संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 7 Manoj kumar shukla द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 7

Manoj kumar shukla द्वारा हिंदी कविता

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (7) जेलों की सलाखों में..... जेलों की सलाखों में, अब वो दम कहाँ । खा- म - खा उलझ रहे, क्यों कोतवाल से । जमाने का चलन बदला है, कुछ आज इस कदर । ...और पढ़े