शानदार झाड़-फानूसों की रोशनी में नहाए हुए बैंक्वेट हॉल में संगीत और महफिल की चहल-पहल थी।
हमदान मीर सफेद कढ़ाईदार सिल्क की शेरवानी पहने, चेहरे पर झूठी शराफत का मुखौटा लगाए हॉल में दाखिल हुआ। उसके चारों तरफ चार पर्सनल गनमैन चल रहे थे। वह सीधा स्टेज की तरफ बढ़ा, जहाँ दूल्हा अपने परिवार के साथ खड़ा मेहमानों से मिल रहा था।
हमदान ने आगे बढ़कर दूल्हे को गले लगाया और अपने असिस्टेंट को इशारा किया। असिस्टेंट ने तुरंत एक मखमली बॉक्स आगे बढ़ाया, जिसमें हीरों का बेशकीमती सेट और एक लग्जरी कार की सोने की चाबी चमक रही थी।
हमदान मीर:
"बहुत-बहुत मुबारक हो नवाब साहब! मीर खानदान की तरफ से यह छोटा सा तोहफा कबूल कीजिए। हमारे ताल्लुकात हमेशा इसी तरह मजबूत रहने चाहिए।"
दूल्हे ने मुस्कुराते हुए शुक्रिया अदा किया, लेकिन हमदान का ध्यान शादी में बिल्कुल नहीं था।
स्टेज से नीचे उतरते ही वह कोने में खड़े अपने हेड गार्ड राशिद के पास गया और फुसफुसाते हुए बोला।
हमदान मीर:
"बायर्स आ गए हैं? नीचे के सेफ रूम की सिक्योरिटी चेक कर ली?"
राशिद:
"जी सर। विदेशी डीलर्स नीचे प्राइवेट ऑफिस में आपका इंतज़ार कर रहे हैं। रास्ता पूरी तरह क्लियर है।"
हॉल के दूसरे कोने में, एक बड़े संगमरमर के खंभे की ओट में खड़ा नौशाद हाथ में ड्रिंक का ग्लास लिए हमदान की हर हरकत पर पैनी नज़र रखे हुए था।
नौशाद ने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी के डायल को हल्का सा घुमाया।
कुछ ही दूरी पर लाउंज एरिया में बैठे साहिर के सीक्रेट ईयरपीस में हल्की-सी बीप हुई।
साहिर भी नौशाद की मदद के लिए खुफिया रास्ते से कराची पहुंच चुका था। चूंकि हमदान ने साहिर को कायरो की फैक्ट्री में कभी नहीं देखा था, इसलिए साहिर इस मिशन के लिए सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता था।
साहिर इस वक्त इटैलियन सूट पहने, आंखों पर टिंटेड चश्मा लगाए एक बड़े यूरोपीय केमिकल ब्रोकर 'मार्को' के भेष में बैठा था।
नौशाद ने अपने माइक्रो-कॉम पर बेहद धीमी आवाज़ में बात शुरू की।
नौशाद इब्राहिम खान:
"साहिर, हमदान स्टेज से हट चुका है। वह अगले तीन मिनट में अंडरग्राउंड सीक्रेट ऑफिस की तरफ बढ़ेगा। तुम्हारी एंट्री का वक्त हो गया है।"
साहिर ने सिगार की राख ऐशट्रे में झाड़ी और बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया।
साहिर:
"सब सेट है नौशाद। मेरी बैकग्राउंड स्टोरी एक यूरोपीय केमिकल ब्रोकर की है। हमदान को रत्ती भर भी शक नहीं होगा। मैं उसकी टेबल पर बैठकर पूरी डील की रिकॉर्डिंग करूँगा। खास तौर पर उस केमिकल के बारे में, जो उसने तुम पर इस्तेमाल किया था।"
कुछ पल की खामोशी के बाद नौशाद की आवाज आई।
नौशाद:
"बेहद चौकन्ने रहना साहिर। हमें सिर्फ डील की जानकारी नहीं चाहिए। हमें यह पता लगाना है कि उस केमिकल का असली फॉर्मूला क्या है, उसे किसने बनाया और हमदान इसे आगे कहाँ इस्तेमाल करने वाला है।"
साहिर:
"डोंट वरी। आज हमदान अपनी ही जुबान से सबूत देगा।"
हमदान ने मेहमानों की भीड़ से बचते हुए पीछे के सीक्रेट कॉरिडोर के भारी दरवाजे का रुख किया।
साहिर ने अपनी वाइन का ग्लास टेबल पर रखा और उसी कॉरिडोर की तरफ बढ़ रहे विदेशी बायर्स के ग्रुप में चुपचाप शामिल हो गया।
नौशाद ने अपनी जेब से एक मिनी-टैबलेट निकाला और अंडरग्राउंड ऑफिस के सुरक्षा कैमरों की निगरानी अपने सिस्टम पर ले ली।
बैंक्वेट हॉल के नीचे बना वह अंडरग्राउंड प्राइवेट ऑफिस किसी बंकर की तरह साउंडप्रूफ और बुलेटप्रूफ था।
कमरे के बीचों-बीच महोगनी की एक बड़ी गोल मेज रखी थी। उसके चारों तरफ भारी लेदर की कुर्सियां लगी थीं।
कोने में दो हथियारबंद गार्ड्स खामोशी से खड़े थे।
मेज के इर्द-गिर्द इंटरनेशनल ब्लैक-मार्केट के चुनिंदा केमिकल बायर्स बैठे थे।
साहिर, जो यूरोपीय ब्रोकर 'मार्को' बना हुआ था, उनके बीच बैठा था।
उसके सामने रूस का खतरनाक केमिकल डीलर दिमित्री वोल्कॉफ बैठा था, जबकि दूसरी तरफ मध्य-पूर्व का सिंडिकेट फाइनेंसर शेख मंसूर अल-हबीब मौजूद था।
हमदान मीर अपनी शेरवानी की आस्तीनें हल्की-सी ऊपर करते हुए मेज की मुख्य कुर्सी पर आकर बैठा।
उसने मेज पर एक हाई-टेक एन्क्रिप्टेड हार्ड ड्राइव रखी।
हमदान ने अपनी शेरवानी की आस्तीनें हल्की-सी ऊपर कीं और मेज की मुख्य कुर्सी पर बैठ गया।
उसने अपनी जेब से एक छोटी-सी काली धातु की केस निकाली।
केस खोलते ही अंदर एक पारदर्शी शीशी दिखाई दी, जिसमें हल्के हरे रंग का तरल था।
कमरे में बैठे सभी लोगों की नजर उसी शीशी पर टिक गई।
हमदान ने शीशी को उठाकर रोशनी के सामने किया।
हमदान मीर:
"इसे कहते हैं... NEX-47."
दिमित्री ने भौंहें सिकोड़ते हुए पूछा।
दिमित्री वोल्कॉफ:
"NEX-47? मैंने इस नाम के किसी compound के बारे में नहीं सुना।"
हमदान के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
हमदान मीर:
"क्योंकि यह किसी खुले बाजार में मिलने वाला chemical नहीं है। इसका formula मेरी सबसे बड़ी दौलत है।"
उसने शीशी को वापस मेज पर रखा।
शेख मंसूर:
"और हमें कैसे यकीन हो कि यह उतना ही असरदार है जितना तुम दावा कर रहे हो?"
हमदान कुर्सी पर पीछे झुका।
उसकी आंखों में ठंडी चमक दिखाई दी।
हमदान मीर:
"यकीन चाहिए?"
उसने कुछ सेकंड के लिए सबकी तरफ देखा।
हमदान मीर:
"तो सुनो... मैंने इसका पहला human trial खुद अपनी आंखों के सामने देखा है।"
साहिर ने 'मार्को' बने हुए अपना चेहरा बिल्कुल शांत रखा।
हमदान आगे बोला।
हमदान मीर:
"जिस इंसान पर इसका इस्तेमाल किया गया था... वह बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देता रहा। लेकिन कुछ वक्त बाद उसके शरीर और दिमाग के बीच का तालमेल बिगड़ने लगा।"
दिमित्री आगे झुका।
दिमित्री:
"मतलब?"
हमदान ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया।
हमदान मीर:
"मतलब यह कि NEX-47 इंसान को तुरंत खत्म करने के लिए नहीं बनाया गया। इसका असली कमाल यह है कि इसका असर धीरे-धीरे सामने आता है।"
साहिर ने जानबूझकर सवाल किया।
साहिर — मार्को:
"और उस test subject का क्या हुआ?"
हमदान ने कुछ पल उसकी तरफ देखा।
फिर बोला:
हमदान मीर:
"वह आज भी जिंदा है।"
कमरे में खामोशी छा गई।
हमदान ने अपनी उंगली से शीशी को हल्का-सा घुमाया।
हमदान मीर:
"लेकिन जिस इंसान को मैंने देखा था... वह कुछ और था।"
साहिर ने अपना गिलास उठाया और शांत स्वर में पूछा:
साहिर — मार्को:
"तो तुम हमें सिर्फ chemical नहीं बेच रहे। तुम उसके पीछे की पूरी technology बेच रहे हो?"
हमदान मुस्कुराया।
हमदान मीर:
"अब तुम सही सवाल पूछ रहे हो, मार्को।"
उसने मेज पर रखी encrypted hard drive की तरफ इशारा किया।
हमदान मीर:
"इसमें NEX-47 की पूरी research, उसकी development history और उसके future batches की जानकारी है।"
शेख मंसूर ने पूछा:
शेख मंसूर:
"कीमत?"
हमदान ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया।
हमदान मीर:
"पाँच सौ मिलियन डॉलर।"
दिमित्री ने तुरंत कहा:
दिमित्री:
"पाँच सौ मिलियन? एक chemical के लिए?"
हमदान हल्का-सा हंसा।
हमदान मीर:
"तुम अभी भी इसे सिर्फ chemical समझ रहे हो, दिमित्री।"
उसने शीशी को दोबारा उठाया।
हमदान मीर:
"यह सिर्फ एक liquid नहीं है। यह एक ऐसी technology है जो इंसान के शरीर को बाहर से नहीं... अंदर से बदल सकती है।"
साहिर ने हमदान की तरफ गौर से देखा।
उसके कोट के बटन में लगा छोटा कैमरा पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर रहा था।
साहिर ने आखिरी सवाल किया।
साहिर — मार्को:
"और अगर हम पाँच सौ मिलियन देने के लिए तैयार हो जाएं... तो हमें कितनी मात्रा मिलेगी?"
हमदान ने मुस्कुराकर जवाब दिया:
हमदान मीर:
"जितनी तुम खरीद सकते हो... उतनी मैं बेच सकता हूँ।"
उधर कॉरिडोर में खड़ा नौशाद अपने मॉनिटर पर पूरी बातचीत सुन रहा था।
उसने सिर्फ एक शब्द सुना था—
NEX-47.
नौशाद की आंखें गंभीर हो गईं।
अब उसे उस chemical का नाम मिल चुका था जिसने उसकी जिंदगी बदल दी थी।