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CHILD LABOUR

चाइल्ड लेबर एवं उससे बचने के उपाय

"चाइल्ड लेबर" ये दो शब्द पढ़ने में जितने आसान हैं समझने में शायद उतने ही या उससे कहीं ज़्यादा कठिन हैं।हमारे देश में लगभग हर दूसरा बच्चा चाइल्ड लेबर का शिकार है। चाइल्ड लेबर हमारे देश की गंभीर समस्याओं में से एक है। जब सोलह वर्ष से कम आयु का कोई बालक या बालिका अपना रोज़गार चलाने के लिए काम करते हैं,तो उनको "चाइल्ड लेबर" कहा जाता है। वह अपना घर चलाने के लिए हर वो प्रयास एवं हर वो क्रिया करते हैं जो उनके उम्र के बच्चों को शोभा नहीं देता और उन्हें ये सब कार्य नहीं करने चाहिए।जिस उम्र में बच्चों की आँखों में मासूमियत एवं कन्धों पे बस्ते होने चाहिए उस उम्र में इन बच्चों के कन्धों पे बोझ तो होता है परंतु इनके घर का,आँखों में सिर्फ और सिर्फ आंसू होते है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ हमारे देश में सबसे ज़्यादा चाइल्ड लेबर के किस्से मुम्बई शहर में सुनने तो मिलते हैं।

हम जब भी किसी दुकान पर जाते हैं तो अक्सर हम एक शब्द सुनते हैं "छोटू", दरअसल वे "छोटू" इस घिनौनी समस्या का शिकार हुए होते हैं और ये "छोटू" ही अपने घर के "बड़े" होते हैं। उनको ये सब छोटी उम्र से ही सिखा दिया जाता है।और वो ये समझते हैं की ये सब काम ही है उनकी किस्मत में।

हमारे देश में चाइल्ड लेबर के कई कारण है जैसे शिक्षा का अभाव न होना,पैसे की ज़रूरत,गरीबी,माता पिता का न होना इत्यादि। जिन बच्चों में शिक्षा का अभाव नहीं होता है उन्हें किसी भी विषय के बारे में किसी भी प्रकार की कोई भी समझदारी नहीं होती है। जो बच्चे गरीबी के माहोल में पले बड़े हुए होते हैं उनको पैसे की बहुत भीषण आवश्यकता होती है और वो अपनी ज़रूरत को पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं तथा वे कोई भी काम करने को तैयार हो जाते हैं।
चाइल्ड लेबर के चलते उन मासूमों को शिक्षा का अधिकार एवं वो सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं जिन पर उनका जन्म सिद्ध अधिकार होता है।

हम लोगों को ये बहुत आम बात लगती है क्योंकि हम लोग इसके बारे में गहराई से नहीं सोचते हैं मगर क्या किसी ने भी ये सोचा है की यदि इस समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया तो हमारे देश का भविष्य संकट में पड़ जायेगा क्योंकि बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं और यदि हम इन्ही का ख्याल नहीं रख पाये तो सब कुछ नष्ट हो जायेगा और हमारा देश मिटटी में मिल जायेगा।

आज हमारे देश की सरकार ने बहुत से ऐसे कानून एवं नियम बनाये हैं जिनके तहत चाइल्ड लेबर एक दंडनीय अपराध है।परंतु इसके बावजूद भी हमारे देश में चाइल्ड लेबर कम नही हो रहा है क्योंकि कुछ तो आम जनता की गलती भी है तो कुछ हद तक सरकार भी मिली हुई है।सरकार उन तमाम तस्करियों से घूस ले लेती है और फिर अपने आप को ऐसे प्रदर्शित करती है जैसे की उसे कुछ पता ही न हो।

उपर्युक्त अनुच्छेद में हमने सरकार कमियों पर तो प्रकाश डाल दिया अब बारी है अपनी यानि आम जनता की।हम अपने दैनिक जीवन मे हर पल छोटे बच्चों को काम करता हुआ देखते हैं परंतु हम लोग हमेशा शांत रहते हैं।आखिर क्यों..? सिर्फ इसलिए की वो बच्चे हमारे नहीं हैं.? सिर्फ इसलिए की हम उन्हें जानते नहीं है? क्या वो हम लोग जैसे नहीं होते हैं या उनको जीने का कोई अधिकार नहीं होता है?क्या उनकी ज़िन्दगी में सिर्फ उदासी ही है?क्या हम लोग ऐसा कुछ नहीं कर सकते या कदम उठा सकते जिससे उनका भला हो सके? हो सकता है जिन परिस्तिथियों में वो आज हो कल को उन्ही परिस्तिथियों में हमारे बच्चे भी हो..!! ।

जब यही बच्चे काम करते करते परेशान एवं इनके हाथ सिर्फ मायूसी और उदासी लगती है तब इनके अंदर की ज्वाला एक शैतान तो पैदा करती है और वही शैतान इनको जुर्म करने पर मजबूर करता है।तो इस तरह इनकी आधी ज़िन्दगी तो पहले उनकी मासूमियत छीन के निकल जाती है और आधी ज़िन्दगी कारागार में।

चाइल्ड लेबर से बचने के उपाय:

सबसे पहले तो हम लोगों को ये संकल्प करना होगा कि हम न ही तो चाइल्ड लेबर होते हुए देखेंगे और न ही तो इसे बढ़ावा देंगे और न किसी को देने देंगे।हम लोगों को अपनी तरफ से हर वो संभव कोशिश करनी होगी जिससे चाइल्ड लेबर को रोक जा सके। हम लोगों को सरकार की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा।हम लोगों को बच्चों को पढ़ने लिखने पे ज़ोर देना होगा और उनको पढाई की महत्वता समझानी होगी।हम होगों को ऐसे कई प्रोग्राम्स एवं स्कीम्स लागू करनी होंगी जिससे बच्चों का भला हो।

हम लोग जब भी बच्चों को काम करता देखे या ऐसे किसी भी चीज़ का शिकार होते हुए देखे हम लोगों को फॉरेन ही पुलिस को इन्फॉर्म करना होगा और सबसे एहम बात तो ये है की सभी बच्चों को अपने बच्चों की दृष्टि से देखना होगा।हम लोगों को कदम कदम पर बच्चों की मदद के लिए तैयार रहना होगा।

एक तरफ तो कहा जाता है की बच्चे भगवान का रूप होते हैं और एक तरफ बच्चों के भविष्य से खेल जा रहा है।हमारे समाज में जब भी कोई कुरीति जन्म लेती है तो लोग बातें तो खूब सारी बना लेते हैं एवं खूब सारे वादे कर लेते हैं परंतु जब किये हुए वादों को निभाने का वक़्त आता है तो हर कोई हाथ पीछे खीच लेता है।हमे इसके आगे बढ़ना होगा और संपूर्ण विश्व के बच्चों के कल्याण के बारे में न सिर्फ सोचना होगा बल्कि करना भी होगा।

सरकार को भी खूब सकती करनी होगी एवं ऐसा कोई भी शख्स जो ऐसी कुरीतियों को जन्म देता हो उस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाई करनी होगी।सरकार को तरह तरह के जागरूकता अभियान शुरू करने होंगे जिससे संपूर्ण भारत की आवाम् प्रेरित हो सके और सिर्फ चाइल्ड लेबर ही नही ऐसी सारी कुरीतियों के खिलाफ मिलकर एक आवाज़ उठाई जाए।

ये काम सिर्फ एक या दो लोग नही कर सकते हैं।अगर संपूर्ण भारत की जनता मिलकर ये प्रण ले ले की भारत में चाइल्ड लेबर नही होने देंगे तो विश्व की ऐसी कोई ताक़त नही है जो भारत को ऐसी कुरीतियों से दूषित कर सके और अपने भारत को ऐसी कुरीतियों के इरादों को पूरा कर सके।

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