यह एक अनाड़ी और अंतर्मुखी लड़की की कहानी है जिसे अगवा कर 'स्वयंवधू' नामक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया। यह उसके लिए अमीर लोगों की मूर्खतापूर्ण आकर्षण के अलावा कुछ नहीं था और उसने अपने परिवार कि सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बना लिया, जो उसके छह फुट से अधिक लंबे बहु-करोड़पति अपहरणकर्ता के हाथों में थी। उसकी शुरुआत तो ठीक थी लेकिन कहते है ना जब ज़िंदगी बहुत आसानी से चलता है तभी ज़ोरदार तमाचा पड़ता है। माफिया के अप्रत्यक्ष शिकार से प्रत्यक्ष शिकार का खौफना सफर शरू होता है-

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स्वयंवधू - 1

मैंने सुना था कि ज़िंदगी सभी को मौका देती है, यहाँ तक कि उसे भी जो इसके लायक नहीं मैंने सोचा कि मेरे पास भी एक मौका है, लेकिन यह मेरा भ्रम था, वो आज मिटने वाला था... कितना लंबा लाइन है। आधे घंटे से यहाँ खड़े हैं, और कितना वक्त लगेगा?! , मैं शिकायत करते हुए लाइन में खड़ी थी, चुप-चाप खड़े रहो मैं भी तो यह खड़ा हुआ हूँ! , भाई मुझे डांट रहा था, तुम्हें तो आदत है, ना...भाई , उसके ऊपर टेकी लेने की कोशिश कर रही थी, पीछे हटो गधी! मुझे तुम्हारी एक शिकायत नहीं सुननी। तुम्हारे ...और पढ़े

2

स्वयंवधू - 2

"...फिर से कहना?", मुझे एक पल के लिए अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ,"अभी नहीं!", वह इतना शांत था कि वह इस जगह का मालिक हो।(त-तुम! मैं जानती थी! मैं जानती थी! मुझे पता था ये मानसिक रूप से परेशान आदमी होगा!)उसने वो दवाइयाँ मुझ कर फेंक दीं और वो वही उस कुर्सी पर जाकर बैठ गया।(इस आदमी में रत्तीभर कि भी शर्म नहीं है। ऐसे ही बैठ गया?!)दवाइयाँ मेरे हाथ में बड़ी लग रही थी। थोड़ी देर बाद...उसकी नज़र मुझ पर थी जैसे वो मुझसे कह रही थी कि इसे ले लो। मैं घबरा गयी, कुछ समझ नहीं ...और पढ़े

3

स्वयंवधू - 3

'समीर बिजलानी और मान्या बिजलानी के बेटे, वृषा बिजलानी अब एकमात्र प्रतिभाशाली उत्तराधिकारी हैं, जो इस कॉर्पोरेट जगत में रखने के दिन से ही अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं और पहले से ही शीर्ष पर हैं। वह एक महान व्यवसायी हैं और वर्तमान में बिजलानी को भारत और दुनिया भर में अग्रणी ब्रांड बनाने के लिए दुनिया भर में काम कर रहे हैं।'और भी बहुत सी बातें लिखी गईं थी लेकिन वह वृषा जी के बारे में नहीं थी।'समीर बिजलानी ने कैसे इस ब्रांड को सफल बनाने के लिए अपनी सारी जवानी लगा दी और अभी भी काम कर ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 4

अभी तक वृषाली का अपहरण किए उसे कैद में रख, उसका जीवन सामान्य ही चल रहा है लेकिन मासिकधर्म लड़की के लिए काफी मुश्किल समय होता है खासकर जब उसके पास उसका मानसिक चैन ना हो और जो पक्की अंतर्मुखी हो। देखते है वृषा-वृषाली इसे कैसे संभालते है। दाईमाँ की क्या योजना है, यह भी देखना होगा। ...और पढ़े

5

स्वयंवधू - 5

"क्या लगा हमे बेघर कर साँस भी ले पाओगी?", मेरी बुआ ने कहा,"किस जोंक से बात खर रही हो?", ने पूछा,"देखो दुनियावालों, कैसे अपने आशिक के साथ भरे बाज़ार में मेरा शोषण कर रही है! कोई मेरी मदद करो!", बीच बाज़ार में वो चिल्लाने लगी। क्ता करूँ, कैसे करूँ...मम्मा-डैडा के साथ क्या हो रहा होगा। वृषा क्या करेगा? मैं इस स्थिति को कैसे संभालूँ ताकि किसी का सिर ना कटे! ...और पढ़े

6

स्वयंवधू - 6

वृषा को नहीं पता कि एक छोटा सा दाग एक लड़की के जीवन और उसके परिवार की छवि को करने के लिए किस तरह पर्याप्त होता है। मैंने वो रात बेचैनी में बितायी।स्टडी रूम में, मैं गहरे विचारों में खोया हुआ था। तभी दाईमाँ आई।"तुमने उसे अंगूठी क्यों नहीं पहनाई?", उन्होंने गुस्से से पूछा,"आप जानती है ना उसका मतलब?", मैंने जवाब दिया,वह नाराज़ थी, "सवाल पर सवाल मत पूछो! आप एक लड़की के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?",('आप'?)इसका कोई मतलब नहीं बनता, "आपका क्या मतलब है दाईमाँ? क्या मैंने कुछ गलत किया है?","हाँ, तुमने किया!","क्या? ऐसा नहीं है ...और पढ़े

7

स्वयंवधू - 7

आज मेरे साथ दो घटना हुई। पहली, वृषा की मदद करने उनके कमरे में, उनके कपड़े निकालने पहली बार क्या? क्या ये अंधेरे के बेटे है?", वृषा के पास सिर्फ शतरंज के पासे जैसे कपड़े थे। और दूसरा, उनकी दी गयी चेतावनी को ना मानना और बिना अपनी मर्ज़ी के किसीके पीछे भी चल देना, और अब पूल में डूबकर मरने से आधे इंच भी दूर नहीं हूँ..... ...और पढ़े

8

स्वयंवधू - 8

कैसा लगेगा जब तुम्हें पता चलेगा कि तुम्हारे कमरे में कैमरे लगाए गए हो? यही हुआ मेरे साथ। मेरे में कैमरा कब लगा, कैसे लगा पता नहीं। पूल में लगभग धकेले के बाद कैमरे में कैद होना, ये मेरे औकात के परे था। ...और पढ़े

9

स्वयंवधू - 9

मैं इतना भयभीत हो गयी थी कि, "क..क-क...ब...", मेरे शब्द निकल नहीं रहे थे। ऐसा था जैसे किसीने मेरी सिल दी थी।"चिंता मत करो हमने पूरी रात जाँच-पड़ताल की। यह कैमरे और माइक्रोफोन, दोंनो कल ही सेटअप किए गए थे। उसके लगते साथ ही हमें उसका पता चल गया-वर्ना...और जहाँ तक तुम्हारी सुरक्षा का सवाल है-तुम्हारी सुरक्षा के लिए तुम अपने इस भैय्या पर भरोसा कर सकती हो।", (मैं तुम्हें सच नहीं बता सकता।)उनकी बात सुनकर मुझे एक कड़ी सूरक्षा का अनुभव हुआ।"...हम्मम!", मेरे मुँह से बस यही निकला,"कुछ खाओगी?", भैय्या ने पूछा,मैंने ना में सिर हिलाया।"चलो आज ये ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 10

दूसरे दिन सुबह-(पता नहीं मैं ऐसे कैसे सो गया? मुझे वृषा को वृषाली के पहले जगाना होगा। पता नहीं भर में क्या नये कांड हुए होंगे?)मैं उनके कमरे में ध्यान से घुसा। वे दोंनो अब भी सोए हुए थे। मैं वृषा के पास ध्यान से गया और उसे बड़े शांति और ध्यान से उठाकर, "श्श्श! शांत रहो। अपने बगल देखो और मेरे साथ चलो।", उसे अपने साथ वृषाली के कमरे में ले गया।"हाह! क्या हुआ कल?", वृषा ने फिर पकड़कर पूछा,"पहले तुम बताओ कि कल क्या हुआ था?", सबसे पहले मुझे अपने दिमाग को सुलझाना होगा ताकि मैं अच्छे ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 11

कल का दिन आ गया। जैसा कि कायल ने कहा था, उन्होंने अपना भविष्य का बेडरूम प्लान भेजा। यह में जितना हास्यास्पद लगता था उससे कहीं अधिक हास्यास्पद देखने में लग रहा था। हर किसी की कमरे की योजना में उन्होंने अपनी इच्छाओं को खूबसूरती से चित्रित किया गया था दिव्या, प्रांजली और अंजली को विशाल शयनकक्ष पसंद थे जबकि साक्षी और प्रतिज्ञा को आरामदायक बेडरूम। कायल को महंगी सामग्री और हीरे-रूबी की फिनिश वाली थी। उसकी हर चीज़ केवल पैसा बोलती थी।और मेरी नियती को तो देखो! इसने कुछ नहीं किया। सादा कमरा कुछ अलग पर्दो के साथ, ...और पढ़े

12

स्वयंवधू - 12

वृषाली ने थोड़ी बातचीत के बाद गंभीरता से कहा,"भैय्या अगर आप थके हुए नहीं है तो क्या आप हमारे ऊपर चल सकते है?","क्या हो गया?", सरयू ने पूछा,"सारी बात यहाँ नहीं हो सकती।", दिव्या ने कहा,"रास्ता साफ है।", प्रांजली ने इधर-उधर देखकर कहा,हम सब ऊपर गए, वृषाली ने धीरे से कमरे का दरवाज़ा खोला और वहाँ स्तब्ध खड़ी रही फिर कहा,"वो भाग गया-","कैसे?", साक्षी ने भी अंदर जाकर देखा,"पर मैंने उसे कसकर बाँधा था।", प्रांजली ने कहा,"सुबह तक का तो वो यही था।", दिव्या ने कहा,"हाँ, मैंने भी तुम्हारे साथ उसे यहाँ देखा था। आखिर वो भागा कैसे?!", प्रांजली ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 13

(वोह! कितना आलिशान है...मुझे बहुत घबराहट महसूस हो रही है।)जहाँ भी मैं अपनी आँखें दौड़ाती मुझे विलासिता ही दिखाई सुनहरी फिनिश के साथ सफेद संगमरमर से बना होटल एक मध्यमवर्गीय लड़की के लिए पचाना मुश्किल था!होटल के कर्मचारी हमें ड्रेसिंग रूम तक ले गए, वहाँ मैंने कायल को छोड़कर सभी प्रतियोगियों को देखा। यह तो तय था, उसे वीआईपी कमरा मिला होगा। (अकेले रहना कितना अच्छा है।)मैंने देखा उस बड़े कमरे में बहुत सारे लोग कैसे इधर-उधर अपना काम करते हुए भाग रहे थे। अब हमारे लिए तैयार होने का समय आ गया था। मैंने आसमानी नीला ए-लाइन गाउन ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 14

उस दिन सुबह...सब कुछ सामान्य था। हम उस समय गायब होने और राज द्वारा उसकी कलाई पर छोड़े गए के से सवालों से बचने में कामयाब रहे।"मैं फिसल गयी और उन्होंने मुझे गिरने से बचाने की कोशिश की और ऐसा ही गया...", उसके इस बहाने पर सब आँख मूंदकर भरोसा कर सकते थे,"तुम बहुत उपद्रवी हो गई हो!", उसके बड़े भाई ने उसे उसके लापरवाह व्यवहार के लिए खूब डांटा।आज सुबह से मेरा सब कुछ बिखरने लगा!हम इस हद तक लड़े कि उसे ठगा हुआ महसूस हुआ, उसने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। हुआ ये कि, उसने ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 15

वह मुझे गुस्से से घूर रही थी।"आपने उसे क्या खिलाया?-नहीं! आपने उसे क्यों खिलाया?", उसने गुस्से से पूछा,मैं उसके से अचरज में था, "वृषाली?...उसने बस पानी पिया और...उसने खून की उल्टी की। वो कैसी है?","वह कैसी है? मिस्टर बिजलानी आपने उसे बर्बाद कर दिया!", वह चिल्लाई,उसके इस वाक्य से हर कोई स्तब्ध रह गया।"चिंता करने कि ज़रूरत नहीं। हमे उसके गले का ऑपरेशन करने की ज़रूरत नहीं पड़ी...पर उसके गले कि अंदरूनी सतह लगभग पूरी तरह से तबाह हो गयी है।",सरयू ने उत्तर दिया, "उसने जो कुछ भी खाया और पीया वह मेरे निरीक्षण पर तैयार किया गया था। ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 16

हम दोंनो ऊपर छत पर गए। शाम सुनहरी काली थी। वहाँ-"तो अब क्या नुकसान पहुँचाना चाहती हों उसे?", मैंने पूछा,वह बहुत अचंभित थी।"क्या? भंडाफोड़ की उम्मीद नहीं थी?",फिर वह बड़बड़ाने लगी, "नहीं! मैंने कुछ नहीं किया! वृषा...","मेरा नाम मत लो! मुझे याद नहीं है कि मैंने तुम्हें मुझे मेरे नाम से बुलाने की अनुमति दी थी?",वह सावधानी से पकड़ी गई थी, "तो तुम उससे या मुझसे क्यों मिलना चाहती थी? देखना चाहती थी कि क्या वह काफी पीड़ित है या नहीं? 'कमी हो तो उसे भी पूरा कर दूँ।' ?",वह उत्तेजित हो गई, "नहीं! आप ऐसा कुछ कैसे कह ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 17

डांसिंग स्टूडियो के पार्किंग स्थल पर-अब मैं अरबपति, वृषा बिजलानी के ठीक बगल में चल रही थी तब मुझे बीच कि वास्तविकता का अहसास फिर से हुआ। मैं कितना भी कमाने की कोशिश कर लूँ, मैं उस स्थान तक कभी नहीं पहुँच सकती जहाँ, वे थे।तभी कोई आदमी काले सूट में वृषा के पास आया और खुसफुसाया। मैं बस 'कायल' और 'ज़रूरत' ही समझ पाई। वृषा हड़बड़ी में गए और एक आदमी को मुझे सबके पास ले जाने को कहा और जल्दी-जल्दी में निकल गए।उसने मुझसे अपने पीछे आने को कहा। मैं उसके पीछे-पीछे चल रही थी। वह मुझे ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 18

"कोई पागल ही मुझे जानना चाहेगा।", वृषाली ने कहा,(तो अब मैं पागल हूँ।)"अहम! यह उनका असफल प्रयास था इसलिए तुम्हें पकड़ने के लिए नई घटनाएँ रचीं और कायल के स्टॉकर का इस्तेमाल किया। जब मैं कायल के स्टॉकर मामले में व्यस्त था, तब उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल कर तुम्हारा अपहरण करने के लिए किया। उन्होंने अपनी आत्म-संतुष्टि के लिए तुम्हें नष्ट करने और एक भयानक मौत देते हुए वीडियो बनाने कि कोशिश की। ताकि मुझे मेरा औकात याद दिला सके।","सिर्फ उनके आत्मसंतुष्टि के लिए मेरे टुकड़े करना चाहते थे?", मैंने जो सुना उस पर मुझे विश्वास नहीं हुआ, ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 19

बालकनी में-"म्याऊँ!", पहेली बगल में अपने खिलौने चूहे से खेल रही थी।"तो हम लोंगो ने हँसो के जोड़े को दिव्या ने कहा,"क्या हो गया वृषाली इतनी गुमसुम क्यों बैठी हो?", साक्षी ने पूछा,हमेशा की तरह वह मुस्कुराते हुए और 'कुछ नहीं' में सिर हिलाते हुए जवाब देने से बचने की कोशिश।दिव्या ने कहा, "वह थकी हुई महसूस कर रही होगी। उसे ठीक होने के लिए आराम की ज़रूरत है।","यहाँ आराम करना चाहती हो? नरम धूप तुम्हें बेहतर महसूस करने में मदद करेगा, बस यहीं आराम करों।", कह दोंनो बालकनी से चले गए।(ऐसा लग रहा है कि दुनिया खत्म होने ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 20

मैं सोफ़े पर हमारे बीच तीन हाथ की दूरी बनाकर बैठ गयी, आमतौर पर यह डेढ़ हाथ की दूरी थी। वहाँ पहेली भी चिंतित होकर आ गई और मुझे खुश करने के लिए म्याऊँ-म्याऊँ करने लगी और मेरी गोद में बैठ गई।मैं बात करने गयी पर मुझसे नहीं हो पाया और मैं, पहेली को ले अपने कमरे में भाग गयी। वहाँ दी मेरा इंतज़ार कर रही थी।"कहाँ थी इतनी देर?", दी ने गुस्से से पूछा,"-दी।", मैंने कांपती हुई आवाज़ में कहा।मुझे डरा देख पहेली दी पर गुर्राने लगी।मैं पहेली को उठा, "पहेली! बच्चा ये मेरी बड़ी बहन है। गलत ...और पढ़े

21

स्वयंवधू - 21

मैं भी हमारे आगंतुक से मिलने गयी, ऊपर छत में।"तो क्या हम बात कर सकते है?",वहाँ भैय्या, आर्य खुराना, दी और दिव्या भी वहाँ थे।वो आदमी ने कहा, "वृषा बाबा को उनकी माँ ने उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर मारने की कोशिश कीथी।"ये सुन सब हैरान थे, भैय्या और शिवम भी।"? 'वृषा बाबा?' पर मैंने आपको यहाँ पहली बार देखे है।", भैय्या ने रूखे स्वर में पूछा,"नहीं सरयू ये जीवन काका है जो बच्चपन में वृषा के अंगरक्षक हुआ करते थे, पर उस घटना के बाद से वे गायब हो गए और हमारी दोस्ती...", शिवम रूक गए,"मैं भी यहाँ अपने बच्चपन ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 22

"मान्या मैम चाहती थी कि वृषा बाबा को क्रूरता से मारा जैसा कभी किसीने नहीं सुना हो।", जीवन जी अपराधबोध से कहा, "मैं देश का एक जाना-माना क्रूर हत्यारा था। मेरा लक्ष्य केवल अमीर लोग थे। मैं अपने करियर के शिखर पर था, तब मेरी मुलाकात एक पूर्व अभिनेत्री और मॉडल से हुई, जिसने मुझसे संपर्क किया था। वह दुनिया के एक स्थापित शक्तिशाली गैंगस्टर की पत्नी के रूप में अंतर्राष्ट्रीय पहचान चाहती थी जो उसे नहीं मिल रहा था। वह अपने जीवन से नाखुश थी। वह चाहती थी कि, या तो मैं समीर को मारूँ या वृषा बाबा ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 23

"वह रेड्डी परिवार के प्रति भी कुछ गुस्सा थी कि वह चाहती थी कि मैं तुम्हें और तुम्हारे छोटे राज को भी खत्म कर दूँ!", सुन दी हैरान-परेशान रह गयी,दी ने शिवम जी का हाथ पकड़कर पूछा, "आखिर इनसे क्या दुश्मनी थी?",उन्होंने सीधे कहा, "सनकियों की यही प्रवृत्ति होती है। वो चाहती थी कि पहले तुम, शिवम बाबा उसी क्षण राज बाबा को बचाते हुए मारे जाओ और राज तुम्हारे मृत शरीर में फँस, सीने में चाकू लगने घाव के कारण, धीमे-धीमे खून की कमी से खत्म हो जाए।-",(वोह! क्या प्लानिंग थी।) मुझे लगा जबकि सब झटके पर झटके ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 24

जैसा कि हमने सुना है, अतीत में उनका अपहरण किया गया था और उन्हें प्रताड़ित किया गया था। तो, सकता है कि उनके खराब स्वास्थ्य का कारण यही हो, लेकिन किसी तरह वे इतने बड़े और मजबूत बनने में कामयाब रहे, उनकी इच्छाशक्ति अगले स्तर की होगी।मुझे अपने पैरों में सुन्नता महसूस हुई, मैं कल्पना नहीं कर सकती कि एक कमज़ोर बच्चा, एक महीने से अधिक समय तक इस तरह से प्रताड़ित होना कैसा होता होगा, मैं इसकी कल्पना नहीं कर सकती।जब हम हतप्रभ थे, हमने कदमों की आवाज़ सुनी। मैं थोड़ा चौंक गयी। यह वृषा थे जो विषय ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 25

अब तक उनके माता-पिता केवल उनका तिरस्कार करते थे, लेकिन अब यह उनके लिए बहुत बुरा मोड़ ले चुका क्योंकि उन्हें उनकी अपनी माँ ने अपने लोंगो से उन्हें अगवा करवा लिया था और उन्हें भूखा रखा और बुरी तरह पीटा। वे आज्ञाकारी थे लेकिन एक दिन उनके अपहरणकर्ताओं में से एक ने दूसरे अत्याचारी अपहरणकर्ता, कृष को मार डाला और उन्हें ठंड के मौसम में नंगे पैर सड़कों पर दौड़ने के लिए मजबूर कर दिया, जहाँ उन्हें एक टैक्सी ने टक्कर मार दी। अब आगे,"मैं दौड़ रहा था, चल रहा था, खुद को घसीट रहा था, बमुश्किल होश ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 26

उस रात सभी लोग भूखे पेट सोये, लेकिन उनके पास हज़म करने के लिए बहुत सारी चीजें थीं। बम, वृषा ने उन पर गिराया। वृषाली भी पहेली को गले लगाकर फर्श पर ही बेसुध सोई थी और फोन उसकी जेब में था। वृषा निराश था कि चीजें उसकी योजना के अनुसार नहीं चल रही थीं और वृषाली के जीवन के साथ अब हर कोई खतरे में था। वह एक गिलास पानी लेने के लिए नीचे गया, क्योंकि महाशक्ति सो गयी थीं और उसने, उसकी निजी सहायक के रूप में अपना काम नहीं किया था। वहाँ उसने जो देखा उससे ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 27

सुहासिनी चुपके से नीचे चली गई। हवा की तरह चलने का गुण विरासत ले, वो बिना किसी की नज़र नीचे गयी। उसने उन पर ध्यान देना शुरू किया। कवच कहीं नहीं दिखा।"वृषाली, एक पेट कैफ़े कैसा रहेगा?", उसने पूछा,उसने अपना सिर हिलाते हुए कहा, "नहीं, शहरों में तो यह बहुत आम बात है।","सही कहा। मैं अपना पहला प्रोजेक्ट शहर में नहीं करना चाह रहा था।", उसने थोड़ी देर दिमाग लगाकर, "अगर हम अपना कैफ़े वहाँ खोले जहाँ कोई और कंपनियाँ ना गयी हो?!","ज़मीन के नीचे, आसमान के पार और बादलो की गोद में कहाँ अपनी नौकरी खोना चाहते हो ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 28

विनाशकारी जन्मदिन- भाग1सभी लोग कवच को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देकर रोमांचित थे। कमाल की बात है, दशकों बाद भी हमेशा की तरह चापलूस और निर्बल हैं, हमेशा उस व्यक्ति की प्रशंसा करना जिसके पास शक्ति है, और हमेशा उनके जूते चाटते रहते। उन्होंने जन्मदिन की हर शुभकामनाओं को पूरे दिल से स्वीकारा, भले ही यह उसके लिए बहुत अलग था। समीर ने उसे, उसके जन्मदिन पर हमेशा अपने पास ही रखा है।दूसरी जगह, सुरक्षा के लिए, सरयू अपने आदमियों के साथ किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार था। आर्य, शिवम, दिव्या, सुहासिनी, साक्षी, अंजलि, अंडरकवर प्रांजलि सब दोंनो को ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 29

विनाशकारी जन्मदिन भाग 2उसे ज़बरदस्ती नीचे दबा दिया गया, उसका हर पल, हर हरकत आतंक से भरी थी, खुद बचाने के लिए कड़ी लड़ाई लड़ने के बाद, वह लड़ाई हार गई और अपने आत्मसम्मान को अपने सामने टुकड़ों में एक नीच के हाथों कुचलने का इंतजार करने लगी। वह भाग्यशाली थी कि दो बार उसकी इज़्ज़त बच गई, लेकिन आज सारे चमत्कार उसके लिए कहीं से भी संभव नहीं दिख रहे थे। बँद कमरे में राज ने एक जंगली जानवर की तरह उसकी पवित्रता पर हमला किया, जिसने समीर से बदला लेने के लिए उसे हर शक्ति का खिलौना ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 30

विनाशकारी जन्मदिन भाग 3"तो तुम क्या चाहते हो?!क्या तुम चाहते हो कि वह हर शक्ति की 'सेवा' करे? उसके की, उसके भाई की, उसके बलात्कारी की!? तुम उसे उन सबके सामने परोसना चाहते हो?!हाह! और कोई रास्ता नहीं है कि राज उसे उस यातना कक्ष में वाष्पित होने देगा। उसे ऊर्जा की आपूर्ति की आवश्यकता है लेकिन वह अनंत ऊर्जा की श्रोत भी है, कौन उसे मरने देगा? समीर बिजलानी तो नहीं! अरे, उसने पहले से ही पिछली महाशक्ति और कवच को अपने अंदर समाहित कर लिया है। यदि तुम उसे चिह्नित नहीं करते या उसे तुम्हें चिह्नित करने ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 31

विनाशकारी जन्मदिन भाग 4दाहिने हाथ ज़ंजीर ने वो काली तरल महाशक्ति के पूरे शरीर पर छिड़क दी और व्हिपर्स समीर के आदेश पर वो सुनहरी व्हिप दी गयी जिसका इस्तेमाल, वो ऊर्जा निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।इस व्हिप की खासियत?शक्तियों को दंडित करने के लिए मानवीय सज़ा। इससे उन्हें चोट तो पहुँचती थी और उनकी ऊर्जा भी खत्म हो जाती थी पर कुछ दिनों में घाव ठीक होने पर वो सामान्य भी हो जाते। यह उनके लिए एकमात्र मानवीय सज़ा थी लेकिन जब शक्ति से ऊर्जा चूसने के लिए विशेष मंत्र के साथ नियमित रूप से प्रयोग ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 32

विनाशकारी जन्मदिन अंतिम भाग"अक! उनका ख्याल रखना।", वह शर्मा कर कमरे से बाहर भाग गयी,उसने अपने पीछे दरवाज़ा बंद लिया।"यह क्या था?", (और मेरा दिल? यह इतनी तेजी से क्यों धड़कना चाहता है?) वह भ्रमित और परेशान महसूस कर रही थी। असमंजस में उसने आईने की ओर देखा। तभी उसे एहसास हुआ कि उसने हूडी पहन रखी थी, जो बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी उसने पहले कवच के लिए खरीदी थी। यह कवच के लिए छोटा था और उसके लिए बड़ा था। वह पूरी तरह से कवच के खून से लथपथ थी और उसके माथे और गाल पर उसके ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 33

उलझन"कल शाम हुआ क्या था? भविष्य के लिए मुझे विस्तार से बताओ।" कवच ने अपनी नियति को अब भी से लगाकर रखे था।कमरे में हल्की बीप की आवाज़ गूँजी जिसपर वृषाली का ध्यान नहीं गया।उसने उसे थोड़ा पीछे हटाकर कहा, "मैं अब ठीक हूँ। राज ने मुझ पर तब हमला किया जब मैं विषय के साथ वीडियो कॉल पर थी। उसने मुझे लैपटॉप पर फेंक दिया और मुझे काले रंग का कुछ पीने पर मजबूर किया। आपके बताने के बाद पता चला कि यह मुझे एक दिन के लिए गूंगा बनाने वाला कोई काला पानी था।", उसने उसे शिकायत ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 34

बस बहुत हो गया!उसने उसे अपने खजाने की तरह अपनी बांहों में थाम रखा था।शांत होने के बाद, "क्या दर्द नामक चीज़ की कोई जानकारी है? , उसने उसे डाँटा, "अब और मत हिलना।",वह व्यंग्यात्मक हँसी हँस, "यह कुछ भी नहीं है। मैं एक दशक से भी अधिक समय से इस दर्द के साथ जी रहा हूँ।",उसने मुँह बनाया फिर डाँटते हुए कहा, "इसका धन्यवाद, अब आपका घाव लगभग असाध्य है। यदि मुझमें बीमारी या कम-से-कम घावों को ठीक करने की क्षमता होती तो यह काफी रहता।", उसने थोड़ी देर रुककर उसकी ढीली पट्टियों को ठीक करते हुए पूछा, ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 35

धोखासुहासिनी उसे लिविंग रूम से निकालकर गलियारे में ले जाने ही वाली थी, तभी पुलिस का दस्ता पूरे घर छापा मारने के लिए घुस आया। उन्होंने सभी अंगरक्षकों को अपने अधीन कर लिया। उन्होंने उन्हें अंदर अपने साथ आने का इशारा किया।उनके पीछे चलते हुए डर से उसके हाथ काँप रहे थे। कंपन छिपाने के लिए उसने अपना हाथ जेब में डाला। अंदर उसके हाथ में कंगन जैसा कुछ लगा जिसे उसने कसकर पकड़ लिया।(गहरी साँस लो और शांत रहो।) कवच की सलाह उसके मन में गूँजी,(नहीं! ये मेरे मन की नहीं, वृषा की आवाज़ की है!) उसने मुझसे ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 36

अत्याचारवृषाली बिना दरवाज़े और खिड़कियों वाले एक ठंडे सफेद कमरे में लोहे के बिस्तर से बंधी हुई जागी। घबराकर अपने अंगों को हिलाने कि कोशिश की। उसे अपने उन हाथों में दर्द महसूस हुआ जहाँ सुहासिनी ने उसे पकड़ा था। उसे वहाँ एक घाव महसूस हुआ पर वह इसे नहीं देख सकती थी लेकिन मैं देख सकती हूँ और वास्तव में वह एक सूई चुभोने वाला घाव था। इसी कारण से वह वहाँ बेहोश हो गई थी। वह फिर खुद को छुड़ाने के लिए तड़पी, लेकिन लोहे के बिस्तर केवल डरावनी चीखने जैसी आवाज़ें निकाल रहे थे।"हेल्-",इससे पहले की ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 37

अत्याचार भाग 2एक, दो महीने से अधिक समय बीत गये थे।उसे उसके पिछले अपहरणकर्ता, उसकी नियति से अगवा करने बाद उन्होंने बिना किसी दया के बार-बार क्रूरता से उसे प्रताड़ित करते गए। पिछले सनकी डॉक्टरों ने उसे कोमा में जाने के लिए पता नहीं कौन सी क्या दवाइयाँ दीं थी?!वह एक जीवित लाश बन गयी थी जो दफनाए जाने का इंतजार कर रही थी। मैंने कवच को ढूँढने कि कोशिश की लेकिन मैं उस तक नहीं पहुँच सकी। मुझे उसे उसके पैंरो पर खड़ा करना होगा।पर एक पेशानी है- वह कमज़ोर है इसलिए मैं भी कमज़ोर हूँ, उसे वापस ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 38

गलत यादे?दो महीने तक गहरी कोमा में रहने के बाद अंततः वह जाग उठी। अधीर के आने के बाद उसके भविष्य की चिंता होने लगी थी।और उस समय माता सरस्वती मेरी जीभ पर बैठी थीं। मेरी चिंताएँ सटीक थी! जैसे ही समीर अंदर दाखिल हुआ, एक डॉक्टर जिसने उससे पहले कोमलता से बात की थी उसने उसे सोते समय गर्दन पर हताश होकर कुछ इंजेक्शन लगाया। यह हर वक्त की तरह कोई सफ़ेद तरल नहीं थी बल्कि काले और भूरे रंग की गाढ़ी चीज़ थी।उसने जाँच की कि क्या उसने अस्वीकृति का कोई संकेत तैयार नहीं दिखाया?समीर के फोन ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 39

गलत यादे भाग 2यह पता चलने के बाद कि उसके पिता का नंबर उसके पिता का नहीं था, वह परिवार के साथ अब तक की अपनी हर पल को याद करके और उस पर संदेह करते हुए फूट-फूटकर रोने लगी। समीर ने उसे सांत्वना देने कि कोशिश की, जब वह उसे सांत्वना दे रहा था तब उसके कोट की ऊपरी जेब से एक फोटो फिसल कर उसकी बाहों पर गिर गई। ऐसे लगा कि समीर ने फोटो को नहीं देखा। वृषाली ने इसे नज़रअंदाज करना चाहा लेकिन वह उसके चेहरे के पसीने और आँसू बहने के कारण यह उससे ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 40

इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ ज़बरदस्ती के रिश्ते हैं। पाठकों, यदि आप आघात नहीं चाहते तो इसे छोड़ दें।नया तक उसे पता चला कि वह वृषाली राय नहीं थी, वह मीरा पात्रा थी जो कि एक ड्रॉप आउट थी और एक वेश्या थी साथ ही वृषा की सनक भी। उसके और उसके बॉस के मनाही सुनने के बाद उसके अहंकार के सनक ने उस क्लब को रौंद दिया जिसमें वह काम करती थी और बिना किसी दूसरे विचार या दया के सभी को निर्दयता से पीट-पीटकर मार डाला और उन्हें, उन्हीं के क्लब के बाहर सजावट की तरह दरवाज़े ...और पढ़े

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इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ ज़बरदस्ती के रिश्ते हैं। पाठकों, यदि आप आघात नहीं चाहते तो इसे छोड़ दें।पहला कमरे में अकेली असहज और अपमानित महसूस कर रही थी। उसे उस बात का अपराध बोध हुआ जो उसने नहीं किया था और ना ही उसे याद था। थककर उसने अब कमरे की ओर अधिक ध्यान से देखा। कमरे के बीच में एक बड़े बिस्तर के अलावा, कमरा दो बड़े फूलदानों से भरा हुआ था जो लगभग उसकी ऊँचाई तक पहुँच रहे थे और प्रवेश द्वार पर रखे हुए थे, कमरे के दाहिनी ओर एक महँगी ड्रेसिंग टेबल थी, जिसके ...और पढ़े

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इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ ज़बरदस्ती के रिश्ते हैं। पाठकों, यदि आप आघात नहीं चाहते तो इसे छोड़ दें।रहस्यउसकी एक शिशु की तरह सो गई, लेकिन उसका शरीर नहीं। उसके शरीर में परिवर्तन होने लगे। जिस स्थान पर उसने काले गुलाब के रस का रस, उसके खून और अनजान रक्त के मिश्रण को सील बँद किया था वहाँ मच्छर के काटने जैसा धब्बा बन गया जो सवेरे होते हुए थोड़ा धब गया।सुबह वृषाली कंधे दर्द के साथ उठी। वह अपने हाथ को मसलने वाले ही हो रही थी कि उसकी नर्स दिशा वहाँ आई, "मीरा। ऐसे नहीं। अपने हाथ ...और पढ़े

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इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ ज़बरदस्ती के रिश्ते हैं। पाठकों, यदि आप आघात नहीं चाहते तो इसे छोड़ दें।कंपनी सामनेदो घंटे की लंबी यात्रा के बाद वह 'बिजलानी कॉरपोरेशन' नामक एक इमारत के सामने खड़ी थी। उसने काली जींस और सफेद शर्ट पहन रखी थी और उसके ऊपर काला ब्लेज़र था।"चलो।", अधीर ने रूखे स्वर में कहा।उसने एक कदम बढ़ाया। उसका जूता टाइल पर बिना आवाज़ के चला। वह अधीर के पीछे-पीछे चल रही थी। चलते-चलते वह एक भव्य शीशे के प्रवेशद्वार से प्रवेश कर रिसेप्शन में प्रवेश कर गई। वहाँ काम कर रही दो लड़कियों ने अधीर का ...और पढ़े

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इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ ज़बरदस्ती के रिश्ते हैं। पाठकों, यदि आप आघात नहीं चाहते तो इसे छोड़ दें।कंपनी अंदरपिछली कहानी में समीर ने उसे अपने अधीनस्थ कंपनी की बैलेंस शीट के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया और उसे उससे छीन लिया और उसी समय वहाँ नीरज और राघव कमरे में दाखिल हुए और समीर के हाथ में कागज देखकर समीर के बगल खड़े हो गए। अब आगे,तीनो उसे शिकारी की तरह अपनी नज़रो से चीर रहे थे।वह डरी हुई पछता रही थी।उसने अपना सिर नीचे कर लिया और अपनी हाथों को खरोंचते हुए, "मुझे पता है कि मैंने ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।मीरा भाग 1पिछले भाग में वृषाली ने मीरा के मोहक गुण को अपनाया जिससे समीर अचंभे में पड़ गया था। मीरा उर्फ वृषाली की जिद्द के कारण समीर जो 'एक अच्छा आदमी जो जीवनभर अपने आदर्शों और कानून पर जिया है उसे अपने पुत्रमोह के कारण गलत काम करना पड़ा'का किरदार निभा रहा था, अब उसके सामने आँखों के स्तर पर बैठकर उसके सवालों का जवाब दे रहा था।"आप मुझसे मेरा सच क्यों ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।मीरा भाग 2समीर उसके बालो से खेलते-खेलते व्हिस्की की तीसरी बोतल भी ख़त्म कर दी और गिलास को फायर पिट में पटक दिया।मीरा उर्फ वृषाली उसे देखती रह गयी।"तुम अपना अतीत के बारे में जानना चाहती हो?", उसकी आँखे लपटो का कारण पीली और डरावनी लग रही थी।"हाँ।", उसने सावधानी से कहा,फिर समीर ने सिगार निकाली। उसने सिगार को फायर पिट की ओर बढ़ाया। सिगार जल उठा। समीर उसके समाना सीधा खड़ा होकर, ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।पूछताछअगले दिन समीर हमेशा की तरह उठा और अपना नियमित काम किया, अपने शिकार की जाँच की (जाँच करने का मतलब है कैमरों और अपने आदमियों के माध्यम से उनकी दैनिक गतिविधियों पर नज़र रखना।), जिम जाना, फ्रेश हुआ और अपने महत्वपूर्ण शिकार से व्यक्तिगत रूप से मिलने गया।"आप कहाँ थे समीर? मैं सारा दिन आपको ढूँढ़ती रही! क्या हैंगओवर इतना बुरा होता है?", उसने एक ही साँस में सारे सवाल पूछ लिए,समीर ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।डेट भाग 1राहुल और मीरा ने नई-नई बातचीत शुरू ही की थी कि समीर वहाँ आ गया। उसे देख मीरा उर्फ वृषाली थोड़ा हिल गई। समीर उन्हें गहरे आँखो से घूर रहा था जैसे वो कुछ जाँच रहा हो।राहुल ने अपना हाथ बढ़ाया, "मैं आपसे मिलने ही आ रहा था।",समीर भी हाथ बढ़ाकर, "अच्छा? माहौल तो कुछ और कह रहा है।",राहुल हँसकर, "ये मोहतरमा इतने प्यारे मासूम आँखो को तकलीफ दिए अकेले रोए ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।पत्रराहुल चिंता के मारे कमरे में कुछ और आवाज़ सुनने के लिए ड्रेसिंग रूम के बाहर घूम रहा था।अंदर ड्रेसिंग रूम में वृषाली ने मोनिका का मुँह बँद कर दीवार से सटाकर चुप रहने का इशारा कर दिया था। फिर उसने यहाँ-वहाँ देखा और मैग्ज़ीन की ओर इशारा कर पूछा, "ज़रूरी?",उसने ना में सिर हिलाया।उसने हँसकर कहा, "ये ग्रीन टॉप बहुत भड़कीला है।",उसने फिर पन्ने पलटने और कागज़ो को टुकड़ो में फाड़ने लगी।उसे ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।डांटमीरा और राहुल समय को भूल गए में घुस चुके थे। समीर के कॉल और टेक्ट का दोंनो जवाब नहीं दे रहे थे। चिढ़कर समीर ने अधीर को उनके पीछे भेजा।वृषाली की गर्दन पर प्लेनटड चिप के माध्यम से उन्हें ट्रैक करने के बाद वो 'माया इंटरनेट कैफे' पर गया।वहाँ वृषाली ने अधीर को अनदेखा कर राहुल के कंधे पर हाथ रख मग्न होकर खेल रही थी।अधीर वहाँ खड़ा होकर सब देख रहा ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।छापासमीर को मनाने के बाद मीरा और राहुल के बीच नज़दीकी बढ़ने लगी। वे लगभग अविभाज्य थे। समीर भी खुश था।वह अपनी बिगड़ती हुई सेहत को छुपाए अपना सामाजिक दायरा बढ़ा रही थी।राहुल के माध्यम से उसकी मुलाकात अन्य व्यवसायी बच्चों से और मीडिया के छोटे लेकिन काम के लोगो से हुई जो उसकी उम्र के थे, कुछ बड़े थे तो कुछ छोटे। वह सबके साथ घुलमिल गई, बस एक मिनट के लिए, ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।वृषा का कंफैशनदोपहर बारह बजे डॉक्टर ने अधीर को उससे मिलने की इज़ाज़त दी। राहुल उनके साथ था लेकिन उनसे दो कदम दूर था। डॉक्टर बिनॉय वहाँ आया और उन्हें संक्रमित चिप दिखाई। चिप पर सड़ा हुआ माँस चिपका हुआ था। अधीर ने राहुल को घूर कर देखा, राहुल ने तुरंत उसके सामने अपना सिर थोड़ा झुकाकर और दायां हाथ से अपनी टाई को ठीक कर बाहर चलने लगा। उसकी नज़र वहाँ रहे ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।वृषा और वृषाली का बेटाइससे पहले कि उसकी छुट्टी की प्रक्रिया शुरू होती, बिनॉय तीन प्रमुख अधिकारियों के एक समूह के साथ कमरे में दाखिल हुआ। राहुल मीरा को पानी पिला रहा था। राहुल और मीरा उन्हें देखकर दंग रह गए। वे आए और मीरा से बात करने को कहा लेकिन मीरा ने राहुल को अपने साथ रखने पर ज़ोर दिया। उसकी हालत देखकर डॉक्टर बिनॉय ने अधिकारी से उसके साथ रहने की ...और पढ़े

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ड्रामासमीर अंदर गया और बिना किसी भावना के बच्चे को हवा में उठा लिया।वृषाली ने बच्चे की बोतल पकड़ ताकि ज़रूरत पड़ने पर उस पर हमला कर सके, राहुल ने ज़रूरत पड़ने पर लड़ने के लिए अपना हाथ मुट्ठी में बाँध ली थी।वे बेचैनी से किसी घटना के घटने का इंतजार कर रहे थे। तीस सेकंड, जो अनंत काल की तरह लग रहा था, उसके बाद सीमर के होठों ने कहा, "क्या तुम हो...मेरे पोते?",उसके आवाज़ में स्नेह किसी नए प्लान का आगाज़ दे रही थी।समीर के हाथ उस बच्चे की गर्दन की तरफ जा रहे थे।उसे देख वृषाली ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।रंगे हाथ पकड़नावृषाली के कहने पर राहुल ने नर्स से उसका सामान दरवाज़े पर ही रखने और उसे नहाकर उसके दिए गए वस्त्रों को पहनने को कहा या सीधे वापस लौट जाए जहाँ से वो आई थी। बहुत सोचने के बाद उसने अपना सामान अनिच्छा से नीचे रखा और स्नान करने चली गयी।उसके जाते ही वृषाली कमरे से बाहर सफेद दस्ताने पहने हुए आई, "इसे अंदर ले चलो।", उसने कहा।"तुम मुझे अंदर करवा ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।अपराध स्वीकार है- नर्स दिशाराहुल, कान्हा को, अपने जिगर के टुकड़े को देखने और चुप कराने के लिए वृषाली को खून से लथपथ छोड़कर भागा।राहुल बहुत देर तक उसे चुप कराने की कोशिश कर रहा था पर उसकी नन्हीं आवाज़ रो-रोकर रूखी होती जा रही थी।कुछ और देर रुकने के बाद वृषाली ने अपनी आँखें खोलीं और धीरे से उठकर बैठ गयी।वह पत्ते की तरह काँप रही थी।लेकिन उसकी करुण क्रंदन की आवाज़ें ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।राहुल का अतीतराहुल सन्न था।वह ऐसे भाव से मुड़ी जैसे उसने अपनी किस्मत को स्वीकार कर लिया हो, "तुम्हारे बॉस की अगली योजना क्या है? मैं तैयार हूँ।","क्या?", नर्स दिशा को लगा वो कुछ गलत सन रही थी,"अगर तुम्हारी बहन मेरे जाने से बच सकती है तो मैं तैयार हूँ।", उसने उससे कहा।"क्या?", नर्स दिशा ने चौंक कर पूछा,"उसने मेरे कारण जो भी यातनाएं सही है मैं उसके लिए तैयार हूँ। मैं निर्दोष ...और पढ़े

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शक्ति का आह्वानवृषाली ने राहुल के शांत होने तक इंतजार किया और धीरे से उसके आँसू पोंछते हुए पूछा, हम किसे एकांत स्थानों पर जा सकते हैं?",राहुल झिझका, लेकिन उसकी इच्छा नहीं तोड़ना चाहता था। यह पहली बार था जब उसने उससे कुछ माँगा था।उसने हर काम को पुनर्निर्धारित किया और समीर को आश्वासन दिया कि वे उसे सौंपा गया कार्य कुशलतापूर्वक करेगा और उसे गँदा खेल ना खेलने की चेतावनी भी दी। उसके उम्मीद के उल्टे वह सहमत हो गया और खुद उनके लिए रुकने का प्रबंध किया। उन्हें उस स्थान पर भेजा जहाँ से राहुल के लिए ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।दिल की पीड़ाजब उसके आँसू, रक्त और शुद्ध भावनाएँ महाशक्ति रत्न पर गिरीं।"कृपया मेरी मदद करो शक्ति। हम तुम्हारे बच्चे हैं, तुम्हारे वंशज है और हमें अपनी माँ, अपनी शक्ति, अपनी जननी की मदद की ज़रूरत है, शक्ति। कृपया अपने बच्चों की मदद करो। प्लीज़।", वो गिड़गिड़ाकर मदद माँग रहा थी।मैं उसकी ईमानदारी से बहुत खुश थी इसलिए, जंगल में अचानक तेज़ तूफ़ान लाना पड़ा, "देखूँ तो ये निष्ठा क्षणभंगुर है क्या?", शक्ति ...और पढ़े

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60. सीने में खंजरकवच, सिर से पाँव तक भीगा हुआ राहुल से दो कदम पीछे चल रहा था।वह महसूस सकता था कि कई नज़रे उन पर थी।तीनों पर बेबुनियाद टिप्पणियाँ सुन सकते थे और जब वे मुड़ते,तब दूसरी ओर देखने लगते। तीन मिनट की दूरी तीस मिनट के समान थी।चलते-चलते राहुल दाई ओर मुड़कर रुका। कवच ने सिर उठाकर सामने देखा, वहाँ नर्स दिशा कान्हा को सांत्वना देते हुए उनका इंतजार कर रही थी।जब उसने उन्हें पहली बार देखा तो उसे राहत मिली लेकिन जैसे ही उसने वृषा बिजलनी को पीछे और वृषाली को राहुल के हाथ पर देखा ...और पढ़े

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61. प्लानिंगउधर महाशक्ति ने कवच की गर्दन पर धारदार कैंची रखी थी, "वापस आ जाते नहीं तो मैं खुद अपने हाथों में ले लूँगी। और पता है फिर क्या होगा।", और इधर दो मर्द एक दूसरे पर रोमांटिक रूप से गिरे पड़े थे।अहम! गला साफ करते हूए।तो पिछले अध्याय में हमने पढ़ा और अपनी कल्पना का उपयोग करे हुए देखा कि राहुल ने होटल के कर्मचारी, गगन को सामान्य 'चलो बैठकर बात करते है' कहा था और वह राहुल के सामने अपनी शर्ट को आधा खोल घुटनों के बल डरते हुए बैठ गया।गलतफहमी को समझते हुए राहुल उसे रोकने ...और पढ़े

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स्वयंवधू - 62

62. कान्हा का त्याग और दुर्घटनावह दिन वृषाली के लिए सबसे खुशी और दर्द से भरा दिन था। अचानक बनना और अब उसे माँ बनाने वाले को त्यागना। उसे कल अपना अंश त्यागना होगा। पर यही उसे सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका था।कमरे में दोंनो माँ-बेटे अकेले थे। वृषाली कहो या मीरा, इस वक्त एक माँ अपने बच्चे के साथ कुछ आखिरी पल बना रही थी। उसे हँसा रही थी, खिला रही थी, पुचकार रही थी, सँवार रही थी, उसपर अपना हर एक पल, हर एक क्षण का प्रेम लुटा रही थी। खेलते-खेलते थककर कान्हा उसकी गोद में ही ...और पढ़े

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इसमें धुम्रपान और शराब का सेवन है। लेखक इसे प्रोत्साहित नहीं करता।साथ ही, इसमें हिंसा, खून-खराबा और कुछ जबरन भी शामिल हैं। पाठकगण कृपया विवेक से पढ़ें।63. परफेक्ट दुर्घटनास्थल दिखाना है!पिछले भाग में कवच ने महाशक्ति का हाथ थाम वहाँ से जाने लगा। उनके पैरों के नीचे मलबा आवाज़े निकाल रही थी। कवच के बड़े और गर्म हाथ महाशक्ति को सुरक्षित महसूस करा रहे थे। पर अंदर ही अंदर परेशान थी। उसके आँखे में संकोच था। उसे यह इंसाफ डरपोकों का लगा। जितने लोगों ने भी उसके अत्याचार सहे उनके साथ यह अन्याय था। कवच के हाथ में लाइटर ...और पढ़े

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