ए.आई. बन गयी जादुई चिराग का जिन्न Devendra Kumar द्वारा रोमांचक कहानियाँ में हिंदी पीडीएफ

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ए.आई. बन गयी जादुई चिराग का जिन्न

बचपन में जादुई चिराग के घिसने से निकलने वाले जिन्न या जिन्नात की बेमिसाल ताकत और करामात की कहानियाँ सुन सुन कर दिमाग चकराया करता  था और हम किसी दूसरी दुनिया में  पहुँच  जाते थे. शाम को साँस रोक कर आश्चर्य से सुनी तिलस्मी कहानियां विस्मय कराती, रात में सपनों में दिख कर डराती  व रोमांचित कर किसी दूसरे लोक में ले जाया करती थी.  जादुई  चिराग में या जादूई अंगूठियों  के जरा रगड़ने से आनन फानन में एक शक्तिशाली जिन्न हाज़िर होकर अपने आका का  हुकुम पाते ही बड़े से बड़े काम चुटकी बजाते कर डालता था, चाहे झोंपड़ी की जगह भव्य महल बनाना हो, चाहे दूरदराज  से मनचाहे स्वादिष्ट व्यंजन लाकर परसना हो, दौलत खजाना पाना हो. किसी दूर दराज की राजकुमारी को लाना  कोई भी काम  जिन्न के असंभव नहीं था. ए.आई. की बाते सुनकर लगता है कि  इन  नए जिन्नात का नाम ‘एजेंट्स’ या ‘बोट्स’ हो गया है.   

 अलीबाबा के किस्से में भी उसके पास जादुई  चिराग में  कुछ ऐसा ही करामाती जिन्न  होता होगा जिससे गरीब अलीबाबा जो चाहे पलक झपकते हुए चुटकी में करवा लेता था. यहाँ तक की बेहद शानदार महल बनवा लिया, खाने के पकवान व्यंजन ही नहीं और तो और एक दूर देश की बेहद खूबसूरत राजकुमारी भी ले आया था, और  इस तरह अलीबाबा ने बेहद ही ऐशो आराम व ठाठ से जिन्दगी बिताई.

  बचपन में बाल मन कामना करता था कि काश अपने साथ कुछ ऐसा ही कुछ कमाल हो जाए. ऐसा ही कोई  पुराना चिराग या दीये वाला या अंगूठी वाला जिन्न मिल जाये फिर कुछ करने की ज़रूरत नहीं मौज ही मौज  की जिंदगी. कुछ बाद में अरेबियन नाईट की अनेक कहानियां जैसे सिंदबाद ज़हाजी की कहानियां, जहाज टूटने पर किसी लकडी के टुकड़े के सहारे किसी सुनसान टापू पर पहुँच जाना. वहां से सोना चांदी और  हीरे जवाहरात भर कर लाने की कहानियाँ पढ़ उसी तरह की जादू टोने, कल्पनाशील, जादुई तिलस्मी की दुनिया में रम जाते थे. और उन्हें काल्पनिक कहानी न समझ कर असली मानते थे. पर अब इस तरह का जिन्न तो ऐ. आई. में सम्भव दिख रहा है. चलो इसे सिलसिले से चलते हुए समझने की कोशिश करते हैं की ऐ.आई.के नए ज़माने चीज़े कहाँ से कहाँ जा रही हैं, कहाँ जाने वाली हैं.

 कुछ बड़े होने पर अपने गाँव भाजू जाने पर अपने ताऊ और बाबा से भी भूत प्रेत, ओपरी  परायी हवा और सफ़ेद घोड़े पर सवार गोग्गा पीर के किस्से सुनता था, और उनसे सुन कर खूब रोमांच होता और जब वे कहते कि उन्होंने खुद आँखों से देखा  है कि भूत के उलटे पंजे व नाक से निकली नेकनी आवाज़ सुनी है तो पूरा नहीं सही कुछ विश्वास ज़रूर  होता था. सोचता बड़े हैं वे झूठ थोड़े ही बोलेंगे. बाबा कहते कि गुग्गा पीर को अपने सफ़ेद घोड़े पर चांदनी रात में उन्होंने देखा था, उन्हें थोडा दूर देख उनकी अपनी घोड़ी भी डर कर बिदक कर भागी थी. रात को पास के पीपल के पेड़ पर हवा चलने पर पत्तों से आवाज सुनती उससे लगता कि भूत भूतनी खिल खिला कर हंस रहे हैं और डर लगता था. अब पता नहीं भूत कहाँ चले गए अब उनके बारे  में सुनने को नहीं मिलता.

 भूत होने की बात सिर्फ भारत में ही नहीं दूसरे देशों में भी है. इतना तो वे भी कहते थे कि भूत सब को नहीं दिखते. बड़े होने पर विज्ञान का छात्र होने तथा कुछ आर्य समाज के उपदेशकों की बातों से ये बातें मन का बहम या भ्रम लगती रही. पर बहुत सी भूतों की कहानी अंग्रेजी में भी पढ़ी और कई मकान  या इमारतें देखी जिन्हें भूतिया समझ उनमें कोई जाने को तैयार नहीं होता क्योंकि उनमें कभी कोई हत्याकांड हुआ या दर्दनाक हादसा हुआ और वहां उनकी आत्माएं निवास करती हैं. ये भी सुनते थे कि किसी के सिर पर चढ़ कोई आत्मा आकर उस व्यक्ति को अपने बस में कर लेती हैं. अंग्रेजी में तो  घोस्ट स्टोरीज बहुत हैं यहाँ तक कि चार्ल्स डिकेन्स जैसे बड़े कथाकार यह मानते थे और भूतों की अनेक कहानियां उन्होंने भी लिखी भी.

 काफी बड़े होने पर में त्रिपुरा में दूर दराज़ बुलंग्बाशा पोस्ट पर एक अजीबोगरीब घटना को देखा था, वहां सिपाहियों की फूंस की छत की बैरक में बांस की चारपाईयां बनी हुई थी, मेरा आवास भी वैसा ही पास में था, मुझे बताया गया कि बैरक में डर के कारण कोई भी हवलदार सिपाही चारपाई नहीं सोता बल्कि नीचे बिस्तर ज़मीन पर लगा कर सोते हैं, अगर कभी किसी ने ऊपर सोने की जुर्रत की तो वहां मौजूद भूत नीचे गिरा देते हैं. मेरे समझाने पर की ये मन का बहम  है कोई  ऊपर सोने के लिए तैयार नहीं हुआ. कई लोगों ने अपनी रात की ड्यूटी में भूतों को देखा था, तथा अगर गार्ड ड्यूटी देते हुए झपकी भी ले तो जोर का थप्पड़ मार कर जागा देता है. उसके पीछे कहानी यह बताई कि कुछ बरस पहले गेट के संतरी के सोने की लापरवाही से उग्रवादियों ने पोस्ट के अन्दर घुस कर सोते हुए लोगों को मार डाला था और कुछ हथियार भी छीन कर भाग गए थे. काफी समझाने पर भी वे मानने को तैयार नहीं थे. और मुझे ही भूतों को दिखाने की बात कही.

एक रात को गैर समय गेट ड्यूटी पर तैनात संतरी दौड़ कर आया और मुझे जगा कर बाहर आने के लिए बताया. मेरे निवास के सामने खड़ी जीप कोई बीस पच्चीस कदम दूर पर थी. संतरी ने बताया कि उसके देखते देखते बिना स्टार्ट हुए जीप चल कर वहां से आगे आ गई है. मैंने उन्हें समझाया था कि थोड़ी ढलवान होने के कारण शायद हवा के झोके से चल कर पहुँच गयी होगी. था तो मुझे भी थोडा अचम्भा पर न मैंने उनकी बात पर न विश्वास जताया न उन्होंने मेरी बात सुन भूतों से विश्वास हटाया और नीचे ही बिस्तर लगाते रहे. जब कहता कि इन बातों पर विश्वास न करो वे यह कह कर संन्तोष कर लेते थे की सबको दिखाई नहीं देते.

यह सब ऐसा है न तो इन बातों पर विश्वास कर पाते और नहीं पूरा अविश्वास पर ऐसा लगता है कुछ शक्तियां ऐसी हो सकती हैं जो मानव से अधिक शक्तिशाली हो सकती हैं. मानव जिसका वैज्ञानिक नाम ‘होमो सेपियन्स’है सभी प्राणियों में सबसे विकसित माना जाता है, सबसे अधिक बुद्धिशाली है, इसी कारण अभी तक कम से कम इस पृथ्वी उपग्रह पर मानव का सर्वाधिकार है, बाकी जंगली की तरह से  वनों में जिन्दगी  आरम्भ कर विकास करते करते अब इतना विकसित हो गया है कि अपने से ज्यादा तेज और शक्तिशाली  ए.आई. या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का ऐसा जिन्न ईजाद कर लिया है जो उसे ही गुलाम, निकम्मा  और बेकारा बनाने के रास्ते पर अग्रसर है.

 अब तक इंटरनेट, सुपर कंप्यूटर ही आदमी से तेज तो काम कर सकते थे पर उनमें सोचने की क्षमता  तो नहीं थी उनमें चेतना या ‘कांसेस’ तो नहीं थी, दुःख सुख, गर्म या ठंडा महसूस तो नहीं कर सकते थे, भावना या संवेदनशीलता तो नहीं थी सुख दुख का अनुभव तो नहीं कर सकते थे. पर अब तो लग  रहा  है  ऐ.आई. ने सोचने  समझने की क्षमता भी प्राप्त कर ली है, चेतनता या उस जैसी कोई चीज़ भी शायद स्वतःआ गई है. या कहें कि प्रेत या जिन्न अनचाहे ही ऐ आई से जागृत हो निकल आया है. अलीबाबा को क्या मालूम था पुराने दिए में जिन्न हो सकता है. बहुत से मामलों में  ऐ.आई. एजेंट इंसान से कहीं आगे निकल चुके है बाकी में निकलने वाले हैं. यह तो आराम से कहा जा सकता है कि ऐ.आई.आई एजेंट पूरे इंसान नहीं तो आधे  इंसान तो हो चुके हैं ही. वह ग़ालिब का किस्सा सुना होगा की जब उनसे पूछा गया कि उनका मज़हब कौन सा है तो बताया था, “आधा मुसलमान हूँ, शराब पीता हूँ सूअर का मांस नहीं खाता.” अब ऐ.आई. ऐसी ही करे दे रही है जो इंसान के थे और वह उनमें ज़बरदस्ती घुसती जा रही है और यहाँ तक कि उनके बनाने वालों को बड़े बड़े एक्सपर्ट को, जिनके हाथ में कण्ट्रोल होना चाहिए को हवा भी नहीं लग पाती और वे आश्चर्य से तापते रह जाते हैं क्या कर डाला?  ऐ आई एजेंट इतने बड़े  और  होशियार हो गए हैं कि उनके जो मानव जात हैंडलर होने चाहिए वे ही सुपर इंटेलीजेंट ऐ आई एजेंट के ‘पालतू लेब्रोडोर’ जैसे होते जा रहे हैं. अभी फिलहाल मैं यूएसए   में था, वहां सड़क पर घरों में सामान पहुँचाने के लिए रोबोट घूमते मिलना साधारण सी बात है, वे सिग्नल देखकर सड़क पार करते हैं सामने से आने वाले से बचते रुकते मुड़ते सप्लाई कर वापिस लौटते हैं, आम आदमी से ज्यादा सतर्क लगते हैं. एक मित्र ने अपनी नई टेसला कंपनी की ड्राईवर-लेस  कार में बैठा कर एड्रेस भरा और हम बस कार में बैठे रहे स्टीयरिंग बिना छुए कार ने  ठीक जगह पर ले जाकर पार्किंग में गाड़ी लगा दी.  

बड़ी बड़ी एआई  कम्पनिया निवेशिको से  बड़े बड़े वायदे कर रहीं हैं और बहुत तेज़ी से कम समय में ही बेहद अमीर हो गयी हैं. लोगबाग तेज़ी से  इनमें निवेश कर रहें हैं , मुनाफा उठा रहे हैं  निविडिया नामक कंपनी की कीमत पांच ख़रब(5 ट्रिलियन) से भी अधिक हो चुकी है. इतनी बड़ी रकम कि  जिस में एक के बाद बारह जीरो लगती हैं. जब कि इतने बड़े देश भारत की इकॉनमी सवा चार खरब डॉलर्स से भी कम है. अभी इसी कंपनी ने हगिंग फेस नामक ए आई लाइब्रेरी कम्पनी को खरीद लिया है इससे मुनाफा और अधिक बढ़ जाएगा. इसी तरह ओपन ए.आई. और अन्थ्रोपिक भी अपने प्रोजेक्टों के लिए पब्लिक इशू द्वारा बड़ी राशियाँ जुटाने में लगी पड़ी हैं, आज ही अखबार में पढ़ा कि सचिन तेंदुलकर ने भी इसी कंपनी में निवेश किया है.

 निविडिया के पास तो इतना पैसा है कि वह सिल्वर वेली का सेंट्रल बैंक कहलाने लगी है और नए  नए स्टार्टअप उससे धन लेकर आगे बढ़ रहे हैं. देखा जाये तो ये अपना दिमाग बड़ी कम्पनियों को बेच धन कमाने  के लिए ही तो लगे हैं. निविडिया का स्वामी  जेनसन  हांग जो ताईवानी अमेरिकन है  तो बस इस मैदान का जादूगर ही माना जा रहा है. नए नए स्टार्टस अप धन के लिए उसकी कंपनी में लाइन लगाये हुए हैं और  इस तरह वह पैसे से समझ लो नए मेधावी एक्सपर्ट दिमाग खरीद रहा है, और अपनी कंपनी की क्षमता दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ा रहा है  पैसा उसके पास भरपूर है ही. और निरंतर पैसा पैसे को खींच रहा है. हाल ही में उसकी चिप बनाने वाली  कंपनी निविडिया ने  12.8 अरब डॉलर की बड़ी राशि से हगिंग फेस कंपनी को खरीद लिया है ताकि तकनीकी  रेस में आगे रह सके. 

दुनिया के सबसे अमीर इंसान  हज़रत एलोन मस्क का दिवा-स्वप्न तो बेहद  बड़ा है, उसकी योजना तो मंगल ग्रह पर भी इंसानों की बस्ती बनाने का है उसके लिए बिना चालक के टेस्ट फ्लाइट मंगल भेजना और फिर दस साल से पहले इंसानों को वहां भेजना है, सुना है कुछ लोगों ने फ्लाइट भी बुक करा ली है.  मस्क बहुत बड़ा सपनों का सौदागर है. उनकी कंपनी टेस्ला ने  स्टीयरिंग व्हील विहीन साइबर कैब  कार बना ली जिसे चलाने के लिए इंसान की ज़रूरत नहीं  है, इसे रोबो टैक्सी के तौर प्रयोग शीघ्र शुरू हो जाएगा, देर सबेर इससे टैक्सी ड्राईवरों के पेट में लात लगना निश्चित है. मंगल ग्रह के लिए भी वहां की आवश्यकता का मॉडल ज़ल्दी तैयार हो  रहा होगा. पर मुझे लगता है कि मंगल या दूसरे ग्रहों में इंसान की बस्तियां बनाने की सोचना खफ्ती पन नहीं और क्या है? इसकी  रिसर्च में करोड़ों और अरबों डॉलर फूँका जा रहा है पर विश्व का  सबसे धनवान और सनकी  एलोन मस्क इसी पथ पर अग्रसर है और अनेक लोगों ने उसके  स्पेस-x  प्रोजेक्ट  के आई.पी.ओ. पर खूब  विश्वास कर  पैसा निवेश किया. वह स्पेस में ही डाटा सेंटर बनाये जाने पर अग्रसर है जिनसे भविष्य में ए आई को पॉवर देंगें. उसके अनुसार वह ऐसी तकनीक चाह रहा जिससे पांच वर्ष के अन्दर जिससे बाकी सब को पॉवर की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी. और यह सब अगले पांच वर्षों में हो जाना चाहिए. वह कहा रहा है कि  ऐ.आई. द्वारा दुनिया में इतनी सब चीज़ों की आश्चर्यजनक प्रचुरता आने वाली है किसी को भी कोई भाव नहीं रहेगा पांच वर्ष के अन्दर ऐ आई  की सोचने की क्षमता मानवता के सोचने की क्षमता से कहीं बहुत अधिक होगी. और ऐ आई रोबोट्स ही  दुनिया के सब कुछ कार्य व्यापार  मानव से छीन अपने काबू में कर लेंगे. जैसे मानवता को ऐ आई चला रही हो. मानव तो उनके पालतू कुत्ते भर रह गए हों. दुनिया में सब चीज़ें  प्रचुर मात्र में होंगी और सब को उपलब्ध हो जायेंगी कि किसी को भी काम करने की आवश्यकता ही नहीं होगी और धन का महत्व समाप्त हो जाएगा. कुछ ऐसी परिकल्पना है कि ‘अंधेर नगरी चौपट राजा टके  सेर भाजी टेक सेर खाजा’, बल्कि टेक की भी ज़रूरत नहीं रहेगी. किसी के पास अधिक धन है उसकी कोई महत्ता नहीं होगी क्योंकि सब की आवश्यकताएँ घर बैठे बिना काम किये पूरी हो जायेंगी. यह तो यूटोपिया या काल्पनिक आदर्श लोक वाली बात है प्रैक्टिकल बिलकुल भी नहीं है. मेरे अनुसार  कोरी परिकल्पना.  

ऐ आई के  गॉड फादर माने जाने  वाले कंप्यूटर वैज्ञानिक ज्योफ्री हिनटन को इस क्षेत्र में कार्य में 2024 नोबेल पुरस्कार मिला है. ऐ आई के विकास में उसे इस स्तर पर पहुँचाने में उन्होंने भारी भूमिका निभाई है. पर अब जो हो रहा है उसे जान कर वे बड़े चिंतित हैं. अब तो  वे सुपर इंटेलीजेंट ऐ आई के खतरों से सब को सावधान कर रहे हैं, उनका कहना है कि अब सुपर इंटेलीजेंट  ऐ आई मानव से बहुत आगे निकल गयी है उनका सम्बन्ध माँ और बेटे जैसा बन गया है, जैसे सुपर इंटेलीजेंट ऐ.आई. मां हो और मानव उसका बच्चा. मां के मुकाबले बच्चा बिलकुल निरीह है कमज़ोर है. इसी तरह अब मानव ऐ आई के सामने कमज़ोर और निरीह होता जा रहा है. हाँ कोई मां अपने बच्चे का नुकसान नहीं चाहती पर  ज्योफ्रीहिनटन को यही डर सता रहा है अगर ठीक तरह से रेगुलेट नहीं किया गया तो ऐ आई कहीं मानवता को ही समाप्त न कर दे. क्योंकि वह  ऐ आई का जिन्न मानव से कहीं ‘सुपर इंटेलीजेंट’ होशियार और समझदार है, मानव से और भी बेहद सुपर इंटेलीजेंट होने की क्षमता रखता है. शायद उसमें चेतना भी है या  बस आने वाली है.

 साइंस फिक्शन तो पहले ही एलियन या पृथ्वी  से  बाहर के सुपर इंटेलीजेंट प्राणियों अर्थात एलियन के मौजूद होने और यहाँ पर आकर चले जाते हैं वे निश्चित रूप से  मानव से काफी अधिक विकसित और एडवांस होते होंगे उनका ऐ आई सिस्टम  ब्रह्माण्ड में  कहीं और भी  बहु ही त ही एडवांस होता हो, कुछ वैज्ञानिकों और चिंतकों का अनुमान है कि हो सकता है अपना यह जगत मिथ्या हो और हम सब उनकी ऐ.आई. की क्रिएशन या उत्पाद हों.भारत के मनीषी तो पहले  ही बता गए हैं ‘जगत मिथ्या ब्रह्म सत्य’ की बात.

जैसा जानने  को मिल रहा है, एक्सपर्ट् लोग तो ऐसा प्रयास करते रहे की ऐआई मानव के वश में रहे उनके निर्देशों का पालन करे. पर ऐसा कहाँ हो पा रहा है? अभी  एंथ्रोपिक कंपनी  के एक  एडवांस रिसर्च  वैज्ञानिक ज़ेकोब कोक्सन  ने यह उजागर  कर तहलका मचवा दिया किया कि जिस सिस्टम को वे बना रहे थे वे बिना उनके पता हुए दूसरे संस्थानों में हैक कर गए  हैं अर्थात ‘ऐआई में  भी हैक करने, छल करने और उसे गुप्त रहने की खुरापाती प्रवृत्ति है. कंपनियां एक दूसरे से आगे ही आगे   निकलने की होड़ में लगी पड़ी हैं. उसका अनुमान है कि ऐआई  की  क्षमता मनुष्य की इंटेलिजेंस से बहुत आगे निकल चुकी है और निरंतर बढती ही जा रही है  ज्यादा समय नहीं लगेगा जब वह पूरे मानव समाज का विनाश कर दे. और इस कारण  रिसर्च साइंटिस्ट ने  भारी निराशा और दुःख के कारण उसने अपना इस्तीफा दिया है. उसने  इस सब से लग रहा है कि ऐआई से निकला जिन्न अपनी मर्ज़ी से भी कुछ कर डाल रहा है. यह रिसर्चर के शब्द है ‘इट विल किल अस आल इन  टेन इयर्स.’  इस यह मानव के  जीवन के अस्तित्व के लिए बड़ी डरावनी समस्या है.

ऐआई में एक दूसरे देश से आगे निकलने की होड़ लगी है, विशेष रूप से अमेरिका और चीन के बीच, फिलहाल अमेरिका थोडा आगे हैं,उसकी  मुख्य कम्पनियां निविडा, गूगल की अल्फाबेट ( डीप माइंड ),माइक्रोसॉफ्ट  (ओपन एआई ), अमेज़न ऐ.डब्लू.एस. आदि और चीन की अलीबाबा, डीप सीक ,मूनशॉट, पंगू, हुवाई आदि भी  इस अंधी दौड़ में अमेरिकन से ज्यादा पीछे नहीं हैं. पहले जैसे दुनिया में परमाणु दौड़ थी कुछ वैसी ही अब चल रही है.

समझा जा रहा है जो इसमें जितना आगे निकल जायेगा उतना ही दुनिया में उसका प्रभुत्व हो जाएगा. कुछ लोगों का मानना है जितनी तेज़ी से चीन के प्रयास चल रहे हैं वह इस दौड़ में अमेरिका को पीछे छोडने के लिए कटिबद्ध है. और कुछ क्षेत्र में आगे भी पहुँच गया है. यह भी दिख रहा है कि जो भी आगे रहेगा वहीँ दुनिया में ज्यादा प्रभावशाली होगा, चीन अमेरिका को पदच्युत कर अपना प्रभुत्व चाहता है. इस सब से यह हो सकता है जिसके पास ज्यादा और समर्थ ऐ आई होगा चाहे बड़ी कंपनियां हो चाहे चीन आदि. वे बाकी देशों को गुलाम बना सकते हैं.उनसे कुछ भी कर सकते हैं. सुना है चीन तो रोबोट आर्मी भी बना रहा है.

 चीन में ह्यूमेंनोइड रोबोट मनुष्यों से कई सो गुणा  काम कर रहे हैं सो वे बेहतर  व सस्ते कारीगर मजदूर हो सकते हैं, पर इसका दूसरा पहलू है कि बहुत संख्या में बेरोजगारी बढ़ जायेगी. चीन में तो सत्ता  वहां की कम्युनिस्ट पार्टी कहो, सरकार कहो उनके पास है, जो निरंकुश है और चीन आगे जाने की होड़  में किसी भी तरीके को अपनाने में ज़रा भी पीछे नहीं हटेगा.

इसीलिए यह मामला सयुंक्त राष्ट्रसंघ में भी जोर शोर से बहस को विषय रहा, और अभी अभी कुछ दिन पहले ही अमेरिका की सरकारी यात्रा पर गए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा. डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रोटोकॉल को अनदेखा कर जिनपिंग को स्वयं एअरपोर्ट पर जाकर स्वागत हेतु पहुंचे और पूरी चापलूसी करते दिखाई दिए, जिनपिंग ने न ट्रम्प और न ही संयुक्त राष्ट्रसंघ को कुछ भाव दिया. जिससे साफ़ है चीन अमेरिका को पीछे छोड़ने में कोई कसर छोड़ने वाला नहीं, और जो उसमें आगे होगा वही बड़ी विश्व शक्ति होगी.

अमरीका की कम्पनियाँ तो  मानने लगी हैं कि ए आई की रफ़्तार को धीरे करने के लिए कुछ अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबन्ध लगने चाहिए ताकि इसकी रफ़्तार में ढील की आवश्यकता है. पर चीन तो आगे बढ़ कर तुलसीदास  के कथन ‘समरथ कहुं नहिं दोष गोसाई’वाली बात को सत्यापित करने के लिए इच्छुक चाहे उसके लिए कितनों के ही रोजगार चले जाएँ कुछ भी अनर्थ हो किसी भी हद तक कदम क्यों न उठाना पड़े.

 प्रेसिडेंट ट्रम्प ने तो खिसया कर यह भी कह दिया कि ‘ ऐ आई बस होक्स या छलावा है. मानव से कभी आगे नहीं जा सकता उसके लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी उसके जैसा स्मार्ट राष्ट्रपति चाहिए’. वैसे भले ही मिड़टर्म  इलेक्शन में हारने की आशंका से प्रेसिडेंट ट्रम्प  पेंट गीली न हो रही हो.

ऐ आई की उभरती वैज्ञानिक कहानी शायद अब तक की सबसे बड़ी कहानी है. जिसमे हर दिन नई नई बातें सुनने को आ रही हैं, जैसे अमेरिका में  तेज़ी फैलते हुए  केलिफ़ोर्निया तथा अन्य जगहों में डाटा सेंटर का विरोध हो रहा है, वह अब ऑस्ट्रेलिया में डाटा सेंटर बनाने जा रहा है, यहाँ तक स्पेस में भी डाटा सेंटर बनेंगे.

चीन भी अपने दूरस्थ स्थानों जैसे मंगोलिया में डाटा सेंटर का जाल  बहुत तेज़ी से फैला रहा है. वहां सरकार का विरोध सम्भव ही नहीं है.

बहुत से वैज्ञानिक बड़े नेता और यहाँ  तक पोप कह रहे हैं कि कोई  अंतर्राष्ट्रीय संधि कर ऐ आई की रफ़्तार पर कुछ नियंत्रण आवश्यक है ताकि मानवता बनी रहे दुनिया बनी रहे. पर दो बड़ी बिल्लियाँ विशेष रूप से कम्युनिस्ट एकतान्त्रिक चीन देश के गले में कौन घंटी बांध पायेगा. प्रेसिडेंट ट्रम्प भी ऐसा कदम उठाने में असमर्थ पा रहा है की ऐ आई कंपनियों में इतना पैसा लगा हुआ है प्रतिबन्ध लगते में मार्किट गिर जायेंगे और उस की और देश मिटटी पलीद होगी.  

ऐ आई के जिन्न का भविष्य क्या होगा? आगे की कहानी कैसी होगी? क्या  वह मानवता पर शासन करेगा? क्या  मानवता जीवित रहेगी या नहीं ? या मानव इस जिन्न को  भी नियंत्रित करने में सफल होगा और अपनी बातें मनवा कर ऊँची छलांग लगाएगा? ये बातें भविष्य ही बता पायेगा उसी का इंतजार करना पड़ेगा.