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Novels Stories free PDF Download | Matrubharti

दहलीज़ के पार - 5
by Dr kavita Tyagi
  • (5)
  • 72

जब गरिमा की चेतना लौटी, तब उसने स्वय को अस्पताल मे बिस्तर पर पाया। उस समय उसके चेहरे पर भयमिश्रित चिन्ता की रेखाएँ स्पष्ट दिखायी दे रही थी और ...

नियति - 11
by Seema Jain
  • (17)
  • 139

शिखा आश्वस्त नहीं थी, वह रोहन के दिल को और टटोलना चाहती थी। लेकिन रोहन के होठ उसके गालों को चूमते हुए उसके कानों तक पहुंच रहे थे। उसकी ...

आयम स्टिल वेटिंग फ़ॉर यू, शची - 14
by Rashmi Ravija
  • (4)
  • 63

शची के यहाँ से निकला.... निरुद्देश्य सा इधर उधर भटकता रहा थोड़ी, देर... कुछ लोगों से बातें की... मन में भले ही झंझावात चल रहें हों.. पर प्रोफेशनल ड्यूटी ...

शकबू की गुस्ताखियां - 3
by Pradeep Shrivastava
  • (1)
  • 24

जैसे-जैसे हिंदुस्तान की आजादी करीब आती गई। जिन्ना का दो राष्ट्र का सिद्धांत जोर पकड़ता गया। जल्द ही यह तय हो गया कि विभाजन होकर रहेगा। अब शकबू के ...

मेरे दिल का हाल अन्तिम भाग
by Shaihla Ansari
  • (3)
  • 74

ज़ईम कुछ कहे बिना वहां से चला गया और वो दोनों एक दूसरे का मुंह देखते रह गए।.............  . .........................................अगले कुछ दिन मायरा इंतज़ार करती रही कि ज़ईम   उसे ...

मनचाहा - 2
by V Dhruva
  • (1)
  • 72

शाम के 5:30 बज चुके थे। वैसे कोलेज मेरे घर से आधा घंटा ही दुर है। जेसे जेसे स्टोप आते गए वेसे वेसे बस की भीड़ भी कम होती ...

हिम स्पर्श - 73
by Vrajesh Shashikant Dave
  • (2)
  • 59

73 ”वफ़ाई, देखो आज सूरज नहीं निकला।“ “हाँ, पहाड़ियों पर दिवसों तक सूरज नहीं निकलता।“ “ऐसा क्यूँ होता है?”   “यहाँ यह सामान्य बात है। अनेक बार सूरज संध्या ...

हवाओं से आगे - 14
by Rajani Morwal
  • (4)
  • 37

उम्र तो ऐसी कोई खास नहीं हुई उसकी फिर भी सुमि के पैरों में दर्द रहने लगा है, उम्र को कोई ऐसी भी नहीं गुज़री उस पर बस समय ...

शकबू की गुस्ताखियां - 2
by Pradeep Shrivastava
  • (2)
  • 46

शकबू के गम को शाहीन ने कुछ ही दिनों में अपनी सेवा, हुस्न, प्यार से खत्म सा कर दिया। इसका अंदाजा मुझे शकबू के आने वाले फ़ोन से होता। ...