विद्दुक पार्ट 1 AbhiNisha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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विद्दुक पार्ट 1

विद्दुक पा    1


कहते हैं कुछ लोग कभी खत्म नहीं होते 
मरने के भी बाद लौट आते हैं 

और उनमें से कुछ पुण्य आत्मा जो 
अपने सबसे प्यारी रूप में लौट आती है
 बाल रूप में और उने विद्युत कहते हैं













अंधेरों की बीच-बीच अचानक एक दृश्य ऊभर आती है 
एक छोटी बच्ची किसी के हाथों में अपना हाथ दिए
 उदास चेहरे के साथ खड़ी है


 और वही उसके समाज में झुकते हुए 
एक आदमी जिसकी उम्र लगभग 30 साल होगी
 वो बच्ची की हाथो को अपने हाथों में ले हुए खड़ा है
 उने देखते हुए




और वही वो बच्ची अचानक से मासूम भरी आवाज में कहती है 

प्रॉमिस कीजिए कि 
आप लौटकर आएंगे



और वही उस बच्ची के पीछे पांच छे कदम दूर से 
एक हल्की कदमों की आहट 
और मुस्कुराते हुए आवाज आती है






और वही वह आदमी मुस्कराते हुए 
उस बच्ची देखा है 
 और इसके हाथ अपने हथेली में हल्के तबाते हुए 
मुट्ठी बनता है और 
ठेहराऊ भरी हल्की भारी आवाज में कहता है


ठीक है मैं बादा करता हूं 
मैं वापस लौटकर आऊंगा



और फिर वो बच्ची बड़ी मासूमियत के साथ 
उस आदमी को देखते हुए कहती है 

 ठीक है
 मैं आपका इंतजार करूंगा
 अगर आप दुबारा लौट के नहीं आई तो
 हमारी यारी कटी






और तभी यह सुनते ही उस बच्ची के पीछे 5। 6 कदम दुर एक कमरे की दरवाजे के पास अंधेरे में खड़ी किसी 
 औरत की होंठ मुस्कुराके फेल जाती है



 


और वही वो आदमी उस बच्ची की बाते सूनते हुए 
 अचानक से मुस्कुराते है 
और अपने हाथ को डीला करते हुए
 उस बच्चे के हाथ अपने हाथ से धीरे-धीरे छोड़ते हुए 
ठहरते कदमो के साथ हाल्के झुकते ही पीछे लेता है
 और मुस्कुराते हुए कहता है 

ठीक है 


और वही बच्ची अपने हाथों को नीचे करते ही
 उदास भरी चेहरे के साथ दुबारा मासूमियत आबाज के साथ कहती है 

आप भूलना मत
 नाही अपना प्रोमिस तोड़ना 

 


और वही वो आदमी खड़ा होकर 
अपनी वही हाथ उठाते
 और बस बच्ची के तरफ अपना हाथ हीलाते हुए 
और उसे देखते हूए मुस्कुराकर कहत है 

ठीक है मैं नहीं तोड़ूंगा 


और फिर स्माइल करते हुए नजर उठाकर 
 आगे अंधेरे में खड़ी उसे औरत की तरफ देखती है 
और उस औरत को देखते हुए 
एक जो लाइन स्माइल देते हुए 



और वही वह औरत भी 
 अंधेरे में दीवार से लगकर खड़ी होते हुए ही 
 उस आदमी को देखते हुए स्माइल करती है




और वही वह आदमी उसे औरत को देखकर स्माइल करते हुए 
अचानक मुड़कर वहां से दूसरी साइट 
जाने के लिए अपनी कदम आगे बढ़ते हैं 


और वही वह बच्ची 
अपने हाथ नीचे करते हुए 
उस आदमी को जाते हुए देखती रहती है 
उसका इंतजार करते हुए 





और तभी एक धुंध बजती है
 गाना को गहरी लाइन के साथ धीरे-धीरे गुनगुनाने उठती है


पागलों की तरह ही है तो क्या तुम ने प्यार है 
 रोसन है जिंदगी मेरी तुमी से
मुझे तुम पे एतबार है


तु ने जो कहा प्यार है 
मैं पिघल गया 
तेरे छाओं तले आ कर 
मैं तुझ में ढल गया

पागलों की तरह ही है तो क्या तुम से प्यार है 
रोसनी के तलाशने में ही तो किया तेरा ऐतबार है 




और तभी धीरे-धीरे दृश्य गायब होती है और 
अचानक से इस गाने के साथ
 किसी की पलकें हिलती है
 और एक लड़की की आवाज आती है 

आपने प्रॉमिस किया है
 वापस आधा 

और वही लॉटती हुए दूसरी तरफ से भी दूसरी आवाज आती है

 ठीक है



और 
तभी अचानक दृष्टि धुंध में बदल जाता है 
अंधेरी रातों गसरी मे धुंध के साथ
 ठंडी हवा चलते हुए
 एक के बड़ी कब्रिस्तान के दिखाई देता है 
और उस कब्रिस्तान वो धुंध आते हुए 
इधर उधर भागने लगते हैं 
और उसके साथ साथ  


 यह गाना फिर से बज उठता है
उस धुंध में 

पागलों की तरह ही है तो क्या तुम ने प्यार है 
एक तेरी ही ख्याल में तो लौट आया तेरा यार है


जग से दूर होकर फिर से लौट आया
 तेरे करीब रहने के लिए 
जग के सरे बंधन तोड़ कर 
ओया मे यहा दुवारा लोट कर


पागलों की तरह ही तो मुझ पे तेरा एतबार है 
एक तेरे ही एतबार से तो मै लोटा तेरे पास आया बार बार है 

पागलों की तरह ही है  
मुझे भी तुमसे प्यार हे



और वही कब्रिस्तान में इस सॉन्ग के साथ 
सेहरन भरी हवा तेज चल रही है 
और ठंडी रात समसान में कहरे से भरी धरती 
ऐसा लग रहा है कि कोई 
अपनी मौजूदगी जाहिर कर रहा है
इस गाने की धुन के साथ धुंध जैसे उड़ते हुए
कोई 
जिसका अभी तक कोई चेहरा नहीं है




और वही कब्रिस्तान में 
 वहुत सारा कब्र से भरी हुई 
धुंध और अंधेरों के बीच 
बिना डर के
 एक उमर दराज पंडित धोती और गंजी 
अपने हुए कंधे पे गमछा रखा हुआ
 बस चुप चाप सीधे पूर्व की मुंह करते हुए खड़े हैं 
दोनो हाथ सीधे करके बन्धते हुए 
उसके आंखों में कोई चमक नहीं है 
कोई उम्मीद नहीं बस खाली पन
लगभग आधे रात हो चुकी है 
धूंध से भरे कब्रिस्तान ऐसा लग रहा है कि
 कोई कहानी लिख रही है 
और वो पंडितो कब्रिस्तान कि कहानी की गवाह है





और वही
ऐसी अंधेरी सेहरन भरी हवा मे रूह कपां देने वाली ठंड में 
कोहरे भरी धरती  और उड़ता हआ ऐ धुधं डरावना
फिर भी अकेले होते हुए भी बिना डर के
उस पंडित की आंखें किसी को देख रही है 


 वहा पंडित बस आगे की तरफ देखा रहा है
बिना भाव बिना माथेपर कोई सेकंज  के




और 
 तभी अचानक आगे कुछ दूर पर ही कब्र के पास 
 धुंध आते हैं बड़ा जाता है 
और उसके साथ उड़ते हुए चारों तरफ की धुंध 
धीरे-धीरे करके उस धुंध में मिलते हुए 
और देखते ही देखते अचानक 
उस धुंध मे धीरे-धीरे करके कोई इंसानी आकर बनने लगता है 





और वही वह पंडित बिना डरे
अपने दोनों हाथ को बंधते हुए 
 आगे की तरफ बिना घबराहट जीजक के देखता रहता है 
न जाने कि आसा में किसकी लौट कर 
आने की उम्मीद में वह अब तलक यहां है 
अपना स्थित चेहरा लिए 





अगर यह कहानी आप सबको पसंद आए तो
आगे बढ़ते रहिए 
जल्द मिलते हैं नेक्स्ट एपिसोड में
मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा 🦋❤️💯