अध्याय 6 : तहखाने में दूसरी नित्या
रुद्र ने नित्या को बेड पर धकेला तो था, पर उसकी आँखों में हवस नहीं, एक पागलपन भरा प्यार था।
नित्या ने डर के मारे आँखें बंद कर लीं, "दूर रहो... मुझे मत छूना!"
रुद्र उसके बिल्कुल करीब आया, इतना करीब कि उसकी गर्म साँसे नित्या के चेहरे पर पड़ रही थीं।
"इतना क्यों डरती है मुझसे?" रुद्र ने बहुत धीरे से कहा। "मैं तुझे खा थोड़ी जाऊंगा?"
उसने नित्या के माथे से पसीना पोंछा। "देख, तेरा दूध से भीगा हुआ जोड़ा... बदल ले। नहीं तो सर्दी लग जाएगी। मेरी डॉक्टर बीवी बीमार हो गई तो?"
नित्या ने आँखें खोलीं। रुद्र उठकर अलमारी की तरफ गया और एक लाल रंग की नाइटी निकाल कर लाया।
"ये पहन ले।"
"मैं नहीं पहनूंगी ये सब!" नित्या ने गुस्से में कहा।
"तो फिर इसी गीले जोड़े में रह। मैं तो बस तेरा ख्याल रख रहा था।" रुद्र ने नाइटी बेड पर फेंक दी और बालकनी में चला गया सिगरेट पीने।
नित्या ने जल्दी से वो नाइटी ली और बाथरूम में जाकर बदल ली। जब वो बाहर आई, तो रुद्र उसकी तरफ देखता ही रह गया।
लाल नाइटी में, गीले बालों में, मांग में सिंदूर... नित्या किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।
रुद्र का दिल जोर से धड़कने लगा।
तभी...
*"आह्ह्ह... छोड़ दो मुझे! कोई है!"*
एक लड़की के चीखने की आवाज आई। बहुत धीमी, पर हवेली के सन्नाटे में साफ सुनाई दे रही थी। आवाज नीचे से, जमीन के नीचे से आ रही थी।
नित्या चौंक गई, "ये आवाज कैसी है?"
रुद्र का चेहरा एकदम से बदल गया। सफेद पड़ गया। सिगरेट उसके हाथ से गिर गई।
"तूने कुछ सुना?"
"हाँ, कोई लड़की चीख रही है! तहखाने से आ रही है आवाज!"
रुद्र ने तुरंत बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया, "तुझे वहम हुआ है। यहाँ कोई तहखाना नहीं है। सो जा।"
"वहम नहीं है! साफ आवाज आई है - छोड़ दो मुझे!" नित्या ने कहा। "कौन है वहाँ नीचे?"
रुद्र ने गुस्से में दीवार पर मुक्का मारा, "मैंने कहा ना कोई नहीं है! तू ज्यादा दिमाग मत चला!"
पर नित्या डॉक्टर थी, डरपोक नहीं। उसे लगा कोई मरीज फँसा है।
रुद्र के बालकनी में जाते ही, नित्या दबे पांव कमरे से बाहर निकली।
पूरी हवेली सो रही थी। वो आवाज का पीछा करते-करते हवेली के सबसे पीछे वाले हिस्से में पहुँची, जहाँ एक लोहे का बड़ा सा दरवाजा था, जिस पर ताला लगा था।
अंदर से फिर वही आवाज - "पानी... पानी दे दो..."
नित्या ने ताले को खींचा। ताला खुला हुआ था।
उसने दरवाजा खोला। नीचे जाने के लिए सीढ़ियाँ थीं। बहुत अंधेरा था।
नित्या ने फोन की टॉर्च जलाई और नीचे उतरी।
नीचे एक छोटा सा कमरा था। और उस कमरे में...
एक लड़की बंधी हुई थी।
उसके कपड़े फटे हुए थे, बाल बिखरे हुए थे। और उसका चेहरा...
*नित्या के होश उड़ गए। वो लड़की बिल्कुल नित्या जैसी दिखती थी!*
"कौन... कौन हो तुम?" नित्या काँपी।
उस लड़की ने जैसे ही नित्या को देखा, वो चीख पड़ी, "नित्या? तू यहाँ कैसे? भाग जा यहाँ से! ये रुद्र पागल है! ये तुझे भी मार देगा! जैसे इसने मुझे..."
तभी पीछे से एक हाथ आया और नित्या का मुँह बंद कर दिया।
रुद्र।
उसकी आँखें गुस्से से, डर से लाल थीं।
"तुझे मना किया था ना नीचे आने से?" रुद्र ने नित्या को कंधे पर उठाया।
"वो लड़की कौन है? वो मेरे जैसी क्यों दिखती है? बताओ रुद्र कौन है वो?" नित्या चिल्ला रही थी।
रुद्र ने उस लड़की की तरफ देखा और कहा, "इसे यहीं रहने दो। ये तेरा भ्रम है।"
और वो नित्या को उठाकर ऊपर ले आया। उसने तहखाने के दरवाजे पर फिर से बड़ा सा ताला लगा दिया।
कमरे में लाकर उसने नित्या को बेड पर पटका।
"आज के बाद अगर तू उस दरवाजे के पास भी गई... तो मैं सच में उस लड़की को मार दूंगा! समझी?"
नित्या रोने लगी, "कौन है वो? बताओ मुझे! क्या वो मेरी बहन है?"
रुद्र ने उसकी आँखों में देखा और एक जहरीला सच बोला,
*"वो तेरी हमशक्ल नहीं है... वो तेरी असली बड़ी बहन है... आराध्या। जिसे 5 साल पहले मैंने ही किडनैप किया था। क्योंकि मुझे लगा था वो तू है।"*
नित्या के पैरों तले जमीन खिसक गई।
*अगले अध्याय में क्या होगा?*
क्या आराध्या सच में नित्या की बहन है? 5 साल पहले रुद्र ने उसे क्यों किडनैप किया था? क्या रुद्र बचपन से ही नित्या से प्यार करता था? और क्या नित्या अपनी बहन को बचा पाएगी?
*जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 7 : रुद्र का बचपन का पागल प्यार*