Mafia saiya chapter 3 Shilpi Mishra द्वारा नाटक में हिंदी पीडीएफ

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Mafia saiya chapter 3



अध्याय 3 : वो पागल रात

रात के 11 बज रहे थे।

राजावत हवेली के उस बड़े से कमरे में नित्या बेड के एक कोने में सिमटी हुई बैठी थी। सामने रुद्र सोफे पर बैठा, बिना पलक झपकाए उसे ही देख रहा था।

उसने अपने आदमियों को सख्त ऑर्डर दिया था - "कोई भी इस कमरे के आसपास भी नहीं आएगा।"

नित्या का गला सूख रहा था, "देखो... मुझे जाने दो। मेरी माँ परेशान हो रही होगी।"

रुद्र उठा। धीरे-धीरे चलता हुआ बेड के पास आया। उसने टेबल से पानी का गिलास उठाया और नित्या की तरफ बढ़ाया।

"लो, पानी पियो।"

नित्या ने गिलास लेने के लिए हाथ बढ़ाया, पर रुद्र ने गिलास पीछे खींच लिया।

"मैंने कहा मेरी पर्सनल डॉक्टर हो... तो पानी भी मैं ही पिलाऊंगा।"

इससे पहले कि नित्या कुछ समझ पाती, रुद्र ने उसके चेहरे को एक हाथ से पकड़ा और दूसरा हाथ से गिलास उसके होंठों से लगा दिया।

नित्या को पीना पड़ा। पानी उसके होंठों से बहकर उसकी गर्दन पर आ गया।

रुद्र की नजर वहीं टिक गई। उसकी आँखों में एक अजीब सा नशा उतर आया।

"जंगली बिल्ली..." उसकी आवाज भारी हो गई थी।

नित्या ने उसे धक्का दिया, "तुम पागल हो! दूर हटो मुझसे!"

रुद्र गिरा नहीं। बल्कि वो और करीब आ गया। उसने नित्या के दोनों हाथों को पकड़ कर बेड पर पिन कर दिया।

अब नित्या उसके नीचे थी, और रुद्र उसके ऊपर।

दोनों की साँसे टकरा रही थीं।

"कितना भागेगी मुझसे? हाँ?" रुद्र ने उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा। "तूने मेरा कॉलर पकड़ा था ना? अब देख... मैं क्या पकड़ता हूँ।"

नित्या की आँखों में आँसू आ गए, "रुद्र... प्लीज मुझे छोड़ दो। मैं डॉक्टर हूँ, मैं किसी की अमानत..."

"अमानत?" रुद्र की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। "किसकी अमानत हो तुम? नाम बता उसका? किसकी हिम्मत हुई तुझे अपना कहने की?"

उसका पागलपन वापस लौट रहा था।

"मेरी हो तुम! सिर्फ मेरी! समझी? इस हवेली की हर ईंट से लेकर तेरी साँसों तक पर सिर्फ मेरा हक है!"

उसने नित्या की गर्दन पर देखा, जहाँ पानी की बूँद अभी भी थी।

रुद्र ने अपना चेहरा झुकाया...

नित्या ने आँखें कसकर बंद कर ली। उसे लगा आज उसकी सारी हदें पार हो जाएंगी।

पर...

रुद्र रुका। उसने सिर्फ उसकी गर्दन पर से पानी की बूँद को अपने अंगूठे से पोंछा। और फिर बहुत धीरे से उसके माथे पर, जहाँ चोट लगी थी, एक किस किया।

एकदम हल्का सा, पवित्र सा किस।

नित्या ने चौंक कर आँखें खोलीं।

रुद्र की आँखों में आँसू थे? नहीं, शायद उसे वहम हुआ था।

"मैं जानवर हूँ, जंगली बिल्ली... पर तेरे साथ जबरदस्ती नहीं करूँगा।" रुद्र ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। "जिस दिन तू खुद मेरे करीब आएगी, उस दिन मैं तुझे अपनी दुनिया की रानी बना दूंगा।"

उसने नित्या को छोड़ा और उठकर खिड़की के पास चला गया।

"सो जा। आज रात तू इसी कमरे में सोएगी। दरवाजा बाहर से बंद है। भागने की कोशिश मत करना, नीचे मेरे कुत्ते हैं... वो भी तेरी तरह जंगली हैं, पर मेरी बात मानते हैं।"

नित्या कुछ नहीं बोली। वो चुपचाप बेड के दूसरे कोने में लेट गई, पर उसकी नजरें रुद्र पर ही थीं। जो खिड़की के पास खड़ा, सिगरेट जला रहा था।

अचानक रुद्र का फोन बजा।

"बोल।"

दूसरी तरफ से आवाज आई, "बॉस, वो लड़की के घरवाले पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने जा रहे हैं।"

रुद्र ने नित्या की तरफ देखकर एक जहरीली मुस्कान के साथ कहा, *"तो जाने दो। पुलिस आएगी तो मैं कह दूंगा कि ये मेरी होने वाली बीवी है। और वैसे भी... कल सुबह पंडित आ रहा है।"*

नित्या का दिल जोर से धड़कने लगा।

पंडित? शादी?

अगले अध्याय में क्या होगा?

क्या रुद्र सच में नित्या से जबरदस्ती शादी करने वाला है? कौन है वो दुश्मन जो नित्या के घरवालों को पुलिस के पास भेज रहा है? और हवेली के तहखाने में वो किसकी तस्वीर है जो बिल्कुल नित्या जैसी दिखती है?

जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 4 : जबरदस्ती की शादी