अरव मेरी ज़िंदगी का पहला और आखिरी पता था। हम दोनों एक ही गली में पले-बढ़े। मुझे आज भी याद है कि जब हमने नन्हें कदमों से चलना सीखा था, तब से अरव मेरा हाथ पकड़कर चलता था। बचपन में जब गली के बाकी बच्चे खेल-खेल में मुझे रुला देते, तब अरव अपनी छोटी-छोटी मुट्ठियाँ भींचकर मेरे आगे ढाल बनकर खड़ा हो जाता।
वह कहता: "सत्या, तुम्हें कभी रोना नहीं है... मैं हूँ ना!"
बड़े होते-होते हमारी दोस्ती कब प्यार में बदल गई, मुझे पता ही नहीं चला। स्कूल के दिनों में जब मेरी सहेलियाँ हीरो-हीरोइन की बातें करतीं, तब मेरी आँखों के सामने सिर्फ़ अरव का मासूम चेहरा तैरता। मेरे लिए प्यार का मतलब कोई शारीरिक स्पर्श नहीं था... मेरे लिए प्यार का मतलब था अरव का मेरे साथ होना, उसकी वही चुलबुली हँसी और उसकी आँखों में मेरे लिए अटूट भरोसा।
हम साथ पढ़ते, साथ सपने देखते। मैंने मन ही मन अरव को अपना पति मान लिया था।
सब कुछ कितना खूबसूरत चल रहा था... तभी एक रात हमारी दुनिया उजड़ गई।
स्कूल के आखिरी साल की परीक्षा खत्म हुई थी। अरव बाइक लेकर मेरे लिए आइसक्रीम लेने गया था। घंटों बीत गए पर वह वापस नहीं आया। और फिर अस्पताल से फोन आया—एक भयानक एक्सीडेंट!
मैं भागती हुई अस्पताल पहुँची। आईसीयू के बाहर अरव के माता-पिता टूटे हुए बैठे थे। डॉक्टरों ने घंटों की सर्जरी के बाद अरव की जान तो बचा ली, लेकिन जब डॉक्टर बाहर आए तो उनके चेहरे पर गहरा अँधेरा था।
डॉक्टर ने अरव के पापा का हाथ पकड़कर धीमी आवाज़ में कहा: "हादसे में अरव के कमर के निचले हिस्से में इतनी गंभीर चोट आई है कि... वह अब कभी एक पुरुष के रूप में सामान्य ज़िंदगी नहीं जी पाएगा। वह ताउम्र नपुंसक रहेगा।"
ये शब्द सुनकर अरव के मम्मी-पापा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। लेकिन मेरी आत्मा अंदर से चीख उठी—"नहीं सत्या! प्यार शरीर से नहीं होता!"
अस्पताल के उस अँधेरे कमरे में अरव खिड़की की तरफ़ मुँह करके लेटा था। उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। उसका आत्मसम्मान एक ही रात में छिन गया था। मैं शांति से उसके करीब गई। मैंने उसका काँपता हुआ हाथ अपने हाथों में ले लिया।
अरव (रोते हुए): "सत्या... तुम चली जाओ! मैं अब तुम्हारे लायक नहीं रहा। मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो गई है..."
सत्या (दृढ़ता से): "अरव, मेरी तरफ़ देखो। तुम क्या सोचते हो कि मैं तुम्हारे शरीर से प्यार करती थी? नहीं... मेरा प्यार तुम्हारी आत्मा से है। तुम जैसे भी हो, मेरे हो। मैं ताउम्र तुम्हारी सेवा करूँगी, लेकिन तुम्हें कभी अकेला नहीं पड़ने दूँगी।"
अरव मुझसे लिपटकर घंटों रोता रहा। उस दिन मैंने अपनी जवानी और अपने सारे शारीरिक सपनों को अरव के कदमों में न्योछावर कर दिया।
हमने शहर के एक नामी कॉलेज में कानून (Law) की पढ़ाई शुरू की। मैं चाहती थी कि मैं वकील बनूँ ताकि भविष्य में अरव की ढाल बन सकूँ।
लेकिन कॉलेज के दूसरे साल में एक भयानक धमाका हुआ।
कॉलेज में शहर के शक्तिशाली और बाहुबली विधायक (MLA) की बेटी भी पढ़ती थी। एक दिन सुबह अचानक पुलिस की गाड़ियाँ कॉलेज आ पहुँचीं। पूरी कॉलेज के सामने पुलिस ने अरव को कॉलर से पकड़ा और गाड़ी में ठूँस दिया। विधायक की बेटी ने अरव पर हॉस्टल के कमरे में बलात्कार (Rape) का गंभीर आरोप लगाया था!
पूरा कॉलेज, मीडिया और समाज अरव पर थूंकने लगा।
मैं भागती हुई पुलिस स्टेशन गई।
सत्या: "साहब! यह आरोप पूरी तरह झूठा है! अरव ऐसा कर ही नहीं सकता!"
पुलिस इंस्पेक्टर: "लड़की, तेरा प्रेमी हवस का पुजारी है। विधायक साहब की बेटी का रेप किया है उसने। ज़्यादा बीच में आएगी तो तुझे भी अंदर बंद कर दूँगा!"
विधायक के राजनीतिक दबाव के कारण कोई बड़ा वकील अरव का केस लड़ने को तैयार नहीं था। उस रात मैंने खुद को आइने में देखा और कहा: "सत्या, अगर तेरा प्यार सच्चा है, तो आज से तू ही अरव की वकील है!"
मैंने दिन-रात एक कर दिए। मैं जानती थी कि अरव को बचाने का एकमात्र कानूनी रास्ता यह था कि अदालत में साबित किया जाए कि अरव हादसे के बाद से शारीरिक रूप से 'नपुंसक' है। यह कड़वा सच पूरी दुनिया के सामने ज़ाहिर करना एक पुरुष के स्वाभिमान पर बहुत गहरा घाव था, लेकिन अरव की जान बचाने के लिए मैंने अपने दिल पर पत्थर रख लिया।
अदालत में जंग शुरू हुई। सामने विधायक के महँगे वकीलों की फ़ौज थी। समाज ने मुझ पर भी गंदे कीचड़ उछाले: "देखो! अपने प्रेमी को बचाने के लिए लड़की उसे नपुंसक साबित करने निकली है!"
मैंने वह सारा अपमान चुपचाप सहा। अदालत में मैंने अरव के एक्सीडेंट के समय की मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की पैनल पेश की।
अंततः, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया: "अरव को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी किया जाता है।"
विधायक की बेटी झूठी साबित हुई। पूरे शहर में सत्या के सच्चे प्यार और बलिदान की तारीफें होने लगीं।
जिस दिन अरव जेल से आज़ाद हुआ, उस रात मैं खुशी से झूम रही थी। मैं अरव के घर पहुँची। उसके कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था।
मैं अंदर जाकर उसे गले लगाने ही वाली थी कि तभी अंदर से अरव की आवाज़ आई। वह फोन पर किसी से बात कर रहा था। उस आवाज़ में एक घमंडी और क्रूर राक्षस बोल रहा था!
अरव : "अरे रिया... तुमने मुझ पर पुलिस केस करके मुझे ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी ना? पर देखा? मेरी बेवकूफ़ सत्या ने पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया कि मैं तो 'नपुंसक' हूँ!"
रिया : "अरव... तुमने मेरे साथ हॉस्टल में जबरदस्ती की! तुमने मेरा रेप किया अरव! तुम्हारी उस एक्सीडेंट वाली सर्जरी तो सालों पहले सफल हो गई थी, तुम बिल्कुल नॉर्मल हो!"
अरव : "हाँ, मैं बिल्कुल फ़िट हूँ! लेकिन सत्या जैसी बेवकूफ़ लड़की मेरी गुलाम बनकर मेरी सेवा कर रही थी, इसलिए मैंने उसे कभी नहीं बताया। और देख, उसी अंधी दीवानी ने अपने हाथों से कोर्ट में पुरानी रिपोर्ट पेश करके मुझे बलात्कार के केस से बचा लिया! तू सच्ची होकर भी अब इस दुनिया की नज़र में झूठी ही रहेगी, रिया!"
दरवाज़े की चौखट थामे खड़ी मैं...
जिस अरव के लिए मैंने अपनी जवानी होम कर दी... जिस अरव के लिए मैंने पूरे समाज की गालियाँ खाईं... वही अरव एक असली रेपिस्ट था! उसने एक निर्दोष लड़की की इज़्ज़त लूटी थी और मेरा इस्तेमाल अपने पाप धोने के लिए एक 'मोहरे' की तरह किया था!
मेरा कलेजा चीर गया। आँखों से आँसू बहना बंद हो गए और वहाँ एक काला, भयानक अँधेरा छा गया। मेरा मासूम प्यार उसी पल दम तोड़ चुका था।
मैं एक शब्द बोले बिना पीछे मुड़ गई। मैंने मन ही मन कहा: "अरव... मैंने कानून की अदालत में तुझे बेगुनाह साबित किया था। लेकिन सत्या की अदालत में तेरे लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ 'मृत्युदंड' है!"
अगले दिन मैंने अरव को शहर से बाहर स्थित हमारे पुराने फार्महाउस पर बुलाया। वह जीत के अहंकार में दौड़ता हुआ आया। मैंने हँसकर उसे ड्रिंक का गिलास दिया, जिसमें बेहोशी की दवा मिली हुई थी। कुछ ही मिनटों में वह ज़मीन पर ढह गया।
जब अरव की आँखें खुलीं, तो वह लोहे की कुर्सी से मोटे तारों और ज़ंजीरों से बँधा हुआ था। सामने मेज़ पर सर्जिकल ब्लेड और पुरानी मेडिकल रिपोर्ट रखी थीं।
अरव (काँपती आवाज़ में): "सत्या... यह क्या मज़ाक है? मुझे क्यों बाँधा है?"
मैं अँधेरे से धीरे-धीरे बाहर आई। मैंने मेज़ से एक धारदार सर्जिकल ब्लेड हाथ में ली।
सत्या : "अरव, याद है मैंने कोर्ट में क्या कहा था? कि तुम शारीरिक रूप से अयोग्य हो... लेकिन उसी रात दरवाज़े के पीछे खड़े होकर मैंने तुम्हारी खुशी सुनी थी। तुमने एक निर्दोष लड़की का रेप किया, और मेरा इस्तेमाल अपने पाप छिपाने के लिए किया।"
अरव : "सत्या! मुझे माफ कर दो! प्लीज, मुझे छोड़ दो!"
सत्या: "नहीं अरव, आज न्याय का दिन है। जो कानून तुम्हें सज़ा न दे सका, वह न्याय आज सत्या करेगी। जिस मर्दानी के अहंकार में तुमने एक औरत की इज़्ज़त लूटी और जिस झूठ पर तुमने मेरा इस्तेमाल किया... आज मैं तुम्हें सचमुच वही बनाऊँगी जो मैंने कोर्ट में साबित किया था।"
अरव चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन मैंने धारदार ब्लेड से एक ही झटके में उसका वह गुप्त अंग (प्राइवेट पार्ट) काट दिया।
अरव की दर्दनाक चीख से पूरा कमरा काँप उठा। खून के फव्वारे छूट पड़े। अरव असहनीय दर्द से तड़पता रहा। मैंने उसके खून से लथपथ चेहरे के पास जाकर कहा: "अब तुम सच्चे हो अरव... कोर्ट में भी और कुदरत की नज़र में भी।"
घंटों तक अरव मेरे सामने ज़मीन पर खून के पोखर में तड़पता रहा। उसका एक-एक कतरा खून बह गया और धीरे-धीरे उसकी आखिरी साँस भी छूट गई।
अगले दिन सुबह, फार्महाउस से अरव की क्षत-विक्षत लाश मिली। पूरे शहर में हड़कंप मच गया। पुलिस और मीडिया इसी नतीजे पर पहुँचे कि विधायक ने अपनी बेटी की बदनामी का बदला लेने के लिए अरव की इतनी बेरहमी से हत्या करवाई है।
अरव की शवयात्रा में पूरा गाँव रो रहा था। लोग मेरी तरफ़ दया से देख रहे थे—"बेचारी सत्या, जिसके लिए इतना लड़ी, उसे आखिरकार खो दिया..."
मैं भीड़ के पीछे अकेली खड़ी थी। मेरी आँखों में एक भी आँसू नहीं था।
वे नहीं जानते थे कि जिसे वे 'बेचारी' समझ रहे थे, उसी ने अपने हाथों से अपने प्यार के राक्षस को मिटाकर, एक ही झटके में अपने विश्वासघात का बदला ले लिया था और उस बेगुनाह लड़की को भी असली न्याय दिला दिया था।
मैं अगले ही पल पीछे मुड़ गई... एक नई, शांत लेकिन खौफनाक सत्या बनकर।