अध्याय 9 : खिड़की से कूदी बहन
"आराध्या मैडम खिड़की से कूद गई!"
नौकर की चीख सुनते ही नित्या बेड से कूद पड़ी। लाल नाइटी में ही वो नीचे की तरफ भागी।
"दीदी! दीदी!"
रुद्र भी उसके पीछे भागा। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, टेंशन थी।
नीचे बगीचे में भीड़ लगी थी।
आराध्या जमीन पर पड़ी थी। उसके पैर से खून निकल रहा था। पर वो जिंदा थी। दूसरी मंजिल से कूदने की वजह से उसका पैर टूट गया था।
"दीदी! ये क्या किया तुमने!" नित्या ने उसे गोद में लिया।
आराध्या रोते हुए बोली, "मुझे यहाँ नहीं रहना... मुझे इस पागल के साथ नहीं रहना... मैं मर जाऊंगी पर यहाँ नहीं रहूंगी।"
रुद्र ने डॉक्टर को फोन लगाया, "अभय को बुलाओ! जल्दी!"
5 मिनट में डॉक्टर अभय आ गया। उसने आराध्या का पैर देखा।
"फ्रैक्चर है। ज्यादा गहरा नहीं, पर 2 महीने बेड रेस्ट करना पड़ेगा।"
रुद्र ने नौकरों को घूरा, "तुम लोग क्या कर रहे थे? मैंने कहा था नजर रखो!"
एक नौकर ने डरते हुए कहा, "मालिक, अंदर से किसी ने मदद की है। खिड़की का लॉक बाहर से नहीं, अंदर से खोला गया है, पर आराध्या मैडम अकेले इतना भारी लॉक नहीं खोल सकती।"
रुद्र की आँखें छोटी हो गईं। मतलब हवेली में कोई गद्दार है। कोई है जो आराध्या को भगाना चाहता है।
नित्या ने आराध्या का सिर अपनी गोद में रखा, "दीदी, तुम ठीक हो जाओगी। मैं हूँ ना।"
आराध्या ने धीरे से नित्या के कान में कहा, "नित्या... यहाँ से भाग जा... इस हवेली में कुछ ठीक नहीं है। रात को... रात को यहाँ से अजीब आवाजें आती हैं... जैसे कोई रो रहा हो..."
नित्या ने रुद्र की तरफ देखा। रुद्र सब सुन रहा था।
उसने इशारे से सब नौकरों को बाहर भेज दिया।
अब बगीचे में सिर्फ तीनों थे।
रुद्र ने आराध्या के पास बैठते हुए कहा, "तुम कूद कर गलत किया, साली साहिबा। अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो तुम्हारी बहन मुझे कभी माफ नहीं करती।"
उसने अपनी जेब से रुमाल निकाला और आराध्या के पैर का खून पोंछने लगा।
आराध्या ने पैर खींच लिया, "मत छूओ मुझे!"
रुद्र ने कुछ नहीं कहा। वो उठा और नित्या से बोला, "इसे अंदर ले चलो। आज से ये तुम्हारे साथ, तुम्हारे कमरे में ही रहेगी। ताकि तुझे लगे कि मैं इसे कैद नहीं कर रहा।"
नित्या को थोड़ी राहत मिली।
दोनों बहनों को ऊपर वाले कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टर ने आराध्या के पैर पर प्लास्टर चढ़ा दिया।
रात हो गई।
नित्या और आराध्या एक ही बेड पर लेटी थीं।
आराध्या ने कहा, "नित्या, तू सच में एक महीने तक इस राक्षस के साथ रहेगी?"
"और कोई रास्ता नहीं है दीदी।" नित्या ने कहा। "अगर मैंने मना किया तो ये हमें मार देगा।"
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
रुद्र अंदर आया। हाथ में दो गिलास दूध।
"तुम दोनों के लिए।"
आराध्या ने मुंह फेर लिया। नित्या ने दोनों गिलास ले लिए।
रुद्र नित्या के पास आया और बोला, "शर्त याद है ना? तुझे मेरी बाहों में सोना है।"
"पर दीदी..." नित्या ने कहा।
"दीदी सो जाएगी। तू 10 मिनट बाद मेरे कमरे में आ जाना। नहीं आई तो..."
रुद्र ने आराध्या के प्लास्टर वाले पैर की तरफ देखा।
धमकी साफ थी।
रुद्र चला गया।
आराध्या ने नित्या का हाथ पकड़ा, "मत जा नित्या..."
"जाना पड़ेगा दीदी। तुम्हारे लिए।" नित्या ने आँखों में आँसू लिए कहा।
10 मिनट बाद, नित्या दबे पांव रुद्र के कमरे में गई।
रुद्र बेड पर लेटा था, शर्टलेस। उसकी पीठ पर एक बड़ा सा निशान था... जलने का निशान। जैसे किसी ने गरम लोहे से दागा हो।
नित्या ने वो निशान देखा और चौंक गई। ये निशान उसने कहीं देखा था...
बचपन में! उस कल्लू लड़के की पीठ पर भी ऐसा ही निशान था! क्योंकि क्लास के लड़कों ने उसे सिगरेट से जला दिया था और नित्या ने ही उसकी मरहम-पट्टी की थी!
मतलब... रुद्र सच कह रहा था!
"देख लिया?" रुद्र ने बिना मुड़े कहा। "ये निशान तुम्हारी वजह से है। तुम्हारे लिए लड़ाई की थी मैंने।"
नित्या धीरे-धीरे उसके पास आई और बिना कुछ सोचे, उस निशान पर हाथ रख दिया।
रुद्र सिहर गया। 15 साल में पहली बार किसी ने उस निशान को प्यार से छुआ था।
उसने पलट कर नित्या को देखा।
नित्या की आँखों में अब नफरत नहीं, थोड़ी सी हमदर्दी थी।
रुद्र ने मौका देखा और नित्या को खींच कर अपने नीचे ले लिया।
"आज... आज मैं शर्त तोड़ दूँ?" उसकी आवाज भारी हो गई थी।
नित्या कुछ बोलती, उससे पहले हवेली की सारी लाइटें बंद हो गईं। पूरा अंधेरा।
और अंधेरे में... किसी ने रुद्र के कंधे पर हाथ रखा।
*अगले अध्याय में क्या होगा?*
अंधेरे में रुद्र के कंधे पर हाथ किसने रखा? क्या हवेली में कोई भूत है? क्या नित्या रुद्र को बचाएगी? और रुद्र की पीठ पर वो जलने का निशान किसने दिया था?
जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 10 : हवेली का भूत और पहली किस