुम्हारी बहन ने जिंदगी भर दुख ही झेले हैं, मैं तो भगवान से यही दुआ करती हूं, कि वह हमेशा खुश रहे|

(और दोनों में काफी देर तक यूं ही बातें चलती रहती है, दोनों खुश है और इधर उधर घूमते हैं और बातें करते रहते हैं)

(रात के 9:00 बजे का समय है, लक्ष्मी अपने कमरे में बैठी है और कुछ सोच रही है सामने मेज पर कुछ शराब की बोतल और गिलास रखे हुए हैं, तभी राजू आता है और कुर्सी पर बैठता है)

राजू:- भाभी आप की तबीयत कैसी है?

लक्ष्मी:- अब ठीक है, और तुम्हारी पढ़ाई सही चल रही है|

राजू:- सही चल रही है भाई| (और खामोशी छा जाती है, तभी राजू की नजर टेबल पर रखी शराब और गिलासों पर पड़ती है)

राजू:- भाभी ये शराब और गिलास, यहां भला कौन रखा है शराब के लिए|

लक्ष्मी:- ये सब तुम्हारे भैया के लिए है|

राजू:- क्या भैया घर में आकर शराब पीते हैं?

लक्ष्मी:- हां पीते हैं|

राजू:- लेकिन वे तो बाहर से ही शराब पीकर आते हैं|

लक्ष्मी:- पहले बाहर पीकर आते हैं, फिर घर में आकर पीते हैं, और फिर आपे से बाहर हो जाते हैं|

राजू:- अच्छा और अक्सर शराब पीकर ही भैया आपको मारते पीटते हैं, भाभी आप कब तक सहते रहेंगे इन पापियों के जुल्मों को, आप आवाज क्यों नहीं उठाते इन लोगों के खिलाफ, आपको आवाज उठानी चाहिए इन लोगों के खिलाफ|

लक्ष्मी:- सदियों से हम महिलाओं का शोषण होता आया है, और फिर आवाज उठाने से होगा क्या, कौन सुनेगा हमारी आवाज को, और वैसे भी हमारे पुरुष प्रधान देश में महिला हमेशा पिछड़ी रहीं है| वो तो शुक्र है कि तुम्हारे जैसे लोग हमेशा एक भाई की तरह हम औरतों का साथ देते हैं, वरना ना जाने औरतें कब की………..

(तभी रंजीत अंदर आता है, और रंजीत के आते ही राजू उठकर चला जाता है)

रंजीत:- ये यहां इतनी रात को क्यों आया था|

लक्ष्मी:- चला आया था तबीयत के बारे में पूछने|

रंजीत:- तबीयत के बारे में पूछने आया या फिर कुछ और, जरूर तुम लोगों के बीच कुछ चल रहा है|

लक्ष्मी:- ये कैसी बातें कर रहे हैं आप, राजू देवर है मेरा, मेरे लिए भाई जैसा है मेरे|

रंजीत:- अच्छा भाई, साली मुझे लगता है कि तुम लोग जरूर मेरे खिलाफ कोई षड्यंत्र रच रहे हो, वो तो मेरा भाई है, वो ऐसा नहीं करेगा, लेकिन जरूर तू ही उसे फंसाने के चक्कर में है साली, ताकि मुझे अपने रास्ते से हटा कर उसके साथ अपना चक्कर चला सके|

लक्ष्मी:- बस करो रंजीत, क्यों देवर भाभी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर रहे हो|

रंजीत:- (खींच के थप्पड़ जड़ देता लक्ष्मी के गाल पर) साली मुझसे जुवान लडाती है, तू अपने बाप के घर जा, मेरी शराब का पैसा घट रहा है, जाकर दहेज का बाकी 10000 रुपया और एक रंगीन टीवी लेकर आ| उससे पहले अपनी शक्ल नहीं दिखाना, वरना तुझे जान से मार दूंगा|

लक्ष्मी:- बाकी, कौन सा बाकी? मेरे पिताजी ने तुम्हारी सारी मांगे पूरी की, और कौन सी कमी रह गई, मेरे पिताजी ने तुम्हें बह सब कुछ दिया जो तुमने मांगा, और खुद जमाने के कर्जदार हो गए, रोज-रोज की मुसीबत से तो अच्छा है कि मैं जहर खा कर मर जाऊं|

रंजीत:- तो मर क्यों नहीं जाती बोझ बनी हुई है मुझ पर, ना जाने कितने अच्छे अच्छे घरों से रिश्ते आ रहे थे, लाखों रुपए दहेज में मिल रहे थे, मगर तेरे बाप ने आकर पांव पकड़ लिए, तुझसे शादी के लिए, नहीं तो मेरे लिए लड़कियों की कमी नहीं थी| चल मेरे लिए पैग बना कर ला|

(लक्ष्मी उसे गिलास में शराब लाकर देती है, और शराब पीकर टुन्न हो जाता है, और गधे की तरह जमीन पर गिर जाता है, और वही पड़ा रहता है)

क्रमश:..........