पागल कौन और पगलाया कौन? Arvind Kumar द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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पागल कौन और पगलाया कौन?

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पागल कौन और पगलाया कौन


मेरे एक गाँव भैया थे। मतलब मेरे गाँव में रहते थे। और भैया लगते थे। भैया शीतला प्रसाद। और आप तो जानते ही हैं कि किसी ज़माने में अपने गाँव जवार में हर पुरुष या तो भैया या बाबू या चाचा-ताऊ, मामा, नाना और बाबा-दादा ही होता है। और लड़कियाँ और महिलायें बहन, दीदी, मौसी, मामी, चाची-काकी और नानी-दादी। अब तो खैर ज़माना बदल गया है। अब तो अगर मानों तो भगवान और न मानों, तो पत्थर या पत्थर की मूरत। इस उत्तर आधुनिकता के युग में सारे रिश्ते-नाते और प्रेम-भाईचारा अब सूख-साख कर ऐसे बिकाऊ माल में तब्दील हो गये हैं कि अगर आसानी से खप गए, तो खरे-खरे और नहीं तो खोटे-खोटे।

बहरहाल, भइया पढ़ने में बहुत तेज़ थे। बड़े दिमागदार। बड़े ज़हीन। वे एक बार जो चीज़ पढ़ लेते थे, वह उनको पूरी तरह से कंठस्त हो जाता था। तब बेसिक फोन, मोबाईल फोन, कारें और बाईक्स के लिए इतनी मारा-मारी और भेंड़िया धसान नहीं था। और मकानों पर भी तब नंबर-संबर नहीं हुआ करते थे। वरना नंबरों की वे श्रृंखलाएं भी तब उनकी उँगलियों पर बेधड़क नाचा करतीं। पर पूरे गाँव वासियों, हित-पहुनई, अरिचितों-परिचितों के नाम, उनके पते, उनकी सालगिरह, उनकी शादी का दिन, गाँव में कब किसका देहांत हुआ था, किसकी तेरहवीं किस दिन और किस तारीख को पड़ी थी और उसमें कितने ब्राह्मण घी पीने आये थे, वह सब उन्हें पूरी तरह से याद रहता था। इसके अलावा गणित के सूत्र, निर्मेय, परिमेय, विज्ञानं के फार्मूले और सिद्धांत आदि भी हमेशा उनकी जुबान की फुनगी पर रहते थे।

वे हर क्लास में हमेशा फर्स्ट आते थे। और हमारे जैसे कुछ ठस दिमाग के लोगों को छोड़ कर बाकी सबकी बधाई के पात्र बनते थे।

हम सभी ठस दिमागी उनसे सिर्फ इसलिए कुढ़ते थे, क्योंकि एक तो हमारे घर वाले हमेशा ही उनका उदहारण दे-दे कर हमारी जान खाते रहते थे। और दूसरे वे खुद भी हमें गाहे-बगाहे पकड़ कर हमारी बौद्धिकता की लानत-मलामत यानि कि ऐसी-तैसी करते रहते थे। फलाना प्रमेय सुनाओ। फलाना सूत्र बताओ। फलाने की खोज किस वैज्ञानिक ने और कब की थी? यही नहीं, कभी कभी तो वे हद ही कर देते थे। अच्छा यह बताओ कि गणित का यह वाला सवाल तुम्हारी किताब के किस पृष्ठ पर और किस नंबर पर है? इस सवाल के पहले और बाद में कौन सा सवाल है? न्यूटन कहाँ का रहने वाला था? आइन्स्टीन की बीबी का नाम क्या था? सूरज धरती से कितने प्रकाश वर्ष दूर है?

पढ़ते-लिखते याद करते और एक ही साल में दो-दो कक्षाओं को फलांगते भैया को अचानक ही पता नहीं कौन सी धुन सवार हुयी कि उन्होंने छः महीने में ही पूरी की पूरी डिक्शनरी याद कर ली। जी हाँ, चैम्बर्स की पूरी डिक्शनरी को रट्टा मार मार कर पूरी तरह से चाट लिया। और चाटते ही साला मैं तो साहब बन गया कि स्टाईल में पूरे अँगरेज़ तो नहीं, पर एक टिपिकल हिन्दुस्तानी अँगरेज़ की तरह का व्यवहार जरूर करने लगे।

करैला तो वैसे भी पहले से ही कड़ुआ था। पर हाय री हमारी किस्मत, अब तो वह नीम पर भी चढ़ गया। पहले तो यदा-कदा हम बच्चे ही उनके शिकार हुआ करते थे। पर अब तो गाँव का हर शख्स, चाहे वह बूढ़ा हो या जवान, औरत हो या मर्द और बच्चा हो या कि बच्ची उनकी अंग्रेज़ी शब्द-शक्ति का बुरी तरह से शिकार होने लगा। वे राह चलते कभी भी किसी को भी पकड़ लेते। और पूछने लगते कि फलाने शब्द की स्पेलिंग बताओ। यह बताओ कि डिक्शनरी में फलाना शब्द फलाने शब्द से पहले आएगा कि बाद में? साइक्लोजी की तरह और किस-किस शब्द में पी साइलेंट होता है? वगैरह-वगैरह।

फिर क्या था? पहले जो लोग शान से उनका उदहारण दे-दे कर हमें ताने मारते थे, अब वे भी उनके द्वारा आखेटित होने के कारण धीरे-धीरे उनसे चटने-कतराने लगे। और तत्परता से हमको उनके चंगुल से बचाने भी लगे।

धीरे-धीरे सिर्फ हमारे गाँव में ही नहीं, अगल-बगल के इलाकों, स्कूल और मास्टर लोगों के बीच भी यह बात जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी। और चर्चाएँ होने लगीं कि लगता है कि शीतलवा का दिमाग चल गया है। पहले तो ये चर्चाएँ काफी दिनों तक फुस-फुसाहट के रूप में चलीं। फिर वे मुखर होकर चारों तरफ फ़ैलने भी लगीं। भैया के घर वालों ने पहले तो इसे अटिदारी-पटीदारी और ईर्ष्या रखने वालों का कोई कुत्सित अफवाह भरा दुष्प्रचार समझा। और इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। पर जब पूरे गाँव को निपटाने के बाद भैया उनको भी उसी तरह से निपटाने लगे, तब जाकर उन्हें भी लगने लगा कि शितलवा का दिमाग वाकई चल गया है।

फिर क्या था? होने लगी भैया की ओझैती-सोखैती। झाड़-फूंक। और दवा-दारू। पर भैया का दिमाग कोई साधारण दिमाग तो था नहीं। इसलिए उस पर किसी भी उपाय का न कोई असर होना था और न हुआ। और उनकी हिन्दुस्तानी अंग्रेजियत कम होने के बजाय दिन पर दिन और बढ़ने लगी। और चैम्बर्स डिक्शनरी का वह कहर गाहे-बगाहे हरेक के दिमाग पर टूट-टूट कर गिरने लगा। अब घरवाले मरते क्या न करते? हार-पाछ कर लोग भैया को बाँध-लाद कर शहर के बड़े पागलखाने में भर्ती कराने के लिए ले गए।

पर वहां जो हुआ, वह तो और भी गज़ब था। पागलखाने के डाक्टर ने पूछा---हाँ बोलिए मिस्टर शीतला प्रसाद, व्हाट्स योर प्राब्लम?

---सर, इन फैक्ट आई डोंट हैव एनी प्राब्लम, बट दे हैव ए लाट्स ऑफ...सर, मुझे लगता है कि मेरे ये बिग ब्रदर एंड फादर...बोथ हैव गौन मैड...ये दोनों पागल हो गए हैं। और सर, ये लोग पागल इसलिए हुए हैं कि क्योंकि हमारे गाँव वालों ने इनका मजाक उड़ा-उड़ा कर इनको पागल कर दिया है।...आल आर इल्लिटरेट एंड फूल्स। आप इन दोनों को भर्ती कर लीजिये। आई हम्बली बेग यू, सर।

और इससे पहले कि डाक्टर कुछ और पूछे या बोले, भैया के बड़के भैया जोरों से चीख पड़े---सर, पागल हम नहीं, यह हो गया है। और इसी ने अपनी हरकतों से हम सब को भी पागल बना दिया है।

इस पर शीतला भैया हंसते हुए बोले---देखिये सर, मैं कह रहा था न? देखिये, बड़के भैया खुद ही मान रहे हैं कि ये लोग पागल हो गएँ हैं।...बट दिस इज रियली फनी एंड रेडिकुलस दैट दीज टू गाईज आर कालिंग मी मैड।...व्हाट ए फनी कामेडी?

इस पर भैया के पिताजी उखड़ कर चिल्लाने लगे---सर, आप इसकी बकवास पर बिलकुल भी ध्यान मत दीजिये। यह पागल है। और पूरा पागल है।

साथ ही भैया के भैया भी चिल्लाने लगे---हाँ सर, यह पागल है। आप खुद इसकी हरकतों को ज़रा गौर से देखिये।

भैया को भी गुस्सा आ गया---शट-अप यू बोथ मेंटली डीरेल्ड पर्सन्स। इसके बाद शीतला भैया ने अंग्रेज़ी में जो बोलना शुरू किया, डाक्टर का मुंह खुला का खुला रह गया। और भैया के भैया और पिताजी की चीख-पुकार को सुन-सुन कर अब उसको भी गुस्सा आ गया---वह तो मैं देख ही रहा हूँ कि कौन पागल है और कौन पागल नहीं है?

भैया के भैया और पिताजी को लगा कि डाक्टर कहीं शीतला भैया की बातों में न आ जाए। इसलिए वे थोड़ा और जोश और थोड़ा और ताव में आ गए---डाक्टर साहब, आप ख्वामख्वाह इस पागल की बातों में आ रहे हैं। आप हमारी बात मानिये, यह पूरा पागल है।

अब डाक्टर को बड़ा जोर का गुस्सा आया---चुप रहिये आप दोनों लोग। एकदम चुप। मुझे मत सिखाइए। मुझे अच्छी तरह से पता है कि कौन पागल है? और कौन पागल नहीं है?

डाक्टर साहब ने घंटी बजा कर अपने दो मुष्टंडे अर्दलियों को बुलाया---पकड़ लो इन दोनों बाप बेटों को। और अन्दर ले जाकर बंद कर दो। ये दोनों बड़े चालाक पागल हैं। एंड थैंक यूं, मिस्टर शीतला प्रसाद। आप निश्चिन्त हो कर घर जाइए। इन दोनों को एक लम्बे इलाज़ की सख्त ज़रुरत है।

बाप बेटे खूब चिल्लाये। खूब गिड़गिड़ाए। अर्दलियों को समझाया। डाक्टर साहब को समझाया। पर किसी ने उनकी एक न सुनी। थक हार कर वे चिल्ला चिल्ला कर डाक्टर और शीतला को गंदी-गंदी गलियां देने लगे। और डाक्टर साहब के इशारे पर अर्दलियों ने दोनों को ज़बरदस्ती खींच-खांच कर अन्दर बंद कर दिया।

इस तरह जो लोग पागलखाने में भर्ती कराने गए थे, वे खुद ही भर्ती हो गए। और जिसे लोग भर्ती करवाने गए थे, वह भर्ती करवाने वालों को ही भर्ती करवा कर बड़े शान से गाँव वापस लौट आया। गाँव वापस आकर भैया सबको अपनी अंग्रेज़ी में सुना-सुना कर कहने लगे----बोथ वेयर थिंकिंग दैट आई ऐम मैड। पर डाक्टरी जांच से पता चला कि वे खुद ही पगला गए हैं। इसलिए डाक्टर ने उल्टा खुद उनको ही पागलखाने में भर्ती कर लिया। पूअर गाईज। अब जब बिजली का झटका लगेगा, तो दिमाग ठिकाने आ जायेगा। क्या और कोई है इस गाँव में जो मुझे पागल समझता है? और पागलखाने में भर्ती करवाना चाहता है?