ZERO TO BILLIONAIRE - 5 Raju kumar Chaudhary द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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ZERO TO BILLIONAIRE - 5

ZERO TO BILLIONAIRE

भाग 5: पिता का रहस्य और अरबों का षड्यंत्र

लेखक: राजु कुमार चौधरी

अध्याय 1: सुबह छह बजे का रहस्य

सुबह के पाँच बजकर तीस मिनट हो चुके थे।

आरव अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा शहर को देख रहा था। रातभर उसकी आँखों में नींद नहीं आई थी।

उसके दिमाग में बार-बार वही ईमेल घूम रहा था।

"अगर तुम्हें अपने पिता के बारे में सच्चाई जाननी है, तो सुबह छह बजे पुराने रेलवे स्टेशन पर आना।"

आरव के पिता की मृत्यु को कई साल बीत चुके थे। बचपन से उसे बताया गया था कि उसके पिता एक साधारण व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी ईमानदारी से बिताई।

लेकिन अब अचानक उसके अतीत के बारे में इतने सवाल क्यों उठ रहे थे?

क्या उसके पिता की जिंदगी में कोई ऐसा रहस्य था, जिसके बारे में परिवार को भी नहीं पता था?

आरव ने अपना कोट उठाया और घर से निकल गया।

सुबह की ठंडी हवा चल रही थी। सड़कें लगभग खाली थीं।

छह बजने में पाँच मिनट बाकी थे, जब उसकी कार पुराने रेलवे स्टेशन के सामने रुकी।

यह वही स्टेशन था, जहाँ से कभी वह अपने छोटे-से गाँव से बड़े शहर आया था।

उस समय उसकी जेब में कुछ पैसे और आँखों में हजारों सपने थे।

आज उसके पास अरबों की कंपनी थी, लेकिन वह अपने अतीत के एक सवाल का जवाब खोजने आया था।

स्टेशन की पुरानी घड़ी ने छह बजाए।

तभी प्लेटफॉर्म नंबर तीन की ओर से एक बुजुर्ग व्यक्ति उसकी तरफ बढ़ा।

उसके हाथ में एक काला बैग था।

"आरव?"

"जी। आप कौन हैं?"

बुजुर्ग ने चारों ओर देखा और धीमी आवाज में कहा—

"मैं तुम्हारे पिता को जानता था। और जो कुछ तुम्हें उनके बारे में बताया गया है, वह पूरी सच्चाई नहीं है।"

आरव के चेहरे का रंग बदल गया।

"मेरे पिता के बारे में आप क्या जानते हैं?"

बुजुर्ग ने बैग खोला।

उसमें एक पुरानी डायरी, कुछ तस्वीरें और एक सीलबंद लिफाफा था।

"तुम्हारे पिता केवल एक साधारण कर्मचारी नहीं थे। उनके पास एक ऐसा विचार था, जो आज तुम्हारी कंपनी से भी बड़ा साम्राज्य बना सकता था।"

आरव ने हैरानी से पूछा

"कौन-सा विचार?"

बुजुर्ग ने डायरी उसकी ओर बढ़ा दी।

"इसे पढ़ो। लेकिन याद रखना, तुम्हारे पिता ने जो शुरू किया था, उसे पूरा करने की कोशिश करने वाले कई लोग अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाए।"

"क्यों?"

बुजुर्ग ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा

"क्योंकि उस विचार में केवल पैसा नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक रहस्यों में से एक छिपा है।"

इतना कहकर वह वहाँ से जाने लगा।

आरव ने उसे रोकने की कोशिश की।

"रुकिए! कम से कम अपना नाम तो बताइए!"

बुजुर्ग पीछे मुड़ा।

"मेरा नाम देवेंद्र है। तुम्हारे पिता मुझे अपना सबसे भरोसेमंद मित्र मानते थे।"

फिर वह स्टेशन की भीड़ में गायब हो गया।

आरव के हाथ में अपने पिता की पुरानी डायरी थी।

और उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य अब खुलने वाला था।

अध्याय 2: डायरी के पन्ने

अपने ऑफिस पहुँचकर आरव ने किसी को भी अंदर आने से मना कर दिया।

उसने डायरी खोली।

पहले पन्ने पर उसके पिता की लिखावट थी।

"मेरे बेटे आरव के लिए।

अगर तुम कभी यह डायरी पढ़ रहे हो, तो शायद वह समय आ गया है जब तुम्हें अपने परिवार के अतीत को जानना चाहिए।"

आरव की उँगलियाँ काँपने लगीं।

उसने अगला पन्ना पलटा।

"दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वे, जो दूसरों के बनाए नियमों के अनुसार जीवन बिताते हैं। दूसरे वे, जो ऐसी व्यवस्था बनाते हैं जिसमें लाखों लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

मैं हमेशा दूसरी तरह का इंसान बनना चाहता था।

मेरा सपना एक ऐसा डिजिटल व्यापारिक नेटवर्क बनाना था, जहाँ दुनिया का कोई भी छोटा व्यापारी अपने उत्पाद को किसी भी देश के ग्राहक तक पहुँचा सके।"

आरव अचानक रुक गया।

यह तो बिल्कुल उसी विचार जैसा था, जिस पर उसने अपनी ई-कॉमर्स कंपनी खड़ी की थी!

उसने तेजी से अगले पन्ने पढ़े।

डायरी में लिखा था कि उसके पिता ने कई साल पहले एक व्यापारिक नेटवर्क का प्रारंभिक मॉडल तैयार किया था। लेकिन उस परियोजना में उनके कुछ साझेदारों ने विश्वासघात किया।

उनका उद्देश्य उस तकनीक को खरीदना नहीं, बल्कि उसके वास्तविक निर्माता को उससे दूर करना था।

अंतिम पन्ने पर एक नाम लिखा था

विक्रम मल्होत्रा।

आरव कुर्सी से उठ खड़ा हुआ।

"यह कैसे संभव है?"

क्या विक्रम मल्होत्रा उसके पिता को पहले से जानता था?

क्या उसके पिता के पुराने विचार और आरव की वर्तमान कंपनी के बीच कोई संबंध था?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल

क्या विक्रम आरव के बिजनेस में निवेश करके वास्तव में उसकी कंपनी पर नियंत्रण पाना चाहता था, या वह किसी पुराने रहस्य को हमेशा के लिए दबाना चाहता था?

आरव ने डायरी बंद कर दी।

अब यह केवल एक व्यावसायिक विवाद नहीं था।

यह उसके परिवार के अतीत से जुड़ा मामला बन चुका था।

अध्याय 3: अनन्या की खोज

उसी दिन दोपहर में अनन्या आरव के ऑफिस पहुँची।

आरव ने उसे अपने पिता की डायरी दिखाई।

अनन्या ने कुछ पन्ने पढ़े और हैरानी से कहा

"मुझे लगता है कि हमें इस मामले में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।"

आरव ने पूछा, "तुम्हारा क्या मतलब है?"

"मेरे पास मल्होत्रा ग्लोबल ग्रुप के कुछ पुराने व्यावसायिक रिकॉर्ड हैं। उनमें एक परियोजना का नाम बार-बार सामने आता है प्रोजेक्ट फीनिक्स।"

"प्रोजेक्ट फीनिक्स?"

"हाँ। आधिकारिक रिकॉर्ड में इसे एक असफल तकनीकी परियोजना बताया गया था। लेकिन कंपनी के कुछ पुराने दस्तावेजों से पता चलता है कि इस परियोजना को बंद करने के बाद भी इसके लिए धन खर्च किया जाता रहा।"

आरव ने पूछा, "क्या तुम्हें पता है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्या था?"

अनन्या ने सिर हिलाया।

"अभी नहीं। लेकिन मुझे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पता चला है, जिसने इस परियोजना पर काम किया था। उसका नाम है समीर मेहरा।"

"वह कहाँ है?"

"मुझे नहीं पता। कंपनी छोड़ने के बाद वह सार्वजनिक जीवन से दूर हो गया।"

आरव ने अपने कंप्यूटर पर समीर मेहरा के बारे में उपलब्ध जानकारी खोजने के लिए अपनी टीम को निर्देश दिया।

कुछ देर बाद एक पुरानी व्यावसायिक रिपोर्ट सामने आई।

उसमें समीर की तस्वीर थी।

तस्वीर के नीचे लिखा था

पूर्व तकनीकी निदेशक, फीनिक्स इनोवेशन लैब्स।

आरव ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

उसके पिता की डायरी में भी यही नाम एक पन्ने के कोने पर लिखा हुआ था।

अब उसके पास पहली ठोस कड़ी थी।

लेकिन उसे यह भी समझना था कि इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि कैसे की जाए।

उसने अनन्या से कहा

"हम किसी पर आरोप नहीं लगाएंगे। पहले सभी रिकॉर्ड की जाँच करेंगे। अगर कोई सच्चाई छिपी है, तो उसे प्रमाणों के साथ सामने लाएँगे।"

अनन्या ने पहली बार मुस्कुराकर उसकी ओर देखा।

"शायद इसी वजह से तुम्हारी कंपनी इतनी आगे पहुँची है।"

आरव ने जवाब दिया

"कंपनी बनाना आसान नहीं था। लेकिन उसे सही रास्ते पर रखना उससे भी कठिन है।"

अध्याय 4: विक्रम की असली चाल

दूसरी ओर, माल्होत्रा ग्लोबल ग्रुप के मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी।

विक्रम मल्होत्रा अपने निजी कार्यालय में बैठा था।

उसके सामने कंपनी के तीन वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

विक्रम ने पूछा

"क्या आरव ने निवेश प्रस्ताव स्वीकार कर लिया?"

एक अधिकारी ने जवाब दिया

"नहीं सर। उसने अतिरिक्त शर्तों की माँग की है और अब वह हमारी पुरानी परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी जुटा रहा है।"

विक्रम कुछ क्षण चुप रहा।

फिर उसने पूछा

"क्या उसे प्रोजेक्ट फीनिक्स के बारे में पता चल गया है?"

कमरे में खामोशी छा गई।

एक अधिकारी ने धीमी आवाज में कहा

"हमें अभी इसकी पुष्टि नहीं है। लेकिन उसने समीर मेहरा के बारे में जानकारी माँगी है।"

विक्रम ने मेज पर रखी फाइल बंद कर दी।

"तो इसका मतलब है कि अतीत फिर से सामने आ रहा है।"

दूसरे अधिकारी ने पूछा

"सर, अब हमें क्या करना चाहिए?"

विक्रम खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।

"आरव को कम मत समझो। उसने अपने दम पर वह कंपनी खड़ी की है, जिसे हम खरीदना चाहते हैं। वह केवल पैसा कमाने वाला लड़का नहीं है। वह सवाल पूछना जानता है।"

"तो क्या हम निवेश का प्रस्ताव वापस ले लें?"

विक्रम ने तुरंत जवाब नहीं दिया।

कुछ क्षण बाद उसने कहा

"नहीं। प्रस्ताव वापस मत लो। उसे बातचीत में उलझाए रखो। हमें पहले यह पता लगाना होगा कि उसके पास वास्तव में क्या जानकारी है।"

विक्रम ने अपनी दराज से एक पुरानी तस्वीर निकाली।

तस्वीर में तीन लोग खड़े थे।

उनमें से एक आरव के पिता थे।

दूसरा स्वयं विक्रम था।

और तीसरा व्यक्ति ऐसा था, जिसे देखकर विक्रम के चेहरे पर चिंता उभर आई।

उसने तस्वीर को उलटकर देखा।

पीछे केवल एक तारीख लिखी थी।

12 मई 1998।

विक्रम ने तस्वीर वापस रख दी।

"अगर यह रहस्य खुल गया, तो केवल आरव की जिंदगी नहीं बदलेगी। मेरी जिंदगी भी बदल जाएगी।"

अध्याय 5: समीर मेहरा का पता

तीन दिन बाद आरव की टीम को एक महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

समीर मेहरा पिछले कई वर्षों से एक छोटे पहाड़ी शहर में रह रहा था।

उसने तकनीकी दुनिया से दूरी बना ली थी और किसी भी मीडिया इंटरव्यू से बचता था।

आरव ने उससे संपर्क करने का प्रयास किया।

पहले ईमेल का कोई जवाब नहीं आया।

दूसरे संदेश का भी कोई उत्तर नहीं मिला।

आखिरकार तीसरे दिन समीर का जवाब आया।

"मुझे पता है कि तुम कौन हो, आरव। मैं तुम्हारे पिता को भी जानता था। लेकिन जिस सच्चाई को तुम खोज रहे हो, उसे जानने के लिए तुम्हें तैयार रहना होगा।"

आरव ने तुरंत जवाब दिया

"मैं अपने पिता के बारे में सच जानना चाहता हूँ। अगर उनके साथ अन्याय हुआ था, तो मैं चाहता हूँ कि वह सबके सामने आए।"

कुछ देर बाद समीर का संदेश आया।

"ठीक है। अगले सप्ताह हम मिलेंगे। लेकिन एक बात याद रखना हर सच तुम्हें खुशी नहीं देता। कभी-कभी वह तुम्हारी पूरी दुनिया बदल देता है।"

आरव ने फोन रख दिया।

अब उसे लगने लगा था कि उसके पिता का अतीत एक साधारण व्यापारिक विवाद से कहीं अधिक जटिल था।

लेकिन वह पीछे हटने वाला नहीं था।

अध्याय 6: परिवार का छिपा हुआ पन्ना

उस शाम आरव अपने गाँव पहुँचा।

कई वर्षों बाद वह उस पुराने घर में आया था, जहाँ उसने अपना बचपन बिताया था।

घर की दीवारें पुरानी हो चुकी थीं। आँगन में लगा पेड़ अब पहले से बड़ा हो गया था।

उसकी माँ कमरे में बैठी थीं।

आरव को देखकर उनके चेहरे पर खुशी उभर आई।

"बेटा, आज अचानक गाँव कैसे आना हुआ?"

आरव उनके पास बैठ गया।

"माँ, मुझे पिताजी के बारे में कुछ जानना है।"

उनकी मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।

"क्या हुआ?"

आरव ने डायरी और पुरानी तस्वीर उनके सामने रख दी।

तस्वीर देखते ही उनकी आँखें भर आईं।

कुछ देर तक वह चुप रहीं।

फिर उन्होंने कहा

"मुझे उम्मीद थी कि एक दिन तुम्हें यह सब पता चल जाएगा।"

आरव हैरान रह गया।

"माँ, आप सब जानती थीं?"

उन्होंने सिर झुका लिया।

"पूरी बात नहीं। लेकिन तुम्हारे पिता ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में कुछ दस्तावेज मुझे दिए थे। उन्होंने कहा था कि अगर कभी कोई उनके पुराने काम के बारे में पूछे, तो मैं ये दस्तावेज तुम्हें दे दूँ।"

वह कमरे के अंदर गईं और एक पुराना संदूक लेकर लौटीं।

संदूक में कपड़ों के नीचे एक छोटा लिफाफा रखा था।

आरव ने उसे खोला।

उसमें एक पत्र और एक अधूरा नक्शा था।

पत्र में लिखा था

"आरव, अगर तुम यह पत्र पढ़ रहे हो, तो इसका अर्थ है कि तुमने अपने सपनों को जीवित रखा है।

मुझे नहीं पता कि तुम जीवन में कहाँ तक पहुँचोगे। लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम एक बात कभी मत भूलना।

सच्चा साम्राज्य वह नहीं होता, जिसमें केवल एक व्यक्ति शक्तिशाली बनता है। सच्चा साम्राज्य वह होता है, जिसमें हजारों लोगों को अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिलता है।

अगर कभी तुम्हें मेरे अधूरे काम के बारे में पता चले, तो उसे पूरा करने से पहले यह जरूर समझना कि उसका उद्देश्य क्या था।

पैसा तुम्हें शक्ति दे सकता है, लेकिन तुम्हारे निर्णय ही तय करेंगे कि उस शक्ति का उपयोग किसके लिए होगा।"

पत्र के अंत में एक स्थान का नाम लिखा था।

फीनिक्स रिसर्च सेंटर।

आरव ने नक्शा उठाया।

उसकी माँ ने धीमी आवाज में कहा

"तुम्हारे पिता आखिरी बार इसी जगह जाने की बात कर रहे थे। उसके बाद उन्होंने कभी इसके बारे में खुलकर बात नहीं की।"

आरव ने माँ का हाथ थाम लिया।

"माँ, मैं पता लगाऊँगा कि आखिर हुआ क्या था।"

उन्होंने उसे गले लगा लिया।

"बस एक वादा करो, बेटा। अपने सपनों को पूरा करने के चक्कर में खुद को मत खो देना।"

आरव ने कहा

"मैं वादा करता हूँ।"

अध्याय 7: फीनिक्स रिसर्च सेंटर

अगले सप्ताह आरव और अनन्या उस स्थान पर पहुँचे, जिसका उल्लेख उसके पिता के पत्र में था।

फीनिक्स रिसर्च सेंटर कभी एक आधुनिक तकनीकी प्रयोगशाला हुआ करती थी।

अब वहाँ सन्नाटा था।

मुख्य द्वार पर पुराना बोर्ड लगा था। इमारत के कई हिस्से वर्षों से बंद पड़े थे।

आरव ने अपने साथ लाई गई जानकारी के आधार पर पुराने प्रशासनिक कार्यालय का पता लगाया।

वहाँ उन्हें एक पूर्व कर्मचारी मिला, जिसने अपना नाम बताने से पहले दोनों की पहचान जाँची।

"आप लोग यहाँ क्यों आए हैं?" उसने पूछा।

आरव ने अपने पिता का नाम बताया।

उस व्यक्ति का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।

"आप उनके बेटे हैं?"

"जी।"

उसने कुछ देर आरव को देखा, फिर बोला

"तुम्हारे पिता ने यहाँ जो काम शुरू किया था, वह अपने समय से बहुत आगे था। लेकिन उस परियोजना को बंद करने के पीछे कई कारण थे।"

आरव ने पूछा

"क्या आप जानते हैं कि प्रोजेक्ट फीनिक्स वास्तव में क्या था?"

उस व्यक्ति ने उत्तर दिया

"यह केवल एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बनाने की परियोजना नहीं थी। इसका उद्देश्य छोटे उत्पादकों, स्थानीय व्यापारियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच ऐसा नेटवर्क तैयार करना था, जिसमें व्यापार की जानकारी और अवसर कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहें।"

आरव की आँखें चमक उठीं।

उसके पिता का सपना और उसका अपना बिजनेस एक ही दिशा में जा रहे थे।

लेकिन वह व्यक्ति आगे बोला

"परियोजना बंद होने से पहले कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हो गए थे। उसके बाद टीम के कई सदस्य अलग-अलग जगह चले गए। कुछ ने तकनीकी दुनिया छोड़ दी। कुछ ने इस विषय पर बात करना ही बंद कर दिया।"

अनन्या ने पूछा

"क्या आपको पता है कि उन दस्तावेजों में क्या था?"

उसने सिर हिलाया।

"पूरी जानकारी नहीं। लेकिन मुख्य अभिलेखागार में एक रिकॉर्ड अब भी मौजूद हो सकता है।"

वह उन्हें इमारत के एक पुराने हिस्से तक ले गया।

वहाँ एक छोटी अलमारी में कई फाइलें रखी थीं।

आरव ने फाइलों की सूची देखी।

अचानक उसे एक नाम दिखाई दिया

PROJECT PHOENIX ORIGINAL FOUNDERS.

उसने फाइल बाहर निकाली।

पहले पन्ने पर तीन नाम थे।

पहला नाम उसके पिता का था।

दूसरा नाम विक्रम मल्होत्रा का।

और तीसरा नाम देखकर आरव के हाथ रुक गए।

वह नाम था

देवेंद्र राठौर।

वही व्यक्ति, जिसने उसे पुराने रेलवे स्टेशन पर डायरी दी थी।

आरव ने अनन्या की ओर देखा।

"इसका मतलब देवेंद्र जी इस परियोजना के संस्थापकों में से एक थे।"

अनन्या ने कहा

"हाँ। और शायद वह इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जानते हैं।"

तभी पीछे से एक आवाज आई

"तुम दोनों को यह फाइल नहीं खोलनी चाहिए थी।"

आरव और अनन्या ने पीछे मुड़कर देखा।

दरवाजे पर एक आदमी खड़ा था।

उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी।

उसने तस्वीर आरव की ओर बढ़ाई।

"अगर तुम वास्तव में अपने पिता का सच जानना चाहते हो, तो पहले यह देखो।"

आरव ने तस्वीर ली।

उसमें उसके पिता, विक्रम मल्होत्रा और देवेंद्र राठौर एक साथ खड़े थे।

लेकिन तस्वीर के पीछे लिखी तारीख ने आरव को चौंका दिया।

12 मई 1998।

और उसके नीचे एक वाक्य लिखा था

"जिस दिन तीन दोस्तों ने एक साम्राज्य बनाने का सपना देखा, उसी दिन उनके बीच विश्वासघात का बीज बोया गया।"

आरव ने तस्वीर को कसकर पकड़ लिया।

अब सवाल यह नहीं था कि उसके पिता विक्रम मल्होत्रा को जानते थे या नहीं।

सवाल यह था कि उन तीन दोस्तों के बीच वास्तव में क्या हुआ था।

और क्या आरव का आज का साम्राज्य उसी अधूरे सपने की अगली कड़ी था?

अध्याय 8: वह नाम जो इतिहास बदल देगा

आरव उस अजनबी की ओर मुड़ा।

"आप कौन हैं?"

उस व्यक्ति ने उत्तर दिया

"मेरा नाम समीर मेहरा है।"

आरव कुछ क्षण चुप रहा।

"मैं आपसे मिलने ही वाला था।"

समीर ने कहा

"मुझे पता है। लेकिन तुम्हारे यहाँ आने की खबर मुझ तक पहले पहुँच गई।"

"किसने बताया?"

समीर ने सीधे जवाब देने के बजाय पूछा

"क्या तुम सच में जानना चाहते हो कि तुम्हारे पिता के साथ क्या हुआ था?"

"हाँ।"

"तो तुम्हें यह समझना होगा कि तुम्हारे पिता, विक्रम और देवेंद्र केवल साझेदार नहीं थे। वे तीन दोस्त थे, जिन्होंने मिलकर एक ऐसी कंपनी बनाने का सपना देखा था, जो दुनिया के छोटे व्यापारियों की जिंदगी बदल सके।"

आरव ने पूछा

"फिर वे अलग कैसे हो गए?"

समीर ने लंबी साँस ली।

"क्योंकि जब उनका विचार सफल होने लगा, तो उनके सामने एक बड़ा प्रस्ताव आया। उस प्रस्ताव को स्वीकार करने से उन्हें बहुत पैसा मिल सकता था। लेकिन इसके बदले उन्हें अपने मूल उद्देश्य से समझौता करना पड़ता।"

"मेरे पिता ने प्रस्ताव ठुकरा दिया?"

"हाँ। तुम्हारे पिता चाहते थे कि परियोजना छोटे व्यापारियों के लिए खुली रहे। विक्रम का मानना था कि उसे नियंत्रित करके अधिक बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य बनाया जा सकता है। देवेंद्र दोनों के बीच समझौता करवाना चाहता था।"

आरव ने पूछा

"और फिर?"

समीर ने फाइल से एक दस्तावेज निकाला।

"इसके बाद कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं, जिनकी वजह से परियोजना बंद हो गई। लेकिन मैं अभी यह नहीं कह सकता कि किसकी गलती थी। हमारे पास पूरी जानकारी नहीं है।"

आरव ने दस्तावेज पढ़ा।

उसमें परियोजना के स्वामित्व, तकनीकी अधिकारों और निवेश से संबंधित कई पुराने समझौते दर्ज थे।

लेकिन अंतिम पन्ने पर एक अतिरिक्त हस्ताक्षर था।

वह हस्ताक्षर किसी ऐसे व्यक्ति का था, जिसका नाम आरव ने पहले कभी नहीं सुना था।

समीर ने कहा

"यही वह नाम है, जिसे हमें खोजना होगा। क्योंकि संभव है कि उस व्यक्ति के पास असली समझौते की प्रति हो।"

आरव ने पूछा

"वह कौन है?"

समीर ने उत्तर देने से पहले कुछ क्षण रुककर कहा

"उसका नाम है अर्जुन सिंघानिया।"

आरव ने यह नाम अपने फोन में लिख लिया।

अब उसके पास एक नई कड़ी थी।

लेकिन उसे यह नहीं पता था कि अर्जुन सिंघानिया जीवित था या नहीं, और अगर था, तो इतने वर्षों से कहाँ छिपा हुआ था।

तभी आरव के फोन पर एक संदेश आया।

भेजने वाला नंबर अनजान था।

संदेश में लिखा था

"प्रोजेक्ट फीनिक्स की जाँच बंद कर दो। तुम्हारे पिता ने जो गलती की थी, वही गलती मत दोहराना।"

आरव ने संदेश समीर को दिखाया।

समीर का चेहरा गंभीर हो गया।

"अब उन्हें पता चल गया है कि तुम सच के करीब पहुँच रहे हो।"

आरव ने फोन अपनी जेब में रखा।

उसकी आँखों में अब डर नहीं, दृढ़ निश्चय था।

"अगर मेरे पिता ने कोई गलती की थी, तो मैं उसे समझना चाहता हूँ। अगर उनके साथ अन्याय हुआ था, तो मैं सच सामने लाना चाहता हूँ। लेकिन मैं बिना प्रमाण किसी को दोषी नहीं ठहराऊँगा।"

समीर ने उसकी ओर देखा।

"तुम्हारे पिता भी यही कहा करते थे।"

आरव ने फाइल बंद कर दी।

वह जानता था कि उसकी कंपनी के सामने अभी भी बड़े व्यावसायिक खतरे थे। उसे अपने कर्मचारियों, व्यापारियों और निवेशकों का विश्वास बनाए रखना था।

लेकिन अब उसके सामने एक और जिम्मेदारी थी।

अपने पिता के अधूरे सपने को समझना।

और यह पता लगाना कि प्रोजेक्ट फीनिक्स का वास्तविक उद्देश्य क्या था।

 भाग 5 समाप्त 

अगले भाग में  भाग 6: अरबों का युद्ध

आरव के सामने अब तीन नए सवाल हैं

1. अर्जुन सिंघानिया कौन है, और उसके पास कौन-सा रहस्य छिपा है?
2. क्या विक्रम मल्होत्रा वास्तव में आरव का दुश्मन है, या वह भी किसी पुराने षड्यंत्र का हिस्सा बन गया था?
3. क्या आरव अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करते हुए अपनी कंपनी को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल साम्राज्यों में से एक बना पाएगा?

लेकिन सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी है।

प्रोजेक्ट फीनिक्स के मूल दस्तावेज में एक चौथे संस्थापक का भी उल्लेख था ऐसा व्यक्ति, जिसका नाम जानबूझकर इतिहास से मिटा दिया गया था।

और उस व्यक्ति का संबंध सीधे आरव के परिवार से था।

Continue...

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