: प्रकरण - 26 :
बिभूति ने भी मेरी कहानी पढ़ी थी, जिस में उसे खुद का प्रतिबिम्ब नजर आया था.
उसे पढ़कर वह काफ़ी प्रभावित हुई थी.
" उस की एक एक बात को मैंने बारीकी से कहानी में प्रस्तुत की थी
उस की वॉट्स अप पर सुदेश से बात होती थी. उस ने मेरे बारे में उस को सब कुछ बताया था. जानकर उस ने भी ख़ुशी व्यक्त की थी.
आज के दौर में बिना मिले ऐसा प्यार पनप सकता हैं! यह मानने वाली बात नहीं थी. लेकिन हमारा वॉट्स अप रिश्ता आठ साल से ज्यादा समय पार चूका था, जिस में क़ोई विक्षेप या क्षति नहीं आई थी.. यह सब से बड़ी बात थी.
' बेटी तो हैं धन ही परायापास उसे कब क़ोई रख पाया अपने बाबुल जी देंगे दुआके रानी बेटी राज करेंगी '
यह गीत के जरिये मैंने म्युझिका भी आशीर्वाद दिया था.
उस के पिताजी तो नहीं रहे थे.
उस वक़्त मैंने उस के सिर पर हाथ रखकर कहां था.
" यह तुम्हारे डैडी का आशीर्वाद हैं जो उन्हों ने ऊपर से भेजा हैं! "
उस पर म्युझिका गदगदित हो गई थी.
उस ने मेरा चरण स्पर्श किया था.
यह मेरे लिये एक राष्ट्रीय पुरस्कार से बढ़कर था..
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सुहानी तो मेरी जिंदगी से चली गई थी.
उस की जगह परिवार में क़ोई ले नहीं पाया था.
तृषाली ने कोशिश जरूर की थी, लेकिन वह नाकाम हुई थी. उस के व्यवहार में प्यार नहीं बल्कि सेक्स की मात्रा ज्यादा छलकती थी. इस लिये मैं उस से दूर रहना पसंद करता था. लेकिन मैं बहन का सच्चा प्यार चाहता था. और भगवान ने उस के विकल्प के तौर पर 'फ्लोरा ' या ने ' कीसी ' को मेरी जिंदगी मे लाकर खड़ा कर दिया था.
वह केथलिक बिरादरी से ताल्लुक रखती थी. उन के बारे में कहां जाता था.
वह लोग खुल्ले, दिलदार, दरिया दिल होते हैं. लोगो के बारे में ज्यादा सोचते हैं. उस बात का ' कीसी ' ने मुझे बहुत जल्द एहसास करवाया था.
मैंने बिभूति को उस के बारे में सब कुछ बताया था.
' कीसी' केथोलिक थी. वह हिन्दुओ की तरह साड़ी परिधान करती थी. इस वजह से मुझे गलत फहमी हुई थी.
वह गुजराती है.
लेकिन उस का नाम पूछने पर मेरा भ्रम दूर हो गया था.
कुछ ही दिनों में हम लोग काफ़ी करीब आ गये थे.. उस के मंगेतर के साथ भी गाढ़ा रिश्ता बन गया था.
उस के पहले मेरी मुलाक़ात एक दो केथलिक लड़कियो से हुई थी. जो मेरी नजदीक भी आ गई थी लेकिन वहाँ आत्मीयता का अभाव था. हमारा रिश्ता औपचारिकता से कुछ कदम आगे बढ़ पाया था. उस में आत्मीयता का अभाव था.
वैसे भी मुझे ' प्रेम सन ' को छोड़ने की नौबत आई थी. इस लिये हमारे रिश्ते को वही ब्रेक लग गई थी.
एक बार दो केथलिक लड़किया मेरे घर आई थी..उस के सिवा मैं किसी के साथ आया गया नहीं था..
' कीसी' पहली लड़की थी जिस को मुझ में दिलचस्पी थी. वह मुझ से खुल कर बातें करती थी. जिस से मुझे भी उस के साथ अजीब सा लगाव हो गया था.
वह सरल और सह्रदयी थी. वह सब से बातें करती थी. छोटे लोगो का भी ख्याल रखती थी. जिस की वजह से वह ओफिस में सब की चहरीती सदस्य बन गई थी..
ना जाने क्यों एक बात मेरे जहम गहराई तक घुस गईं थी.
मैं अक्सर ऐसा सोचता था. क़ोई केथोलिक लड़की मेरी जिंदगी में बहन बनकर आयेगी और यह बात सच साबित हुई थी.
बहुत जल्द हमारे बीच भाई बहन का रिश्ता क़ायम हो गया था. इस बात से ओफिस में वाद विवाद और चर्चा का बाजार खुल गया था. क़ोई भी हमारे रिश्ते को पसंद नहीं करता था, जिस में मैनेजमेंट भी शामिल थी.
' कीसी ' ने आते ही सब के दिलो में एक जगह बना ली थी, यह देखकर अन्य लड़कियो को भी जलन होने लगी थी, लड़को को भी तकलीफ होती थी. धीमन्त कुमार को भी हमारे रिश्ते को लेकर ना जाने क्या आपत्ति थी?
हम लोगो के बीच गजब का बॉन्डिंग हो गया था. यह मेरे लिये सब से बड़ी उपलब्धि साबित हुई थी.
उस का पति जोब के लिये दुबई में सेटल हो गया था. और वह अपने आप को अकेला महसूस करती थी.. उस स्थिति में उसे हमारा बड़ा सहारा था..
उस की लड़की भी हम लोगो से काफ़ी धुल मिल गई थी.
उसी दौरान उस को पेट का अल्सर हो गया था. उस ने किसी के मुंह से सुना था.
यह दुनिया की दसवीं जान लेवा बीमारी थी.
तब से उस के मन में एक डर बैठ गया था.
वह ज्यादा जी नहीं पायेगी.
अगर ऐसा हुआ तो अपनी बेटी का क्या होगा? उस की चिंता लगी रहती थी . इस स्थिति में वह अपने पति को अपने पास चाहती थी. लेकिन वह आ नहीं पाया था, उस बात से वह काफ़ी डिप्रेस्ड हो गई थी.
पति के ऐसे सलूक ने उसे गलत फहमी की गहरी खाई में धकेल दिया था.
ठीक दो महिनो के बाद परमेश्वर मुंबई आया था, तो ' कीसी' उस से नाराज हो गई थी. पति को अनापशनाप सुनाया था, बेवफाई का इल्जाम भी लगाया था.
वह कुछ भी सुनने की स्थिति में नहीं थी.
उस ने दुबई में किसी ओर से संबंध होने की बेतुकी बात की थी. सुनकर परमेश्वर का दिल बिल्कुल टूट सा गया था. दोनों के बीच महाभारत की जंग छिड़ गई थी. परमेश्वर इस हालत में अपने आप को संभाल नहीं पाया था. उस ने मुझे फोन कर के अपने घर पर बुलाया था
उस वक़्त पहली बार मैंने ' कीसी ' की आँखों में आंसू देखे थे, उस के पति के प्रति उस की आँखों में संदेह का कीड़ा नर्तन करता हुआ महसूस किया था.
मुझे ऐसा लग रहा था. परमेश्वर कुछ कहना चाहता था. लेकिन कह नहीं पा रहा था. ' कीसी ' अब भी विचलित थी., प्रताड़ित थी.. वह खुद भी अपने आप को सँभाल नहीं पा रही थी.
इस स्थिति मे परमेश्वर ने राज खोलते हुए अलमारी से एक फाइल निकालकर मेरे हाथों में थमा दी थी.
फाइल में अस्पताल के पेपर्स थे. जिसे पढ़कर मेरी आँखों के सामने अंधेरा छा गया था.
उस को दुबई में अकस्मात हुआ था. उस के पेट तले गंभीर चोट लगी थी, जिस ने उसे वैवाहिक सुख से भी वंचित कर दिया था. वह अपनी समस्या बताकर ' कीसी' की परेशानी बढ़ाना नहीं चाहता था. इस लिये उस ने चुप्पी धारण कर ली थी, जो उस की दुश्मन बन गई थी.
हकीकत जानकर ' कीसी ' हड़बडा सी गई थी. उस ने अपने पति की वफ़ादारी पर संदेह किया था. इस लिये अपने आप को गुनहगार मान रही थी. लेकिन परमेश्वर उसे बेपनाह प्यार करता था. उस ने सब कुछ भूलकर ' कीसी' को तुरंत ही गले लगाकर माफ कर दिया था.
वह अकेली रहती थी. इस स्थिति में उस की जिंदगी में अनेकानेक समस्या पैदा हुई थी.
परमेश्वर ने जिस को अपना दोस्त माना था, उस पर ' कीसी' ने भरोसा किया था जिस को तोड़कर विश्वास उसी ने ' उस के पैसो का गबन किया था.
000000000 ( क्रमशः)