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    जिंदगी कुछ हसीं कुछ ग़मगीन - 1
    by Nilakshi Vashishth
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    हेलो रीडर्स,  ये मेरी पहली कहानी हैं .या यु कहु की मेरी अपनी कहानी इस कहानी को लिखने का मेरा मकसद किसी को अपनी तरफ आकर्षित करना नहीं बल्कि ...

    अच्छाईयां – २३
    by Dr Vishnu Prajapati
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    शहर से दूर एक होटलमें अनवरने सभी लोगो को बुलाया था | अनवरने पुलिस का रवैया देखकर शहर से दूर इस जगह को पसंद किया था की यहाँ उसके ...

    नया सवेरा - (सवेरे का सूरज) - 8
    by Yashvant Kothari
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    अभिमन्यु बाबू विद्यालय में परीक्षा की तैयारी करने लगे। परीक्षायें निश्चित दिवस से सुचारू रूप से चलने लगी। प्रधान जी के आदमियों ने गड़बड़ी की कोशिश शुरू में की। ...

    आरुषि भाग - 3
    by Ashish Jain
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    Yrr, I can't.. you don't love me.. I think is distance ne humare relation me bhi distance la di, you take ur space 'aarav'.. love u so much my ...

    दहलीज़ के पार - 15
    by Dr kavita Tyagi
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    प्रभा की एम. ए. की शिक्षा सम्पन्न हो चुकी थी, किन्तु सिविल सर्विस की परीक्षा मे वह अभी तक पूर्ण सफलता प्राप्त नही कर पायी थी। यद्यपि वह लिखित ...

    मनचाहा - 7
    by V Dhruva
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    अभी औफिस से छूटने का टाईम नहीं हुआ था तो रास्ते में ट्राफिक ज्यादा नहीं था। छः बजे तक हम कोलेज पहुंच गए। वहां पार्किंग में ही रीधीमा और ...

    दहलीज़ के पार - 14
    by Dr kavita Tyagi
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    प्रातः आठ बजे थे। अक्षय अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हो चुके थे और नाश्ते की प्लेट को जल्दी—जल्दी खाली करने का प्रयास कर रहे थे। अचानक उनकी ...

    हवाओं से आगे - 23
    by Rajani Morwal
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    उस रोज़ ज़ाहिदा ने महक के बाथरूम में मर्दाना बाथ-रॉब में लिपटी ब्रीफ देखी थी तभी उसके दिमाग में कुछ खटका जरूर था पर फिर विचारों को ...

    हिम स्पर्श - 86
    by Vrajesh Shashikant Dave
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    86   “वफ़ाई, तुम यहाँ हो?” इन शब्दों ने मृत से चारों शरीरों में जीवन का संचार कर दिया। चारों ने ध्वनि की दिशा में देखा। दिलशाद, नेल्सन तथा ...

    नया सवेरा - (सवेरे का सूरज) - 7
    by Yashvant Kothari
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    अन्ना अपने कमरे में मिसेज प्रतिभा के साथ अपनी सर्वेक्षण रपट को अन्तिम रूप देने के पूर्व विमर्श कर रही थी। बातचीत को शुरू करते हुए अन्ना ने कहा। ‘‘ ...

    आरुषि भाग-2
    by Ashish Jain
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    वो:- कुछ बता सकते हो आहिरा के बारे में..?मैं:- कुछ जान सकता हूँ.. मैं तुम्हारे बारे में..?वो:- पूछो..! क्या जानना चाहते हो मेरे बारे में..?मैं:- तुमने मुझे पसंद क्यों ...

    दहलीज़ के पार - 13
    by Dr kavita Tyagi
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    दो दिन कान्ता मौसी के घर रहकर गरिमा अपने पिता के घर वापिस लौट आयी । जब वह घर लौट कर आयी, आशुतोष उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। आशुतोष ...

    मनचाहा - 6
    by V Dhruva
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    lab खत्म होने के बाद मैं और दिशा केंटीन चल दिए। देर होने के कारण आज सुबह नाश्ता नहीं किया था। वैसे मैं रोज घर से भरपेट नाश्ता करती ...

    हिम स्पर्श - 85
    by Vrajesh Shashikant Dave
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    85   “जीत, क्या हुआ? तुम रुक क्यों गए? कहो जो कहना हो।“ वफ़ाई ने जीत से कहा। “दिलशा...द, डॉक्टर नेल्सन....।“ जीत आगे नहीं बोल सका। जीत के मन ...

    हवाओं से आगे - 22
    by Rajani Morwal
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    “मैं भी तो नाम और हुलिया बदलकर जीते-जीते तंग आ चुकी हूँ” “जब आमिर खान, इमरान हाशमी जैसे नामी-गिरामी हस्तियों को अपने मजहब की वजह से मकान खरीदने में समस्या ...