तुम्हारी शादी है - 4 Luna Rinn द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुम्हारी शादी है - 4



रात के 10:00 ,

 शेखावत हवेली को खूबसूरती से सजाया गया था। वह इस वक्त किसी सोने के महल की तरह लग रही थी। जहां हर तरफ सिर्फ धूमधाम और चहल-पहल थी। बाहर गार्डन में आतिश बाजिया हो रही थी। वही दरवाजे पर बड़ी-बड़ी लाल कलर की थालियां रखी हुई थी जो तांबे की थी और उसे पर लाल कलर का रंग डाला हुआ पानी था। जिसे आता कहते हैं। वही दरबार से कुछ एक औरत जो काफी बुजुर्ग लग रही थी। वह सिर पर दुपट्टा डालें बाहर की तरह देख रही थी।

जैसे उनकी बेचैन नजरों को किसी के आने का इंतजार हो। करीब 1 मिनट भी मुश्किल से नहीं गुजरा होगा कि एक लग्जरियस गाड़ी आकर रुकती हैं। जिसके साथ अद्विक अपने रॉब के साथ बाहर आता है। उसने ब्लैक कलर का पठानी कुर्ता और पजामा पहना हुआ था। जिसकी स्लीव्स कोहनी तक फोल्ड थी। चेहरे पर हमेशा की तरह एक गुरुर झलक रहा था।

उसके चेहरे के गुरुर को देखकर ही लग रहा था। वह कितना ज्यादा रईस हो सकता है। वह एक मगरूर सल्तनत का बादशाह बना था। उसके उतरने के साथ ही उसके पीछे एक लाल जोड़े में लिपटी हुई लड़की बाहर आती है। जिसने सर पर घूंघट डाला हुआ था। उसकी नज़रें नीचे की तरफ झुकी हुई थी। चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

उसकी लंबी पलके और आंखों के सिवा जो नीचे की तरफ थी। वो सीधा दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो जाता है और वहां खड़ी हुई उस बुजुर्ग औरत के पैरों को छूते हुए , " माफ करिएगा मासा कहीं हमने आने में देर तो नहीं कर दी ना। "

वह औरत जिसका नाम ज्योति सिंह शेखावत था वह अधिक के एक हाथ से बलाई लेते हुए , " हमारा गुरूर कभी हमारा सर झुकाने दे सकता है क्या ! नहीं ना। चलो आप बिंदनी के साथ खड़े हो जाओ हमें आप दोनों की आरती उतारनी है। "

वो बगल में खड़ी हुई लड़की को एक नजर देखता है और बिल्कुल उसके नजदीक खड़ा हो जाता है। ज्योति जी उन दोनों की आरती करती है और एक लंबा सा तिलक अद्विक के माथे पर लगा देती हैं। उसके साथ कुछ चावल के दाने भी उसके अधिरा की तरफ करते हैं।

और उसके ऊपर भी ऊपर से ही चावल डालते हुए , " नई बहू आपका स्वागत है हमारे घर में , अब आपको एक-एक करके इन थालियां के ऊपर पैर रखते हुए वहां तक पहुंचना है। अगर आपके पैर एक बार भी डगमगाए तो इसका मतलब अच्छा नहीं होगा और आशा करते हैं आपके कदम नहीं लड़खड़ाएंगे। "

अधीरा अपनी मुठिया मजबूत से बंद करे हुए , " हमने भी इस पैलेस की नींव को हवा में ना हिला के रख दीया तो हमारा नाम भी अधीरा राजपूत नहीं। " बोलते हुए वह लहंगे को हल्का सा ऊपर की तरफ उठा जब पैर रखने के लिए आगे बड़ाती है उसका बैलेंस हल्का सा डगमगा जाता है।

अद्विक तुरंत अपनी चौड़े हथेलियां के बीच उसकी पतली सी कमर से संभालते हुए , " आराम से पत्नी जी यहां आपको जरा फूंक कर कदम रखने होंगे ये एक ऐसी चिता है जिसमे लोग जलने भी नहीं देगे और मरने भी नहीं। "

 अधीरा नजर उठाकर अद्विक की तरफ देखने लगती है। अधिक ने यह बात बहुत ही धीमी से उसके कान में कही थी। जिसका मतलब अधीरा को समझ ही नहीं आता अद्विक उसे आंखों से ही सामने देखने का इशारा करता है। अधीरा तुरंत उसके हाथों को अपनी कमर से झटका सीधी खड़ी हो जाती है और अपनी कमर को देखने लगती हैं।

उसे अभी भी अद्विक की हथेलियो की तपीश अपने पेट और खुली हुई कमर पर महसूस हो रही थी। वह फिर से लहंगे को हल्का सा पकड़ उन थालियो में अपना पैर रखते हुए आगे जाने लगती हैं। इस बार वह बिना रुके सीधा उन थालियां को क्रॉस करते हुए एकदम लिविंग हॉल पर जाकर खड़ी हो जाती है। अद्विक पीछे खड़ा उसे देख रहा था। उस नेट के दुपट्टे में अधीरा के ब्लाउज की डोरियों और बैक साफ दिखाई दे रहा था। वही डोरियो के नीचे उसकी पतली सी सुराही जैसी कमर जो बहुत ही अट्रैक्टिव लग रही थी।

अद्विक मासा की तरफ देखते हुए , " मासा अब हम चलते हैं , रात बहुत हो गई है। आप भी जाकर आराम कर लीजिए। "

ज्योति जी उसकी बात पर , " हां हम जा रहे हैं और आप लोग भी जाकर आराम कर लीजिए हमने खाना आपके कमरे में ही रखवा दिया है और बहू से कहना कि वह सुबह जल्दी उठ जाए। " बोलते हुए वह सर्वेंट के साथ वहां से चली जाती है।

इस वक्त हवेली में कुछ खास लोग मौजूद नहीं थे। अद्विक अधीरा के पास आता है। जो नेट के दुपट्टे के अंदर से ही चारों तरफ देखते हुए चीजों को समझने की कोशिश कर रही थी। अगले ही पल वो खुद को हवा में महसूस करती हैं। उसके दोनों हाथ सीधा अद्विक के कंधे पर आ जाते हैं। वह बड़ी-बड़ी पाल के झपकते हुए अद्विक को देखने लगती है।

अद्विक स्ट्रेट फेस के साथ , " हमारी शादी की पहली रात है। पत्नी जी तो खुद को तैयार कर लीजिए। " बोलते हुए वह कदम ऊपर की तरफ बढ़ाने लगता है।

 वही अधीरा का दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था। अद्विक उसके दिल की धड़कन साफ महसूस कर पा रहा था। वहां पर एकदम गहरी खामोशी थी। वो कमरे में जाकर दरवाजे को पैर से बंद कर देता है। सीधा अधिरा को लाकर बेड पर बैठाते हुए अपनी शेरवानी के कुर्ते के बटन खोलने लगता है।

अधीरा जो अभी एकदम खामोश थी वह एकदम से अपने लाल दुपट्टे को अपने सर से निकाल कर फेंकते हुए चिल्लाकर , " आपकी हिम्मत भी कैसे हुई हमें इस तरीके से उठाकर लेकर आने की ? "

अद्विक जिसने अपना कुर्ता निकाल दिया था। वो अधीरा की बात पर उसकी तरफ पलट जाता है। अधीरा जो बिना दुपट्टे के उसके सामने सिर्फ लहंगे और चोली में खड़ी हुई थी। वह अधिक को देखकर उसका पूरा चेहरा लाल पड़ जाता था। अद्विक का कसा हुआ मजबूत सीना जो भरा हुआ था , कसे हुए कंधे जहां एक बड़ा सा त्रिशूल जैसा टैटू बना हुआ था और कर्सिव में कुछ लिखा हुआ था। जो बिल्कुल अधीरा के नजदीक आ रहा था। अधीरा सांस लेना ही भूल जाती है। वो बस बड़ी-बड़ी आंखों से उसे देख रही थी।

अद्विक उसकी बात पर उसके नजदीक आता है और उसके कानों से उसके झुमको को निकालते हुए , " अभी तो पूरी रात बची है पत्नी जी हमें देखने के लिए जरा सब्र करिए और थोड़ी सी सांस ले लीजिए। " उसने बहुत ही शांति से कहा था।

 अधीरा को अपने शरीर में रोंगटे खड़े होते हुए महसूस होते हैं। वह आगे की तरफ कदम बढ़ाते हुए , " तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई ? मेरे साथ. "

उसने इतना ही बोला था कि अद्विक उसके खुले हुए पेट पर पीछे से अपना हाथ रख उसकी नाभि पर अपनी छोटी उंगली प्रेस कर देता है। जिसके साथ अधीरा की सास गले में ही रह जाती हैं। उसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी जिससे उसका सीना ऊपर नीचे हो रहा था।

अद्विक उसके कुछ नजदीक जा उसकी नाजुक सी पीठ को अपने चौड़े सीने में धसाते हुए अपने हाथ को पीठ से लेकर ऊपर की तरफ सफर तय करते हुए , " हमने कहा था ना आपसे कि आपके इस खूबसूरत मुंह से इस तरीके के शब्द नहीं निकलने चाहिए , वरना हम आपको अपने तरीके इसकी सजा देकर अपनी इज्जत करवाएंगे। "

अधीरा जो उसके इतना नजदीक होने से सांस तक नहीं ले पा रही थी। ऊपर से अद्विक का वह डरावना औरा उसके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे। वो गुड़िया की तरह खड़ी थी। अद्विक टेढ़ा मुस्कुराते हुए उससे दूर हो जाता है। अधीरा उसके दूर होने पर गहरी सांस भरती है। उसकी सांसे कुछ तेजी से चल रही थी। अधिक जो उससे कुछ दूर हुआ था। वह अगले ही पल उसके एक बार फिर से नजदीक आ।

 उसके ब्लाउज की डोरियों को खोलते हुए , " हमें लगता है आपको इन कपड़ो में जरा तकलीफ होगी सोने में। तो क्यों ना ? हम आपके कपड़ो को उतार दे। " बोलते हुए वह दूसरी डोरी को भी उंगली से लपेटने लगता है।

 अधीरा अपना सर ना में हिलाते हुए , " नहीं , नहीं इसकी इसकी कोई , कोई भी जरूरत नहीं है। हम , हम खुद कर लेंगे। " अद्विक उसे छोड़ देता है।

अधीरा उसकी तरफ देखने लगती हैं। अद्वैत फिर सीधा क्लोजेट में चला जाता है और वहां से एक ब्लैक कलर का ट्राउजर पहन कर बाहर आता है। उसने अभी भी अपने ऊपर ना कोई शर्ट केरी करी थी और ना ही कुछ और कपड़े वह जाकर सीधा काउच पर बैठ जाता है और अपने फोन में कुछ करने लगता है। उसका चेहरा बेहद गंभीर हो चुका था। अधूरा उसको एक तक घूरने लगती है। अद्विक जिसे अधीरा की नजर खुद पर महसूस हो रही थी।

वह अपनी नजरे ऊपर की तरफ उठाते हुए , " क्या हुआ पत्नी जी ? आपको कुछ काम है तो आप हमसे बेझिझक कह सकती हैं। आखिर हम आपके पति हैं। "

अधीरा इधर-उधर देखते हुए , " तुम , तुम इस तरीके से किसी लड़की के सामने बिना कपड़ों के कैसे नंगे होकर घूम रहे हो ? क्या तुम्हें शर्म नही आती ? "

 जो अभी एकदम शांत था अधीरा के एक बार फिर से तुम कहने पर वो अपने फोन को टेबल पर फेक देता है और खड़ा होकर उसकी तरफ कदम बढ़ाने लगता है। अधीरा उसे खुद की तरफ नजदीक आता हुआ देख।

पीछे की तरफ कदम बढ़ाते हुए , " भगवान जी आपने कहां फंसा दिया ? किस पागल के साथ हमें कुछ तो करना पड़ेगा। "

अद्विक बिल्कुल उसके नजदीक आ दोनों हाथ दिवार पर रख उसके चेहरे पर झुक जाता है। वह दोनों एक बार फिर से बेहद नजदीक खड़े हुए थे। अधीरा जो अभी अपने ख्याल में ही कहीं गुम थी अद्विक उसकी खुली हुई कमर पर हल्का सा नोच देता है। जिसके साथ उसकी कमर लाल हो जाती हैं और वह अद्विक को घूरने लगती हैं।

अद्विक उसके चेहरे पर झुकते हुए , " पत्नी जी यहां से भगाने के बारे में सोचना भी मत अगर आपका एक कदम बाहर की तरफ बढ़ा तो हम आपके दोस्तो की पहली टिकट नर्क की काटेगे जहा अभी वो लोग ठीक से घर भी नही पोछे वो सीधा नर्क जरूर जा सकते है। "

अधीरा उसके बाद पर बड़ी-बड़ी पलके झुकते हुए , " क्या यह मेरे मन की बात भी सुन सकता है ? " वह उसे हैरानी से देखने लगती हैं।

अद्विक उसके गाल पर हाथ रख बहुत ही सेडक्टिव अंदाज में उसके होंठ और गाल के हिस्से को धीरे-धीरे सहलाते हुए , " अब आप जाइए और जाकर अपने कपड़े बदल लीजिए। "

अधीर किसी छोटे बच्चों की तरह अपना सीर हिलाते हुए , " पर हम , हम क्या पहनेगे अभी ? "

अद्विक उसे एक नजर देखता है और फिर सीधा क्लोजेट में जा अपनी एक वाइट कलर की शर्ट लेकर आता है और सीधा अधीरा की तरफ बढ़ाते हुए , " फिलहाल के लिए तो आप यही पहन लीजिए क्योंकि आपके लिए कोई कपड़े नहीं है और जो कपड़े हैं वह हमारी पहली पत्नी के हैं। जिसे हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि आप पहने , तो आपको हमारे ही कपड़े पहनने पड़ेंगे। "

अधीरा बड़ी आंखों से उसे देखते हुए , " आपकी पहली पत्नी। "

अद्विक उसे घूरते हुए , " आपको हमसे सवाल करने का हक नहीं है अर्धांगिनी जी तो जाइए और कपड़े पहन लीजिए। "

अधीरा उस शर्ट को उदास भरी नजरों से देखती है। हां वह बहुत ही मॉडर्न थी और वह ऐसे कपड़े पहनती थी। पर एक लड़के के सामने जो उसे खुद का पति बोल रहा हो। उसका क्या भरोसा ? कि वह अपने पति होने का हक उससे नहीं मांगेगा। वह यही सोच–सोच के अंदर ही अंदर चिल्ला रही थी और कुढ़ते हुए अद्विक को देख रही थी।

अद्विक उसकी बात पर उसकी ब्लाउज की आखिरी डोरी खोलते हुए , " अगर आप खुद से कपड़े बदलने में कुछ असंतुष्ट महसूस कर रही हैं तो हम आपकी थोड़ी मदद कर सकते हैं पत्नी जी। " बोलते हुए वह उसकी डोरी को खींच देता है।

अधीरा जो खुद में कहीं मसरूफ हो चुकी थी। अद्विक की बात को सुन सेंस में आती है और अपने ब्लाउस को मजबूती से पकढ़ते हुए , " नहीं मैं कर लूंगी। " बोलते हुए वह जल्दी से बाथरूम में घुस जाते हैं।

 अद्विक उसे जाता हुए खाली देखता है और फिर वापस वही अपनी आंखें बंद करके दोनों हाथों को सीने पर बांधकर खड़ा हो जाता है। अधीर बाहर आती है। उसने सिर्फ ऊपर का चोली उतार दिया था। बाकी वह अभी भी लहंगे में थी। उसने उसकी व्हाइट शर्ट के बटन को ऊपर तक लगाकर शर्ट के नीचे हिस्सों को नोट की तरह कमर पर बांध दिया था। जिससे उसकी छोटी सी महीन भरी सी नाभी दिखाई दे रही थी।

जिसमें एक वाइट कलर का स्टोन रखा था , जो बहुत ही ज्यादा अट्रैक्टिव लग रही थी। अद्विक उसे देखता है तो पलके झपकाना हीं भूल जाता है। अधीरा इस वक्त किसी गुड़िया से कम नहीं लग रही थी। उसने जहां नीचे सुर्ख हैवी लहंगा पहना था। तो वही वाइट कलर की शर्ट जो उस पर काफी निखर रही थी। उसने मेकअप रिमूव कर दिया था। इसमें उसकी आंखें जो अभी भी काजल से सनी हुई थी और सुर्ख होट जो काफी अट्रैक्टिव लग रहे थे।

हल्के हल्के बाल जो आगे की तरफ आ रहे थे। उसने बाकी बालों को जुड़ा बना लिया था। वह काफी क्यूट सी डॉल लग रही थी। अद्विक उसकी तरफ कदम बढ़ाते हुए उसके नजदीक आ जाता है। अधीरा उसे खुद के नजदीक आता हुआ देख जल्दी से पीछे की तरफ कदम बढ़ा पाती उससे पहले ही अद्विक उसकी कमर पर हाथ लपेट खुद के नजदीक कर लेता है। अधीरा के हाथ अद्विक के खुले उभरे हुए सीने पर आ जाते हैं। उसका चेहरा एक बार फिर से लाल होने लगता है।

अद्विक उसके होठों पर अंगूठा बहुत ही सेडक्टिव अंदाज में फिराते हुए , " जाइए जाकर आराम करिए। " बोलते हुए वह उसे छोड़ देता है।

अधिरा जल्दी से काउच की तरफ भागने लगती हैं। उसे डर था कि अगर वह बेड पर सोएगी तो अद्विक उसके साथ कहीं कुछ कर ना दे , अद्विक उसे काउच की तरफ जाता हुआ देख तुरंत उसकी कलाई को पकड़ घूमाते हुए खुद के नजदीक कर लेता है। अधीर एक बार फिर से उसके सीने से जा लगती है। इस बार उसकी नाक सीधा अद्विक के सीने को छू गई थी और उसके होंठ अधिक के दिल वाली जगह पर टिक चुके थे।

वह बड़ी-बड़ी पलके झपकाते हुए बस अद्विक के उस हिस्से को देख रही थी। जहां एक साइड त्रिशूल का टैटू बना हुआ था और संस्कृत में कुछ लिखा हुआ था। वही थोड़ी ही दूरी पर बिल्कुल दिलवाली जगह पर उसके होंठ चिपक चुके थे।

 अधीरा की आंखें नम हो चुकी थी और चेहरा पूरा सुर्ख पड़ चुका था। अद्विक उसे उठाकर सीधा बैठ के पास लेट हुए , " आप यहां पर सोएंगी और खबरदार अगर आपने सोचा कि आप हमसे जरा भी दूर रह सकती हैं। आप हमारी अर्धांगिनी है और आपको अर्धांगिनी होने के सारे हक अदा करने होंगे। " बोलते हुए उसे के ऊपर ब्लैंकेट डालने लगता है।

अधीरा जिसके दिमाग में कुछ और ही आ गया था। वह ब्लैंकेट को जल्दी से खुद के ऊपर खींचते हुए अपने आप को पूरी तरीके से उसे ब्लैंकेट के अंदर घुसा लेती है और उस ब्लैंकेट को पूरी तरीके से ब्लॉक कर देती हैं। जैसे अद्विक से वह ब्लैंकेट उसे प्रोडक्ट कर लेगा। अद्विक उसकी बचकानी हरकत पर उसे गहरी नजरों से देखता है और वहां से सीधा काउच पर जाकर बैठ जाता है।

करीब 2 घंटे बाद ,

अधीरा गहरी नींद में जा चुकी थी और ब्लैंकेट थोड़ा उसके ऊपर से हट चुका था। उसका चेहरा बाहर की तरह दिख रहा था। वह बहुत ही बेढंगे तरीके से सो रही थी। जहां एक पैर उसने ब्लैंकेट के ऊपर रखा था तो दूसरा पैर ब्लैंकेट के अंदर एक हाथ बेड पर फैला था तो दूसरा हाथ उसके खुले हुए पेट पर वो इस तरीके सो ही रही थी।

उसे कुछ अजीब सा महसूस होने लगा था। वह धीरे-धीरे आंखें खोलती है और उसकी आंखें हैरानी से बड़ी हो जाती है। अद्विक उसके ऊपर था और उसकी शर्ट के बटन खुले हुए थे। वह महसूस कर पा रही थी आद्विक का हाथ कहीं और महसूस कर उसकी एक जोरदार चीख निकल जाती है।

अद्विक स्मिर्क करते हुए , " हमने कहा था ना कि आप हमारी पत्नी हैं और आपको एक पत्नी होने के सारे हक अदा करने पड़ेंगे। "

मिलते है अगले chapter me😊😊