तेरा ज़िक्र

गहरे जख़्म मिलेंगे , इल्म था , दानिस्ता दिल लगाया पर ।
अंगारों पे पाँव रखे और इश्क़ को देखा छूकर ।।

Gehre Zakhm Milenge , Ilm Tha , Daanistaa Dil Lagaya Par |
Angaaron Pe Paanv Rakhe Aur Ishq Ko Dekha Chookar | |




हर एक घूँट में शामिल है तेरे लबों का ज़ायका ।
तभी तो हंसते हंसाते पी रहा हूँ ये ज़हर ।।

Har Ek Ghoont Mein Shamil Hai Tere Labon Ka Zaayka |
Tabhi Toh Hanste Hansaate Pee Raha Hoon Yeh Zehar | |




अभी तो वक़्त है अभी ज़रा ठहरो , अभी वो नहीं आयी ।
रुसवा इतनी जल्द भी न होने पाये ये सहर ।।

Abhi Toh Waqt Hai Abhi Zara Thehro , Abhi Wo Nahin Aayi |
Ruswaa Itni Jald Bhi Naa Hone Paaye Yeh Seher | |




चलो अब जो हुआ मियां सो हुआ अच्छा ।
कोई इत्तेफाक था या तय मुलाकात कोई फ़र्क़ नही हम पर ।।

Chalo Ab Jo Hua Miyaan So Hua Accha |
Koi Ittefaaq Tha Yaa Tay Mulaaqat Koi Farq Nahin Hum Par | |




तेरा ज़िक्र तेरी फिक्र , क्या इतना ही हक़ था मेरा ?
कभी तो कहा होता कि एक तिल भी है तेरे काँधे पर ।।

Tera Zikr Teri Fikr , Kya Itna Hi Haq Tha Mera ?
Kabhi Toh Kahaa Hota Ki Ek T'il Bhi Hai Tere Kaandhe Par | |




 © सुयोग्य सिंह "अविअदीज़" 























गहरे जख़्म मिलेंगे , इल्म था , दानिस्ता दिल लगाया पर ।
अंगारों पे पाँव रखे और इश्क़ को देखा छूकर ।।

Gehre Zakhm Milenge , Ilm Tha , Daanistaa Dil Lagaya Par |
Angaaron Pe Paanv Rakhe Aur Ishq Ko Dekha Chookar | |




हर एक घूँट में शामिल है तेरे लबों का ज़ायका ।
तभी तो हंसते हंसाते पी रहा हूँ ये ज़हर ।।

Har Ek Ghoont Mein Shamil Hai Tere Labon Ka Zaayka |
Tabhi Toh Hanste Hansaate Pee Raha Hoon Yeh Zehar | |




अभी तो वक़्त है अभी ज़रा ठहरो , अभी वो नहीं आयी ।
रुसवा इतनी जल्द भी न होने पाये ये सहर ।।

Abhi Toh Waqt Hai Abhi Zara Thehro , Abhi Wo Nahin Aayi |
Ruswaa Itni Jald Bhi Naa Hone Paaye Yeh Seher | |




चलो अब जो हुआ मियां सो हुआ अच्छा ।
कोई इत्तेफाक था या तय मुलाकात कोई फ़र्क़ नही हम पर ।।

Chalo Ab Jo Hua Miyaan So Hua Accha |
Koi Ittefaaq Tha Yaa Tay Mulaaqat Koi Farq Nahin Hum Par | |




तेरा ज़िक्र तेरी फिक्र , क्या इतना ही हक़ था मेरा ?
कभी तो कहा होता कि एक तिल भी है तेरे काँधे पर ।।

Tera Zikr Teri Fikr , Kya Itna Hi Haq Tha Mera ?
Kabhi Toh Kahaa Hota Ki Ek T'il Bhi Hai Tere Kaandhe Par | |














गहरे जख़्म मिलेंगे , इल्म था , दानिस्ता दिल लगाया पर ।
अंगारों पे पाँव रखे और इश्क़ को देखा छूकर ।।

Gehre Zakhm Milenge , Ilm Tha , Daanistaa Dil Lagaya Par |
Angaaron Pe Paanv Rakhe Aur Ishq Ko Dekha Chookar | |




हर एक घूँट में शामिल है तेरे लबों का ज़ायका ।
तभी तो हंसते हंसाते पी रहा हूँ ये ज़हर ।।

Har Ek Ghoont Mein Shamil Hai Tere Labon Ka Zaayka |
Tabhi Toh Hanste Hansaate Pee Raha Hoon Yeh Zehar | |




अभी तो वक़्त है अभी ज़रा ठहरो , अभी वो नहीं आयी ।
रुसवा इतनी जल्द भी न होने पाये ये सहर ।।

Abhi Toh Waqt Hai Abhi Zara Thehro , Abhi Wo Nahin Aayi |
Ruswaa Itni Jald Bhi Naa Hone Paaye Yeh Seher | |




चलो अब जो हुआ मियां सो हुआ अच्छा ।
कोई इत्तेफाक था या तय मुलाकात कोई फ़र्क़ नही हम पर ।।

Chalo Ab Jo Hua Miyaan So Hua Accha |
Koi Ittefaaq Tha Yaa Tay Mulaaqat Koi Farq Nahin Hum Par | |




तेरा ज़िक्र तेरी फिक्र , क्या इतना ही हक़ था मेरा ?
कभी तो कहा होता कि एक तिल भी है तेरे काँधे पर ।।

Tera Zikr Teri Fikr , Kya Itna Hi Haq Tha Mera ?
Kabhi Toh Kahaa Hota Ki Ek T'il Bhi Hai Tere Kaandhe Par | |



                       

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